BSEB 12 GEO CH 03

BSEB Bihar Board Class 12 Geography Solutions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

Bihar Board Class 12 Geography जनसंख्या संघटन Textbook Questions and Answers

(क) नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से किसने संयुक्त अरब अमीरात के लिंग अनुपात को निम्न किया है?
(क) पुरुष कार्यशील जनसंख्या का चयनित प्रवास
(ख) पुरुषों की उच्च जन्म दर
(ग) स्त्रियों की निम्न जन्म दर
(घ) स्त्रियों का उच्च उत्प्रवास
उत्तर:
(ग) स्त्रियों की निम्न जन्म दर

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या जनसंख्या के कार्यशील आयु वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है?
(क) 15 से 65 वर्ष
(ख) 15 से 66 वर्ष
(ग) 15 से 64 वर्ष
(घ) 15 से 59 वर्ष
उत्तर:
(घ) 15 से 59 वर्ष

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से किस देश का लिंग अनुपात विश्व में सर्वाधिक है?
(क) लैटविया
(ख) जापान
(ग) संयुक्त अरब अमीरात
(घ) फ्रांस
उत्तर:
(क) लैटविया

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

प्रश्न 1.
जनसंख्या संघटन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जनसंख्या संघटन, जनसंख्या की उन विशेषताओं को प्रदर्शित करता है, जिनकी माप की जा सके तथा जिनकी मदद से दो भिन्न प्रकार के व्यक्तियों के समूहों में अंतर स्पष्ट किया जा सके। आयु, लिंग, साक्षरता, आवास का स्थान आदि ऐसे महत्त्वपूर्ण घटक हैं, जो जनसंख्या के संघटन को प्रदर्शित करते हैं। ये विकास की भावी योजनाओं को निश्चित करने में भी मदद करते हैं।

प्रश्न 2.
आयु संरचना का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
आयु संरचना विभिन्न वायु वर्गों में लोगों की संख्या को प्रदर्शित करती है। जनसंख्या संघटन का यह एक महत्त्वपूर्ण सूचक है क्योंकि 15 से 59 आयु वर्ग के बीच जनसंख्या का बड़ा आकार एक विशाल कार्यशील जनसंख्या को संकेतित करता है। 60 वर्ष से अधिक आयु वाली जनसंख्या का एक बड़ा अनुपात उस वृद्ध जनसंख्या को प्रदर्शित करता है, जिसे स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के लिए अधिक खर्च की आवश्यकता है। युवा जनसंख्या के उच्च अनुपात का अर्थ है कि प्रदेश में जन्म दर ऊंची है व जनसंख्या युवा है।

प्रश्न 3.
लिंग-अनुपात कैसे मापा जाता है?
उत्तर:
भारत में लिंग-अनुपात इस सूत्र का प्रयोग करके ज्ञात किया जाता है:

अथवा प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या।
कुछ देशों में लिंग-अनुपात निम्न सूत्र द्वारा परिकलित किया जाता है:

अथवा प्रति हजार स्त्रियों पर पुरुषों की संख्या।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों से अधिक में न दें:

प्रश्न 1.
जनसंख्या के ग्रामीण-नगरीय संघटन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या का ग्रामीण और नगरीय संघटन विभाजन निवास के आधार पर होता है। यह विभाजन आवश्यक है क्योंकि ग्रामीण और नगरीय जीवन आजीविका और सामाजिक दशाओं में एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में आयु-लिंग संघटन, व्यावसायिक संरचना, जनासंख्या का घनत्व तथा विकास के स्तर अलग-अलग होते हैं।

यद्यपि ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या में अंतर करने के मापदंड एक देश से दूसरे देश से अलग है। लेकिन समान्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र वे होते हैं, जिनमें लोग प्राथमिक क्रियाओं में संलग्न होते हैं और नगरीय क्षेत्र वे होते हैं जिनमें अधिकांश कार्यशील जनसंख्या गैर-प्राथमिक क्रियाओं में संलग्न होती है।

चित्र में कुछ चुने हुए देशों की ग्रामीण-नगरीय लिंग संघटना को दर्शाता है। कनाडा और फिनलैंड जैसे पश्चिमी यूरोपीय देशों में ग्रामीण और नगरीय लिंग अनुपात में अंतर अफ्रीकी और एशियाई देशों क्रमशः जिबाब्वे तथा नेपाल के ग्रामीण और नगरीय लिंग अनुपात के विपरीत हैं। पश्चिमी देशों में ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों की संख्या अधिक है, जबकि नगरीय क्षेत्रों में स्त्रियों की संख्या पुरुषों की अपेक्षा अधिक है। नेपाल, पाकिस्तान और भारत जैसे देशों में स्थिति इससे विपरीत है।

नगरीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की अधिक संभावनाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाओं के आगमन के परिणामस्वरूप यूरोप, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के नगरीय क्षेत्रों में महिलाओं की अधिकता है। कृषि भी इन विकसित देशों में अत्यधिक मशीनीकृत है और यह लगभग पुरुष प्रधान व्यवसाय है। इसके विपरीत एशिया के नगरीय क्षेत्रों में पुरुष प्रधान प्रवास के कारण लिंग अनुपात भी पुरुषों के अनुकूल है। उल्लेखनीय है कि भारत जैसे देशों में ग्रामीण क्षेत्रों के कृषि कार्यों में महिलाओं की सहभागिता काफी ऊंची है। नगरों में आवास की कमी, रहन-सहन की उच्च लागत, रोजगार के अवसरों की कमी और सुरक्षा की कमी महिलओं के गांव से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास को रोकते हैं।

प्रश्न 2.
विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असंतुलन के लिए उत्तरदायी कारकों तथा व्यावसायिक संरचना की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या की आयु-लिंग संरचना का अभिप्राय विभिन्न आयु वर्गों में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या से है। जनसंख्या पिरामिड का प्रयोग जनसंख्या की आयु-लिंग संरचना को दर्शाने के लिए किया जाता है।

अधिकांश विकासशील देशों में आयु-लिंग पिरामिड का आधार चौड़ा तथा शीर्ष पतला होता है। इसका अभिप्रायः यह है कि वहां पर बच्चों की संख्या अधिक तथा वृद्धों की संख्या कम होती है, लेकिन अधिकांश विकसित देशों में पिरामिड के आधार तथा मध्य की मोटाई लगभग एक जैसी होती है। इसका अभिप्राय यह है कि जन्म दर कम होने के कारण बच्चों एवं मध्य वर्ग के लोगों की संख्या लगभग बराबर है। चित्र 3.1 में दिए मैक्सिकों तथा स्वीडन के आय लिंग पिरामिडों को देखकर भावी प्रवृत्तियों का अनुमान लगाया जा सकता है।

मैक्सिको में दोनों लिंगों के बच्चों की संख्या अधिक है। इससे इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि मैक्सिको में निकट भविष्य में जनसंख्या तेजी से बढ़ेगी। इसके विपरीत स्वीडन के पिरामिड का आधार तथा मध्य भाग लगभग एक जैसी मोटाई वाले हैं। अर्थात् बच्चों एवं प्रौढ़ो की संख्या लगभग एक जैसी है। अत: वहां पर निकट भविष्य में विस्फोटक का डर नहीं है। विकास से जुड़े कार्यों का चतुर्थक क्रियाओं के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

इन चार खंडों में कार्यशील जनसंख्या (अर्थात् 15-59 आयु वर्ग में स्त्री और पुरुष) कृषि, वानिकी, मत्स्यन, विनिर्माण, निर्माण व्यावसायिक परिवहन, सेवाओं, संचार तथा अन्य अवर्गीकृत सेवाओं जैसे व्यवसायों में भाग लेते हैं का अनुपात किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास के स्तरों का एक अच्छा सूचक है। इसका कारण यह है कि केवल उद्योगों और अवसंरचना से युक्त एक विकसित अर्थव्यवस्था ही द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक सेक्टरों से अधिक कर्मियों को समायोजित कर सकती है। यदि अर्थव्यवस्था अभी भी आदिम अवस्था में है, तब प्राथमिक क्रियाओं में संलग्न लोगों का अनुपात अधिक होगा क्योंकि इसमें मात्र प्राकृतिक संसाधनों का विदोहन होता है।

चित्र: विस्तारित होती जनसंख्या

चित्र: स्थिर जनसंख्या

परियोजना/क्रियाकलाप

प्रश्न 1.
अपने जिला/राज्य/देश के आयु लिंग पिरमिड की रचना कीजिए।
उत्तर:
सारणी 3.1 भारत में आयु एवं लिंग के अनुसार कुल जनसंख्या का (प्रतिशत में) वितरण –

आयु तथा लिंग पिरामिड लोगों की आयु एवं लिंग के अनुसार जनसंख्या की संरचना दिखाता है। यह जनसंख्या की वृद्धि दर तथा कार्यशील एवं आश्रित जनसंख्या का भी संकेत देता है। भारत की 2001 की जनगणना के अनुसार 14 वर्ष तक की उम्र के बच्चे कुल जनसंख्या में 40 प्रतिशत हैं। 15-59 की आयु समूह के कुल जनसंख्या में व्यक्तियों की संख्या 55 प्रतिशत है तथा 60 वर्ष या इससे अधिक उम्र के व्यक्तियों की संख्या 5 प्रतिशत है।

हाल के दशकों में आयु संरचना के धीरे-धीरे कुछ परिवर्तन हो रहे हैं। विभिन्न जनसांख्यिकी प्रवृतियों में से एक प्रवृत्ति यह है कि युवा जनसंख्या अर्थात् 0-14 आयु समूह का अनुपात घट रहा है तथा कार्यशील आयु समूह अर्थात् 15-59 आयु समूह के व्यक्तियों का प्रतिशत बढ़ रहा है। 15-59 आयु समूह के व्यक्तियों का प्रतिशत 1991 में 52 प्रतिशत से बढ़कर 2001 में 55 प्रतिशत हो गया। वृद्ध व्यक्तियों अर्थात् 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों का अनुपात 2001 में 5 प्रतिशत था। सबसे बड़ा अकेला आयु समूह उन बच्चों का है जिनकी आयु 14 वर्ष से कम है। यह बात चित्र से स्पष्ट हो रही है। आयु तथा लिंग संरचना दिखाने वाले चित्र को जनसंख्या पिरामिड कहते हैं। इस पिरामिड का आधार चौड़ा है तथा शीर्ष पतला है।

Bihar Board Class 12 Geography जनसंख्या संघटन Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आयु-पिरामिड क्या प्रदर्शित करता है?
उत्तर:
आयु पिरामिड आयु संरचना का अधिक विस्तृत चित्र प्रदान करता है।

प्रश्न 2.
गांवों में निवास करने वाली तथा कृषि करने वाली जनसंख्या को किस वर्ग में रखा जाता है?
उत्तर:
गांवों में निवास करने वाली तथा कृषि करने वाली जनसंख्या को ग्रामीण वर्ग में रखा जाता है।

प्रश्न 3.
जनसंख्या संघटन, जनसंख्या की कौन-सी विशेषताओं को प्रदर्शित करता है?
उत्तर:
जनसंख्या संघटन, जनसंख्या की उन विशेषताओं को प्रदर्शित करता है, जिनकी माप की जा सके तथा जिनकी मदद से दो भिन्न प्रकार के व्यक्तियों के समूहों में अंतर स्पष्ट किया जा सके।

प्रश्न 4.
जनसंख्या के महत्त्वपूर्ण घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
आयु, लिंग, साक्षरता, आवास का स्थान आदि जनसंख्या को प्रदर्शित करने वाले महत्त्वपूर्ण घटक हैं।

प्रश्न 5.
किसी देश की जनसंख्या को कितने आयु वर्गों में बांटा गया है?
उत्तर:
सामान्यतः किसी देश की जनसंख्या को तीन बड़े आयु वर्गों में रखा गया है – आयु बाल बर्ग (0-14 वर्ष), प्रौढ़ वर्ग (15-59 वर्ष) और वृद्ध वर्ग (60 से ऊपर)।

प्रश्न 6.
PPP45 $ का क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
PPP45 $ का तात्पर्य परचेजिंग-पावर पैरिटी इन यू. एस. डालर अर्थात् अमेरिकी डालर में क्रय शक्ति समता है।

प्रश्न 7.
प्रति व्यक्ति सकल उत्पादन की तुलना में मानव विकास सूचकांक का ऊंचा क्रम क्या प्रदर्शित करता है?
उत्तर:
विकास सूचकांक का ऊंचा क्रम यह प्रदर्शित करता है कि इन देशों ने अपनी आय को बड़ी कुशलता से मानव विकास में परिवर्तित कर लिया है।

प्रश्न 8.
विकासशील जनसंख्या एवं ह्रासमान जनसंख्या में अंतर बताइये।
उत्तर:
(क) विकासशील जनसंख्या:
पिरामिड का चौड़ा आधार तथा तेजी से पतला होता शीर्ष बढ़ती जन्म-दर तथा उच्च मृत्यु-दर को दर्शाता है।

(ख) ह्रासमान-जनसंख्या:
पिरामिड का संकीर्ण पतला आधार और पतला शीर्ष घटती हुई जन्म-दर तथा निम्न मृत्यु-दर को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 9.
लिंग संघटन किसे कहते हैं?
उत्तर:
जनसंख्या में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या के बीच अनुपात को लिंग अनुपात कहते हैं।

प्रश्न 10.
विश्व की जनसंख्या का औसत लिंग अनुपात क्या है?
उत्तर:
प्रति हजार पुरुषों पर 990 स्त्रियां हैं।

प्रश्न 11.
निम्न लिंग अनुपात वाले क्षेत्र कौन से हैं?
उत्तर:
चीन, भारत, सऊदी अरब, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान।

प्रश्न 12.
साक्षरता पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
साक्षरता सामाजिक और आर्थिक विकास को सूचक है। इससे रहन-सहन के स्तर, महिलाओं की सामाजिक स्थिति, शैक्षणिक सुविधाओं की उपलब्धता तथा सरकार की नीतियों का पता चलता है।

प्रश्न 13.
विश्व की नगरीय जनसंख्या में प्रतिवर्ष वृद्धि दर क्या है?
उत्तर:
विश्व की नगरीय जनसंख्या में प्रतिवर्ष 6 करोड़ की वृद्धि हो रही है।

प्रश्न 14.
साक्षरता का क्या अर्थ है।
उत्तर:
साक्षरता जनसंख्या की वह गुणात्मक विशेषता है जिससे जनसंख्या की गुणवत्ता को निर्धारित किया जा सके।

प्रश्न 15.
‘विकास’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
विकास लोगों के कार्य करने के तरीके तथा क्षमताओं में उन्नयन की प्रक्रिया है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
महानगर किसे कहते है? संक्षेप में बताइये।
उत्तर:
दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर को महानगर कहते हैं। भारत में महानगरों . की संख्या निरंतर बढ़ रही है। 1901 तक कोलकाता तथा मुम्बई ही दो महानगर थे। परंतु 1951 में उनकी संख्या 5 हो गई। 1991 में 23 महानगर थे। इनके नाम ग्रेटर मुम्बई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, बंगलौर, अहमदाबद, पुणे, कानपुर, नागपुर, लखनऊ, सूरत, जयपुर, कोचीन, कोयम्बटूर, बड़ोदरा, इंदौर, पटना, मदुरई, भोपाल, विशाखापट्टनम, वाराणसी तथा लुधियाना हैं। इन महानगरों में देश की कुल नगरीय जनसंख्या का 65 प्रतिशत भाग रहता है।

प्रश्न 2.
ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या में अंतर:

प्रश्न 3.
भारत की जनसंख्या की निम्नलिखित विशेषताओं पर संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
(क) ग्रामीण नगरीय अनुपात।
(ख) लिंग अनुपात।
(ग) आयु संरचना।
उत्तर:
(क) ग्रामीण नगरीय अनुपात:
भारत की कुल जनसंख्या 5 लाख 70 लाख हजार गांवों तथा 4615 शहरों में बसती है। भारत को सामान्यतः गांवों का देश समझा जाता है। भारत की कुल जनसंख्या का आधा भाग केवल पांच राज्यों में रहता है। ये पांच राज्य हैं – महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिमी बंगाल तथा आंध्र प्रदेश। शेष नगरीय जनसंख्या बाकी के 15 राज्यों में एवं सात संघ शासित क्षेत्रों में रहती है।

(ख) लिंग अनुपात:
लिंग अनुपात का अर्थ है किसी क्षेत्र की जनसंख्या में प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या। भारत की 1991 की जनगणना के अनुसार प्रति एक हजार पुरुषों पर 927 स्त्रियाँ है। भारत में लिंग अनुपात प्रतिकूल है।

(ग) आयु संरचना:
आयु तथा लिंग पिरामिड लोगों की आयु एवं लिंग के अनुसार जनसंख्या की संरचना दिखता है। यह जनसख्या की वृद्धि-दर तथा कार्यशील एवं आश्रित जनसंख्या का भी संकेत देता है। आयु संरचना को पिरामिड द्वारा दिखाया जाता है।

प्रश्न 4.
आयु पिरामिड से आपका क्या तात्पर्य है? संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर:
आयु पिरामिड आयु संरचना का अधिक विस्तृत चित्रण प्रस्तुत करता है। प्रत्येक आयु वर्ग की जनसंख्या को क्षैतिज दंड द्वारा प्रदर्शित करते हैं। दंड की लंबाई उस वर्ग में स्त्रियों तथा पुरुषों को दिखाने वाले दंडों को केन्द्रीय अक्ष के बाईं ओर तथा महिलाओं के दंडों को दाईं ओर अर्ध्वाधर रूप से वर व्यवस्थित किया जाता है। अक्ष को एक वर्ष या बहुवर्ष के अंतराल पर विभक्त करते हैं। पिरामिड की .तीन अलग-अलग आकृतियों का संबंध जनसंख्या की तीन भिन्न-भिन्न स्थितियां से होता है।

  1. पिरामिड के ऊपर की ओर का पतला स्वरूप लंबे समय तक परिवर्तन रहित अपरिवर्तित आधार जन्म तथा मृत्यु दरों को दर्शाता है।
  2. पिरामिड का चौड़ा आधार तथा पतला शीर्ष बढ़ते जन्म-दर तथा उच्च मृत्यु-दर को प्रदर्शित करता है।
  3. पिरामिड का पतला आधार और पतला शीर्ष घटते हुए जन्म-दर तथा निम्न मृत्यु-दर को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 5.
बाल, प्रौढ़ तथा वृद्ध आयु विभिन्नताओं के आधार पर कितने प्रकार की आयु संरचताएं पहचानी गई हैं?
उत्तर:
ऐसी विभिन्नताओं के आधार पर तीन प्रकार की आयु संरचानाएं पहचानी गई हैं –

  1. पश्चिमी यूरोपीय प्रकार: इसमें बाल आयु वर्ग, वृद्ध आयु वर्ग में जनसंख्या क्रमश: 30 प्रतिशत और 15 प्रतिशत होती है।
  2. संयुक्त राज्य प्रकार: इस प्रकार की जनसंख्या में बाल तथा वृद्धों का अनुपात क्रमश: 35 से 45 प्रतिशत तथा 10 प्रतिशत होता है।
  3. तृतीय विश्व प्रकार इस प्रकार की जनसंख्या में बाल आयु वर्ग या बच्चे 45-55 प्रतिशत तथा वृद्ध 4-8 प्रतिशत होते हैं।

प्रश्न 6.
जनसंख्या के पुनर्वितरण का एक महत्त्वपूर्ण लक्षण क्या है?
उत्तर:
बड़े-बड़े नगरों की संख्या में वृद्धि हुई है। विश्व की लगभग आधी जनसंख्या नगरों में रहती है। 1960 तथा 2000 के बीच नगरों की जनसंख्या में 80 करोड़ की वृद्धि हुई है जो तीन गुना से अधिक है। इसी अवधि में विश्व की जनसंख्या में मात्र दुगुनी वृद्धि आंकी गई है। अनुमान है कि सन् 2030 ई. में नगरों में निवास करने वाले लोगों की संख्या 8 अरब हो जायेगी, जिसमें से 80 प्रतिशत जनसंख्या विकासशील देशों में ही निवास करेगी। इस बढ़ती हुई नगरीय जनसंख्या से अनेक अभूतपूर्व समस्याएँ उत्पन्न होंगी और सारे विश्व में इन समस्याओं को समाध न करने में कुछ ही देश समर्थ होंगे।

प्रश्न 7.
लिंग अनुपात का किसी देश के प्रौद्योगिक एवं आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है, संक्षेप में बताइये।
उत्तर:
देश के आंतरिक प्रवास में लिंग-चयन की तीव्रता उस देश के प्रौद्योगिक एवं आर्थिक विकास से सीधे जुड़ी होती है। विकासशील देशों में, विशेषतः एशिया तथा अफ्रीका में, ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय केन्द्रों की ओर पुरुषों के प्रवास की ही प्रधानता पाई जाती है। भारतीय नगरों में प्रत्याशित रूप से पुरुषों के प्रवास उच्च अनुपात दृष्टिगत होता है। कोलकाता में, प्रति हजार पुरुषों पर 570 स्त्रियों की संख्या का होना इसका ज्वलंत उदाहरण है। खनन तथा भारी उद्योगों के केन्द्रों तथा सैन्य में प्रवास को छोड़कर यहां स्त्रियां भी ग्रामीण क्षेत्रों की ओर प्रवास करती हैं।

प्रश्न 8.
ग्रामीण-नगरीय संघटन पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या को ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या में विभाजित करना, लोगों के आवास की विशेषता होती है। यह विभाजन इसलिए आवश्यक होता है क्योंकि दोनों ही जीवन यापन के तरीके तथा सामाजिक पर्यावरण की दृष्टि से एक दूसरे से अलग होते हैं। व्यावसायिक संरचना, जनसंख्या का घनत्व, एवं सामाजिक व आर्थिक विकास के स्तरों में, दोनों वर्गों में विशेष अंतर होता है। गांवों में निवास करने वाली तथा कृषि करने वाले जनसंख्या को ग्रामीण वर्ग में रखते हैं। इसके विपरीत, नगरीय जनसंख्या गैर-कृषि कार्य करने वाली होती है। प्राकृतिक वृद्धि के साथ ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों में प्रवास करने वाली जनसंख्या के कारण नगरीय जनसंख्या में वृद्धि होती रहती है।

प्रश्न 9.
विकास के स्तर पर अतिरिक्त लोगों की तीन आकांक्षायें क्या हैं?
उत्तर:
तीन आकांक्षायें हैं:
प्रथम लंबा एवं स्वस्थ जीवन व्यतीत करना, द्वितीय साक्षर या ज्ञानवान बनमा और तृतीय, उत्तम जीवन स्तर के लिए आवश्यक संसाधनों की जरूरत या प्राप्ति। ये तीनों तीन अलग-अलग सूचकों द्वारा प्रदर्शित किए जाते हैं।

  1. जीवनकाल: इसकी माप जन्म पर जीवन प्रत्याशा से की जाती है।
  2. शैक्षिक उपलब्धता: इसे प्रौढ़ साक्षरता (दो-तिहाई भार) और प्राथमिक माध्यमिक तथा तृतीयक स्तर की शिक्षा का सम्मिलित सकला नामांकन अनुपात (एक-तिहाई भार) दोनों को जोड़कर मापा जाता है; तथा
  3. जीवनस्तर: इसे प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के रूप में आय (जी. डी पी.) द्वारा मापा जाता है।

प्रश्न 10.
जनसंख्या और विकास का एक-दूसरे से क्या संबंध है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य विकास प्रक्रिया का केन्द्र तथा सभी विकास रणनीतियों का एक अभिन्न अंग है। जनसंख्या के बड़े आकार को अनेक लोग विकास में ऋणात्मक कारक के रूप में देखते हैं। जनसंख्या पर बहुत कुछ निर्भर करता है। यदि जनसंख्या तेजी से लगातार बढ़ती रहे और उसके अनुरूप खाद्य उत्पादन में वृद्धि न हो, तो मानव जाति पर इसका क्या असर होगा? ऐसी स्थिति आने पर ‘माल्थस’ ने मानव जाति के लिए एक डरावने भविष्य की कल्पना की थी। उसी समय से जनसंख्या और खाद्य आपूर्ति में महत्त्वपूर्ण संबंध बन गया है। खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए भूमि के अतिपयोग या दुरुपयोग के पर्यावरण पर भयंकर परिणाम पड़ते हैं और इस प्रकार खाद्य सुरक्षा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती है।

सामाजिक संरचना, प्रकृति प्रौद्योगिक उन्नति की अवस्था, वितरण प्रणाली और सार्वजनिक सरकारी नतियां आदि उस प्रणाली के अंग हैं जो मनुष्यों तथा संसाधनों की बीच संतुलन को प्रभावित करते हैं। जनसंख्या किसी क्षेत्र के भौतिक संसाधनों पर ही निर्भर नहीं होती, अपितु यह सामाजिक, आर्थिक, प्रौद्योगिक और राजनीतिक दशाओं पर भी निर्भर करती है। इस प्रकार जनसंख्या और जीवन निर्वाह के साधनों के बीच संतुलन संबंधी निध रिण में ये सभी कारक उस प्रणाली के महत्त्वपूर्ण घटक का निर्माण करते हैं।

प्रश्न 11.
प्राकृतिक लाभ बनाम सामाजिक हानि क्या हैं?
उत्तर:
स्त्रियों को पुरुषों की तुलना में जैविक लाभ प्राप्त हैं, क्योंकि वे पुरुषों की तुलना में अधिक स्थिति-स्थापक होती है, फिर भी, यह लाभ उन सामाजिक हानियों व भेदभाव द्वारा जिन्हें वे अनुभव करती है, समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 12.
परिशिष्ट II से निम्नलिखित मालूम कीजिए –
(क) कनाडा, स्वीडन, जर्मनी, रूस, ब्राजील, श्रीलंका, भारत, नेपाल, जांबिया और इथोपिया को क्या-क्या क्रम या स्थान दिए गए हैं?
उत्तर:

(ख) यूरोप के कितने देश प्रत्येक वर्ग में हैं?
उत्तर:
यूरोप के अधिकांश देश उच्च मानव विकास वर्ग में है। मध्यम मानव विकास वर्ग में क्रोशिया, लिथुआनिया, बुल्गारिया, रोमानिया आदि देश हैं। निम्न मानव विकास वर्ग में यूरोप का कोई देश नहीं है।

(ग) एशिया के कौन से देश उच्च मानव विकास की श्रेणी में हैं?
उत्तर:
कोरिया का लोकतांत्रिक जनवादी गणराज्य, हांगकांग, चीन, जापान, सिंगापुर, इजरायल, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात एशिया के उच्च मानव विकास की श्रेणी में आते हैं।

(घ) अफ्रीका के कितने देश निम्न मानव विकास की श्रेणी में आते हैं?
उत्तर:
अंगोला, वेनिन, बुरकिनाफासों, बुरूंडी, मध्य अफ्रीकी गणतंत्र, चाड़, कांगों, लोकतांत्रिक गणराज्य, कोटे डी आइवर, एरिट्रिया, इथोपिया, गिनी, मलावी, रवाडा, माली मोजांबिक, सिएरा लियोन में सभी देश निम्न श्रेणी में आते हैं।

(ङ) ऊपर की जानकारी से क्या प्रतिरूप उभरता है?
उत्तर:
उपरोक्त जानकारी से हमें मालूम हुआ है कि यूरोप के अधिकांश देश उच्च मानव विकास श्रेणी में हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों का संक्षेप में उत्तर दीजिए:

  1. जनसंख्या संघटन का क्या अर्थ है?
  2. किसी देश की जनसंख्या के जनांकिकीय निर्धारक के रूप में आयु-संरचना का क्या महत्त्व है?
  3. ऊपर की ओर नियमित रूप से संकीर्ण होने वाला आयु-लिंग पिरामिड जनसंख्या संबंधी किन-किन विशेषताओं को प्रकट करता है?
  4. लिंग अनुपात किसे कहते हैं?
  5. विकासशील देशों में नगरीकरण की दर तेजी से क्यों बढ़ रही है?
  6. साक्षरता दर से आपका क्या तात्पर्य है? संसार के विभिन्न देशों के बीच साक्षरता दर में बड़ी असमानता क्यों है?
  7. मानव विकास सूचकांक किसे कहते हैं?
  8. 1990 से किन प्रदेशों ने मानव विकास में उत्क्रमण का अनुभव किया?

उत्तर:
1. जनसंख्या संघटन, जनसंख्या की उन विशेषताओं को प्रदर्शित करता है, जिनकी माप की जा सके तथा जिनकी मदद से दो भिन्न प्रकार के व्यक्तियों के समूहों में अंतर स्पष्ट किया जा सके। आयु, लिंग, साक्षरता, आवास का स्थान आदि ऐसे महत्त्वपूर्ण घटक हैं, जो जनसंख्या के संघटन को प्रदर्शित करते हैं। ये विकास की भावी योजनाओं को निश्चित करने में भी सहायता करते हैं।

2. विभिन्न आयु वर्गों के लोगों की संख्या को जनसंख्या की आयु-संरचना कहते हैं। विभिन्न आयु वर्गों के आकार एक जनसंख्या से दूसरी जनसंख्या में तथा समयानुसार बदलते रहते हैं। यदि जनसंख्या में बच्चों की संख्या अधिक है तो पराश्रितता अनुपात अधिक होगा। इसी प्रकार 15 से 59 वर्ष की आयु वर्ग में अधिक जनसंख्या होने पर वहां बड़ी कार्यशील जनसंख्या होने की संभावना होती है: इसी प्रकार 60 से ऊपर के आयु संरचना वर्ग में बढ़ती हुई जनसंख्या से वृद्धो की देख-भाल पर अधिक व्यय होने का संकेत मिलता है।

यदि कहीं पर बड़ी संख्या में युवक हैं और जन्म-दर उच्च है, तो जनसंख्या युवा होगी। जैसे एशिया, अफ्रीका तथा द. अमेरिका के अनेक विकासशील देशों में ऐसे देखा जाता है। इसके विपरीत यदि जन्म-दर कम है और लोगों की दीर्घ आयु है तो जनसंख्या को काल प्रभाव कहा जाता है, ऐसा अनेक यूरोपीय देशों, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा तथा जापान में घटित हो रहा है। कभी-कभी अप्रत्याशित घटनाएं जैसे युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसी निश्चित आयु वर्ग के लोगों की मृत्यु होने पर आयु-संरचना का स्वरूप बिगड़ जाता है। सामान्यतः किसी देश की जनसंख्या को तीन बड़े आयु वर्गों में रखा जाता है।

  • बच्चे -बाल वर्ग (0-14 वर्ष)
  • प्रौढ वर्ग (15-59 वर्ष) और
  • वृद्ध वर्ग (60 से ऊपर)।

3. पिरामिड का एक ऊपर की ओर पतला होता स्वरूप, लंबे समय तक परिवर्तन रहित अपरिवर्तित आधार, जन्म तथा मृत्यु को दर्शाता है।

चित्र: आयु-लिंग पिरामिड

4. किसी दी गई जनसंख्या में लिंग अनुपात, पुरुष तथा स्त्रियों के बीच संतुलन का एक सूचक होता है। यह प्रति हजार (1000) पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या के रूप में मापा जाता है। लिंग अनुपात का दूसरे जनांकिकी लक्षणों जैसे जनसंख्या की वृद्धि, विवाह-दर, व्यावसायिक संरचना आदि पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। जैसे कि चित्र 3.7 में दिखाया गया है।

5. औद्योगिक क्रांति की नई तकनीकों एवं सेवा:
आधारित अर्थव्यवस्थाओं के सार्वभौमिकरण में वैश्विक परिवर्तन के परिणामस्वरूप विश्व जनसंख्या की नगरीकरण-दर में तीव्र वृद्धि हुई है। विकासशील देशों में बड़े-बड़े नगरों की जनसंख्या में वृद्धि हुई है। विश्व की लगभग आधी जनसंख्या नगरों में निवास करती है। 1960 तथा 2000 के बीच नगर निवासियों की संख्या में 80 करोड़ से 290 करोड़ अर्थात् तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। एक जनसंख्या-प्रक्षेपण के अनुसार सन् 2030 ई. में नगरों में निवास करने वाले लोगों की जनसंख्या 8 अरब हो जायेगी। जिसमें से 80 प्रतिशत जनसंख्या विकासशील देशों में ही निवास करेगी।

6. साक्षरता जनसंख्या की वह गुणत्मक विशेषता है जो किसी क्षेत्र के समाजिक आर्थिक विकास का एक विश्वसनीय तथा यथार्थ रोचक पहलू है। यह जनसंख्या के उस सामाजिक पक्ष को प्रतिबिंबित करता है, जिससे जनसंख्या की गुणवत्ता को निर्धारित किया जा सकता है। विश्व स्तर पर साक्षरता दर में अत्यधिक विभिन्नता पाई जाती है। साक्षरता दर कुल जनसंख्या की उस जनसंख्या के प्रतिशत को दर्शाती है जिसमें 15 वर्ष तथा उससे अधिक आयु के लोग, अपने दैनिक जीवन में एक साधारण छोटे और सरल कथन को समझकर, पढ़ तथा लिख सकते हैं। इस दर को प्रभावित करने वाले कारकों में आर्थिक विकास का स्तर, नगरीकरण, जीवन-स्तर, महिलाओं का सामाजिक स्तर, विभिन्न शैक्षिक, सुविधाओं की उपलब्धता तथा सरकारी नीतियां प्रमुख हैं। आर्थिक विकास का स्तर स्वयं साक्षरता का कारण और परिणाम दोनों ही हैं।

7. मानव विकास सूचकांक तीन बालों:

(I) जन्म के समय की जीवन प्रत्याशा, शैक्षणिक उपलब्धता और अमेरिकी डॉलर के (PPP45 $) प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी) पर आधारित एक संयुक्त सूचकांक है। (PPP45 $) का तात्तर्य है – परचेजिंग पावर पैरिटी इन यू. एस. डॉलर अर्थात् अमेरिकी डॉलर में क्रय-शक्ति समता है।

सूचकांक निर्मित करते समय तीनों सूचकों या तत्त्वों के लिए सर्वप्रथम न्यूनतम तथा अधिकतम मान निश्चित कर लेते हैं, जैसे:

(क) जन्म के समय की जीवन प्रत्याशा जीविता: 25 वर्ष और 85 वर्ष
(ख) सामान्य साक्षरता दर: 0 प्रतिशत और 100 प्रतिशत
(ग) प्रति व्यक्ति वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (PPP$) 100 डॉलर और 40000 डॉलर पहले प्रत्येक सूचक का मान दिए गये सूत्र के आधार पर निकाला जाता है। मानव विकास सूचकांक इन तीनों सूचकों का औसत है। अत: इन तीनों सूचकों के मानों को जोड़कर योगफल को उससे भाग देने पर मानव विकास सूचकांक प्राप्त होता है।

चित्र: मानव विकास सूचकांक (1998)

8. 20 देशों ने एड्स के प्रमांक के फलस्वरूप वर्ष 1990 से ही मानव विकास में उत्क्रमण का अनुभव किया जिसमें सर्वाधिक ह्रास (उत्क्रमण) उप-सहाराई अफ्रीका, पूर्वी, यूरोपीय, तथा जी. आई.एम. (पूर्व सोवियत संघ) के देशों में अंकित किया गया। मानव विकास के शिखर पर कनाडा, नार्वे, सं. रा. अमेरिका प्रतिस्थापित थे, जबकि सियरा लियोन, नाइजीरिया तथा बुरकिनों फारसो न्यूनतम स्तर पर विद्यमान थे।

प्रश्न 2.
साक्षरता तथा जनसंख्या के संबंध पर विस्तृत चर्चा कीजिए।
उत्तर:
साक्षरता जनसंख्या की वह गुणात्मक विशेषता है जो किसी क्षेत्र के सामाजिक आर्थिक विकास का एक रोचक संबंध है। यह जनसंख्या के उस सामाजिक पक्ष को प्रतिबिंबित करता है। जिससे जनसंख्या की गुणवत्ता को निर्धारित किया जा सकता है। विश्व स्तर पर साक्षारता-दर में अत्यधिक विभिन्नता पाई जाती है। साक्षारता-दर कुल जनसंख्या में उस जनसंख्या के प्रतिशत को प्रदर्शित करता है, जिसमें 15 वर्ष तथा उससे अधिक आयु के लोग, अपने दैनिक जीवन में एक साधारण छोटे और सरल कथन को समझकर, पढ़ तथा लिख सकते हैं।

इस दर को प्रभावित करने वाले कारकों में आर्थिक विकास का स्तर, नगरीकरण, जीवन स्तर, महिलाओं का सामाजिक स्तर, विभिन्न शैक्षिक सुविधाओं की उपलब्धता तथा सरकारी नीतियां प्रमुख हैं। आर्थिक विकास का स्तर स्वयं साक्षरता का कारण और परिणाम दोनों ही हैं। उन्नत तथा नगरीय अर्थव्यवस्थाएं, उच्चतर साक्षरता-दर तथा उच्चतर शैक्षणिक स्तर को प्रतिबिंबित करती है। साक्षरता एवं शिक्षा का निम्न स्तर, ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को इंगित करता है। विश्व के सिर्फ विकासशील देशों में जहां ऐसी विभिन्नताएं भी अधिक दृष्टिगोचर हो रही हैं, साक्षरता को कोई स्वरूप देना आवश्यक है।

चित्र: भारत में साक्षरता

  1. विभिन्न विकासशील देशों में प्रौढ़ साक्षरता दर इस प्रकार है – 1998 के अनुसार
  2. सभी विकासशील देशों में – 72.3
  3. अल्प विकासशील देशों में – 50.7
  4. अरब गणराज्य – 59.7
  5. पूर्वी एशिया – 83.4
  6. पूर्वी एशिया (चीन को छोड़कर) – 96.3
  7. लैटिन अमेरिका तथा केरिबियन – 87.7
  8. दक्षिण एशिया – 54.3
  9. दक्षिण एशिया (भारत को छोड़कर) – 50.5
  10. दक्षिण पूर्वी एशिया पेसिफिक – 88.2
  11. उप सहाराई अफ्रीका – 58.5
  12. पूर्वी यूरोप तथा सी.आई.एस. – 98.6

प्रश्न 3.
जनसंख्या और विकास के बीच अंतर-संबंधों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य विकास प्रक्रिया का केन्द्र तथा सभी विकास रणनीतियों का एक अभिन्न तत्त्व होता है। विभिन्न समय तथा स्थान संदर्भ में विकास की परिभाषा तथा सबसे उपयुक्त रणनीति प्रस्तुत करते समय अनेकों अलग-अलग तथा बहुधा परस्पर विरोधी विचार सामने आते हैं। जनसंख्या के बड़े आकार को अनेक लोग विकास के ऋणात्मक कारक के रूप में देखते हैं। फिर भी जनसंख्या के गुण पर बहुत कुछ निर्भर करता है।

यदि जनसंख्या तेजी से लगातार बढ़ती रहे और उसके अनुरूप खाद्य उत्पादन में वृद्धि न हो, तो ऐसी स्थिति आ जाने पर माल्थस ने मानव जाति के लिए एक डरावने भविष्य की कल्पना की थी। इस भविष्यवाणी के समय से ही जनसंख्या और खाद्य आपूर्ति के बीच का संबंध अध्ययन का विषय बन गया है। दी गई असमान जनसंख्या वृद्धि पर और खाद्य उत्पादन में तकनीकी क्रांति होने पर भी यह बताना कठिन है कि खाद्य उत्पादन के बढ़ने की दर क्या होगी या उसका उपयोग किस प्रकार बदलेगा। इसके साथ ही यह तथ्य भी विचारणीय है कि खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए भूमि के अतिपयोग या दुरुपयोग के पर्यावरण पर भयंकर परिणाम पड़ते हैं और इस प्रकार खाद्य सुरक्षा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती है।

क्षेत्र के आर्थिक विकास और संसाधनों के उपभोग के महत्त्वपूर्ण कारक एक जैसे होते हैं। यह पुनः उस प्रदेश अथवा देश की जनांकिकी संक्रमण की अवस्था पर भी निर्भर करता है। जिससे होकर वह गुजर रही है। जनांकिकी संक्रमण की चर्चा हम पिछले अध्याय में कर चुके हैं। स्पष्टतः जनसंख्या तथा खाद्य आपूर्ति अथवा दूसरे संसाधनों की आपूर्ति के बीच भागी संसाधनों की कोई भी भविष्यवाणी उपभोग की दर के उत्पादन और जनसंख्या परिवर्तन जैसे कारकों पर निर्भर करती है। जनसंख्या वृद्धि की विषम वृद्धि दर को देखते हुए खाद्य आपूर्ति में वृद्धि की दर अथवा उपभोग में कैसे परिवर्तन होगा? आदि जैसी बातों की भविष्यवाणी करने में कठिनाई आती है। फिर भी जनसंख्या और खाद्य-आपूर्ति के बीच भावी-संतुलन के संदर्भ में अनेक विद्वानों के ध्यान आकृष्ट हैं तथा निराशाजनक भविष्यवाणियां माल्थसवादी या नव माल्थसवादी विचारों के रूप में वर्णित की गई है।

इस संदर्भ में खोज-बीन का प्रमुख प्रश्न यह है कि: क्या जनसंख्या वृद्धि में ये प्रादेशिक विभिन्नताएं क्षेत्र की भरण-पोषण क्षमता की प्रादेशिक विषमताओं के अनुरूप है? यदि नहीं, तो वृद्धि दरों में ये विभिन्नताएं जनसंख्या और संसाधनों के बीच संतुलन उत्पन्न करने में किस सीमा तक उत्तरदायी हैं? इस प्रकार जनसंख्या और संसाधनों के बीच संतुलन के किसी मूल्यांकन में जनसंख्या वृद्धि महत्त्वपूर्ण तत्त्व बन जाता है। लेकिन हम इस तथ्य की अपेक्षा नहीं कर सकते हैं कि केवल उच्च जन वृद्धि अथवा संसाधनों की कमी संतुलन के लिए उत्तरदायी है। सामाजिक संरचना, प्रकृति प्रौद्योगिक उन्नति की अवस्था, विवरण प्रणाली की विशेषताएं और सार्वजनिक सरकारी नीतियां, आदि उस प्रणाली के अंग हैं जो मनुष्य तथा संसाधनों के बीच संतुलन को प्रभावित करते हैं।

इस प्रकार एक भू-भाग द्वारा पोषित जनसंख्या उस क्षेत्र के भौतिक संसाधनों पर ही निर्भर नहीं करती बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक प्रौद्योगिक और राजनीतिक दशाओं पर भी निर्भर करती है। इस प्रकार जनसंख्या और जीवन निर्वाह के साधनों के बीच संतुलन संबंधी किसी निर्धारण में, ये सभी कारक उस प्रणाली के महत्त्वपूर्ण घटक का निर्माण करते हैं। इस जटिल अंतर्सम्बंध को विभिन्न विद्वानों एवं चिंतकों द्वारा मॉडल या सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

प्रश्न 4.
संसार में ग्रामीण-नगरीय जनसंख्या के प्रतिरूप पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या को ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या के वर्गों में विभाजित करने में लोकों के आवास करने की विशेष भूमिका होती है। अधिकांश देशों में यह विभाजन विभिन्न ‘आकार-बिंदुओं के संदर्भ में किए गये हैं। यह विभाजन इसलिए भी आवश्यक होता है। क्योंकि दोनों में ही जीवनयापन के तौर तरीके सामाजिक पर्यावरण की दृष्टि से एक-दूसरे से अलग होते हैं। व्यावसायिक संरचना, जनसंख्या का घनत्व, एवं सामाजिक व आर्थिक विकास आदि के दोनों वर्गों के स्तरों में, विशेष अंतर होता है।

गांवों में निवास करने वाली तथा कृषि अथवा प्राथमिक क्रियाकलापों में संलग्न जनसंख्या को ग्रामीण वर्ग में रखते हैं। इसके विपरीत, नगरीय जनसंख्या गैर-कृषि कार्यों में संलग्न होती है। रोजगार के अवसर की खोज, बेहतर सामाजिक सुविधाएं तथा उच्च जीवन स्तर की तलाश में लोग नगरीय क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं। प्राकृतिक वृद्धि के साथ ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों में प्रवास करने वाली जनसंख्या के कारण नगरीय जनसंख्या में वृद्धि होती रहती है।

किसी बस्ती को नगर घोषित करने के लिए प्रयुक्त आंकड़ों में एक देश से दूसरे देश में भिन्नता पाई जाती है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 2500 से कम जनसंख्या का एक क्षेत्र ग्रामीण कहलाता है, जबकि 2500 से अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र को नगर की संज्ञा दी जाती है। भारतीय जनगणना के अनुसार वे सभी क्षेत्र जो नगरीय नहीं है, ग्रामीण की परिभाषा में आते हैं। खेती पर आधारित कृषि प्रधान देशों में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत उच्च होता है जबकि औद्योगिक विकसित प्रदेशों में नगरीय जनसंख्या का अनुपात अधिक होता है। तालिका 3.1 में (%) सन् 2000 का महाद्वीपों के आधार पर ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत वितरण दिया गया है। केवल एशिया तथा अफ्रीका आदि देशों में ही 60 प्रतिशत से अधिक भाग पर ग्रामीण जनसंख्या है जबकि विश्व जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार 62 प्रतिशत लोगों का निवास स्थान नगरों में है।

तालिका: महाद्वीपों की ग्रामीण व नगरीय जनसंख्या (सन् 2000 में)

करोड़ की वृद्धि हो रही है उसका 60 प्रतिशत नगरों में जन्में लोगों की प्राकृतिक वृद्धि है और शेष वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों में प्रवास करने वाली जनसंख्या के कारण है। जनसंख्या के पुनर्वितरण का एक महत्त्वपूर्ण लक्षण, विशेषकर विकासशील देशों में बड़े-बड़े नगरों की संख्या में वृद्धि है। विश्व की लगभग आधी जनसंख्या नगरों में निवास करती है। 1960 से 2000 के बीच नगर निवासियों की संख्या में 80 करोड़ से 290 करोड़ अर्थात् तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में विश्व की कुल जनसंख्या में तात्र दुगुनी (3 अरब से 6 अरब) वृद्धि अंकित की गई है। एक जनसंख्या-प्रक्षेपण के अनुसार सन् 2030 ई. में नगरों में निवास करने वाले लोगों की संख्या 8 अरब हो जाएगी, जिसमें से 80 प्रतिशत विकासशील देशों में ही निवास करेगी।

प्रश्न 5.
लिंग-संरचना द्वारा प्रकट की जाने वाली विश्व जनसंख्या की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
किसी दी गई जनसंख्या में लिंग अनुपात, पुरुष तथा स्त्रियों के बीच संतुलन का एक सूचक होता है। यह प्रति हजार (1000) पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या के रूप में मापा जाता है। लिंग अनुपात का दूसरे जनांकिकी लक्षणों जैसे जनसंख्या की वृद्धि, विवाह-दर, व्यावसायिक संरचना आदि पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

चित्र: भारत में लिंग अनुपात के वितरण का प्रारूप

अज्ञात कारणों से लगभग सभी समाजों में पुरुष जन्म, स्त्री जन्म से अधिक (आगे) होता है। लेकिन जन्म से पहले और बाद की दशाएं, कभी-कभी इस स्थिति को अत्यधिक परिवर्तित कर देती है। विकासशील देशों में शिशु-मृत्यु-दर बालिकाओं की तुलना में बालकों से अधिक होती है। इस कारण बालकों के जन्म के समय उनकी अधिकता, एक वर्ष में समाप्त हो जाती है। विकसित देशों में भी जीवन की सभी अवस्थाओं में पुरुष मृत्यु-दर स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है। अतः जन्म के समय पुरुष वर्ग की बढ़ी हुई संख्या, उत्तरोत्तर समाप्त हो जाती है और यहां तक कि 30 वर्ष की आयु के पश्चात् स्त्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखने को मिलती है। अनेक विकासशील देशों में स्त्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखने को मिलती है। अनेक विकासशील देशों में स्त्रियों को समाज में गौण स्थान प्रदान किये जाने के कारण बाल्यावस्था में वे बहुधा उच्च मरणता से ग्रसित हो जाती है। इससे यौन-लिंग-अनुपात को बढ़ावा मिलता है। इन देशों में समग्र-लिंगानुपात महिलाओं के प्रतिकूल ही होता है।

दोनों लिंगों में असमान जन्म या मृत्यु-दर होने के अतिरिक्त, लिंगानुपात स्त्री अथवा पुरुष के प्रवास से भी प्रभावित होता है, तथा इसका लिंगानुपात पर जटिल प्रभाव पड़ता है। प्राचीन समय में अंतर्राष्ट्रीय तथा लंबी दूसरी के प्रवास में सदैव पुरुषों की प्रधानता रही है। इस कारण उद्भव क्षेत्र तथा गन्तव्य क्षेत्र दोनों ही स्थानों के लिंगानुपातों में जटिल असंतुलन उत्पन्न हो जाता था। वर्तमान समय में पुरुष प्रधान क्षेत्र मात्र अलास्का तथा आस्ट्रेलिया की नार्दन टेरिटरी हैं। इन दोनों ही में प्रति हजार स्त्रियों पर 1350 पुरुष पाये जाते हैं।

यह देश के आंतरिक प्रवास में लिंग-चयन की तीव्रता उस देश के प्रौद्योगिक व आर्थिक विकास से सीधे जुड़ी प्रतीत होती हैं विकासशील देशों में, विशेषतः एशिया तथा अफ्रीका में, ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय केन्द्रों की ओर पुरुषों के प्रवास की ही प्रधानता पाई जाती है। भारतीय नगरों में अप्रत्याशित रूप से प्रवास की प्रधानता पाई जाती है। भारतीय नगरों में अप्रत्याशित रूप से पुरुषों का प्रवास उच्च अनुपात दृष्टिगत होता है। कोलकाता में, प्रति हजार पुरुषों पर 570 स्त्रियों की संख्या का होना इसका ज्वलंत उदाहरण है। आर्थिक रूप से उन्नत राष्ट्रों में इसके प्रतिकूल दशा पायी जाती है। खनन तथा भारी उद्योगों के केन्द्रों तथा सैन्य नगरों में प्रवास को छोड़कर यहां स्त्रियां भी ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की ओर प्रवास करती हैं।

विभिन्न देशों में ग्रामीण तथा नगरीय लिंग-संघटन में अंतर के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि इसमें प्रवास की धाराओं से समान परिणाम उत्पन्न नहीं होते। यह तथ्य बड़ा रोचक है कि संयुक्त राज्य अमेरिका तथा पश्चिमी यूरोप के देशों में ग्रामीण और नगरीय लिंग-अनुपातों में अंतर एशिया के देशों जैसे भारत से बिल्कुल भिन्न है। पश्चिमी देशों में ग्रामीण क्षेत्रों के भागों में पुरुषों की संख्या स्त्रियों से अधिक होती है, जबकि नगरों में स्त्रियों की संख्या पुरुषों से अधिक होती है।

इसके विपरीत भारत जैसे देशों में बिल्कुल प्रतिकूल स्थिति पाई जाती है। यू. एस. ए. तथा यूरोप के नगरीय क्षेत्रों में स्त्रियों की अधिकता का मुख्य कारण यहां महिलाओं के रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध होना है। जिससे इनकी संख्या में स्त्रियों का ग्रामीण क्षेत्रों से प्रवास हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती का कार्य बहुत से पुरुषों का व्यवसाय ही बन कर रह गया है। इसके विपरीत एशियाई नगरों, विशेषतः भारत में पुरुषों का प्रवास स्त्रियों से अधिक होने के कारण, लिंगानुपात में पुरुषों का ही अधिक्य दर्शाता है। यहां के नगरों में आवास की समस्या, रहन-सहन का ऊंचा खर्च रोजगार के अवसरों में कमी तथा सुरक्षा की कमी के कारण स्त्रियों का गांवों से नगरों की ओर प्रवास बहुत कम हुआ है।

प्रश्न 6.
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा पारिभाषित मानव विकास की संकल्पना समझाइए और मानव विकास सूचकांक विकसित करने के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र संघ विकास कार्यक्रम (यू.एन.डी.पी.) द्वारा प्रस्तावित मानव विकास प्रतिवेदन (रिपोर्ट)-1990 के अनुसार-विकास केवल लोगों की आय तथा पूंजी का ही विस्तार नहीं अपितु यह मानव की कार्यप्रणाली कार्य करने के तरीके तथा क्षमताओं में उन्नति की प्रक्रिया है। विकास की इसी विचारधारा को मानव विकास का नाम दिया गया है। इस संकल्पना को इस प्रकार परिभाषित करते हैं कि मानव विकास मनुष्य की आकांक्षायें एवं उन्हें उपलब्ध जीवनयापन की सुविधाओं को स्तर को विस्तृत करने की प्रक्रिया है यह रिपोर्ट बताती है कि विकास के स्तर के अतिरिक्त लोगों की तीन आकांक्षायें हैं: प्रथम लंबा एवं स्वस्थ जीवन व्यतीत करना, द्वितीय साक्षर या ज्ञानवान होना और तृतीय उत्तम जीवन स्तर के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता या प्राप्ति। ये तीनों तीन अलग-अलग सूचकों द्वारा प्रदर्शित किए जाते हैं:

  1. जीवनकाल: इसकी माप जन्म-दर की जीवन प्रत्याशा शब्दावली से की जाती है,
  2. शैक्षिक उपलब्धता इसे प्रौढ़ साक्षरता (दो-तिहाई भाग) और प्राथमिक, माध्यमिक तथा तृतीयक स्तर की शिक्षा का सम्मिलित सकल नामांकन अनुपात (एक-तिहाई भाग) दोनों को जोड़कर मापा जाता है, तथा
  3. जीवन स्तर प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के रूप से आय (जी.डी.पी.) द्वारा मापा जाता है।
  4. राष्ट्र संघ द्वारा सन् 1990 से प्रतिवर्ष यह मानव विकास सूचकांक तैयार किया जा रहा है। जिसे आधारभूत मानव विकास की उपलब्धि के औसत के एक सरल संयुक्त सूचकांक के रूप में गणना करके विभिन्न देशों के पदनुक्रम निर्धारण किए जाते हैं।

मनाव विकास सूचकांक का परिकलन मानव विकास सूचकांक तीन चरणों-जन्म के समय की जीवन प्रत्याशा, शैक्षणिक उपलब्धता और अमेरिकी डॉलर में (PPP45$) प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) पर आधारित एक संयुक्त सूचकांक है। (PPP45$) का तात्पर्य परचेजिंग पाव पैरिटी इन यू.एस.डॉलर अर्थात् अमेरिकी डॉलर में क्रय-शक्ति समता है।

मानव विकास सूकांक निर्मित करते समय तीनों सूचकों र तत्त्वों के लिए सर्वप्रथम न्यूनतम तथा अधिकतम मान निश्चित कर लेते हैं, जैसे –

  1. जन्म के समय जीवन प्रत्याशा जीविता: 25 वर्ष से 85 वर्ष.
  2. सामान्य साक्षरता दर: 0 प्रतिशत से 100 प्रतिशत,
  3. प्रति व्यक्ति वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (PPP$) 100 डॉलर और 40000 डॉलर के प्रत्येक सूचक का मान दिए गए सूत्र के आधार पर निकाला जाता है।
  4. मानव विकास सूचकांक इन तीनों सूचकों का औसत है। अतः इन तीनों सूचकों के मानों को जोड़कर योगफल के उसे भाग देने पर मानव विकास सूचकांक प्राप्त होता है। चित्र 3.8 देखें।

इन्ही मानों को सूत्र में भरकर प्रत्येक देश के लिए अलग-अलग सूचकों की गणना की जाती है। तीनों चरणों के मानों को सामान्यीकृत कर लेने पर मा. वि. सूचकांक बनता है तथा इसका विस्तार मान शून्य (0) से एक (01) के बीच रहता है (0-1) या किसी देश या प्रदेश के लिए HI का मान वह दूरी है जो इसे अधिकतम संभावित मान एक (1) को प्राप्त कर लेने के लिए चलना पड़ेगा। इससे दो देशों के बीच विकास-स्तर की तुलना करने में सहायता मिलती है। इस प्रकार यह सूचकांक प्रत्येक देश के समक्ष इस मानक (सूचकांक 1) को प्राप्त करने के उपयों को ढूंढने की चुनौती भी प्रस्तुत करता रहता है।

वर्ष 2000 में जिन देशों के लिए मानव विकास सूचकांक की गणना की गई है उनमें 46 देश उच्च मानव विकास श्रेणी में (सूचकांक 0.8 से से अधिक),93 देश मध्यम श्रेणी (0.5 से 0.79) में तथा 25 देश निम्न श्रेणी (0.5 से कम) में आते हैं। 20 देशों ने एड्स के प्रमांक के फलस्वरूप वर्ष 1990 से ही मानव विकास में उत्क्रमण का अनुभव किया जिसमें सर्वाधिक हास (उत्क्रमण) उप-सहराई अफ्रीका पूर्वी यूरोपीय तथा जी. आई. एम. (पूर्व सोवियत संघ) के देशों में अंकित की गई है।

1. मानव विकास के शिखर पर कनाडा, नार्वे, सं. रा. अमेरिका प्रतिस्थापित थे जबकि सियरा लियान, नाइजर तथा बुरकिना फारसो न्यूनतम स्तर पर विद्यमान थे।

2. उत्तर-प्रादेशिक असमानता भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि कुछ को लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अभी लंबी दूरी (विकास यात्रा) तय करनी है जबकि कुछ देशों को जैसे उप-सहारीय अफ्रीका को, लैटिन अमेरिका तथा कैरिबियन आदि देशों की तुलना में लगभग दुगुनी दूरी तय करनी है। दक्षिण एशिया को चीन के बिना पूर्वी एशिया से लगभग तीन गुनी अधिक यात्रा तय करनी है।

3. अंतर्देशीय असमानता सार्थक हो सकती है। दक्षिण पूर्वी एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र के देश में यह सूचकांक डेमोक्रेटिक गणतंत्र वाले देशों में 0.489 और स्लिमपुर वाले देशों में 0.881 तक फैला हुआ है।

4. आर्थिक सम्पन्नता और विकास के बीच सह-संबंध न तो स्वचालित है और न ही स्पष्ट। कुल 174 देशों में से 97 देशों में प्रति व्यक्ति सकल उत्पादन की तुलना में मानव विकास सूचकांक का क्रम ऊंचा है, जो यह प्रदर्शित करता है कि इन देशों ने अपनी आय को बड़ी कुशलता से मानव विकास में परिवर्तित कर लिया है। 69 देशों में मानव विकास सूचकांक प्रति व्यक्ति सकल उत्पादन से कम है। ये देश अपनी आर्थिक सम्पन्नता से, अपने देशवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाये जाने में कुछ कम ही सफल हुए हैं।

चित्र: भारत में नगरीय जनसंख्या का वितरण

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आयु पिरामिड के लिए सामान्यतः प्रयोग किए जाते हैं –
(A) 5 या 10 वर्ष के अंतराल वाले आयु वर्ग
(B) 10 या 20 वर्ष के अंतराल वाले आयु वर्ग
(C) 2 या 10 वर्ष के अंतराल वाले आयु वर्ग
(D) 15 या 20 वर्ष के अंतराल वाले आयु वर्ग
उत्तर:
(A) 5 या 10 वर्ष के अंतराल वाले आयु वर्ग

प्रश्न 2.
पिरामिड का चौड़ा आधार तथा तेजी से पतला होता शीर्ष
(A) बढ़ती जन्म-दर तथा उच्च मुत्यु-दर
(B) घटती जन्म-दर तथा निम्न मृत्यु दर
(C) (A) और (B) दोनों
(D) (A) और दोनों नहीं दर्शाते हैं ।
उत्तर:
(A) बढ़ती जन्म-दर तथा उच्च मुत्यु-दर

प्रश्न 3.
प्रौढ़ आयु वर्ग
(A) 15 से 59 वर्ष
(B) 10 से 10 वर्ष
(C) 20 से 60 वर्ष
(D) 5 से 35 वर्ष
उत्तर:
(A) 15 से 59 वर्ष

प्रश्न 4.
जनसंख्या का लिंग संघटन
(A) पुरुष तथा स्त्रियों के बीच
(B) बच्चों तथा प्रौढ़ों के बीच
(C) (A) और (B) दोनों में लिंग अनुपात होता है
(D) (A) और (B) दोनों नहीं
उत्तर:
(A) पुरुष तथा स्त्रियों के बीच

प्रश्न 5.
अधिकांश देशों में ग्रामीण नगरीय विभाजन किस आधार पर होता है?
(A) पिरामिड
(B) आकार बिंदू
(C) सारिणी
(D) (A) (B) (C)
उत्तर:
(B) आकार बिंदू

प्रश्न 6.
विश्व की नगरीय जनसंख्या में प्रतिवर्ष वृद्धि हो रही है –
(A) 8 करोड़
(B) 5 करोड़
(C) 6 करोड़
(D) 4 करोड़
उत्तर:
(C) 6 करोड़

प्रश्न 7.
किसी देश में साक्षर जनसंख्या का अनुपात किसका सूचक होता है?
(A) सुरक्षा का
(B) सांस्कृतिक विकास का
(C) सामाजिक-आर्थिक विकास का
(D) राजनीति विकास का
उत्तर:
(C) सामाजिक-आर्थिक विकास का

प्रश्न 8.
भारत में साक्षरता दर कितने वर्ष से अधिक आयु वाले जनसंख्या के उस प्रतिशत को सूचित करत है, जो पढ़ लिख सकता है।
(A) 7 वर्ष से अधिक
(B) 10 वर्ष से अधिक
(C) 5 वर्ष से अधिक
(D) 21 वर्ष से अधिक
उत्तर:
(A) 7 वर्ष से अधिक

प्रश्न 9.
एशिया के नगरीय क्षेत्रों में कि कारण लिंग अनुपात भी पुरुषों के अनुकूल है?
(A) पुरुष प्रधान प्रवास
(B) स्त्री प्रधान प्रवास
(C) महिलाओं की अधिकता के कारया
(D) रोजगार के अवसरों की अधिकता के कारण
उत्तर:
(A) पुरुष प्रधान प्रवास

प्रश्न 10.
ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में कौन से स्तर अलग-अलग होते हैं?
(A) आयु-लिंग संघटन
(B) व्यावसायिक संरचना
(C) जनसंख्या का घनत्व
(D) सभी
उत्तर:
(D) सभी

प्रश्न 11.
जापान के पिरामिड का संकीर्ण आधार और शंडाकार शीर्ष क्या दर्शाता है?
(A) उच्च जन्म दर
(B) उच्च मृत्यु दर
(C) निम्न जन्म दर और मृत्यु दर
(D) इसमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) निम्न जन्म दर और मृत्यु दर

प्रश्न 12.
आस्ट्रेलिया का आयु-लिंग पिरामिड किस आकार का है जो शीर्ष की ओर शुंडाकर होता जाता है?
(A) वर्गाकार
(B) त्रिभुजाकर
(C) घंटी के आकार
(D) मंदिर की चोटी के आकार
उत्तर:
(C) घंटी के आकार

प्रश्न 13.
निम्न लिंग अनुपात किसमें है?
(A) चीन
(B) भारत
(C) सऊदी अरब
(D) सभी में
उत्तर:
(D) सभी में

प्रश्न 14.
नाइजीरिया का आयु लिंग पिरामिड की आकृति वाला है?
(A) त्रिभुजाकार
(B) वर्गाकार
(C) वृत्ताकार
(D) अष्टाकार
उत्तर:
(A) त्रिभुजाकार

प्रश्न 15.
लोगों को निम्न में से किस आधार पर अलग किया जा सकता है?
(A) आयु
(B) लिंग
(C) निवास स्थान
(D) सभी
उत्तर:
(A) आयु

भौगोलिक कुशलताएँ

निम्नलिखित को परिशिष्ट (पाठ्यपुस्तक) से ज्ञात कीजिए –
(Find out the following shown Appendix – II)

1. कनाडा, स्वीडन, जर्मनी, रूस, ब्राजील, श्रीलंका, भारत, नेपाल, जाम्बिया तथा इथोपिया को क्या-क्या क्रम या स्थान दिए गए हैं? (What ranking has been given to Canada, Swedan, Grermany, Russia, Brazil, Sri Lanka, India, Nepal, Zambia and Ethiopia)
उत्तर:

2. यूरोप के कितने देश प्रत्येक वर्ग में हैं? (How many countries of Europe belong to each category)
उत्तर:
श्रेणी – यूरोप के देशों की संख्या

  • उच्च मानव विकास – 27
  • मध्यम मानव विकास – 10
  • निम्न मानव विकास – कोई नहीं

3. एशिया के कौन-से देश उच्च मानव विकास की श्रेणी में हैं? (Which countries of Asia belong to high human development category)
उत्तर:
क्रमशः

  • जापान
  • इजरायल
  • सिंगापुर
  • हांगकांग (चीन)
  • कोरिया गणतंत्र
  • कुवैत
  • बहरीन
  • कतर
  • संयुक्त अरब अमीरात।

4. अफ्रीका के कितने देश निम्न मानव विकास की श्रेणी में आते हैं? (How many countries of Arica are in the category of low human development)
उत्तर:
29

5. ऊपर की जानकारियों से क्या प्रतिरूप उभरता है? (What pattern does emerge from the above findings)
उत्तर:
उत्तर अमेरिका के देश, कनाडा व सं. रा. अमेरिका, पश्चिमी यूरोप के देश तथा जैसे मध्य-पूर्व के तेल उत्पादक देश उच्च मानव विकास के अन्तर्गत आते हैं।

कारण:
इन देशों में उच्च तकनीकी विकास तथा संसाधनों का पूर्ण उपयोग तथा प्रति व्यक्ति आय अधिक है। दक्षिण अमेरिका के देश, पूर्वी यूरोप के देश, पश्चिम एशिया के देश, द. पू. एशिया के देश, चीन, मध्य एशियाई दूसरी श्रेणी के अन्तर्गत आते हैं। ये देश संसाधनों में धनी हैं लेकिन तकनीकी विकास में पिछड़े हैं। अफ्रीका के अधिकतर देश तथा एशिया कुछ देश तीसरी श्रेणी में है। इसका कारण है ये संसाधनों में धनी तो हैं लेकिन ये देश बहुत दिनों तक गुलाम रहे।

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