BSEB 12 HIS CH 7

BSEB Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 7 एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर

Bihar Board Class 12 History एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर Textbook Questions and Answers

उत्तर दीजिए (लगभग 100-150 शब्दों में)

प्रश्न 1.
पिछली दो शताब्दियों में हम्पी के भवनावशेषों को अध्ययन में कौन-सी पद्धतियों का प्रयोग किया गया है? आपके अनुसार यह पद्धतियाँ विरुपाक्ष मंदिर के पुरोहितों द्वारा प्रदान की गई जानकारी की किस प्रकार पुरक रही?
उत्तर:
पिछली दो शताब्दियों में हम्पी के भवनावशेषों के अध्ययन की पद्धतियाँ एवं विरुपाक्ष मंदिर के पुरोहितों द्वारा प्रदान की गई जानकारी का यूरक: विजयनगर का विनाश होने के लगभग दो सौ वर्ष पश्चात् भी विजयनगर की स्मृति बनी रही। हम्पी की खोज में एक अभियन्ता (Engineer) एवं पुरातत्वविद् कर्नल कॉलिन मैकेन्जी का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। उसने 1800 ई० में इस स्थान का सर्वप्रथम सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया।

उसे विरुपाक्ष मंदिर तथा पम्पादेवी के पूजास्थल के पुजारियों से इसके बारे में आरंभिक जानकारी मिली। इसके आधार पर 1856 ई० से छायाचित्रकारों ने शोधकर्ताओं के अध्ययन कार्य को सुगम बनाने के लिए यहाँ के भवनों के चित्र संकलित करने आरंभ किये। 1836 ई० से विद्वानों ने विभिन्न मंदिरों से अनेक अभिलेख एकत्र करने शुरू कर दिए। विजयनगर साम्राज्य के इतिहास का पुनर्निर्माण करने के लिए इन स्रोतों की विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों तथा तेलुगु कन्नड़, तमिल और संस्कृत में लिखे गये साहित्य से तुलना की गई।

प्रश्न 2.
विजयनगर की जल आवश्यकताओं को किस प्रकार पूरा किया जाता था?
उत्तर:
विजयनगर की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के उपाय –

  1. विजयनगर का क्षेत्र एक शुष्क क्षेत्र है। इसकी जल आवश्यकता तुंगभद्रा नदी पूरी करती है। यह नदी एक प्राकृतिक कुंड का निर्माण करती है।
  2. नदी के आस-पास करधनी के रूप में ग्रेनाइट पत्थर की पहाड़ियाँ हैं जिनका पानी जल धाराओं के रूप में नदी में गिरता है।
  3. सभी धाराओं के साथ एक हौज बनाया गया है। हौज के जल का प्रयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है।
  4. इन हौजों में प्रसिद्ध हौज 15 वीं शताब्दी में निर्मित कमलपुरम् जलाशय है। इसके जल का प्रयोग पीने और सिंचाई दोनों कार्यों के लिये किया जाता है।
  5. जल का प्रमुख स्रोत हिरिया नहर था। इस नहर में तुंगभद्रा पर बने बांध से पानी लाया जाता था और घाटी स्थित कृषि भूमि को सिंचाई में प्रयोग किया जाता था।

प्रश्न 3.
शहर के किलेबंद क्षेत्र में कृषि क्षेत्र को रखने के आपके विचार में क्या फायदे और नुकसान थे?
उत्तर:
शहर के क्षेत्र में कृषि क्षेत्र को रखने के फायदे और नुकसान –
1. विजयनगर के शासकों ने शहर के किलेबंद क्षेत्र के भीतर ही कृषि क्षेत्र को रखा था। इसकी पुष्टि फारस यात्री अब्दुर्रज्जाक और पुरातत्त्वविदों ने की है। इसका फायदा यह था कि आक्रमणकारियों को खाद्य सामग्री से वंचित करने और समर्पण के लिए बाध्य करने में होता था। आक्रमणकारियों द्वारा किले को कई महीनों और यहाँ तक कि वर्षों तक घेरा जा सकता था। ऐसी परिस्थितियों में प्राथमिक जरूरत को पूरा करने के लिए किलेबंद क्षेत्रों के भीतर ही खेती की व्यवस्था और अन्नागारों का निर्माण किया जाता था।

2. इस व्यवस्था का नुकसान यह था कि शासकों को कृषि क्षेत्र विस्तृत होने के कारण किले की ऊँची प्राचीर तैयार कराने में बहुत अधिक खर्च आता था । पर्याप्त साधनों और धन की आवश्यकता होती थी।

प्रश्न 4.
आपके विचार में महानवमी डिब्बा से संबद्ध अनुष्ठानों का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
महानवमी डिब्बा से संबद्ध अनुष्ठान:
महानवमी डिब्बा शहर की सबसे ऊँची संरचना थी। इसका आधार 11000 वर्ग फीट है। मंच के आधार पर सुन्दर आकृतियाँ उत्कीर्ण हैं। इस ढाँचे का सम्बन्ध 10 दिन चलने वाले हिंदू त्यौहार दशहरा (उत्तर भारत), दुर्गापूजा (बंगाल) तथा नवरात्रि या महानवमी (दक्षिण भारत) के साथ था। इस अवसर पर शासक अपनी शक्ति और वैभव का प्रदर्शन करता था। इसके अलावा अन्य धर्मानुष्ठानों में मूर्ति पूजा राज्य के अश्व की पूजा, भैंसों और अन्य जानवरों की बलि शामिल है। इस अवसर पर विभिन्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कार और उपहार दिए जाते थे। राजा सेना का निरीक्षण भी करता था। इन सबके बावजूद महानवमी डिब्बा के विषय में स्पष्ट जानकारी अभी तक प्राप्त नहीं हो पाई है।

प्रश्न 5.
यह विरुपाक्ष मंदिर के एक अन्य स्तंभ का रेखाचित्र है। क्या आप कोई पुष्प-विषयक रूपांकन देखते हैं? किन जानवरों को दिखाया गया है? आपके विचार में उन्हें क्यों चित्रित किया गया है? मानव आकृतियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. स्तंभ पर अश्व के नीचे पुष्प विषयक रूपांकन दिखाई देता है। शायद अश्व के महत्त्व को दर्शाने के लिए ऐसा किया गया है।
  2. स्तम्भ पर अश्व मोर को दिखाया गया है। अश्व विजय का प्रतीक होता है और मोर राष्ट्रीय पक्षी है।
  3. इसमें तीन मानव आकृतियाँ हैं। सबसे ऊपर स्त्री की आकृति है जिसके एक हाथ में पुष्प है। उसके नीचे दूसरी आकृति धनुष लिये हुए हैं और उसका एक पैर शिवलिंग पर है। तीसरी आकृति बड़े पेट वाले किसी पुरुष की है। उसके बांये हाथ में गदा जैसा कोई युद्धास्त्र है।

निम्नलिखित पर एक लघु निबंध लिखिए। (लगभग 250 से 300 शब्दों में)

प्रश्न 6.
“शाही केन्द्र” शब्द शहर के जिस भाग के लिए प्रयोग किए गए हैं, क्या वे उस भाग का सही वर्णन करते हैं?
उत्तर:
“शाही केन्द्र” या “राजकीय केन्द्र” आबादी के दक्षिण:
पश्चिम में स्थित था। इसमें 60 से अधिक मंदिर बने थे। स्पष्ट है कि “शाही केन्द्र” शब्द शहर के जिस भाग के लिए प्रयोग किये गये हैं, वे उस भाग का सही वर्णन नहीं करते हैं। इन देव स्थलों में प्रतिष्ठित देवी-देवताओं से संबंद्ध जनता को यहाँ के शासक प्रसन्न रखकर अपनी सत्ता को स्थापित करने तथा वैधता प्रदान करने का प्रयास कर रहे थे।

इतना अवश्य है कि:
शाही केन्द्र में 30 संरचनायें ऐसी हैं जिनकी पहचान महलों के रूप में की गई है। ये अपेक्षाकृत विशाल संरचनाये हैं जो धार्मिक कार्यों से सम्बद्ध नहीं थी। मंदिरों और संरचनाओं से ये ढाँचे इस अर्थ में भिन्न थे कि मंदिर पूरी तरह धर्म-गाथाओं एवं चित्रों से निर्मित थे जबकि महल जैसे भवनों की अधिरचना विलासी वस्तुओं से तैयार की गई थी। कुछ भवनों का नामकरण उनके आकार और कार्य के आधार पर किया गया है।

उदाहरण के लिए राजा का भवन’ आंतरिक क्षेत्र में बहुत विशाल है। इसके मुख्य भाग सभा मण्डप और महानवमी डिब्बा है। सभा-मण्डप के उपयोग के विषय में इतिहासकार स्पष्ट नहीं है। महानवमी डिब्बा का सम्बन्ध 10 दिन चलने वाले हिंदू त्यौहार दशहरा (उत्तर भारत), दुर्गापूजा (बंगाल) या नवरात्रि या महानवमी (दक्षिण भारत) से था। इस अवसर पर शासक अपनी शक्ति, वैभव का प्रदर्शन करते थे। इसमें कुछ अनुष्ठान भी संपन्न कराए जाते थे। इस अवसर पर राजा नायकों की सेना का निरीक्षण करता था। इसके अलावा इस क्षेत्र में एक लोट्स (कमल) महल था। मैकेंजी के अनुसार यह परिषदीय-सदन था। इसके आस-पास भी कई मंदिर थे।

प्रश्न 7.
कमल महल और हाथियों के अस्तबल जैसे भवनों का स्थापत्य हमें उनके बनवाने वाले शासकों के विषय में क्या बताता है?
उत्तर:
शाही केन्द्र के सर्वाधिक आकर्षक भवनों में एक लोट्स (कमल) महल है जिसका यह नामकरण 19 वीं शताब्दी में अंग्रेज यात्रियों ने किया था। यह नाम रोमांचकारी है परंतु इतिहासकार इस संबंध में यह निश्चय नहीं कर पाये हैं कि इस भवन का किस कार्य के लिए प्रयोग किया जाता था। मैकेन्जी का सुझाव है कि यह भवन परिषदीय सदन था जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था। कमल महल के निकट ही हाथियों का अस्तबल था। ये अस्तबल समस्तरी थे। इससे ज्ञात होता है कि विजयनगर के शासक हाथियों के शौकीन थे। हाथियों का प्रयोग सेना के अलावा अन्य कार्यों के लिए भी किया जाता था। अस्तबल में अनेक विशाल कक्ष या हाल थे। स्पष्ट है कि हाथियों की संख्या भी पर्याप्त थी।

प्रश्न 8.
स्थापत्य की कौन-कौन सी परम्पराओं ने विजयनगर में वास्तुविदों को प्रेरित किया? उन्होंने इन परम्पराओं में किस प्रकार बदलाव किये?
उत्तर:
वियजनगर के वास्तुविदों को प्रभावित करने वाली स्थापत्य परम्परायें और इनमें –
बदलाव:
विजयनगर में स्थापत्य कला का विकास 1336 ई० से 1365 ई० के बीच विजयनगर के सम्राटों ने किया। यह साम्राज्य दक्षिण भारत के एक बड़े भाग तक विस्तृत था। वास्तुविदों को यहाँ के मंदिर, भवन, महल और दुर्ग जैसी संरचनाओं ने बहुत प्रभावित किया। विजयनगर और इसके आस-पास के भवनों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की मान्यता मिली है। नये मंदिरों के निर्माण के अतिरिक्त वियजनगर के शासकों ने पूरे दक्षिण भारत के पुराने मंदिरों में भी कुछ परिवर्तन किये। इनमें से कुछ भवन विजयनगर साम्राज्य की स्थापना से पहले के हैं।

शहरी केन्द्र में व्यापारियों के भवन हैं। यहाँ मंदिर और मकबरे भी मिले हैं। शाही केन्द्र में दो प्रमुख संरचनायें-सभामंडल और महानवमी डिब्बा है। ये दोनों संरचनायें धार्मिक कार्यों के लिए बनायी गई थीं। इसके अलावा लोट्स महल के आस-पास अनेक मंदिर हैं। इसी में हजार राम मंदिर है। मंदिरों के गोपुरम् और मण्डप अत्यंत आकर्षक हैं। ये ढाँचा विरुपाक्ष मंदिर और विट्ठल मंदिर में देखने को मिलते हैं।

प्रश्न 9.
अध्याय के विभिन्न विवरणों से आप विजयनगर के सामान्य लोगों के जीवन की क्या छवि पाते हैं?
उत्तर:
वियजनगर के सामान्य लोगों के जीवन की छवि:
अध्याय के विभिन्न विवरणों से सामान्य लोगों के जीवन की निम्नलिखित झाँकी दिखाई पड़ती है –
1. बरबोसा के विवरण से ज्ञात होता है कि सामान्य लोगों का जीवन बहुत अच्छा नहीं था। उसके अनुसार सामान्य लोगों के कच्चे आवास थे परंतु बहुत मजबूत बनाए गए थे।

2. क्षेत्र सर्वेक्षण से ज्ञात होता है कि यहाँ विभिन्न सम्प्रदायों और समुदायों के पूजा स्थल और छोटे मंदिर भी हैं।

3. सामान्य लोग जल संरक्षण के प्रति विशेष रहते थे। इसके लिए कुँए, वर्षा के पानी वाले जलाशय और मंदिर के जलाशय की व्यवस्था थी।

4. शहरों में व्यापार बहुत समृद्ध था और वहाँ की बाजार मसालों, वस्त्रों तथा रत्नों से परिपूर्ण थी। इससे लगता है कि शहर की जनता समृद्ध थी और विदेशों से महँगे सामान मँगाती थी।

5. सामान्य लोगों की जीविका का प्रमुख साधन कृषि थी। विजयनगर की कृषि अच्छी थी और विभिन्न प्रकार के अनाजों, सब्जियों और फलों की खेती की जाती थी।

6. विजयनगर के लोग अत्यधिक धार्मिक थे-इसका अनुमान सभी स्थलों से मंदिरों के अवशेष मिलने से लगाया जा सकता है। ये लोग विशेष रूप से पम्पादेवी और विरुपाक्ष की पूजा करते थे। (vii) लोग भोजन में चावल, गेहूँ, मकई, जौ, सेम, मूंग, दालें, फल, सब्जी और यहाँ तक कि मांस का भी प्रयोग करते थे। नूनिज के अनुसार, “बाजार में “भेड़, बकरी का मांस, सूअर, मृगमांस, तीतर मांस, खरगोश, कबूतर, बटेर और सभी प्रकार के पक्षी, चूहे, बिल्लियों और छिपकलियों का मांस बिकता था।”

मानचित्र कार्य

प्रश्न 10.
विश्व के सीमारेखा पर इटली, पुर्तगाल, ईरान तथा रूस को सन्निकता से अंकित कीजिए। उन मार्गों को पहचानिए जिनका प्रयोग इटली का निकोलो दे कॉन्ती (व्यापारी), अब्दुर रज्जाक (राजदूत), अफानासी निकितिन (रूसी व्यापारी), दुआर्ते बरबोसा, डोमिंगो पेस तथा फर्नावो नूनिज (पुर्तगाली नागरिक) ने विजयनगर पहुँचने के लिए किया था।
उत्तर:

परियोजना कार्य (कोई एक)

प्रश्न 11.
भारतीय उपमहाद्वीप के किसी एक ऐसे प्रमुख शहर के विषय में और जानकारी हासिल कीजिए जो लगभग चौदहवीं-सत्रहवीं शताब्दियों में फला-फूला। शहर के स्थापत्य का वर्णन कीजिए। क्या कोई ऐसे लक्षण हैं जो इनके राजनीतिक केन्द्र होने की ओर संकेत करें? क्या ऐसे भवन हैं जो आनुष्ठानिक रूप से महत्त्वपूर्ण हों? कौन-से ऐसे लक्षण हैं जो शहरी भाग को आस-पास के क्षेत्रों से विभाजित करते हैं?
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 12.
अपने आस-पास किसी धार्मिक भवन को देखिए। रेखाचित्र के माध्यम से छत, स्तम्भों, मेहराबों, यदि हों, तो गलियारों, रास्तों, सभागारों, प्रवेश द्वारों, जल आपूर्ति आदि का वर्णन कीजिए। इन सभी की तुलना निरुपाक्ष मंदिर के अभिलक्षणों से कीजिए। वर्णन कीजिए कि भवन का प्रत्येक भाग किस प्रयोग में लाया जाता था। इसके इतिहास के विषय में पता कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 12 History एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
महमूद खाँ कौन था?
उत्तर:
यह बहमनी शासक मुहम्मदशाह तृतीय का प्रधानमंत्री था। इसने बहमनी राज्य को शक्तिशाली बनाने में बहुत अधिक सहयोग दिया। उसने कोंकण, संगमेश्वर, उड़ीसा और विजयनगर के शासकों को हराया। उसने सेना को संगठित किया और किसानों की सहायता की। वह विद्वानों और कलाकारों का आदर करता था। उसका बहुत दुःखद अंत हुआ।

प्रश्न 2.
विजयनगर राज्य की स्थापना कैसे हुई?
उत्तर:
विजयनगर राज्य की स्थापना दो भाइयों-हरिहर और बुक्का ने की। मुहम्मद तुगलक के शासन काल में दक्षिण भारत में विद्रोह भारत में विद्रोह का लाभ उठाकर उन्होंने 1336 ई० में इसको स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया था।

प्रश्न 3.
बहमनी राज्य की स्थापना कब और किसने की?
उत्तर:
बहमनी राज्य की स्थापना अलाउद्दीन बहमन शाह ने 1247 ई० में की। यह मुस्लिम राज्य था।

प्रश्न 4.
पुर्तगालियों के आगमन से पूर्व भारत के अन्य देशों के साथ सम्बन्धों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
वास्को-डि-गामा 1498 ई० में कालीकट बन्दरगाह पर पहुँचने वाला पहला पुर्तगाली मल्लाह था। वास्को-डि-गामा से पहले भारत के मिश्र, अरब, ईरान, ईराक, सीरिया आदि देशों के साथ बड़े घनिष्ठ व्यापारिक सम्बन्ध थे। भारत के गर्म मसाले, जड़ी-बूटियाँ आदि अरब व्यापारियों के माध्यम से दोनों स्थल और जल मार्गों से यूरोप के जेनोवा, वेनिस आदि बन्दरगाहों तक पहुँच जाते थे और उधर से भारत में घोड़े और ऐश्वर्य की सामग्री लाई जाती थी।

प्रश्न 5.
तालीकोट का युद्ध कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:

  1. 23 जनवरी, 1565 को।
  2. राक्षसी और तगड़ी ग्रामों के मध्य।

प्रश्न 6.
विजयनगर का नाम हम्पी कैसे पड़ा?
उत्तर:
इस नाम का आविर्भाव यहाँ की स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से हुआ था।

प्रश्न 7.
विजयनगर के शासकों को उत्तरी सीमा पर किन राज्यों से संघर्ष करना पड़ा और क्यों?
उत्तर:
विजयनगर के शासकों को अपने समकालीन राजाओं-दक्कन के सुल्तान तथा उड़ीसा के गजपति शासक से संघर्ष करना पड़ा। वे लाभकारी विदेशी व्यापार तथा कृषि क्षेत्र पर कब्जा करना चाहते थे।

प्रश्न 8.
नायकर कौन थे?
उत्तर:
नायकर व्यवस्था विजयनगर राज्य में थी। नायकर वस्तुत: भू – सामन्त थे। अधीनस्थ सेना के रख-रखाव के लिए राजा इनहें वेतन के बदले में एक विशेष भूखण्ड देता था।

प्रश्न 9.
अमर नायक प्रणाली क्या थी? इसकी क्या विशेषता थी?
उत्तर:

  1. यह विजयनगर साम्राज्य को प्रमुख राजनीतिक प्रणाली थी। अमर नायक सैनिक कमांडर थे इन्हें विजयनगर के शासक प्रशासन के लिए राज्य क्षेत्र सौंपते थे।
  2. यह प्रणाली दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से मिलती-जुलती थी।

प्रश्न 10.
भारत में पुर्तगालियों को एक दृढ़ शक्ति बनाने में अलवुकर्क की क्या भूमिका रही?
उत्तर:
पुर्तगाली बस्तियों का वायसराय अलबुकर्क 1509 से 1515 ई० तक भारत में रहा। उसने बीजापुर के सुल्तान से 1510 ई० में गोआ छीन लिया और उसे भारत में पुर्तगाली साम्राज्य की राजधानी बनाया। एशिया और अफ्रीका के महत्त्वपूर्ण ठिकानों पर किलों का निर्माण करके उसने पूर्वी व्यापार पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया।

प्रश्न 11.
क्या तुर्कों तथा पुर्तगालियों के मध्य का संघर्ष अपरिहार्य था? भारत के व्यापार पर इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
तुर्कों और पुर्तगालियों के मध्य का संघर्ष अपरिहार्य था क्योंकि हिन्द महासागर पर दोनों में से केवल एक का प्रभुत्व स्थापित हो सकता था। बिना आपसी संघर्ष के इस बात का निश्चय नहीं हो सकता था कि पूर्वी देशों के साथ व्यापार पर किसका प्रभुत्व स्थापित हो। तुर्को और पुर्तगालियों में समुद्री मार्गों पर प्रभुत्व स्थापित करने के लिए अनेक झड़पें हुईं। तुर्कों को अन्ततः पराजय का मुँह देखना पड़ा। भारत पर इस संघर्ष का बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। भारतीय नाविक जो पहले अन्य देशों से स्वतंत्र रूप से व्यापार कर लेते थे वह समाप्त हो गया। अब उनके जहाज डुबो दिए जाते थे और उन्हें मार दिया जाता था।

प्रश्न 12.
विजयनगर के तीन राजवंश कौन-से थे?
उत्तर:

  1. संगम वंश: 1336 से 1485 ई० तक।
  2. सुलव वंश: 1485 से 1503 ई० तक।
  3. तुलुव वंश: 1503 से 1565 ई० तक।

प्रश्न 13.
बरबोसा ने सामान्य लोगों के विषय में क्या लिखा है?
उत्तर:

  1. लोगों के आवास छप्पर के हैं परंतु फिर भी मजबूत है।
  2. कई खुले स्थानों वाली लम्बी गलियों में बाजारें लगाई जाती है।

प्रश्न 14.
हजार राम मंदिर क्यों प्रसिद्ध था?
उत्तर:

  1. यह मंदिर शाही केन्द्र में स्थित था। इसमें केवल राजा और उनके परिवार के लोग पूजा करते थे।
  2. देवस्थल की मूर्तियाँ नष्ट हो गयी हैं परंतु दीवारों पर अकेरी गई मूर्तियाँ सुरक्षित हैं। उल्लेखनीय है कि आंतरिक दीवारों पर रामायण के दृश्य अंकित हैं।

प्रश्न 15.
आप कमलपुरम् जलाशय के बारे में क्या जानते हैं?
उत्तर:

  1. विजयनगर एक शुष्क क्षेत्र था। जल संरक्षण के लिए यहाँ हौज या जलाशय बनाये जाते थे। इनमें सबसे प्रसिद्ध ‘कमलपुरम् जलाशय’ था।
  2. इस जलाशय से सिंचाई होती थी और इसका. जल एक नहर के द्वारा राजकीय केन्द्र तक ले जाया जाता था।

प्रश्न 16.
दक्षिण के राज्यों में संघर्ष का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर:

  1. दक्षिण के शासक अपने राज्य का विस्तार करना चाहते थे।
  2. वे अपने राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए दूसरे राज्यों पर आक्रमण करते थे।

प्रश्न 17.
विजयनगर और बहमनी राज्य के पतन के दो कारण बताइये।
उत्तर:

  1. दोनों राज्य अपने विस्तार के लिए एक-दूसरे से युद्ध करते रहते थे।
  2. दोनों राज्य रायचूर, दोआब पर अधिकार करने के लिए लालायित थे।

प्रश्न 18.
विजयनगर के शासकों में कृष्णदेवराय को महानतम् शासक क्यों माना जाता है।
उत्तर:

  1. वह एक महान् योद्धा था और उसने विजयनगर की सेनाओं को अभूतपूर्व शक्तिशाली बनाया।
  2. उसने वियजनगर के पास एक नया शहर बसाया तथा वहाँ एक भव्य तालाब का निर्माण करवाया।

प्रश्न 19.
उन विदेशी यात्रियों का उल्लेख कीजिए जिन्होंने विजयनगर शहर की यात्रा की?
उत्तर:

  1. निकोलो-दे-कान्ती-यह इतालवी व्यापारी था।
  2. अब्दुर रज्जाक-यह फारस के राजा का राजदूत था।
  3. अफानासी निकितिन-यह रूस का व्यापारी था। इन सभी ने 15वीं शताब्दी में भारत की यात्रा की।
  4. 16वीं शताब्दी से दुआते बरबोसा, डोमिंगो पेस तथा पुर्तगाल के फनीबो नूलिज ने भी भारत की यात्रा की।

प्रश्न 20.
विजयनगर की इंडो-इस्लामिक शैली की क्या विशेषता है?
उत्तर:

  1. इतिहासकारों ने किलेबंद बस्ती में जाने वाले प्रवेश द्वार पर बनी मेहराब तथा द्वार के ऊपर बनी गुंबद की स्थापत्य शैली को इंडो-इस्लामिक शैली नाम दिया है।
  2. यह शैली विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय स्थापत्य कला का मिश्रित रूप है।

प्रश्न 21.
विजयनगर शहर की दुर्गीकरण या किलेबंदी प्रणाली का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. एक दुर्ग द्वारा शहर के खेतों को घेरा गया था।
  2. नगरीय केन्द्र को भी सुदृढ़ दीवारों से घेरा गया था।
  3. शासकीय केन्द्र को घेरा गया था और महत्त्वपूर्ण ईमारतों के प्रत्येक समूह की घेराबंदी ऊँची दीवारों से की गई थी।

प्रश्न 22.
राय गोपुरम् क्यों बनाये जाते थे?
उत्तर:

  1. यह स्थापत्य कला का एक नवीन तत्त्व था। इसको राजकीय प्रवेश द्वारा कहा जाता था। ये प्रायः केन्द्रीय देवालयों की मीनारों से भी कई गुना अधिक ऊँचे थे।
  2. ये लम्बी दूरी से ही मंदिर होने का संकेत देते थे। गोपुरम शासकों की शक्ति का प्रतीक था क्योंकि इनके निर्माण में पर्याप्त साधन, तकनीक तथा कौशल का प्रयोग होता था।

प्रश्न 23.
विजयनगर पर कौन-कौन से राजवंशों ने शासन किया?
उत्तर:

  1. संगम वंश
  2. सुलुवा वंश
  3. तलुवा वंश
  4. अराविदु वंश।

प्रश्न 24.
कॉलिन मैकेंजी कौन था? उसकी मुख्य उपलब्धि क्या थी?
उत्तर:

  1. कॉलिन मैकेंजी एक अभियंता एवं पुराविद् थे। वह ईस्ट इंडिया कंपनी में कार्यरत थे।
  2. उन्होंने विजयनगर (हंपी) का पहला सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया था। इस नगर के विषय में उसकी जानकारी विरुपाक्ष मंदिर तथा पंपा देवी के पूजास्थल के पुरोहितों के साथ किए गए साक्षात्कार से संगृहीत की गई थी।

प्रश्न 25.
विजयनगर के मंदिरों के दो मुख्य अभिलक्षणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. मंदिरों में विशाल संरचनायें बनाई जाने लगीं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण गोपुरम् अथवा राजकीय प्रवेश द्वार था।
  2. दूसरा अभिलक्षण मंडल तथा गलियारों के निर्माण का था। ये गलियारे मंदिर परिसर में स्थित देवस्थलों के चारों ओर बने थे।

प्रश्न 26.
विजयनगर के ‘महानवमी डिब्बा’ की मुख्य विशेषतायें क्या हैं?
उत्तर:

  1. महानवमी डिब्बा’ एक विशालकाय मंच है जो शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर स्थित है। यह लकड़ी से निर्मित एक विशाल ढाँचा था।
  2. मंच के आधार पर उभारदार नक्काशी की गई है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
कृष्णदेवराय तृतीय को विजयनगर के शासकों में महान् शासक क्यों समझा जाता है? तीन प्रमाण दीजिए।
उत्तर:
कृष्णदेवराय तृतीय का मूल्यांकन –
1. महान विजेता:
वह एक महान् सैनिक और सेनापति था। उसने अपने सभी विरोधियों और विद्रोहियों का दमन करके बीदर, बीजापुर और उड़ीसा राज्यों को जीत लिया।

2. कुशल प्रशासक:
उन्होंने अपने राज्य संगठित करके प्रजा को न्याय प्रदान किया। भूमि सम्बन्धी और व्यापार सम्बन्धी सुधार भी कृष्णदेवराय तृतीय द्वारा किए गए।

3. कला और साहित्य का संरक्षक:
उन्होंने अपने साम्राज्य में संस्कृत और तेलगू को बढ़ावा दिया। कला के क्षेत्र में गोपुर टावर का निर्माण करवाया। उन्होंने प्रसिद्ध कृष्णस्वामी का मंदिर और नागतापुर नगर का निर्माण करवाया। उनकी महानता की प्रशंसा करते हुए डॉ. ईश्वरी प्रसाद ने लिखा है-“दक्षिण के हिन्दू और मुसलमान राजाओं में एक भी ऐसा नहीं था जिसकी तुलना कृष्णदेवराय से की जा सके।”

प्रश्न 2.
विजयनगर राज्य की स्थापना कैसे हुई?
उत्तर:
विजयनगर राज्य की स्थापना-विजयनगर राज्य की स्थापना संगम वंशी के दो भाईयों-हरिहर और बुक्काराय ने की। ये वारंगल के राजा प्रताप रुद्रदेव के यहाँ नौकरी करते थे। उस समय उत्तरी भारत पर मुहम्मद तुगलक राज करता था। जब मुसलमानों ने दक्षिणी भारत को जीत लिया तो इन दोनों भाइयों को बंदी बनाकर दिल्ली लाया गया। दक्षिण भारत के विद्रोह का दमन करने के लिए सुल्तान मुहम्मद तुगलक ने हरिहर और बुक्काराय को रायचूर दोआब का सामन्त बनाकर भेजा।

उनके गुरु माधव विद्यारण्य ने उन्हें हिन्दू जनता की रक्षा के लिए स्वतंत्र राज्य स्थापित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपने गुरु के नाम पर तुंगभद्रा नदी के किनारे 1336 ई० में विद्यानगर अथवा विजयनगर की नींव रखी जो बाद में एक विशाल साम्राज्य बन गया। सीवेल के अनुसार, “यह एक ऐसी महत्त्वपूर्ण घटना थी जिसने दक्षिण भारत के इतिहास को बदल दिया।” यह राज्य मुसलमानों के अत्याचारों से पीड़ित हिन्दुओं की शरणस्थली बन गया।

प्रश्न 3.
विजयनगर साम्राज्य के पतन के तीन कारण बताइये। अथवा, “तालीकोट का युद्ध विजयनगर राज्य के पतन का तत्कालीन कारण था, परंतु अन्य भी कारण थे।” तीन कारण दीजिए।
उत्तर:
विजयनगर साम्राज्य के पतन के कारण –
1. अयोग्य शासक:
कृष्णदेवराय तृतीय के शासन काल तक विजयनगर साम्राज्य मजबूत बना रहा परंतु उनके उत्तराधिकारी अपने सामन्तों और मंत्रियों के हाथों की कठपुतली बन गये।

2. सैनिक कमजोरी:
विजयनगर का सैनिक संगठन सामन्ती ढंग का था। सामन्त विश्वासघाती और अवसरवादी थे। विजयनगर की सेना में अश्वसेना का अभाव था।

3. दक्षिण के झगड़ों में हस्तक्षेप और तालीकोट का युद्ध:
सदाशिवराय जैसे शासक दक्षिण के अन्य राज्यों पर आक्रमण करते थे। कालांतर में बीजापुर, गोलकुंडा और अहमदनगर राज्यों के मुसलमान सुल्तानों ने एक साथ मिलकर 1665 ई० के तालीकोट युद्ध में विजयनगर को बुरी तरह पराजित कर दिया और उसका पतन आरम्भ हो गया।

प्रश्न 4.
कॉलिन मैकेन्जी कौन थे?
उत्तर:

  1. कॉलिन मैकेन्जी एक अभियंता, सर्वेक्षक तथा मानचित्रकार थे जिनका जन्म 1754 ई० में हुआ था।
  2. 1815 ई० में ईस्ट इंडिया कंपनी ने उन्हें भारत का प्रथम सर्वेयर जनरल बनाया और 1821 ई० में अपनी मृत्यु तक इस पद पर कार्य करते रहे।
  3. भारत के अतोत को समझने और उपनिवेश के प्रशासन को आसान बनाने के लिए उन्होंने स्थानीय परम्पराओं का संकलन किया तथा ऐतिहासिक स्थलों का सर्वेक्षण आरम्भ किया।
  4. भारत के कई संस्थानों, कानूनों तथा रीतिरिवाजों के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी देना जैसे कार्य उनके सर्वेक्षण में सम्मिलित थे।

प्रश्न 5.
विजयनगर साम्राज्य के व्यापार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर साम्राज्य का व्यापार:

  1. विजयनगर के शासकों को युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए अरब तथा मध्य एशिया के घोड़ों की आवश्यकता थी। उन्होंने इन देशों से घोड़ों का आयात किया।
  2. व्यापारियों के स्थानीय समूह यथा-कुदिरई चेट्टी या घोड़ों के व्यापारी भी इसमें रुचि लेते थे।
  3. 1498 ई० से पुर्तगाली व्यापारी भी भारत आकर इसके पश्चिमी तट पर बस गये। अपनी बेहतर सामरिक तकनीक एवं बंदूकों के प्रयोग से वे राजनीति में महत्त्वपूर्ण हो गये।
  4. विजयनगर मसालों, वस्त्रों तथा रत्नों की एक बहुत बड़ो बाजार था। यहाँ की जनता महँगी वस्तुओं का आयात करती थी। उन्नत व्यापार ने राज्य की राजस्व आय को बढ़ाया।

प्रश्न 6.
विजयनगर की आर्थिक दशा का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
विजयनगर की आर्थिक दशा:
आर्थिक दृष्टि से विजयनगर एक सम्पन्न राज्य था ! कृषि और व्यापार उन्नत थे। यहाँ आन्तरिक एवं बाह्य दोनों व्यापार होते थे। स्थल तथा जल दोनों मार्गों से व्यापार होता था। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मुख्यतः चीन, बर्मा, अरब, फारस तथा पुर्तगाल आदि देशों के साथ होता था। इन देशों को कपड़ा, चावल, लोहा, शोरा तथा मसाले आदि का मिर्यात किया जाता था। विदेशों से उत्तम नस्ल के घोड़े, हाथी, तांबा, मूंगा, पारा, रेशम आदि मँगवाए जाते थे। राज्य में अनेक उत्तम बंदरगाह थे।

पुर्तगाली यात्री डोमिंगोस पईज ने विजयनगर की आर्थिक समृद्धि का वर्णन करते हुए लिखा है, “राजा के पास भारी कोष, अनेक सैनिक तथा हाथी है। इस नगर में तुम्हें प्रत्येक राष्ट्र और जाति के लोग मिलेंगे, क्योंकि यहाँ व्यापार अधिक होता है और हीरे आदि बहुमूल्य पत्थर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। संसार में यह सबसे अधिक सम्पन्न नगर है और यहाँ चावल, गेहूँ आदि खाद्यान्नों के भंडार भरे हैं।” ईरानी यात्री अब्दुल रज्जाक विजयनगर की प्रशंसा में लिखते हैं, “देश इतना अच्छा बसा हुआ है कि संक्षेप में उसका चित्र प्रस्तुत करा पाना असंभव है। देश के सभी उच्च और निम्न लोग तथा कारीगर. भी कानों, कण्ठों, बाजुओं, कलाइयों तथा अंगुलियों में जवाहरात तथा सोने के आभूषण पहने हुए हैं।”

प्रश्न 7.
विजयनगर की सामाजिक दशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर की सामाजिक दशा:
विजयनगर का समाज एक सुसंगठित समाज था। समाज में स्त्रियों का बड़ा सम्मान था। वे राज्य के राजनैतिक, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन में सक्रिय भाग लेती थीं। उन्हें आक्रामक तथा रक्षात्मक युद्ध का प्रशिक्षण दिया जाता था। वे कुश्ती, संगीत, नृत्य, कला तथा ललित-कलाओं की विधाओं में भी दक्ष थीं। स्त्री अंगरक्षक भी नियुक्त किए जाते थे। राज्य में अनेक अच्छी कवियित्री तथा नाटककार थीं। बाल-विवाह, धनी व्यक्तियों में बहु-विवाह, दहेज-प्रथा और सती-प्रथा जैसी कुरीतियाँ भी समाज में व्याप्त थीं। समाज में ब्राह्मणों का बड़ा सम्मान था। वे धनी थे। उन्हें राज्य में निःशुल्क भूमियाँ प्राप्त थीं; वे राज्य के उच्च पदों पर नियुक्त थे। वे माँस नहीं खाते थे। शेष जातियों के लोग मांसाहारी थे। यज्ञों में पशु-बलि दी जाती थी, किन्तु गो-मांस का पूर्णतः निषेध था।

जाति-प्रथा का खण्डन करते हुए प्रो. नीलकंठ ने लिखा है:
“गाँवों और कस्बों में प्रत्येक जाति के लोग अलग-अलग मुहल्लों में निवास करते थे। वे अपने विशेष रीति-रिवाजों का पालन करते थे। छोटी जातियों के लोगों को विशेष परिश्रम करना पड़ता था। उनकी दशा दासों जैसी थी और वे गाँव से दूर झोंपड़ियों में रहते थे।” इसके ठीक विपरीत, राज-परिवार के लोगों का जीवन बड़ा सुखी था। उन्हें अच्छा भोजन, कपड़ा और रहने के लिए भव्य भवन मिलता था।

प्रश्न 8.
अमर नायक के कार्य बताइए।
उत्तर
अमर नायक के कार्य –

  1. अमर नायक सैनिक कमांडर थे जिन्हें राय शासक प्रशासन के लिए राज्य क्षेत्र सौंपते थे।
  2. वे किसानों, शिल्पकर्मियों तथा व्यापारियों से भू-राजस्व तथा अन्य कर वसूल करते थे।
  3. वे राजस्व का कुछ भाग व्यक्तिगत उपयोग तथा घोड़ों और हाथियों के निर्धारित दल के रख-रखाव के लिए अपने पास रख लेते थे।
  4. ये दल विजयनगर के शासकों की सैन्य शक्ति थे। इनकी सहायता से उन्होंने दक्षिणी प्रायद्वीप में साम्राज्य विस्तार किया।
  5. अमर नायक राजा को वर्ष में एक बार भेंट भेजा करते थे और अपनी स्वामीभक्ति प्रकट करने के लिए राजकीय दरबार में उपहारों के साथ स्वयं उपस्थित होते थे।

प्रश्न 9.
विजयनगर में कला और साहित्य की दशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर में कला तथा साहित्य की दशा:
विजयनगर राज्य साहित्य तथा कला की दृष्टि से, अपने समकालीन राज्यों से कहीं आगे था। विजयनगर राज्य के नरेशों के शासन-काल में संस्कृत, तेलुगू, तमिल तथा कन्नड़ भाषाओं का साहित्य संमृद्ध हुआ। सायण तथा भाई माधव विद्यारण्य ने वेदों की टीकाएँ लिखीं। कृष्णदेवराय स्वयं उच्चकोटि का विद्वान् था और उसके अनेक साहित्यकारों तथा कलाकारों को अपने दरबार में संरक्षण प्रदान किया था।

संगीत, नृत्य-कला, नाटक, व्याकरण, दर्शन, वास्तुकला तथा धर्म आदि सभी विषयों पर इस काल में उच्चकोटि का साहित्य रचा गया। विजयनगर साम्राज्य में वास्तुकला को बहुत प्रोत्साहन मिला। विजयनगर साम्राज्य के राजाओं ने अनेक सुन्दर मंदिरों का निर्माण कराया। उदाहरण के लिए – विट्टल स्वामी का मंदिर तथा हजार स्तम्भों वाला मंदिर हिन्दू स्थापत्य कला के ज्वलत उदाहरण हैं।

प्रश्न 10.
विजयनगर की किलेबंदी कैसी थी? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर की किलेबंदी –

  1. फारस-के राजदूत अब्दुल रज्जाक के अनुसार किले की सात पंक्तियाँ थीं। इनसे न केवल शहर अपितु कृषि में प्रयुक्त आसपास के क्षेत्र तथा जंगलों को भी घेरा गया था।
  2. सबसे बाहरी दीवार शहर के चारों ओर बनी पहाड़ियों को आपस में जोड़ती थी। यह विशाल राजगिरी संरचना हाथी की सूंड जैसी मुड़ावदार थी।
  3. पत्थरों को जोड़ने के लिए गारे या किसी अन्य वस्तु का प्रयोग नहीं किया गया था। पत्थर के टुकड़े फानाकार थे, जिसके कारण वे अपने स्थान पर टिके रहते थे।
  4. दीवारों के अंदर का भाग मिट्टी और मलवे के मिश्रण से बना हुआ था। वर्गाकार तथा आयतकार बाहर की ओर निकले हुए थे।
  5. पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के भीतर जूते हुए खेत, आवास और बगीचे थे।

प्रश्न 11.
कृष्णदेवराय द्वारा बनाये गये जलाशय के विषय में पेस ने क्या लिखा है? अथवा, विजयनगर राज्य के जलाशयों या हौजों का निर्माण किस प्रकार होता था?
उत्तर:
कृष्णदेवराय द्वारा बनाये गये जलाशय के विषय में पेस के विवरण –

  1. उसके अनुसार राजा ने दो पहाड़ियों के मुख विबर पर एक जलाशय का निर्माण करवाया। इन दोनों पहाड़ियों का पानी इसमें गिरता था।
  2. इस जलाशय में एक झील से भी पानी आता था जो लगभग 15 किमी. की दूरी पर थी। यह जल पाइपों की सहायता से यहाँ लाया जाता था।
  3. जलाशय में तीन विशाल स्तम्भ बने थे जिन पर सुन्दर चित्र उकेरे गये हैं।
  4. इस जलाशय से खेतों और बगीचों की सिंचाई के लिए पानी जाता था।
  5. इस जलाशय को बनाने के लिए कृष्णदेवराय ने एक पूरी पहाड़ी को तुड़वा दिया था।
  6. जलाशय में 15000 – 20000 लोगों ने कार्य किया। पेस ने इनकी तुलना चीटियों के झुंड से की है।

प्रश्न 12.
विरुपाक्ष मंदिर के सभागारों एवं मंदिर परिसर में बनी रथ गलियों की विशेषतायें बताइए।
उत्तर:
विरुपाक्ष मंदिर के सभागार की विशेषताएँ –

  1. मंदिर के सभागारों का प्रयोग भिन्न-भिन्न कार्यों के लिए होता था। कुछ सभागारों में देवताओं की मूर्तियाँ रखी जाती थी और संगीत, नृत्य जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे।
  2. अन्य सभागारों का प्रयोग देवी देवताओं के विवाह के उत्सव पर खुशी मनाने के लिए होता था।
  3. कुछ अन्य सभागारों में देवी-देवताओं को झूला झुलाया जाता था। इन अवसरों पर विशेष मूर्तियों का प्रयोग होता था। ये केन्द्रीय देवालयों में स्थापित छोटी मूर्तियों से भिन्न होती थीं।

रथ गलियों की विशेषतायें:
मंदिर परिसरों की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता रथ गलियाँ हैं। ये मंदिर के गोपुरम् से सीधी रेखा में आगे बढ़ती हैं। इन गलियों का फर्श पत्थर के टुकड़ों से बनाया गया था। इसके दोनों ओर स्तम्भ वाले मंडप थे। इन मंडपों में व्यापारी अपनी दुकानें लगाया करते थे।

प्रश्न 13.
विरुपाक्ष मंदिर पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
विरुपाक्ष मंदिर:

  • विरुपाक्ष विजयनगर साम्राज्य के संरक्षक देवता थे। इस मंदिर का निर्माण कई शताब्दियों में हुआ।
  • कुछ इतिहासकारों का कहना है कि सबसे प्राचीन मंदिर 9-10 सदियों का था। विजयनगर साम्राज्य की स्थापना के पश्चात् इसका विस्तार किया गया।
  • मुख्य मंदिर के सामने मण्डप है जिसका निर्माण यहाँ के प्रसिद्ध सम्राट कृष्णदेवराय ने करवाया था। मण्डप को उत्कीर्ण स्तम्भों से सजाया गया है।
  • पूर्व में एक विशाल गोपुरम् था। इसके निर्माण का श्रेय भी कृष्णदेवराय को जाता है।
  • मंदिर के सभागारों का प्रयोग विभिन्न कार्यों में किया जाता था। कुछ में देवताओं की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित रहती थी। संगीत, नृत्य और नाटकों के विशेष कार्यक्रमों का आयोजन भी इन्हीं सभागारों में होता था। अन्य सभागारों का प्रयोग पंपादेवी और विरुपाक्ष के विवाह अवसर पर आनंद मनाने और कुछ अन्य का प्रयोग देवी-देवताओं को झूला-झुलाने के लिए होता था।

प्रश्न 14.
विजयनगर साम्राज्य और बहमनी राज्य के मध्य संघर्ष के कौन-कौन से कारण थे?
उत्तर:
विजयनगर साम्राज्य और बहमनी राज्य के मध्य संघर्ष के कारण –

  1. कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच का क्षेत्र (दोआब) बहुत उपजाऊ था। इसको बह्मनी शासक हथियाना चाहते थे।
  2. कृष्णा और गोदावरी नदियों के डेल्टा क्षेत्र में कई बन्दरगाह थे। इन बन्दरगाहों से भारत का व्यापार श्रीलंका, इण्डोनेशिया, मलाया, जावा, बर्मा आदि देशों से होता था।
  3. युद्धों में विजयश्री का सेहरा अपने सिर पर बाँधना किसको अच्छा नहीं लगता । स्वयं को श्रेष्ठ शक्ति दर्शाने की होड़ में दोनों राज्यों के बीच संघर्ष होना स्वाभाविक था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
विजयनगर साम्राज्य के शासन प्रबंध की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर साम्राज्य का शासन प्रबंध : विजयनगर राज्य दक्षिण का एक हिन्दू राज्य था। यह राज्य मुहम्मद तुगलक का समकालीन था। उत्तम शासन प्रबंध के कारण ही विजयनगर राज्य बहमनी राज्य के कई आक्रमण झेलता हुआ लगभग 30 वर्ष तक अस्तित्व में बना रहा।
1. केन्द्रीय शासन (Central administration):
राजा राज्य का सर्वोच्च अधिकारी था। वह सभी महत्त्वपूर्ण विषयों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रखता था। राजा को महत्त्वपूर्ण विषयों पर सलाह देने के लिए परिषद् भी थी, लेकिन उसकी इच्छा पर निर्भर था कि वह परिषद् की सलाह को माने या न माने।

2. प्रान्तीय शासन (Provincial administration):
प्रशासनिक सुविधा के लिए पूरे साम्राज्य को लगभग 200 प्रांतों में बाँटा गया था। प्रांतों को प्रांतपति के अधीन रखा जाता था। प्रांतपति को केन्द्र नियुक्त करता था। आंतरिक शक्ति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रांतपति सेना रखा करते थे। प्रांतों को जिलों में तथा जिलों को गाँवों में बाँटा गया था। जिले को नाड्डू अथवा कोटम कहा जाता था। गाँवों की देख-रेख पंचायतें करती थीं। पंचायतों का अध्यक्ष ‘अपंगर’ कहलाता था। यह पद पैतृक होता था। पंचायतों के मुख्य काम थे-कर लेना, झगड़ों का निपटारा करना और प्रांतपति को अपने क्षेत्र के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी देना।

3. सेना (Army):
विजयनगर के शासकों का अपने पड़ोसी शासकों के साथ झगड़ा होता रहता था। अपनी स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए विजयनगर के शासकों ने एक सुसंगठित सैन्य-प्रबंध किया। कई युद्धों में परास्त होने के बावजूद भी विजयनगर के शासकों ने तोपखाने और घुड़सवार सेना में सुधार करने की ओर ध्यान न दिया। केन्द्र को सैनिक सहायता पाने के लिए प्रांतों पर निर्भर रहना पड़ता था। करों की वसूली निर्दयतापूर्वक होती थी लेकिन करों से प्राप्त आय लोकहित में लगा दी जाती थी। जन साधारण को सभी नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध थीं।

4. न्याय व्यवस्था (Judicial System):
न्यास सम्बन्धी सर्वोच्च शक्ति राजा के हाथों में थी। न्याय व्यवस्था बड़ी कठोर थी। अपराधियों को बेहिचक कड़े से कड़े दण्ड दिए जाते थे। कई बार अपराधियों को आर्थिक दण्ड भी दिया जाता था। उनकी सम्पत्ति भी सरकार जब्त कर लेती थी। नृशंस अपराधियों को प्राण दण्ड भी दिया जाता था। वस्तुओं में मिलावट करने वालों, चोरी करने वालों तथा देशद्रोहियों को हाथी के पाँव तले रौंदवा दिया जाता था। कड़े दण्ड विधान के कारण देश में शांति और सुव्यवस्था थी।

प्रश्न 2.
क्या यह मानना न्यायसंगत होगा कि कृष्णदेवराय विजयनगर शासकों में महानतम था? अपने उत्तर के मत में तर्क दीजिए।
उत्तर:
कृष्णदेवराय (1509-1530):
तलुव वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक कृष्णदेवराय था। उसको विजयनगर राज्य का सबसे महान् शासक कहा जाता है। वह बड़ा वीर सैनिक और चतुर योद्धा था। उसने पहले अपने राज्य को सुव्यवस्थित किया और विद्रोहियों की शक्ति को कुचल डाला। उसने मैसूर पर आक्रमण किया और उसे जीत लिया। उसने उड़ीसा पर आक्रमण किया और उस राज्य से वे सभी प्रान्त छीन लिए, जो उड़ीसा के शासकों ने कभी विजयनगर के शासकों से छीने थे। यद्यपि गोलकुण्डा और बीदर के सुल्तानों ने उड़ीसा के शासक प्रतापरुद्र का ही साथ दिया, तथापि कृष्णदेव ने उन सबको पराजित किया। इस प्रकार विजयनगर राज्य शीघ्र ही बहुत प्रसिद्ध हो गया।

अब विजयनगर के शासक ने बहमनी राज्य की ओर ध्यान दिया और उससे कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच के दोआब को फिर से छीन लिया। उसकी अंतिम सैनिक सफलता बीजापुर के शासक के विरुद्ध थी, जिसने छीने हुए दोआब को बापस लेने का प्रयत्न किया था परंतु इसमें सफलता कृष्णदेव को ही मिली। कृष्णदेव की सैनिक सफलताओं की प्रशंसा इन शब्दों में की गई है – “वह विजयनगर के सबसे प्रसिद्ध तथा शक्तिशाली शासकों में से एक था। उसने दक्षिण के मुसलमानों से बराबरी से टक्कर ली और अपने से पूर्व शासकों की पराजय का बदला लिया।”

कृष्णदेव केवल एक विजयी शासक ही नहीं था वरन् कला और शिक्षा का भी बड़ा प्रेमी था। वह स्वयं विष्णु का पुजारी था, परंतु फिर भी उसका व्यवहार अन्य धर्म वालों से अच्छा था। सबके साथ न्याय किया जाता था। निर्धनों की राजकोष से सहायता की जाती थी। विदेशियों के साथ भी उसका व्यवहार बहुत अच्छा था। वह उनका आदर करता था और उनके दुःख निवारण का भी प्रयत्न करता था। उसके शासन काल में कई सुन्दर मंदिर बनवाए गये और ब्राह्मणों को विशेष स्थान दिया गया। कृष्णदेव की इतनी महान् सफलताओं के कारण ही यह कहा गया है कि “दक्षिण के हिन्दू तथा मुसलमान शासकों में ऐसा कोई शासक नहीं जो कृष्णदेवराय का मुकाबला कर सके।”

प्रश्न 3.
तालीकोट के युद्ध (1565 ई.) पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
तालीकोट का युद्ध (1565 ई.):
यह युद्ध (विजयनगर तथा बहमनी) साम्राज्य के बीच सन् 1565 ई. में हुआ।

कारण:
दक्षिण के सुल्तानों ने विजयनगर के विरुद्ध एक संयुक्त मोर्चा बना लिया। बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुण्डा तथा बीदर की सेनाएँ इस मोर्च में शामिल हो गईं। इस मोर्च के सदस्यों ने आपस में वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित कर लिए। अब वे विजयनगर पर आक्रमण करने का बहाना तलाश करने के लिए अपने पुराने किलों तथा प्रदेशों की माँग करने लगे। विजयनगर के सामने एक विकट समस्या उत्पन्न हो गई। उसने उनकी मांगों को ठुकरा दिया। फलतः एक मोर्चे में बद्ध सभी मुस्लिम राज्यों ने मिलकर जनवरी, 1565 को विजयनगर के विरुद्ध युद्ध आरंभ कर दिया।

घटनाएँ:
23 जनवरी 1565 ई. को तालीकोट के युद्धक्षेत्र में मुस्लिम मोचे की सेनाओं ने विजयनगर पर एक भयंकर आक्रमण किया। इस युद्ध में विजयनगर को करारी हार का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री रामराय ने वीरतापूर्वक युद्ध किया, किन्तु वह पकड़ा गया और अहमदनगर के सुल्तान ने उसका वध कर दिया। विजेताओं को लूट में घोड़ों एवं गुलामों के अलावा जवाहरात, तम्बू, हथियार तथा नकदी के रूप में अपार धन मिला। इसके पश्चात् विजयी सैनिक विजयनगर शहर पहुँचे और अत्यन्त निर्दयतापूर्वक उन्होंने उसका विनाश किया। सेवेल के अनुसार, “संसार के इतिहास में कभी भी इतने वैभवशाली नगर का ऐसा सहसा सर्वनाश नहीं किया गया, जैसाकि विजयनगर का।”

परिणाम:
यद्यपि तालीकोट के युद्ध ने विजयनगर साम्राज्य को पंगु बनाकर रख दिया, किन्तु वह उसके अस्तित्व को नहीं मिटा सका। दिजय के उपरांत उपर्युक्त चारों सुल्तानों में आपसी ईर्ष्या की ज्वाला पुनः प्रज्वलित हो गई। इसके फलस्वरूप वे विजयनगर का अन्त करने के लिए एकजुट होकर कार्य न कर सके। उनकी ईर्ष्या के कारण विजयनगर अपनी खोई हुई भूमि तथा शक्ति को पुनः प्राप्त करने में समर्थ हो सका।

प्रश्न 4.
विजयनगर साम्राज्य के पतन के कारणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर साम्राज्य के पतन के कारण –
1. निरंकुश और स्वेच्छाचारी शासक:
विजयनगर के शासक निरंकुश और स्वेच्छाचारी थे। राज्य की समस्त शक्तियाँ उनके हाथों में थीं। प्रजा की शासन में विशेष रुचि न रही और संकट के समय राजाओं को पूरा सहयोग नहीं मिला।

2. सैनिक दुर्बलता:
विजयनगर का सैनिक संगठन सामन्ती ढंग का था। सामन्तों के सैनिक राज-भक्त कम होते थे। वे अपने स्वामी के हित का अधिक ध्यान रखते थे। विजयनगर के सैनिक मुसलमान सैनिकों की तरह रण-कुशल भी नहीं थे। मुसलमान शासक घुड़सवार सेना को अधिक महत्त्व देते थे जबकि विजयनगर के हिन्दू राजा हाथियों पर अधिक भरोसा रखते थे। मुसलमानों के पास अच्छा तोपखाना था, जिससे हाथी उनके सामने टिक नहीं पाते थे।

3. गृह-युद्ध:
विजयनगर के शासकों में राजगद्दी पाने के लिए कई गृह-युद्ध हुए। 1486 ई० में संगम वंश के विरुपाक्ष को उसके सेनापति नरसिंह सुलुव ने मारकर अपने वंश की नींव डाली। लेकिन 15 वर्ष के बाद ही सुलुव वंश के शासक को अन्य सरदार नरस नायक ने मार दिया और तुलुव वंश की नींव रखी। इस तरह बार-बार राजवंशों के परिवर्तन से राज्य की बहुत हानि हुई।

4. दक्षिण के सुल्तानों के आपसी झगड़ों में हस्तक्षेप:
विजयनगर के सम्राट’सदाशिव राय का मंत्री रामराजा दक्षिण के सुल्तानों के आपसी झगड़ों में हस्तक्षेप करता था, जिससे बीजापुर, गोलकुण्डा और अहमदनगर जैसी दक्षिण के राज्यों ने विजयनगर के विरुद्ध एक शक्तिशाली संघ बना लिया। दक्षिण के मुसलमान सुल्तानों ने 23 जनवरी, 1565 ई० को तालीकोट के युद्ध में विजयनगर की सेना को बुरी तरह पराजित कर दिया। इस युद्ध में विजयनगर राज्य को भारी हानि उठानी पड़ी और उसका पतन आरंभ हो गया।

5. प्रान्तीय शासकों का शक्तिशाली होना:
विजयनगर राज्य में प्रान्तों के अधिकारियों को बहुत स्वतंत्रता मिली हुई थी। वे एक प्रकार से छोटे राजा के समान थे। उनके पास अपना एक अलग कोष होता था और शक्तिशाली सेना भी होती थी। दुर्बल शासकों के शासन-काल में वे प्रायः विद्रोह कर देते थे। इससे केन्द्रीय सरकार की एकता को बहुत धक्का लगा और अन्त में विजयनगर साम्राज्य का पतन हो गया।

6. कृष्णदेवराय के बाद सत्ता का अयोग्य शासकों के हाथ में जाना:
कृष्णदेवराय एक योग्य शासक था। उसने विजयनगर राज्य को बहुत उन्नत किया। उसके उत्तराधिकारी अयोग्य निकले और अपने सामन्तों और मंत्रियों के हाथों की कठपुतली बने रहे। ऐसे दुर्बल शासकों के कारण विजयनगर राज्य का पतन अवश्यंभावी था।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
विजयनगर क्या था?
(अ) शहर
(ब) राजधानी
(स) साम्राज्य
(द) शहर, राजधानी और साम्राज्य तीनों
उत्तर:
(द) शहर, राजधानी और साम्राज्य तीनों

प्रश्न 2.
विजयनगर किस दोआब क्षेत्र में स्थित था?
(अ) गंगा-यमुना
(ब) गंगा-घाघरा
(स) कृष्ण-तुंगभद्रा
(द) गंगा-गोदावरी
उत्तर:
(स) कृष्ण-तुंगभद्रा

प्रश्न 3.
विजयनगर के लोट्स महल का नामकरण किसने किया।
(अ) एक अंग्रेज यात्री
(ब) एक फ्रांसीसी यात्री
(स) एक अरब यात्री
(द) एक चीनी यात्री
उत्तर:
(अ) एक अंग्रेज यात्री

प्रश्न 4.
हजार राम मंदिर किस राज्य में था?
(अ) बहमनी
(ब) विजयनगर
(स) मैसूर
(द) कर्नाटक
उत्तर:
(ब) विजयनगर

प्रश्न 5.
पम्पा देवी किससे विवाह करना चाहती थी?
(अ) ब्रह्मा
(ब) विष्णु
(स) विरुपाक्ष
(द) इन्द्र
उत्तर:
(स) विरुपाक्ष

प्रश्न 6.
विट्ठल देवता किस देवता के रूप में थे?
(अ) ब्रह्मा
(ब) विरुपाक्ष
(स) इन्द्र
(द) विष्णु
उत्तर:
(द) विष्णु

प्रश्न 7.
हम्पी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की विरासत होने की मान्यता कब मिली?
(अ) 1971
(ब) 1973
(स) 1975
(द) 1976
उत्तर:
(द) 1976

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में विजयनगर स्थल पर कार्य किसने नहीं किया?
(अ) कनिंघम्
(ब) जान एम. फ्रिट्ज
(स) जार्ज मिशेल
(द) एम. एम. नागराज राव
उत्तर:
(अ) कनिंघम्

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में किस वंश ने विजयनगर में शासन नहीं किया?
(अ) चोल वंश
(ब) होयसल वंश
(स) संगम वंश
(द) गुप्तवंश
उत्तर:
(द) गुप्तवंश

प्रश्न 10.
कुदिरई चेट्टी कौन थे?
(अ) स्थानीय व्यापारी
(ब) किसान
(स) स्वर्णकार
(द) कुम्हार
उत्तर:
(अ) स्थानीय व्यापारी

प्रश्न 11.
राक्षसी-तांगड़ी युद्ध (तालीकोटा युद्ध) का नेतृत्व किसने किया था?
(अ) कृष्णदेवराय
(ब) रामराय
(स) शिवाजी
(द) महादजी सिंधिया
उत्तर:
(ब) रामराय

प्रश्न 12.
1542 ई. में विजयनगर पर किस वंश का शासन था?
(अ) संगम वंश
(ब) सुलुव वंश
(स) तुलुव वंश
(द) अराविदु वंश
उत्तर:
(द) अराविदु वंश

प्रश्न 13.
विजयनगर में सेना प्रमुख को क्या कहा जाता था?
(अ) नायक
(ब) अमर नायक
(स) सेनापति
(द) सेना प्रधान
उत्तर:
(अ) नायक

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में फारस का राजदूत कौन था?
(अ) निकोलो-दे कॉन्ती
(ब) अब्दुर रज्जाक
(स) अफानसी निकितिन
(द) दुआर्ते बरबोसा
उत्तर:
(ब) अब्दुर रज्जाक

प्रश्न 15.
विजयनगर के शासक
(अ) धर्म निरपेक्ष थे
(ब) धार्मिक थे
(स) साम्प्रदायिक थे
(द) अधार्मिक थे
उत्तर:
(ब) धार्मिक थे

प्रश्न 16.
महानवमी का पर्व कहाँ मनाया जाता है?
(अ) उत्तर भारत में
(ब) प्रायद्वीपीय भारत
(स) पूर्वी भारत
(द) पश्चिम भारत
उत्तर:
(ब) प्रायद्वीपीय भारत

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *