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गोलीय दर्पण से परावर्तन

प्रकाश की किरणें सीधी रेखा में चलती हैं। जब एक अपारदर्शी वस्तु प्रकाश की किरणों के रास्ते में आ जाती है तो यह छाया बनाती है। प्रकाश की किरणों के द्वारा छाया बनाने की प्रक्रिया हमें यह बतलाता है कि प्रकाश सीधी रेखा में गमन करती है अर्थात चलती है।

जब प्रकाश की किरणें किसी वस्तु से परावर्तित होकर हमारी आँखों पर पड़ती है, तो हम उस वस्तु को देखने में सक्षम हो पाते हैं। हम अंधेरे में रखी वस्तुओं को नहीं देख पाते हैं क्योंकि अंधेरे के कारण कोई भी प्रकाश की किरण उक्त वस्तु से परावर्तित होकर हमारी आंखों पर नहीं पड़ती है।

प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)

प्रकाश की किरणों का किसी वस्तु से टकराकर लौटना प्रकाश की किरणों का परावर्तन या प्रकाश का परावर्तन (REFLECTION OF LIGHT) कहलाता है।

एक उच्च कोटि का पॉलिश किया हुआ चमकीला वस्तु उसपर पड़ने वाली प्रकाश की अधिकांश किरणों को परावर्तित कर देता है। जैसे कि दर्पण या आईना (Mirror), जिसकी सतह एक चमकीले पदार्थ से पॉलिश की रहती है जो उसपर पड़ने वाली प्रकाश की अधिकांश किरणों को परावर्तित कर देती है।

आपतित किरणें (Incident Ray)

किसी परावर्तित होने वाली सतह पर पड़ने वाली प्रकाश की किरणें आपतित किरणें कहलाती हैं।

परावर्तित किरणें (Reflected Ray)

किसी वस्तु से टकराकर लौटने वाली किरणें परावर्तित किरणें कहलाती हैं।

अभिलम्ब (Normal)

एक काल्पनिक रेखा जो परावर्तित होने वाली सतह (Reflecting surface) पर प्रकाश की किरण पड़ने के बिन्दु पर लम्ब होती है, को अभिलम्ब (NORMAL) या परावर्तित होने वाली सतह पर लम्ब (Normal to the reflecting surface) कहते हैं।

आपतन कोण (Angle of Incidence)

प्रकाश की किरणों द्वारा आपतन बिन्दु तथा उस बिन्दु पर अभिलम्ब के साथ बनाने वाले कोण को आपतन कोण (ANGLE OF INCIDENCE) कहते हैं।

परावर्तन कोण (Angle of Reflection)

प्रकाश की किरणों द्वारा प्ररावर्तन के बिन्दु तथा अभिलम्ब के साथ बनाये जाने वाले कोण को परावर्तन कोण (ANGLE OF REFLECTION) कहते हैं।

परावर्तन के नियम (Laws of Reflection)

(i)आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है, तथा

(ii) आपतित किरण, दर्पण के आपतन बिन्दु पर अभिल्म्ब तथा परावर्तित, सभी एक ही तल में होते हैं।

परावर्तन के ये नियम सभी तरह के परावर्तक पृष्ठों (Reflecting Surface) के लिये लागू होते हैं।

परावर्तक पृष्ठों के प्रकार (Types of Reflecting Surfaces)

परावर्तक पृष्ठ गोलाकार, समान या असमान रूप से मुड़े हुए या समलत, किसी भी प्रकार के हो सकते हैं।

गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)

गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं: एक अन्दर की तरफ परावर्तक पृष्ठ वाले गोलीय दर्पण तथा दूसरे बाहर की तरफ परावर्तक पृष्ठ वाले गोलीय दर्पण।

अवतल दर्पण या अवतल गोलीय दर्पण (Concave Mirror or Concave Spherical mirror)

गोलीय दर्पण, जिसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर अर्थात गोले के केन्द्र की तरफ वक्रित रहता है, को अवतल दर्पण या अवतल गोलीय दर्पण कहते हैं।

उत्तल दर्पण या उत्तल गोलीय दर्पण (Convex Mirror or Convex Spherical mirror)

गोलीय दर्पण, जिसका परावर्तक बाहर की ओर वक्रित रहता है, को उत्तल दर्पण या उत्तल गोलीय दर्पण कहते हैं।

उदाहरण: चम्मच। एक चम्मच का एक परावर्तक सतह अंदर की ओर वक्रित रहता है, यह अवतल गोलीय दर्पण का उदारहण है। दूसरी ओर चम्मच का बाहर की ओर वक्रित परवर्तक सतह, एक उत्तल दर्पण का उदाहरण है।

एक गोलीय दर्पण का परावर्तक सतह गोले का एक भाग होता है, जिससे दर्पण बनाया जाता है।

गोलीय दर्पण से संबंधित महत्वपूर्ण पद या शब्द

ध्रुव (Pole)

गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के केन्द्र को दर्पण का ध्रुव कहते हैं। ध्रुव दर्पण के पृष्ठ पर स्थित होता है। गोलीय दर्पण के ध्रुव को प्राय: अंगरेजी के ‘P’′P′ अक्षर से निरूपित किया जाता है।

वक्रता केन्द्र (Centre of Curvature)

गोलीय दर्पण का परावर्तक पृष्ठ जिस गोले का भाग होता है, उस गोले का केन्द्र गोलीय दर्पण का वक्रता केन्द्र कहलाता है। वक्रता केन्द्र को अंगरेजी के अक्षर ‘C’′C′ से निरूपित किया जाता है।

वक्रता केन्द्र गोलीय दर्पण का भाग नहीं होता है। वक्रता केन्द्र गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के बाहर स्थित होता है।

अवतल दर्पण का वक्रता केन्द्र गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के सामने स्थित होता है तथा उत्तल दर्पण का वक्रता केन्द्र दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के पीछे स्थित होता है।

वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature)

गोलीय दर्पण का परावर्तक पृष्ठ जिस गोले का भाग होता है, उस गोले की त्रिज्या गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या कहलाती है।

वक्रता केन्द्र की तरह ही वक्रता त्रिज्या गोलीय दर्पण का भाग नहीं होता है। वक्रता त्रिज्या गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के बाहर स्थित होता है।

अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के सामने स्थित होती है तथा उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के पीछे स्थित होती है।

वक्रता त्रिज्या को अंगरेजी के अक्षर ‘R’′R′ से निरूपित किया जाता है।

मुख्य अक्ष (Principal Axis)

गोलीय दर्पण के ध्रुव तथा वक्रता केन्द्र से गुजरने वाली काल्पनिक सीधी रेखा को मुख्य अक्ष कहा जाता है।

गोलीय दर्पण का मुख्य अक्ष दर्पण के ध्रुव पर अभिलम्ब होता है।

फोकस या मुख्य फोकस (Focus or Main Focus)

मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश की किरणें गोलीय दर्पण के परावर्तित होकर जिस बिन्दु पर केन्द्रित होती है, उसे दर्पण का फोकस या मुख्य फोकस कहा जाता है। गोलीय दर्पण का मुख्य फोकस उसके मुख्य अक्ष पर स्थित होता है। फोकस को फोकस बिन्दु भी कहा जाता है।

फोकस को अंगरेजी के अक्षर ‘F’′F′ से निरूपित किया जाता है।

फोकस दूरी (Focal Length)

ध्रुव तथा फोकस बिन्दु के बीच की दूरी को फोकस दूरी कहते हैं। फोकस दूरी को अंगरेजी के अक्षर ‘f’′f′ से निरूपित किया जाता है।

फोकस दूरी का मान वक्रता त्रिज्या के आधे के बराबर होता है।

अत: R=2fR=2f

द्वारक (Aperture)

गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ की वृत्ताकार सीमारेखा का व्यास दर्पण का द्वारक कहलाता है।

गोलीय दर्पण से प्रकाश का परावर्तन

अनंत से आने वाली प्रकाश की किरणों का अवतल गोलीय दर्पण की सतह से परावर्तन

अनंत से आने वाली प्रकाश की किरणों का पथ मुख्य अक्ष के समानांतर होती है। अवतल गोलीय दर्पण की सतह से ये किरणें परावर्तित होकर मुख्य फोकस बिन्दु से जाती गुजरती है।

अनंत से आती हुई प्रकाश की सभी किरणें, जो कि प्रधान अक्ष के समानांतर होती है, अवतल दर्पण से परावर्तन के पश्चात दर्पण के मुख्य फोकस से गुजरती होती है।

यहाँ आपतन कोण ii तथा परावर्तन कोण rr बराबर है। इस स्थिति में DC आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब है।

चूँकि मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश की सभी किरणें, अवतल दर्पण से परावर्तन के पश्चात, दर्पण के फोकस पर अभिसरित (केन्द्रित) [Converge] होती है, अत: अवतल दर्पण को अभिसारी दर्पण (Converging mirror) भी कहा जाता है।

अनंत से आने वाली प्रकाश की किरणों का उत्तल दर्पण की सतह से परावर्तन

अनंत से आती हुई प्रकाश की किरण, जो कि मुख्य अक्ष के समानांतर होती है, उत्तल गोलीय दर्पण से परावर्तन के पश्चात दर्पण के मुख्य फोकस बिन्दु अपसरित (Diverge) होती हुई प्रतीत होती है।

अनंत से आने वाली प्रकाश की सभी किरणें गोलीय दर्पण के मुख्य अक्ष के समानांतर गुजरती है, तथा उत्तल दर्पण के परावर्तक पृष्ठ से परावर्तन के पश्चात दर्पण के फोकस से अपसरित होती हुई प्रतीत होती है।

चूँकि मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश की सभी किरणें, उत्तल दर्पण से परावर्तन के पश्चात, दर्पण के फोकस से अपसरित (निकलती) [Diverge] होती हुई प्रतीत होती है, अत: उत्तल दर्पण को अपसारी दर्पण (Diverging mirror) भी कहा जाता है।

अवतल दर्पण के मुख्य फोकस से गुजरने वाली किरण का परावर्तन

अवतल दर्पण के मुख्य फोकस से गुजरने वाली प्रकाश की किरण अवतल दर्पण के परावर्तक पृष्ठ से परावर्तन के पश्चात मुख्य अक्ष के समानांतर निकलती है या जाती है।

यह परावर्तन, अनंत से आती हुई प्रकाश की किरणों, जो मुख्य अक्ष के समानांतर होती हैं, का अवतल दर्पण के परावर्तक पृष्ठों के परावर्तन से बिल्कुल उल्टा है।

उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस की ओर निर्देशित किरण का परावर्तन

उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस की ओर निर्देशित प्रकाश की किरण परावर्तन के पश्चात मुख्य अक्ष के समानांतर लौट जाती है।

वक्रता केन्द्र की दिशा में आती हुई प्रकाश की किरण का अवतल दर्पण से परावर्तन

वक्रता केन्द्र की दिशा में आती हुई प्रकाश की किरण का अवतल दर्पण के परावर्तक पृष्ठ से परावर्तन के पश्चात उसी दिशा में लौट जाती है।

वक्रता केन्द्र की निर्देशित प्रकाश की किरण का उत्तल दर्पण से परावर्तन

वक्रता केन्द्र की निर्देशित प्रकाश की किरण का उत्तल दर्पण से परावर्तन के पश्चात समान पथ पर उल्टी दिशा में लौट जाती है।

मुख्य अक्ष से तिर्यक दिशा में आपतित किरण का अवतल दर्पण से परावर्तन

मुख्य अक्ष से तिर्यक दिशा में आपतित किरण का अवतल दर्पण से परावर्तन के पश्चात तिर्यक दिशा में ही मुख्य अक्ष से समान कोण बनाते हुए परावर्तित होती है।

आपतित तथा परावर्तित किरणें आपतन बिन्दु पर मुख्य अक्ष से समान कोण बनाते हुए परावर्तन के के नियमों का पालन करती हैं।

मुख्य अक्ष से तिर्यक दिशा में आपतित किरण का उत्तल दर्पण से परावर्तन

मुख्य अक्ष से तिर्यक दिशा में दर्पण के ध्रुव पर आपतित किरण का उत्तल दर्पण से परावर्तन के पश्चात तिर्यक दिशा में ही मुख्य अक्ष से समान कोण बनाते हुए परावर्तित होती है।

चूँकि प्रकाश की किरणें किसी भी तरह के परावर्तक पृष्ठ से परावर्तन के क्रम में परावर्तन के नियमों का पालन करती है, अट: उपरोक्त सभी स्थितियों में आपतन कोण (ii) तथा परावर्तन कोण (rr) बराबर होते हैं।

वास्तविक प्रतिबिम्ब (Real Image) : प्रतिबिम्ब जिसे पर्दे पर उतारा जा सकता है, को वास्तविक प्रतिबिम्ब कहते हैं। वास्तविक प्रतिबिम्ब हमेशा दर्पण के सामने की ओर बनता है।

आभासी प्रतिबिम्ब (Virtual Image): प्रतिबिम्ब जिसे पर्दे पर नहीं उतारा जा सकता है, को आभासी प्रतिबिम्ब कहते हैं। आभासी प्रतिबिम्ब हमेशा दर्पण के पीछे बनता है।

गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब बनाना

(Image formation by spherical mirror)

किसी गोलीय दर्पण द्वारा निर्मित प्रतिबिम्ब (Image) की स्थिति, प्रकृति तथा आकार [Size (साइज)] के निर्धारण के लिये बिम्ब (Object) से आने वाले प्रकाश की दो किरणों को लेकर उनपर विचार आवश्यक होता है। इसके लिये बिम्ब से दर्पण की ओर आने वाली मुख्य अक्ष से समानांतर एक किरण तथा दर्पण के वक्रता केन्द्र से गुजरने वाली एक किरण को विचार के लिये लिया जाता है। इन दोनों किरणों का दर्पण से परावर्तन के बाद मिलन बिन्दु पर ही प्रतिबिम्ब बनता है।

अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब बनना

(a)जब बिम्ब (Object) अनंत पर हो, तो अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना

अनंत पर स्थित बिम्ब (Object) से आती हुई किरणें, जो कि मुख्य अक्ष के समानांतर होती हैं, अवतल दर्पण से परावर्तन के पश्चात मुख्य फोकस पर अभिसरित होती है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of Image) : चूँकि बिम्ब से आती हुई किरणें अवतल दर्पण से परावर्तित होकर फोकस पर अभिसरित होती है, अत: प्रतिबिम्ब फोकस (F)(F) पर बनता है।

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of Image) : अत्यधिक छोटा, लगभग बिन्दु के आकार का (Highly diminished, point sized)

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of Image) : वास्तविक तथा उलटा (Real and Inverted)

(b)जब बिम्ब वक्रता केन्द्र से परे हो (Object is beyond Centre of Curvature (C))

बिम्ब की स्थिति जब अवतल गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या से परे हो, तो बिम्ब से आने वाली किरणें दर्पण से परावर्तन के पश्चात मुख्य फोकस से गुजरती है। इस स्थिति में प्रतिबिम्ब फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच बनता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of Image) : मुख्य फोकस (F) तथा वक्रता केन्द्र (C) के बीच

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of Image) : बिम्ब से छोटा (Diminished than image)

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of Image) : वास्तविक तथा उलटा (Real and Inverted)

(c)बिम्ब (Object) के वक्रता केन्द्र (Centre of curvature) पर अवस्थित होने की स्थिति में अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का निर्माण

जब बिम्ब (Object) की स्थिति वक्रता केन्द्र [Center of curvature (C)(C)]पर हो तो, वक्रता केन्द्र (C)(C) पर ही अवतल दर्पण (Concave mirror) द्वारा एक उलटा तथा समान आकार (Size) का प्रतिबिम्ब (Image) बनाया जाता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of Image): वक्रता केन्द्र (C)(C)

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of Image): समान आकार (Same size)

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of Image) : वास्तविक तथा उलटा (Real and Inverted)

(d)जब बिम्ब (Object) वक्रता केन्द्र [Center of curvature (C)(C) ] तथा फोकस [Focus (F)(F)]के बीच हो तो अवतल दर्पण (Concave mirror) द्वारा प्रतिबिम्ब का निर्माण

जब बिम्ब (Object) वक्रता केन्द्र [Center of curvature (C)(C) ] तथा फोकस [Focus (F)(F)]के बीच हो तो अवतल दर्पण (Concave mirror) द्वारा वक्रता केन्द्र से परे प्रतिबिम्ब बनाया जाता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of Image): वक्रता केन्द्र (C)(C) से परे

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of Image): विवर्धित (Enlarged)

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of Image) : वास्तविक तथा उलटा (Real and Inverted)

(e)जब बिम्ब फोकस (F)(F) पर हो तो अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का निर्माण

जब बिम्ब फोकस (F)(F) पर हो तो अवतल दर्पण द्वारा अनंत पर प्रतिबिम्ब बनाया जाता है।

यह प्रक्रिया बिम्ब के अनंत पर होने की स्थिति से बिल्कुल उलटा है। बिम्ब के अवतल दर्पण से अनंत की दूरी पर होने की स्थिति में प्रतिबिम्ब फोकस पर बनता है जबकि बिम्ब के फोकस पर होने की स्थिति में प्रतिबिम्ब अनंत पर बनता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of Image): अनंत पर

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of Image): अत्यधिक विवर्धित (Highly Enlarged)

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of Image) : वास्तविक तथा उलटा (Real and Inverted)

(f)बिम्ब के फोकस (F)(F) तथा ध्रुव (P)(P) के बीच होने की स्थिति में अवतल दर्पण द्वार प्रतिबिम्ब का निर्माण

जब बिम्ब अवतल दर्पण के फोकस (F)(F) तथा ध्रुव (P)(P) के बीच स्थित हो तो दर्पण के पीछे एक आभासी, सीधा तथा विवर्धित प्रतिबिम्ब बनता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of Image): दर्पण के पीछे

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of Image): विवर्धित (Enlarged)

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of Image) : आभासी तथा सीधा (Virtual and Erect)

अवतल दर्पण द्वार केवल इसी स्थिति में, अर्थात बिम्ब के फोकस (F)(F) तथा ध्रुव (P)(P) के बीच होने की स्थिति में ही प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे, आभासी तथा सीधा बनाया जाता है। बाकि स्थितियों में प्रतिबिम्ब आभासी, उलटा तथा दर्पण के सामने बनता है।

अवतल दर्पण द्वारा बिम्ब की विभिन्न स्थितियों में प्रतिबिम्ब का निर्माण
बिम्ब की स्थितिप्रतिबिम्ब की स्थितिप्रतिबिम्ब का आकारप्रतिबिम्ब की प्रकृति
अनंत परफोकस (F)(F) परअत्यधिक छोटा, बिन्दु के आकार कावास्तविक तथा उलटा
वक्रता केन्द्र से परेफोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीचछोटावास्तविक तथा उलटा
वक्रता केन्द्र परवक्रता केन्द्र परसमान आकार कावास्तविक तथा उलटा
वक्रता केन्द्र तथा फोकस के बीचवक्रता केन्द्र से परेविवर्धितवास्तविक तथा उलटा
फोकस परअनंत परअत्यधिक विवर्धितवास्तविक तथा उलटा
ध्रुव तथा फोकस के बीचदर्पण के पीछेविवर्धितआभासी तथा सीधा

अवतल दर्पण के उपयोग

अवतल दर्पण का उपयोग टॉर्च, सर्च लाईट, तथा गाड़ियों के हेड लाईट आदि में किया जाता है। इनमें बल्ब को अवतल दर्पण के फोकस पर रखा जाता है, जिससे प्रकाश की किरणों का समानांतर बीम प्राप्त होता है, जिससे रोशनी दूर तक जाती है।

अवतल दर्पण का उपयोग हजामत बनाने के लिये दर्पण के रूप में किया जाता है। अवतल दर्पण के उपयोग से चेहरे का बड़ा प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है, तथा हजामत बनाने में सुविधा होती है।

अवतल दर्पण का उपयोग दाँतों के डॉक्टर द्वारा रोगी के दाँतों का बड़ा प्रतिबिम्ब देखने के लिये किया जाता है।

बड़े अवतल दर्पण का उपयोग सौर भट्ठी में किया जाता है। बड़े अवतल दर्पण का द्वारक भी बड़ा होता है, जिसके कारण यह सूर्य के किरणों की बड़ी मात्रा को एक जग केन्द्रित कर उष्मा की बड़ी मात्रा देता है।

उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनाना

चूँकि उत्तल दर्पण में फोकस [Focus (F)(F)], तथा वक्रता केन्द्र [Center of Curvature (C)(C)] दर्पण के पीछे स्थित होता है, अत: बिम्ब को केवल दो ही स्थिति हो सकती है, एक अनंत दूरी पर तथा दूसरा दर्पण के ध्रुव तथा अनंत दूरी के बीच।

(a)बिम्ब के अनंत दूरी पर होने की स्थिति में उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनाना

जब बिम्ब अनंत दूरी पर हो तो उससी आने वाली किरणें दर्पण के फोकस से अपसरित होती हुई प्रतीत होती है, तथा प्रतिबिम्ब उत्तल दर्पण के फोकस पर बनता है।

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of Image): फोकस पर, दर्पण के पीछे

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of Image): अत्यधिक छोटा, बिन्दु के आकार का

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of Image) : आभासी तथा सीधा (Virtual and Erect)

(b) बिम्ब का उत्तल दर्पण के ध्रुव तथा अनंत दूरी के बीच होने की स्थिति में प्रतिबिम्ब का बनाना

जब बिम्ब उत्तल दर्पण के ध्रुव तथा अनंत के बीच कहीं भी स्थित हो, तो प्रतिबिम्ब दर्पण के ध्रुव तथा फोकस के बीच में, जो कि दर्पण के पीछे होता है, बनता है।

Image formation by a convex when object is between pole (P) and infinity
बिम्ब का में उत्तल दर्पण के ध्रुव तथा अनंत दूरी के बीच होने की स्थिति में प्रतिबिम्ब का बनाना

प्रतिबिम्ब की स्थिति (Position of Image): फोकस तथा ध्रुव के बीच, दर्पण के पीछे

प्रतिबिम्ब का आकार (Size of Image): छोटा

प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature of Image) : आभासी तथा सीधा (Virtual and Erect)

उत्तल दर्पण के उपयोग (Use of Convex Mirror)

(a) उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों में पश्च दृश्य दर्पणों (Rear view mirror) के रूप में किया जाता है। पश्च दृश्य दर्पण वाहनों के पार्श्व (Side) में लगे होते हैं, जिसमें वाहन चालक पीछे आने वाले वाहनों को देख सकता है। उत्तल दर्पण के बाहर की ओर वक्रित होने के कारण इसका दृष्टि क्षेत्र बड़ा होता है तथा ये सीधा तथा सापेक्ष रूप से छोटा प्रतिबिम्ब बनाते हैं, जिसके कारण वाहन चालक उनके पीछे दूर तक आते वाहनों को आसानी से देख पाते हैं, जिससे वाहन चलान में सुविधा होती है।

(b) उत्तल दर्पण का उपयोग तीक्ष्ण मोड़ पर दूसरी तरफ से आने वाले वाहनों को देखने में होता है। दूसरी तरफ से आने वाले वाहनों को देख लेने के बाद विपरीत दिशा से आने वाले वाहन चालक सतर्क हो जाते हैं तथा वाहन सुरक्षित रूप से चला पाते हैं।

गोलीय दर्पणों द्वारा परावर्तन के लिए चिन्ह परिपाटी (Sign Convention of Reflection by Spherical Mirror)

गोलीय दर्पणों द्वारा प्रकाश के परावर्तन पर विचार करने के लिये एक निश्चत चिन्ह परिपाटी तैयार की गई है, जिसे नयी कार्तीय चिन्ह परिपाटी कहते हैं।

गोलीय दर्पणों द्वारा प्रकाश के परावर्तन पर विचार करने के लिये नयी कार्तीय चिन्ह परिपाटी के नियम (Rules of New Cartesian Sign Convention)

(a) बिम्ब को सदैव दर्पण के बाईं ओर रखा जाता है अर्थात दर्पण पर बिम्ब से प्रकासह बाईं ओर से आपतित होता है।

(b) मुख्य अक्ष के समांतर सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव से मापी जाती है।

(c) मूल बिन्दु के दाईं ओर (+ x – अक्ष के अनुदिश) मापी गई सभी दूरियाँ धनात्मक मानी जाती हैं जबकि मूल बिन्दु के बाईं ओर (– x – अक्ष के अनुदिश) के अनुदिश मापी गई दूरियाँ ऋणात्मक मानी जाती हैं।

(d) मुख्य अक्ष के लंबबत तथा उपर की ओर (+ y – अक्ष के अनुदिश) मापी जाने वाली दूरियाँ धनात्मक मानी जाती हैं।

(e) मुख्य अक्ष के लंबबत तथा नीचे की ओर (– y – अक्ष के अनुदिश) मापी जाने वाली दूरियाँ ऋणात्मक मानी जाती हैं

 Sign Convention of Reflection by Spherical Mirror
गोलीय दर्पणों द्वारा परावर्तन के लिए चिन्ह परिपाटी

दर्पण सूत्र तथा आवर्धन (Mirror Formula and Magnification)

ध्रुव से बिम्ब की दूरी (u)(u), ध्रुव से प्रतिबिम्ब की दूरी (v)(v) तथा मुख्य फोकस की दूरी (f)(f) के बीच संबंध को नोम्नांकित तरीके से दर्शाया जाता है:

1v+1u=1f1v+1u=1f

जहाँ, uu = ध्रुव से बिम्ब की दूरी [इसे बिम्ब दूरी कहते हैं।] (Distance of object from pole)

vv = ध्रुव से प्रतिबिम्ब की दूरी (distance of image from pole of mirror)

ff = ध्रुव से मुख्य फोकस की दूरी (focal length (distance between principal focus and pole)

बिम्ब दूरी (u)(u), प्रतिबिम्ब दूरी (v)(v) तथा फोकस दूरी (f)(f) के बीच इस संबंध को दर्पण सूत्र कहा जाता है।

यह संबह सभी प्रकार के गोलीय दर्पणों के लिये बिम्ब की सभी स्थितियों के लिये मान्य है।

आवर्धन (Magnification)

गोलीय दर्पण द्वार उत्पन्न आवर्धन वह सापेक्षिक विस्तार है जिससे ज्ञात होता है कि कोई प्रतिबिम्ब बिम्ब की अपेक्षा कितना गुना आवर्धित है।

आवर्धन को अंगरेजी के अक्षर (m)(m) से निरूपित किया जाता है।

आवर्धन (m)(m) को बिम्ब की उँचाई (h)(h) तथा प्रतिबिम्ब की उँचाई (h’)(h′) के अनुपात में व्यक्त किया जाता है।

m=height of image(h)height of object(h’)m=height of image(h)height of object(h′)

Or, m=h’hm=h′h ———(i)

आवर्धन (m)(m) तथा बिम्ब दूरी (u)(u) तथा प्रतिबिम्ब दूरी (v)(v) में संबंध

आवर्धन (m)=h’h=−vu(m)=h′h=-vu —–(ii)

अत: उपरोक्त समीकरण (i) तथ समीकरण (ii) की मदद से किसी दो का मान ज्ञात रहने पर तीसरे के मान की गणना की जा सकती है।

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