BSEB 9 SCE CH 14

BSEB Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा

Bihar Board Class 9 Science प्राकृतिक सम्पदा InText Questions and Answers

प्रश्न शृंखला # 01 (पृष्ठ संख्या 217)

प्रश्न 1.
शुक्र और मंगल ग्रहों के वायुमण्डल से हमारा वायुमण्डल कैसे भिन्न है ?
उत्तर:
हमारी पृथ्वी का वायुमण्डल बहुत-सी गैसों जैसे-नाइट्रोजन (78%), ऑक्सीजन (20%), कार्बन डाइऑक्साइड (0.03%) तथा जलवाष्प का मिश्रण है। इन वायु घटकों के कारण ही पृथ्वी पर जीवन सम्भव है। जबकि शुक्र तथा मंगल ग्रहों के वायुमण्डल का मुख्य घटक कार्बन डाइऑक्साइड (95 से 97%) है।

प्रश्न 2.
वायुमण्डल एक कम्बल की तरह कैसे कार्य करता है ?
उत्तर:
वायु ऊष्मा की कुचालक है जिससे यह पृथ्वी के तापमान को दिन के समय अचानक बढ़ने से रोकता है तथा रात के समय ऊष्मा को बाहरी अन्तरिक्ष में जाने की दर को कम करती है। इस प्रकार वायुमण्डल एक कम्बल की तरह कार्य करके पूरे वर्ष तापमान को लगभग नियत रखता है।

प्रश्न 3.
वायु प्रवाह (पवन) के क्या कारण हैं ?
उत्तर:
वायु का प्रवाह पृथ्वी के वायुमण्डल के असमान विधियों से गर्म होने के कारण होता है। तटीय क्षेत्रों में स्थल के ऊपर की वायु तेजी से गर्म होकर ऊपर उठना शुरू करती है। जैसे ही यह ऊपर की ओर उठती है, वहाँ कम दाब का क्षेत्र बन जाता है तथा समुद्र के ऊपर की वायु कम दाब वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित हो जाती है। इस प्रकार एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में वाय का प्रवाह पवनों का निर्माण करता है। लेकिन इन हवाओं को बहुत से अन्य कारक; जैसे-पृथ्वी की घूर्णन गति तथा पवन के मार्ग में आने वाली पर्वत श्रृंखलाएँ भी प्रभावित करती हैं।

प्रश्न 4.
बादलों का निर्माण कैसे होता है ?
उत्तर:
दिन के समय जब जलीय भाग गर्म होते हैं तथा बड़ी मात्रा में जलवाष्प बनकर वायु में प्रवाहित हो जाती है। जल वाष्प की कुछ मात्रा विभिन्न जैविक क्रियाओं के कारण भी वातावरण में आती है। जब वातावरण की वायु गर्म हो जाती है तो यह अपने तथा जलवाष्प को लेकर ऊपर की ओर उठ जाती है तथा ऊपर वायुमण्डल में फैलकर ठण्डा होने के कारण छोटी-छोटी जल बूँदों के रूप में संघनित होकर बादलों का निर्माण करती है।

प्रश्न 5.
मनुष्य के तीन क्रियाकलापों का उल्लेख करें जो वायु प्रदूषण में सहायक हैं।
उत्तर:
वायु प्रदूषण में सहायक मनुष्य के प्रमुख तीन क्रिया-कलाप निम्नलिखित हैं –

  1. जीवाश्म ईंधन; जैसे-कोयला एवं पेट्रोलियम पदार्थों का दहन।
  2. जंगलों का विनाश।
  3. औद्योगीकरण की अन्धी दौड़ में नियमों को अनदेखा करना।

प्रश्न श्रृंखला # 02 (पृष्ठ संख्या 219)

प्रश्न 1.
जीवों को जल की आवश्यकता क्यों होती है ?
उत्तर:
जीवों के शरीर की सभी जैविक क्रियाएँ जलीय माध्यम में सम्पन्न होती हैं। ये सभी क्रियाएँ कोशिकाओं के भीतर जल में घुले पदार्थों के माध्यम से होती हैं तथा जीव के शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में पदार्थों का संवहन इसी घुली हुई अवस्था . में होता है। इसी कारण जीवों को जल की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2.
जिस गाँव/शहर/नगर में आप रहते हैं वहाँ पर उपलब्ध शुद्ध जल का मुख्य स्त्रोत क्या है ?
उत्तर:
कुएँ एवं नदियाँ।

प्रश्न 3.
क्या आप किसी क्रियाकलाप के बारे में जानते हैं जो इस जल के स्रोत को प्रदूषित कर रहा है ?
उत्तर:
कुओं का खुला होना तथा हमारे नगरों के नाले का जल एवं उद्योगों से निकला कचरा सीधे ही नदियों में प्रवाहित हो रहा है। ये क्रियाएँ इन जलस्रोतों को प्रदूषित कर रही हैं।

प्रश्न शृंखला # 03 (पृष्ठ संख्या 222)

प्रश्न 1.
मृदा (मिट्टी) का निर्माण किस प्रकार होता है ?
उत्तर:
मृदा निर्माण एक लम्बी प्रक्रिया है जिसमें लाखों वर्ष का समय लगा है। इसका निर्माण चट्टानों से कुछ भौतिक, रासायनिक तथा जैविक प्रक्रमों द्वारा हुआ है। इस क्रिया में सर्वप्रथम तापमान में परिवर्तन से चट्टानों में असमान प्रसरण एवं संकुचन होता है। परिणामस्वरूप उनमें दरारें आ जाती हैं। धीरे-धीरे ये दरारें चौड़ी होकर चट्टानों को तोड़ देती हैं। अब जल के बहाव या तेज हवा या आपस में रगड़ने से ये छोटे-छोटे टुकड़ों तथा अन्त में महीन कणों में बदल जाती हैं तथा आगे निक्षेपित हो जाती हैं।

लाइकेन जैसे छोटे जीव भी मृदा निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। ये चट्टानों पर उगते हैं तथा उनकी सतह पर एक अम्ल जैसा पदार्थ छोड़ते हैं जो चट्टान की सतह को चूर्ण के समान कर मृदा की एक पतली परत बना देता है। इस पर दूसरे जीव जैसे मॉस उग जाते हैं तथा धीरे-धीरे इन जीवों के मृत अवशेष इस पतली परत को और मोटा कर अन्य पौधों की वृद्धि के अनुकूल बना देते हैं। इस प्रकार मृदा का निर्माण होता है।

प्रश्न 2.
मृदा अपरदन क्या है ?
उत्तर:
मृदा की ऊपरी उपजाऊ सतह का किसी कारक जैसे वायु, जल या मनुष्य की क्रियाओं द्वारा एक स्थान से अन्यत्र स्थानान्तरित हो जाना जिससे मृदा की उर्वरता नष्ट हो जाये, मृदा अपरदन कहलाता है।

प्रश्न 3.
अपरदन को रोकने और कम करने के कौन-कौन से तरीके हैं ?
उत्तर:
अपरदन को रोकने और कम करने का प्रमुख तरीका वन विनाश को रोकना तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना है। अपरदन रोकने के लिए यह आवश्यक है कि भूमि खाली न छोड़ी जाये। वर्षा शुरू होने से पहले खाली भूमि के चारों ओर मेड़बन्दी की जाय। असमतल भूमि पर कन्टूर खेती तथा ढालू भूमि पर सीढ़ीदार खेती की जाय। ऐसे क्षेत्र जहाँ वायु द्वारा अपरदन की अधिक सम्भावना है वहाँ भूमि पर लम्बे वृक्षों की वायुरोधी कतार लगाई जाये। \

प्रश्न श्रृंखला # 04 (पृष्ठ संख्या 226)

प्रश्न 1.
जल-चक्र के क्रम में जल की कौन-कौन सी अवस्थाएँ पाई जाती हैं ?
उत्तर:
जल चक्र के क्रम में जल तीन अवस्थाओं –

  1. ठोस अवस्था; जैसे-बर्फ
  2. द्रव अवस्था; जैसे- भूमिगत जल एवं नदी, तालाब, झरने आदि तथा
  3. गैसीय अवस्था; जैसेजलवाष्प में पाया जाता है।

प्रश्न 2.
जैविक रूप से महत्वपूर्ण दो यौगिकों के नाम दीजिए जिनमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों पाये जाते हैं ?
उत्तर:
प्रोटीन तथा न्यूक्लिक अम्ल (DNA एवं RNA) जैविक रूप से महत्वपूर्ण ऐसे दो यौगिक हैं जिनमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों पाये जाते हैं।

प्रश्न 3.
मनुष्य की किन्हीं तीन गतिविधियों को पहचानें जिससे वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है।
उत्तर:
मनुष्य की निम्न गतिविधियों से वायु में कार्बन डाइ-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है –

  1. ईंधन के दहन द्वारा जिसका उपयोग खाना बनाने, उसे गर्म करने, यातायात तथा विभिन्न उपयोगों में किया जाता है।
  2. कूड़े-करकट में आग लगाने से।
  3. वन विनाश के कारण।

प्रश्न 4.
ग्रीन हाउस प्रभाव क्या है ?
उत्तर:
पृथ्वी का तापमान प्रमुख रूप से कार्बन डाइ-ऑक्साइड की मात्रा पर निर्भर करता है। यह गैस एक निश्चित सीमा तक । उपस्थित होने पर सूर्य की किरणों को पृथ्वी पर आने देती है तथा पृथ्वी से इसकी ऊष्मा को पुनः वापस जाने भी देती है। लेकिन इस गैस का मोटा आवरण पृथ्वी से लौटने वाली इस ऊष्मा को रोककर पृथ्वी के उस क्षेत्र विशेष का तापमान बढ़ा देता है। यह क्रिया उस ग्रीन हाउस के समान है जिसका शीशा सूर्य के प्रकाश को तो अन्दर आने देता है लेकिन उसकी गर्मी को वापस बाहर जाने से रोकता है। ठीक उसी प्रकार CO) का आवरण भी ऊष्मा को बाहर जाने से रोक देता है। इसे ही ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 5.
वायुमण्डल में पाये जाने वाले ऑक्सीजन के दो रूप कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
वायुमण्डल में पाये जाने वाले ऑक्सीजन के दो रूप हैं –
1.  द्विपरमाण्विक ऑक्सीजन (O2) तथा
2. त्रिपरमाण्विक ऑक्सीजन-ओजोन (O3)।
सामान्य ऑक्सीजन अणु के विपरीत ओजोन विषैला होता है।

क्रियाकलाप 14.1 (पृष्ठ संख्या 214)

प्रश्न 1.
1. जल से भरा बीकर तथा
2. मृदा या बालू से भरा बीकर में से किसमें तापमान की माप अधिक है ?
उत्तर:
3. मृदा या बालू से भरे बीकर का।

प्रश्न 2.
प्राप्त निष्कर्ष के आधार पर कौन सबसे पहले गर्म होगा-स्थल या समुद्र।
उत्तर:
स्थल।

प्रश्न 3.
क्या छाया में वायुका तापमान, बालू तथा जल के तापमान के समान होगा ? आप इसके कारण के बारे में क्या सोचते हैं ? और तापमान को छाया में क्यों मापा जाता है ?
उत्तर:
नहीं, छाया में वायु का तापमान, बालू तथा जल के तापमान से कम होगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि वायु, बालू अथवा जल की तुलना में जल्दी ठण्डी होती है। तापमान को छाया में इसलिए मापा जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सीधे सूर्य के प्रकाश की अनुपस्थिति में वायु, बालू और जल कैसे ठण्डे होते हैं।

प्रश्न 4.
क्या बन्द बोतल या शीशे के बर्तन में लिया गया हवा का तापमान और खुले में लिया गया हवा का तापमान समान है ? इसके कारण के बारे में आप क्या सोचते हैं ? क्या हम प्रायः इस तरह की घटनाओं से अवगत होते हैं ?
उत्तर:
नहीं, बन्द बोतल या शीशे के बर्तन में लिया गया हवा का तापमान, खुले में लिये गये हवा के तापमान से अधिक होता है क्योंकि शीशे का बर्तन सूर्य के प्रकाश को बर्तन के अन्दर तो आने देता है परन्तु उसकी गर्मी को बाहर जाने से रोकता है जिससे उसका तापमान बाहर की तुलना में अधिक हो जाता है।
हाँ, हम इस तरह की घटनाओं से अवगत हैं। ग्रीन हाउस में इसी प्रकार की घटना होती है।

क्रियाकलाप 14.2 (पृष्ठ संख्या 214)

प्रश्न 5.
जब अगरबत्ती को मुँह के किनारे पर ले जाया जाता है तब अवलोकन करें कि धुआँ किस ओर जाता
उत्तर:
इस स्थिति में अगरबत्ती का धुआँ मोमबत्ती की लौ की ओर नीचे की ओर जाता है क्योंकि ठण्डी हवा (अगरबत्ती का धुआँ मोमबत्ती के आस-पास की वायु की अपेक्षा ठण्डा होता है) मोमबत्ती की ऊपर उठती गर्म हवा से उत्पन्न रिक्त स्थान को भरने के लिए नीचे की ओर बहती है।

प्रश्न 6.
जब अगरबत्ती को मोमबत्ती के थोड़ा ऊपर रखा जाता है तब धुआँ किस ओर जाता है ?
उत्तर:
इस स्थिति में अगरबत्ती का धुआँ ऊपर उठने लगता है। इसका कारण यह है कि अब अगरबत्ती का धुआँ आसपास की वायु की अपेक्षा गर्म होने के कारण ऊपर की ओर उठता है।

प्रश्न 7.
दूसरे भागों में जब अगरबत्ती को रखा जाता है तो धुआँ किस ओर जाता है ?
उत्तर”:
ऊपर की ओर।

क्रियाकलाप 14.3 (पृष्ठ संख्या 215)

प्रश्न 8.
आपने कब देखा कि बोतल के अन्दर स्थित हवा कुहरे की भाँति हो जाती है ?
उत्तर:
जब बोतल पर दाब बढ़ाया जाता है तो बोतल के अन्दर का धुआँ कुहरे की भाँति हो जाता है।

प्रश्न 9.
यह कुहासा कब समाप्त होता है ?
उत्तर”:
दाब समाप्त होने पर यह कुहासा भी समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 10.
बोतल के अन्दर दाब कब अधिक होता है ?
उत्तर:
बोतल को दबाने पर।

प्रश्न 11.
कुहासा दिखाई देने की स्थिति में, बोतल के अन्दर का दाब कम है या अधिक है ?
उत्तर:
कुहासा दिखाई देने पर स्पष्ट है कि बोतल के अन्दर का दाब अधिक है।

प्रश्न 12.
इस प्रयोग के लिए बोतल के भीतर धुएँ की आवश्यकता क्यों है ?
उत्तर:
क्योंकि धुएँ के कणों द्वारा जलवाष्प का संघनन हो जाता है। वास्तव में ऐसी स्थिति में धुएँ के कण जल की बूंदों के लिए केन्द्रक (nuclei) का काम करते हैं जिसके आस-पास जल की बूंदें एकत्रित हो जाती हैं।

प्रश्न 13.
क्या होगा जब आप इस प्रयोग को बिना अगरबत्ती के धुएँ के करेंगे? अब ऐसा प्रयत्न करें और देखें कि परिकल्पना सही थी या गलत।
उत्तर:
कुहासा दिखाई नहीं देता। यदि ऐसा करने पर देखा गया कि परिकल्पना सही थी।

क्रियाकलाप 14.9 (पृष्ठ संख्या 218)

प्रश्न 14.
क्या दोनों बार संख्याएँ समान थीं?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 15.
किस मौसम में आपने विभिन्न प्रकार के पौधों और जन्तुओं की अधिकता पाई ?
उत्तर:
बरसात के मौसम में।

प्रश्न 16.
प्रत्येक प्रकार के जीवों की संख्या किस मौसम में अधिक थी?
उत्तर:
बरसात के मौसम में।

क्रियाकलाप 14.12 (पृष्ठ संख्या 225)

प्रश्न 17.
वैश्विक ऊष्माकरण के क्या परिणाम हो सकते
उत्तर:
वैश्विक ऊष्माकरण के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि हो सकती है जिससे ध्रुवीय क्षेत्रों के विशाल हिमखण्ड पिघलकर समुद्री जल के स्तर को बढ़ा सकते हैं। परिणामस्वरूप समुद्र के किनारे बसे देश एवं नगर डूब सकते हैं। इसके अतिरिक्त पृथ्वी के ताप में वृद्धि से मौसम में भयंकर बदलाव हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक आपदाएँ (तूफान, बाढ़ आदि) आयेंगी।

प्रश्न 18.
कुछ अन्य ग्रीन हाउस गैसों के नामों का भी पता लगाएँ। .
उत्तर:
प्रमुख ग्रीन हाउस गैसें हैं-कार्बन डाइ-ऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड तथा क्लोरोफ्लूरोकार्बन। .. क्रियाकलाप 14.13 (पृष्ठ संख्या 226)

प्रश्न 19.
यह पता लगायें कि कौन-कौन से अणु हैं जो ओजोन परत को हानि पहुँचाते हैं ?
उत्तर:
क्लोरोफ्लूरोकार्बन (CFC) जैसे-फ्रीऑन के विघटन से वातावरण में क्लोरीन एवं फ्लोरीन के परमाणु विसरित होते हैं जो ओजोन परत को हानि पहुँचाते हैं।

प्रश्न 20.
समाचार-पत्रों में प्रायः ओजोन परत में होने वाले छिद्र की चर्चा की जाती है ?
उत्तर:
हमारे वायुमण्डल में ओजोन का एक जीवनरक्षक स्तर पाया जाता है जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर उन्हें पृथ्वी पर आने से रोकता है। परन्तु क्लोरोफ्लूरोकार्बन (CFC) वातावरण में पहुँचकर इस ओजोन परत को पतला करते जा रहे हैं तथा कहीं-कहीं यह स्तर अत्यन्त पतला हो गया है जिसे ओजोन छिद्र कहा जाता है। समाचार-पत्रों मैं प्रायः इसी की चर्चा की जाती है।

प्रश्न 21.
यह पता लगायें कि क्या छिद्र में कोई परिवर्तन हो रहा है। वैज्ञानिक क्या सोचते हैं कि यह किस प्रकार पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित करेगा?
उत्तर:
हाँ, अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत में छिद्र बढ़ता जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ओजोन छिद्र के कारण सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणें पृथ्वी तक पहुँचने लगेंगी जिसके प्रभाव से तरह-तरह के उत्परिवर्तन के अलावा त्वचा का कैंसर एवं आँखों में मोतियाबिन्द जैसे विकार उत्पन्न होंगे।

Bihar Board Class 9 Science प्राकृतिक सम्पदा Text book Questions and Answers

प्रश्न 1.
जीवन के लिए वायुमण्डल क्यों आवश्यक है ?
उत्तर:
जीवन के लिए वायुमण्डल आवश्यक है। इसके प्रमुख कारण हैं –

  1. वायुमण्डल नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइ ऑक्साइड तथा जलवाष्प का मिश्रण है। इन वायु घटकों के कारण ही पृथ्वी पर जीवन सम्भव है।
  2. वायुमण्डल पृथ्वी का एक नियत औसत तापक्रम बनाये रखता है।
  3. यह दिन के समय अचानक तापं वृद्धि से सुरक्षा प्रदान करता है।
  4. रात के समय यह ऊष्मा को बाहरी अन्तरिक्ष में जाने से रोकता है।


प्रश्न 2.
जीवन के लिए जल क्यों अनिवार्य है ?
उत्तर:
जल जीवन के लिए अनिवार्य है, क्योंकि –
(1) जीवों की सभी जैविक क्रियाएँ जलीय माध्यम में सम्पन्न होती हैं।
(2) जीवों के शरीर में विभिन्न पदार्थों का संवहन जल द्वारा ही होता है।

प्रश्न 3.
जीवित प्राणी मृदा पर कैसे निर्भर हैं ? क्या जल में रहने वाले जीव सम्पदा के रूप में मृदा से पूरी तरह स्वतन्त्र हैं ?
उत्तर:
जीवन की विविधता को निर्धारित करने में मृदा महत्वपूर्ण घटक है। लगभग सभी जीवित प्राणी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मृदा पर निर्भर करते हैं। पौधों जो सम्पूर्ण पारितन्त्र को भोजन उपलब्ध कराते हैं, सीधे रूप से मृदा से खनिज लवणों का अवशोषण कर अपने लिए भोजन का निर्माण करते हैं तथा दूसरे जीव इन पौधों या फिर उन जीवों जो पौधों पर निर्भर है, से अपना भोजन लेते हैं।

जल में रहने वाले जीव, सम्पदा के रूप में मृदा से पूर्णरूप से स्वतन्त्र नहीं हैं। यद्यपि जलीय जीव सीधे रूप से मृदा से सम्बन्धित नहीं होते। जलीय उत्पाद पौधे जल से आवश्यक खनिजों को अवशोषित करके अपने भोजन बनाते हैं लेकिन जल में ये आवश्यक खनिज अप्रत्यक्ष रूप से मृदा द्वारा ही पहुँचते हैं जो विभिन्न जल स्रोतों में पानी के साथ घुलकर पहुँची है।

प्रश्न 4.
आपने टेलीविजन पर और समाचार-पत्र में मौसम सम्बन्धी रिपोर्ट को देखा होगा। क्या आप सोचते हैं कि हम मौसम के पूर्वानुमान में सक्षम हैं ?
उत्तर:
मौसम विभाग मौसम से सम्बन्धित कुछ तत्वों; जैसे तापमान, आर्द्रता, वायु की गति एवं वर्षा आदि के आँकड़ों को एकत्र करके मौसम का पूर्वानुमान लगाता है। इन आँकड़ों को कुछ यंत्रों की सहायता से एकत्र किया जाता है; जैसे-तापमान ज्ञात करने के लिए थर्मामीटर, वायु की गति मापने के लिए एनिमोमीटर तथा वर्षा मापने के लिए गेज आदि।

प्रश्न 5.
हम जानते हैं कि बहुत सी मानवीय गतिविधियाँ वायु, जल एवं मृदा के प्रदूषण स्तर को बढ़ा रही हैं। क्या आप सोचते हैं कि इन गतिविधियों को कुछ विशेष क्षेत्रों में सीमित कर देने से प्रदूषण के स्तर को घटाने में सहायता मिलेगी ?
उत्तर:
हाँ, इन गतिविधियों को कुछ क्षेत्र विशेष में सीमित करने से प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सकता है। जैसे यदि किसी नगर उद्योगों को एक निश्चित क्षेत्र में प्रतिस्थापित कर दें तो उनसे निकले अपद्रव्य सीधे जलाशयों (जलकायों) या कृषि भूमि में नहीं मिलेंगे तथा प्रदूषण का स्तर काफी हद तक कम हो जायेगा। इसके अतिरिक्त इन औद्योगिक क्षेत्रों में घना वृक्षारोपण भी प्रदूषण के स्तर को कम करेगा।

प्रश्न 6.
जंगल वायु, मृदा तथा जलीय स्त्रोत की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करते हैं ?
उत्तर:
जंगल या वन वायु, मृदा तथा जलीय स्रोत की गुणवत्ता को अनेक प्रकार से प्रभावित करते हैं जिनमें से कुछ। प्रमुख इस प्रकार हैं –
1. ये प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के माध्यम से वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण कर ऑक्सीजन निकालते हैं जिससे वातावरण शुद्ध होता है तथा इन दोनों गैसों का स्तर ठीक बना रहता है।

2. वन मृदा अपरदन को रोकते हैं। इनकी जड़ें मृदा कणों को मजबूती से जकड़े रहती हैं। वृक्षों से गिरी पुरानी पत्तियाँ मृदा सतह को ढककर वर्षा के वेग को कम कर देती हैं, जिससे जल एवं वायु द्वारा भूमि कटाव नहीं हो पाता।

3. वन जल सम्पदा के पुनः चक्रण में भी सहायता करते हैं। ये वाष्पोत्सर्जन द्वारा वायुमण्डल में जलवाष्प छोड़ते हैं जो संघनित होकर बादल बनाने में सहायक है। इन बादलों के वर्षा के रूप में बरसने पर जलीय स्रोतों की गुणवत्ता में सुधार होता है।

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