phy ch 2

प्रकाश का अपवर्तन

Refraction of Light

प्रकाश के किरण की विरल माध्यम (rare medium) से सघन माध्यम (denser medium) में प्रवेश करने के बाद अभिलम्ब (normal) की ओर मुड़ने तथा सघन माध्यम (denser medium) से विरल माध्यम (rarer medium) में प्रवेश करने के बाद अभिलम्ब (normal) से दूर जाने की प्रक्रिया को प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of light) कहते हैं।

दूसरे शब्दों में, जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम (rarer medium) से सधन माध्यम (denser medium) में जाती है तो अभिलम्ब (normal) की ओर मुड़ जाती है तथा जब प्रकाश की किरण सधन माध्यम (denser medium) से विरल माध्यम (rarer medium) में प्रवेश करती है तो अभिलम्ब (normal) से दूर मुड़ जाती है। प्रकाश की किरण की इस विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाने पर अभिलम्ब की ओर तथा सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाने पर अभिलम्ब से दूर मुड़ने की प्रक्रिया को प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light) कहते हैं।

उदाहरण:

जब एक पेंसिल को पानी से भरे ग्लास में रखा जाता है, तो पेंसिल टेढ़ा दिखता है। ऐसा प्रकाश के अपवर्तन के कारण होता है।

जब एक सिक्के को पानी से भरे टब में रखा जाता है, तो सिक्का टब की तलहट्ठी से थोड़ा उपर दिखता है। यह भी प्रकाश के अपवर्तन के कारण होता है।

प्रकाश के अपवर्तन के नियम (Laws of Refraction of Light)

(i) आपतित किरण (incident ray), अपवर्तित किरण (refractive ray) तथा दोनों माध्यमों को पृथक करने वाले पृष्ठ के आपतन बिन्दु (point of incidence) पर अभिलम्ब (normal) सभी एक ही तल में होते हैं।

(ii) प्रकाश के किसी निश्चित रंग तथा निश्चित माध्यमों के युग्म (pair of medium) के लिये आपतन कोण (angle of incidence) की ज्या (sine) तथा अपवर्तन कोण (angle of refraction) की ज्या (sine) का अनुपात (ratio) स्थिर (constant) होता है

इस नियम को  

स्नेल का नियम (Snell’s Law)  

 भी कहते हैं।

यदि ii आपतन कोण (angle of incidence) हो तथा rr अपवर्तन कोण (angle of refraction) हो तब

sinisinr=sinisinr= स्थिरांक (constant)

इस स्थिरांक मान को दूसरे माध्यम का पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक (refractive index) कहते हैं।

अपवर्तनांक (Refractive Index)

प्रकाश के किरणों का किन्हीं दो माध्यमों के युग्म (pair of two medium) के लिए होने वाले दिशा परिवर्तन के विस्तार को अपवर्तनांक (refractive index) के रूप में व्यक्त किया जाता है।

दूसरे शब्दों में प्रकाश के किरणों का किसी दो माध्यम के युग्म के लिए आपतन कोण की ज्या तथा अवर्तन कोण की ज्या का अनुपात अपवर्तनांक कहलाता है।

अपवर्तनांक तथा प्रकाश की गति

अपवर्तनांक का मान किसी दो माध्यम के युग्म में प्रकाश की सापेक्ष गति को दिखलाता है। प्रकाश की गति अलग अलग माध्यम में अलग अलग होती है। निर्वात (vacuum) में प्रकाश की गति 3×108 m/s3×108 m/s है, जो कि अधिकतम है तथा हवा में प्रकाश की गति निर्वात में प्रकाश की गति से थोड़ा कम है।

प्रकाश की गति अपेक्षाकृत सघन माध्यम (denser medium) में विरल माध्यम (rare medium) के कम होती है।

किसी एक माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम में प्रकाश का अपवर्तनांक

माना कि प्रकाश माध्यम 1 से दूसरे माध्यम 2 में प्रवेश करता है।

माना कि माध्यम 1 में प्रकाश की गति, v1v1 है।

माना कि माध्यम 2 में प्रकाश की गति, v2v2 है।

अत: माध्यम 2 का माध्यम 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक को माध्यम 1 में प्रकाश की गति तथा माध्यम 2 में प्रकाश की गति के अनुपात में व्यक्त किया जाता है।

इसे प्राय: n21n21 द्वारा व्यक्त किया जाता है।

माध्यम 1 का माध्यम 2 के सापेक्ष अपवर्तनांक

मान लिया कि प्रकाश माध्यम 2 से माध्यम 1 में जाता है।

मान लिया कि माध्यम 1 में प्रकाश की गति, v1v1 है।

तथा माध्यम 2 में प्रकाश की गति, v2v2 है।

अत: माध्यम 1 का माध्यम 2 की अपेक्षा अपवर्तनांक को माध्यम 2 में प्रकाश की गति तथा माध्यम 1 में प्रकाश की गति के अनुपात में दर्शाया जाता है।

इसे प्राय: n12n12 से दर्शाया जाता है।

अपवर्तनांक- जब एक माध्यम निर्वात (Vacuum) हो:

किसी माध्यम का निर्वात (Vacuum) के सापेक्ष अपवर्तनांक को निरपेक्ष अपवर्तनांक (ABSOLUTE REFRACTIVE INDEX) कहा जाता है।

दूसरे शब्दों मे निरपेक्ष अपवर्तनांक किसी माध्यम का निर्वात (Vacuum) के सापेक्ष अपवर्तनांक है।

उदाहरण:

मान लिया गया कि माध्यम 1 निर्वात है तथा माध्यम 2 कोई अन्य माध्यम है।

इस स्थिति में,

दिये गये माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक, nmnm

किसी माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक को प्राय: अपवर्तनांक कहते हैं।

उदाहरण: हवा का अपवर्तनांक (na) 1.0003(na) 1.0003 है। बर्फ का अपवर्तनांक, (ni) 1.31(ni) 1.31 है। पानी का अपवर्तनांक (nw) 1.33(nw) 1.33 है, आदि।

प्रकाशिक घनत्व (Optical Density)

किसी माध्यम को प्रकाश को अपवर्तित करने की क्षमता को इसके प्रकाशिक घनत्व द्वारा भी व्यक्त किया जा सकता है। यह प्रकाशिक घनत्व द्रव्यमान के समान नहीं है।

सघन माध्यम का अर्थ प्रकाशिक सधन माध्यम तथा विरल माध्यम का अर्थ प्रकाशिक विरल माध्यम है।

प्रकाशिक सधन माध्यम (Optically Denser Medium):

माध्यम जिसका अपवर्तनांक सापेक्ष रूप से बड़ा या ज्यादा हो, प्रकाशिक रूप से सघन या प्रकाशिक सघन माध्यम कहलाता है।

प्रकाशिक विरल माध्यम (Optically Rarer Medium):

माध्यम जिसका अपवर्तनांक सापेक्ष रूप से कम या छोटा हो को प्रकाशिक विरल माध्यम या विरल माध्यम कहा जाता है। उदाहरण: किरासन तेल का अपवर्तनांक 1.44 है तथा बर्फ का अपवर्तनांक 1.31 है। अत: किरासन तेल बर्फ की तुलना में सघन माध्यम हुआ तथा बर्फ किरासन तेल की तुलना में विरल माध्यम हुआ।

बिभिन्न माध्यम में प्रकाश की गति:

प्रकाश की गति निर्वात में अधिकतम है, जो 3×108 m/s3×108 m/s है। प्रकाश की गति अपवर्तनांक के बढ़ने के साथ घटती है तथा अपवर्तनांक के घटने के साथ बढ़ती है। अर्थात प्रकाश की गति अपेक्षाकृत विरल माध्यम में ज्यादा होती है तथा अपेक्षाकृत सघन माध्यम में अपेक्षाकृत कम होती है।

उदाहरण: क्राउन ग्लास (crown glass) का अपवर्तनांक (refractive index) 1.52 तथा संगलित क्वार्ज (fused quartz) का 1.46 है। इसका अर्थ यह है कि प्रकाश की गति क्राउन ग्लास (crown glass) की तुलना में संगलित क्वार्ज (fused quartz) में ज्यादा है।

चूँकि अपेक्षाकृत सधन माध्यम में प्रकाश की गति कम हो जाती है, इसलिय जब प्रकाश विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाती है तो वह अभिलम्ब की ओर मुड़ जाती है। और चूँकि विरल माध्यम में प्रकाश की गति ज्यादा होती है इसलिये सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करने पर प्रकाश की किरणें अभिलम्ब से दूर मुड़ जाती है।

अत: प्रकाश की गति के बढ़ने या कम होने के कारण ही बिभिन्न माध्यमों में प्रकाश का अपवर्तन होता है।

लेंस या ताल (Lens)

दो पृष्ठों से घिरा कोई पार्दर्शी माध्यम, जिसका एक या दोनों पृष्ठ गोलीय हो, को लेंस या ताल कहते हैं। इसका अर्थ यह है को लेंस का कम से कम एक पृष्ठ गोलीय होता है।

लेंस (ताल) के प्रकार:

उत्तल लेंस या उत्तल ताल (Convex Lens)

ऐसे लेंस जिसके दोनों गोलीय पृष्ठ बाहर की ओर उभरे हों को उत्तल लेंस (Convex lens) कहते हैं। उत्तल लेंस को द्वि उत्तल लेंस (Double convex lens) भी कहते हैं।

एक उत्तल लेंस किनारों की अपेक्षा मध्य भाग में मोटा होता है।

उत्तल लेंस प्रकाश की किरणों को अभिसरित करता है, अत: उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस (Converging Lens) भी कहते हैं।

अवतल लेंस [अवतल ताल (Concave Lens)]

लेंस जो अंदर की ओर वक्रित दो गोलीय पृष्ठों से घिरा होता है, को अवतल लेंस कहते हैं। ऐसे लेंस को द्वि – अवतल लेंस भी कहते हैं। ऐसा लेंस बीच की अपेक्षा किनारे से मोटा होता है।

एक अवतल लेंस किरणों को अपसरित (Diverge) कर देता है, अत: ऐसे लेंस को अपसारी लेंस या अपसारी ताल (Diverging lens) भी कहते हैं।

गोलीय लेंस [गोलीय ताल (Spherical lens)] से संबधित महत्वपूर्ण पद

वक्रता केन्द्र (Centre of Curvature):

एक गोलीय ताल दो गोले के सतह के संयोग (जुड़ने) से बनता है, अत: उन दो गोलों के केन्द्र उनसे बने लेंस (ताल) का वक्रता केन्द्र होता है या कहलाता है।

चूँकि एक लेंस दो गोलों के भागों को मिलाने से बनता है, अत: एक लेंस का दो वक्रता केन्द्र होता है।

एक लेंस (ताल [lens]) के वक्रता केन्द्रों को क्रमश: C1C1 तथा C2C2 से निरूपित किया जाता है।

प्रकाशिक केन्द्र (Optical Centre):

लेंस का केन्द्रीय बिन्दु इसका प्रकाशिक केन्द्र (Optical center) कहलाता है। प्रकाशिक केन्द्र (Optical Centre) को प्राय: अंगरेजी के OO अक्षर से निरूपित किया जाता है।

मुख्य अक्ष (Principal axis):

लेंस [ताल (Lens)] के वक्रता केन्द्रों से गुजरने वाली सीधी काल्पनिक रेखा लेंस का मुख्य अक्ष कहलाती है।

मुख्य फोकस (Principal Focus):

अनंत से आने वाली प्रकाश की किरणें, जो कि मुख्य अक्ष के समानांतर होती हैं, उत्तल लेंस [ताल (Lens)] से अपवर्तन के पश्चात जिस बिन्दु पर अभिसरित होती है या अवतल लेंस के जिस बिन्दु से अपसरित होती है, उस बिन्दु को लेंस [ताल (Lens)] का मुख्य फोकस कहते हैं।

किसी भी लेंस [ताल (Lens)] का दो मुख्य फोकस होता है, जो कि लेंस के दोनों तरफ होता है।

लेंस के मुख्य फोकस को अंगरेजी के अक्षर F1F1 तथा F2F2 से निरूपित किया जाता है।

फोकस दूरी (Focal Length (ff)):

लेंस के मुख्य फोकस (Principal Focus) तथा प्रकाशिक केन्द्र (Optical center (OO)) के बीच की दूरी को फोकस दूरी (Focal Length) कहते हैं। फोकस दूरी को अंगरेजी के छोटे अक्षर ff से निरूपित किया जाता है।

फोकल दूरी का मान लेंस के वक्रता केन्द्र तथा प्रकाशिक केन्द्र के बीच की दूरी का आधा होता है।

अर्थात C1=2f1

गोलीय लेंस से अपवर्तन

Refraction by a Spherical Lens

मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश की किरणों का उत्तल लेंस (Convex Lens) से अपवर्तन

मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश की किरणें से अपवर्तन के पश्चात उसके मुख्य फोकस से गुजरती है।

मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश की किरणों का अवलत लेंस (Concave Lens) से अपवर्तन

मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश की किरणें अपवर्तन के पश्चात अवतल लेंस के मुख्य फोकस से गुजरती हुई अर्थात अपसरित होती हुई प्रतीत होती है।

मुख्य फोकस के द्वारा गुजरने वाली किरण का उत्तल लेंस से अपवर्तन

मुख्य फोकस के द्वारा गुजरने वाले किरण का अवतल लेंस से अपवर्तन के बाद मुख्य अक्ष के स्मानांतर जाती है।

मुख्य फोकस के द्वारा गुजरने वाले किरण का अवतल लेंस से अपवर्तन

मुख्य फोकस के द्वारा गुजरने वाले किरण का अवतल लेंस से अपवर्तन के मुख्य अक्ष के समानांतर निकलती हुई प्रतीत होती है।

उत्तल लेंस के प्रकाशिक केन्द्र से गुजरने वाली किरण का अपवर्तन

उत्तल तथा अवतल लेंस के प्रकाशिक केन्द्र से गुजरने वाली किरण अपवर्तन के बाद बिना विचलित हुए सीधी निकल जाती है।

उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना

जब बिम्ब अनंत पर हो, तो उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना

जब बिम्ब अनंत पर हो, तो उत्तल लेंस द्वारा से अपवर्तन द्वारा प्रतिबिम्ब मुख्य फोकस पर बनता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of image): फोकस, F2F2 पर

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of the image): अत्यधिक छोटा, बिन्दु के आकार का

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of the image): वास्तविक तथा उलटा (Real and inverted)

उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब का निर्माण, जब बिम्ब वक्रता केन्द्र, ?C_1` से परे हो

जब बिम्ब उत्तल लेंस के वक्रता केन्द्र C1C1 से परे हो तो प्रतिबिम्ब मुख्य फोकस, F2F2 तथा वक्रता केन्द्र C2C2 के बीच बनता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of image): मुख्य फोकस, F2F2 तथा वक्रता केन्द्र C2C2 के बीच

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of the image): छोटा

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of the image): वास्तविक तथा उलटा (Real and inverted)

जब बिम्ब वक्रता केन्द्र C1C1 या 2F12F1 पर हो, तो उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना

जब बिम्ब उत्तल लेंस के वक्रता केन्द्र C1C1 या 2F12F1 पर हो, प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी तरफ वक्रता केन्द्र C2C2 पर बनता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of image): वक्रता केन्द्र C2C2 पर

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of the image): समान आकार का

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of the image): वास्तविक तथा उलटा (Real and inverted)

जब बिम्ब उत्तल लेंस के वक्रता केन्द्र C1C1 तथा मुख्य फोकस F1F1 के बीच हो, तो प्रतिबिम्ब का बनना

जब बिम्ब उत्तल लेंस के वक्रता केन्द्र C1C1 तथा मुख्य फोकस F1F1 के बीच हो, तो एक विवर्धित प्रतिबिम्ब वक्रता केन्द्र C2C2 से परे बनता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of image): वक्रता केन्द्र C2C2 से परे

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of the image): विवर्धित

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of the image): वास्तविक तथा उलटा (Real and inverted)

जब बिम्ब उत्तल लेंस के मुख्य फोकस, F1F1 पर हो, तो प्रतिबिम्ब का बनना

जब बिम्ब उत्तल लेंस के मुख्य फोकस, F1F1 पर हो, तो एक अत्यधित विवर्धित प्रतिबिम्ब लेंस दूसरी ओर अनंत पर बनता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of image): अनंत पर

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of the image): अत्यधिक विवर्धित

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of the image): वास्तविक तथा उलटा (Real and inverted)

जब बिम्ब उत्तल लेंस के मुख्य फोकस, F1F1 तथा प्रकाशिक केन्द्र, OO के बीच हो, तो प्रतिबिम्ब का निर्माण

जब बिम्ब उत्तल लेंस के मुख्य फोकस, F1F1 तथा प्रकाशिक केन्द्र, OO के बीच हो, तो एक विवर्धित प्रतिबिम्ब भी बिम्ब की तरफ ही वक्रता केन्द्र, C1C1 से परे बनता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of image): बिम्ब की तरफ ही वक्रता केन्द्र, C1C1 से परे

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of the image): विवर्धित

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of the image): आभासी तथा सीधा (Virtual and Erect)

उत्तल लेंस [उत्तल ताल(Convex Lens)] द्वारा बिम्ब की विभिन्न स्थितियों में प्रतिबिम्ब का निर्माण
बिम्ब की स्थितिप्रतिबिम्ब की स्थितिप्रतिबिम्ब का आकारप्रतिबिम्ब की प्रकृति
अनंत परफोकस (F2)(F2) परअत्यधिक छोटा, बिन्दु के आकार कावास्तविक तथा उलटा
वक्रता केन्द्र C1or2F1C1or2F1 से परेफोकस F2F2 तथा वक्रता केन्द्र 2F22F2 के बीचछोटावास्तविक तथा उलटा
वक्रता केन्द्र 2F12F1 परवक्रता केन्द्र, 2F22F2 परसमान आकार कावास्तविक तथा उलटा
वक्रता केन्द्र, 2F12F1 तथा फोकस, F1F1 के बीचवक्रता केन्द्र, 2F22F2 से परेविवर्धितवास्तविक तथा उलटा
फोकस, F1F1 परबिम्ब की तरफविवर्धितआभासी तथा सीधा
प्रकाशिक केन्द्र, OO तथा फोकस, F1F1 के बीचबिम्ब की तरफविवर्धितआभासी तथा सीधा

अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब का निर्माण (Image Formation by Concave Lens)

अवतल लेंस में बिम्ब की मात्र दो ही स्थिति बनती है। ये स्थितियाँ इस प्रकार हैं:

पहली बिम्ब अनंत पर तथा दूसरी स्थिति बिम्ब प्रकाशिक केन्द्र, OO तथा अनंत के बीच

अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना जब बिम्ब अनंत पर हो

जब बिम्ब अनंत पर हो, तो अवतल लेंस दवारा प्रतिबिम्ब फोकस, F1F1 पर बनता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of image): मुख्य फोकस, F1F1 पर

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of the image): अत्यधिक छोटा, बिन्दु के आकार का

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of the image): आभासी तथा सीधा (Virtual and Erect)

जब बिम्ब अनंत तथा अवतल लेंस के प्रकाशिक केन्द्र, OO के बीच हो, तो प्रतिबिम्ब का बनना

जब बिम्ब अनंत तथा प्रकाशिक केन्द्र, OO के बीच हो, तो अवतल लेंस द्वारा प्रकाशिक केन्द्र, OO तथा मुख्य फोकस, F1F1 के बीच प्रतिबिम्ब बनाया जाता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of image): मुख्य फोकस, F1F1 तथा प्रकाशिक केन्द्र, OO के बीच

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of the image): छोटा

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of the image): आभासी तथा सीधा (Virtual and Erect)

अवतल लेंस [अवतल ताल(Concave Lens)] द्वारा बिम्ब की विभिन्न स्थितियों में प्रतिबिम्ब का निर्माण
बिम्ब की स्थितिप्रतिबिम्ब की स्थितिप्रतिबिम्ब का आकारप्रतिबिम्ब की प्रकृति
अनंत परफोकस (F1)(F1) परअत्यधिक छोटा, बिन्दु के आकार काआभासी तथा सीधा
अनंत तथा प्रकाशिक केन्द्र, OO के बीचफोकस F1F1 तथा प्रकाशिक केन्द्र, OO के बीचछोटाआभासी तथा सीधा

गोलीय लेंसों के लिये चिन्ह परिपाटी

Sign convention for Spherical Lenses

गोलीय लेंसों के लिये चिन्ह परिपाटी गोलीय दर्पण के चिन्ह परिपाटी की तरह ही है।

गोलीय लेंसों के लिये नयी चिन्ह परिपाटी को नयी कार्तीय चिन्ह परिपाटी का नियम भी कहते हैं।

नयी कार्तीय चिन्ह परिपाटी का नियम कहते हैं।

(a) गोलीय लेंस के प्रकाशीय केन्द्र, (O)(O) को संबंधित मानों को मापने के लिये मूल बिन्दु या उदगम के रूप में लिया जाता है अर्थात सभी मानों की माप प्रकाशीय केन्द्र, (O)(O) से ली जाती है।

The principal axis of the lens is taken as the x?axis of the coordinate system. The conventions are as follows:

(i) बिम्ब को हमेशा लेंस के बायीं ओर रखा जाता है। यह बतलाता है कि प्रकाश लेंस पर हमेशा बायें से दायें की ओर पड़ता है।

(ii) मुख्य अक्ष के समानांतर सभी दूरी को प्रकाशिक केन्द्र से मापा जाता है।

(iii) सभी दूरी की माप प्रकाशिक केन्द्र से दायीं ओर (along + x?axis) धनात्मक लिया जाता है तथा प्रकाशिक केन्द्र से बायीं ओर ऋणात्मक मानी जाती है।

(iv) लेंस के मुख्य अक्ष के लम्बबत (along + y?axis) उपर की ओर सभी दूरी धनात्मक मानी जाती है।

(v) लेंस के मुख्य अक्ष के लम्बबत नीचे की ओर (along ? y?axis) सभी दूरी ऋणात्मक मानी जाती है।

लेंस सूत्र तथा आवर्धन (Lens Formula and Magnification)

लेंस से बिम्ब की दूरी (u)(u), प्रतिबिम्ब की दूरी (v)(v), तथा फोकस दूरी में संबंध लेंस सूत्र कहलाता है।

लेंस सूत्र के अनुसार फोकस दूरी का ब्युतक्रम प्रतिबिम्ब की दूरी का ब्युत्क्रम तथा बिम्ब की दूरी के ब्युत्क्रम के अंतर के बराबर होता है, अर्थात

iv−iu=1fiv-iu=1f ———-(i)

समीकरण (i) को लेंस का सूत्र या लेंस सूत्र कहा जाता है। यह सूत्र व्यापक है तथा सभी प्रकार के गोलीय लेंस के लिये मान्य होता है।

आवर्धन (Magnification)

गोलीय दर्पण द्वार उत्पन्न आवर्धन वह सापेक्षिक विस्तार है जिससे ज्ञात होता है कि कोई प्रतिबिम्ब बिम्ब की अपेक्षा कितना गुना आवर्धित है।

लेंस द्वारा उत्पन्न आवर्धन प्रतिबिम्ब की उँचाई तथा बिम्ब की उँचाई के अनुपात के बरार होता है, तथा आवर्धन को अंगरेजी के अक्षर mm द्वारा निरूपित किया जाता है।

लेंस द्वारा उत्पन्न या निर्मित आवर्धन (m) प्रतिबिम्ब की दूरी तथा बिम्ब की दूरी से निम्नांकित तरह से संबंधित होता है।

अत:,

लेंस की क्षमता (Power of Lens)

किसी लेंस द्वारा प्रकाश की किरणों को अभिसरण या अपसरण करने के की मात्रा को लेंस की क्षमता कहते हैं।

किसी लेंस की प्रकाश की किरणों को अभिसरण या अपसरण करने की मात्रा फोकस दूरी के ब्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात फोकस दूरी के बढ़ने के साथ साथ लेंस के अभिसरण या अपसरण करने की मात्रा घटती है तथा फोकस दूरी घटने के साथ लेंस के अभिसरण या अपसरण करने की क्षमता बढ़्ती है।

दूसरे शब्दों में लेंस जिसकी फोकस दूरी ज्यादा होगी, वह प्रकाश की किरणों को कम अभिसारित या अपसारित त करता है, तथ छोटी फोकस दूरी वाला लें प्रकाश की कीरणों का अभिसरण या अपसरण सापेक्ष रूप से अधिक मात्रा में करता है।

Example: एक छोटे फोकस दूरी वाला उत्तल ताल (लेंस) बड़ी फोकस दूरी वाले उत्तल ताल (convex lens) प्रकाश की किरणों बड़े कोण पर अंदर की ओर मोड़ता है। उसी तरह छोटे फोकस दूरी वाला अवतल ताल, बड़ी फोकस दूरी वाले अवतल ताल (concave lens) की अपेक्षा प्रकाश की किरणों को बड़े कोण पर बाहर की ओर मोड़ता है।

किसी लेंस की क्षमता (power) को अंगरेजी के अक्षर ‘P’ से निरूपित किया जाता है।

लेंस की क्षमता (Power) का एस. आई. मात्रक ‘dioptre’ है, इसे को DD से निरूपित किया जाता है।

यदि फोकस दूरी (f) को मीटर में (m) लिया जाता है, तो लेंस की क्षमता डायोप्टर DD (dipoter) में व्यक्त की जाती है।

1 डाइऑप्टर (dipoter) उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर (meter) हो।

अत:, 1D=1m−1D=1m-

लेंस की धनात्मक तथा ऋणात्मक क्षमता (Negative and Positive Power of a lens)

उत्तल ताल (Convex lens) की क्षमता धनात्मक (+) होती है, तथा अवतल ताल (Concave lens) की क्षमता ऋणात्मक (?) होती है।

Example: यदि डॉक्टर किसी मरीज को +1 डाइऑप्टर का लेंस पहनने की सलाह देता है, तो इसका अर्थ है कि वह लेंस उत्तल (Convex) है।

यदि डॉक्टर किसी मरीज को −1-1 डाइऑप्टर का लेंस पहनने की सलाह देता है, तो इसका अर्थ है कि वह लेंस अवतल (Concave) है।

लेंस की क्षमता का सूत्र

लेंस की क्षमता को अंगरेजी के अक्षर PP से निरूपित किया जाता है।

लेंस की क्षमता (P)(P) फोकस दूरी (f)(f) के ब्युत्क्रम अनुपात में होता है।

लेंस की क्षमता, P=1f(meter)P=1f(meter)

जहाँ PP = लेंस की क्षमता तथा ff = लेंस की फोकस दूरी मीटर में है।

समीकरण (1) को लेंस की क्षमता का सूत्र कहा जाता है।

लेंस की क्षमता (P)(P) या फोकस दूरी (f)(f) दूरी में से कोई एक ज्ञात हो, तो दूसरे की गणना समीकरण (1) की मदद से की जा सकती है।

लेंस की कुल क्षमता (The net Power of a lens)

कई प्रकाशिक यंत्र, यथा दूरबीन में कई लेंस लगे होते हैं। एक से अधिक लेंस लगाकर प्रकाशिक यंत्र की आवर्धन क्षमता को बढाया जाता है। प्रकाशिक यंत्र की कुल क्षमता (Power) उसमें लगे सभी लेंसों की क्षमता के योग के बराबर होता है।

यदि किसी प्रकाशिक यंत्र में चार लेंस लगे हैं, जिनकी क्षमता क्रमश: P1, P2, P3, तथा P4 है, तो लेंसों की कुल क्षमता (P) = P1 + P2 + P3 + P4

आँखों के डॉक़्टर द्वारा लेंस की क्षमता की गणना किस तरह की जाती है?

यदि डॉक्टर द्वारा जाँच के क्रम में पाया जाता है कि किसी व्यक्ति की आँख के लिये को दो लेंस क्रमश: 2.00D2.00D तथा 0.25D0.25D का आवशयक है, तो वह लेंस की कुल क्षमता की गणना निम्नांकित तरीके से करता है:

लेंस की कुल क्षमता (P)=2.00D+0.25D=2.25D(P)=2.00D+0.25D=2.25D

अत: डॉक़्टर संबंधित व्यक्ति को 2.25D2.25D क्षमता वाला लेंस पहनने की सलाह देता है।

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *