स्वराज्य पार्टी

स्वराज पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गया वार्षिक सम्मेलन के बाद 1 जनवरी 1923 में भारत में एक राजनीतिक दल बन गया था।
स्वराज पार्टी पराधीन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय बना एक राजनैतिक दल था। यह दल भारतीयों के लिये अधिक स्व-शासन तथा राजनीतिक स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिये कार्य कर रहा था। भारतीय भाषाओं में स्वराज का अर्थ है “अपना राज्य”।

स्वराज्य पार्टी की स्थापना

जब सन् 1922 में चौरी चौरा काण्ड हुआ और गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया तो कुछ नेताओं ने इसके विरोध में स्वराज पार्टी की स्थापना की। इन नेताओं का विचार था कि असहयोग आन्दोलन को वापस नहीं लिया जाना चाहिये था क्योंकि इस आन्दोलन को आश्चर्यचकित करने वाली सफलता मिल रही थी और कुछ दिनों में यह आन्दोलन अंग्रेजी राज की कमर तोड़ देता। 1 जनवरी 1923 ई. को इलाहाबाद चित्तरंजन दास, नरसिंह चिंतामन केलकर और मोतीलाल नेहरू बिट्ठलभाई पटेल ने कांग्रेस के खिलाफ ‘स्वराज्य पार्टी’ नाम के दल की स्थापना की जिसके अध्यक्ष चित्तरंजन दास बनाये गये और मोतीलाल उसके सचिव बनाये गये। इस प्रकार कांग्रेस में दो दल बन गये। एक परिवर्तनवादी दूसरा अपरिवर्तनवादी।

स्वराज्य पार्टी की स्थापना कांग्रेस के ख़िलाफ़ की गई थी। स्थापना 1 जनवरी, 1923 ई. अध्यक्ष चित्तरंजन दास सचिव पण्डित मोतीलाल नेहरू उद्देश्य शीघ्र हीं डोमिनियन स्टेट्स प्राप्त करना था।

सफलता

1923 ई. के चुनावों में ‘स्वराज्य पार्टी’ को मध्य प्रांत में पूर्ण बहुमत, बंगाल, उत्तर प्रदेश, बम्बई (वर्तमान मुम्बई) में प्रधानता व केंद्रीय विधानमण्डल में 101 में से 42 स्थान प्राप्त हुए। अंत 1925 ई. में चितरंजन दास की मृत्यु से स्वराज्य पार्टी को बड़ा धक्का लगा। इसके परिणामस्वरूप 1926 ई. के चुनावों में पार्टी को आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिली। इसका नतीजा यह हुआ कि 1926 ई. के अंत तक स्वराज्य पार्टी का भी अंत हो गया।

स्वराज्य पार्टी के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे-

•शीघ्र-अतिशीघ्र डोमिनियन स्टेट्स प्राप्त करना ।

•पूर्ण प्रान्तीय स्वयत्तता करना ।

•सरकारी कार्यों में बाधा उत्पन्न करना।

•स्वराज्यवादियों ने विधान मण्डलों के चुनाव लड़ने व विधानमण्डलों में पहुँचकर सरकार की आलोचना करने की रणनीति बनाई।

• स्वराज्यवादियों को विश्वास था कि वे शांतिपूर्ण उपायों से चुनाव में भाग लेकर अपने अधिक से अधिक सदस्यों को कौंसिल में भेजकर उस पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लेंगें।

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