BSEB 12 GEO CH 04

BSEB Bihar Board Class 12 Geography Solutions Chapter 4 मानव विकास

Bihar Board Class 12 Geography मानव विकास Textbook Questions and Answers

(क) नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सा विकास का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
(क) आकार में वृद्धि
(ख) गुण में धनात्मक परिवर्तन
(ग) आकार में स्थिरता
(घ) गुण में साधारण परिवर्तन
उत्तर:
(ख) गुण में साधारण परिवर्तन

प्रश्न 2.
मानव विकास की अवधारणा निम्नलिखित में से किस विद्वान की देन है?
(क) प्रो. अमर्त्य सेन
(ख) डॉ. महबूब-उल-हक
(ग) एलन सी. सेम्पुल
(घ) रैटजेल
उत्तर:
(ख) डॉ. महबूब-उल-हक

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में कौन-सा देश उच्च मानव विकास वाला नहीं है?
(क) नार्वे
(ख) अर्जेंटाइना
(ग) जापान
(घ) मिस्र
उत्तर:
(घ) मिस्र

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

प्रश्न 1.
मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र कौन-से हैं?
उत्तर:
संसाधनों तक पहुँच, स्वास्थ्य एवं शिक्षा मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र हैं।

प्रश्न 2.
मानव विकास के चार प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
जिस प्रकार किसी इमारत को स्तंभों का सहारा होता है उसी प्रकार मानव विकास का विचार भी समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता और सशक्तीकरण की संकल्पनाओं पर आश्रित है।

प्रश्न 3.
मानव विकास सूचकांक के आधार पर देशों का वर्गीकरण किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक (HDI) स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निष्पादन के आधार पर देशों का क्रम तैयार करता है। यह क्रम 0 से 1 के बीच के स्कोर पर आधारित होता है जो एक देश, मानव विकास के महत्त्वपूर्ण सूचकों में अपने रिकार्ड से प्राप्त करता है। स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए चुना गया सूचक जन्म के समय जीवन-प्रत्याशा है। प्रौढ़ साक्षरता दर और सकल नामांकन अनुपात ज्ञान तक पहुँच को प्रदर्शित करते हैं। संसाधनों तक पहुँच को क्रय शक्ति के संदर्भ में पाया जाता है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों से अधिक में न दीजिए:

प्रश्न 1.
मानव विकास शब्द से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मानव विकास के दीर्घ और स्वस्थ्य जीवन, शिक्षा और उच्च जीवन स्तर मानव विकास के मुख्य तत्त्व हैं। मानव विकास के अन्य विकल्प हैं, राजनीतिक स्वतंत्रता, मानव अधिकारों की गारंटी, आत्म निर्भरता तथा स्वाभिमान के विविध घटक। लोगों के विकल्पों के परिवर्धन की प्रक्रिया और जनकल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना ही मानव विकास है। मानव विकास की कल्पना केवल अर्थव्यवस्था के विकास से संबंधित न होकर, मानव के संपूर्ण विकास से संबंधित है। आर्थिक कारकों के समान राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कारकों को भी उतना ही महत्त्व दिया जाता है। इसके अतिरिक्त विकास के लक्ष्य और साधनों, दोनों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। मानव विकल्पों के विस्तार को तो विकास का लक्ष्य माना जाता है लेकिन आपके विस्तार हो इसका आवश्यक साधना माना जाता है।

प्रश्न 2.
मानव विकास अवधारणा के अंतर्गत समता और सतत पोषणीयता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मानव विकास अवधारणा के चार स्तंभों में से एक है समता तथा दूसरा स्तंभ है सतत पोषणीयता। समता का आशय प्रत्येक व्यक्ति को उपलब्ध अवसरों के लिए समान पहुँच की व्यवस्था करना है। लोगों को उपलब्ध अवसर लिंग, प्रजाति, आय और भारत के संदर्भ में जाति के भेदभाव के विचार के बिना समान होने चाहिए। यद्यपि ऐसा ज्यादातर तो नहीं होता फिर भी यह लगभग प्रत्येक समाज में घटित होता है। उदाहरण के लिए, किसी भी देश में यह जानना रुचिकर होता है कि विद्यालय से विरत अधिकांश छात्र किस वर्ग से हैं। तब ऐसी घटनाओं के पीछे कारणों का पता लगना चाहिए। भारत में स्त्रियाँ और सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्गों के व्यक्ति बड़ी संख्या में विद्यालय से विरत होते हैं। इससे पता चलता है कि शिक्षा तक पहुँच न होना किस प्रकार इन वर्गों के विकल्पों को सीमित करता है।

सतत पोषणीयता:
सतत पोषणीय मानव विकास के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक पीढ़ी को समान अवसर मिलें। समस्त पर्यावरणीय वित्तीय एवं मानव संसाधनों का उपयोग भविष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। इन संसाधनों में से किसी भी एक का दुरुपयोग भावी पीढ़ियों के लिए अवसरों को कम करंगा। बालिकाओं का विद्यालय भेजा जाना एक अच्छा उदाहरण है। यदि एक समुदाय अपनी बालिकाओं को विद्यालय में भेजने के महत्त्व पर जोर नहीं देता तो युवा होने पर इन स्त्रियों के लिए अनेक अवसर समाप्त हो जाएंगे। उनकी वृत्तिका के विकल्पों में तीव्रता से छंटनी हो जाएगी और यह उनके जीवन के अन्य पक्षों को भी प्रभावित करेगा। अतः प्रत्येक पीढ़ी को अपनी भावी पीढ़ियों के लिए अवसरों और विकल्पों की उपलब्धता को सुनिश्चित करना चाहिए।

Bihar Board Class 12 Geography मानव विकास Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मानव विकास सूचकांक से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मानव विकास के मापन के लिए जिस मापक का प्रयोग किया जाता है। उसे मानक सूचकांक कहते हैं।

  1. दीर्घ जीविता
  2. ज्ञान आधार और
  3. उच्च जीवन स्तर मुख्य मानव सूचकांक हैं।

प्रश्न 2.
विकास का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उत्तर:
विकास का मुख्य लक्ष्य, मानव जीवन की समृद्धि है। दीर्घ और स्वस्थ जीवन शिक्षा और उच्च जीवन स्तर मानव विकास के प्रमुख तत्त्व हैं।

प्रश्न 3.
विकास से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
विकास का अर्थ है-लोगों के रहन सहन के स्तर एवं मानव कल्याण की सामान्य दशाओं को बढ़ावा देना।

प्रश्न 4.
प्रदेश क्या है?
उत्तर:
वह भू-भाग जिसमें भौगोलिक दशाओं की समानता तथा विकास संबंधी समस्याओं की समरूपता हो।

प्रश्न 5.
सामाजिक संकेतक किस प्रकार मानव विकास को प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
शिक्षा मानव विकास संसाधन का प्रमुख घटक है। यह लोगों को गरीबी के दुष्चक्र से बाहर निकाल सकता है।

प्रश्न 6.
प्राथमिक विद्यालय स्तर की आयु सीमा क्या है?
उत्तर:
प्राथमिक विद्यालय स्तर की आयु सीमा 6 से 11 वर्ष है। कुछ छात्र इस आयु सीमा से अधिक या कम आयु के हैं।

प्रश्न 7.
पर्यावरण को प्रभावित करने वाले तत्त्वों के विश्लेषण के लिए किस सूत्र का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
I = PAT
I = पर्यावरणीय प्रभाव
P = जनसंख्या (घनत्व और वृद्धि)
A = प्रचुरता
T = उत्पादन में प्रयुक्त हानिकारक प्रौद्योगिकी।

प्रश्न 8.
‘मानव विकास’ के संकेतकों के तीन समूहों के नाम बताइए।
उत्तर:
स्वास्थ्य संकेतक, सामाजिक संकेतक तथा आर्थिक संकेतक मानव विकास के संकेतक हैं।

प्रश्न 9.
मानव विकास में विश्व में भारत का क्या स्थान है?
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा 162 देशों के लिए विकसित मानव विकास सूचकांक में भारत का 115वाँ स्थान है। भारत को मध्यम विकास के देशों में स्थान मिला है।

प्रश्न 10.
किन राज्यों में साक्षरता की दर सर्वाधिक है?
उत्तर:
9 राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों में शिक्षा की दर सर्वाधिक है। इनमें केरल सर्वप्रथम स्थान पर है। यहाँ साक्षरता दर 90.92 प्रतिशत है। ये राज्य हैं-केरल, मिजोरम, लक्षद्वीप, गोवा, दिल्ली, चंडीगढ़, पांडिचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दमन व दीव।

प्रश्न 11.
मानव विकास सूचकांक (HDI) का क्रम क्या है?
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक का क्रम 0 से 1 के बीच के स्कोर पर आधारित होता है जो एक देश, मानव विकास के महत्त्वपूर्ण सूचकों में से प्राप्त करता है।

प्रश्न 12.
मानव विकास के उपागम कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
(क) आय उपागम
(ख) कल्याण उपागम
(ग) न्यूनतक उपागम
(घ) क्षमता उपागम

प्रश्न 13.
विकास का क्या अर्थ है?
उत्तर:
विकास का अर्थ गुणात्मक परिवर्तन है जो मूल्य सापेक्ष होता है।

प्रश्न 14.
विकास के महत्त्वपूर्ण पक्ष कौन-से हैं?
उत्तर:
किसी देश में लोग जीवन की गुणवत्ता का जो आनंद लेते हैं, उन्हें जो अवसर उपलब्ध हैं और जिन स्वतंत्रताओं का वे भोग करते हैं, विकास के महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं।

प्रश्न 15.
मानव विकास का विचार किन संकल्पनाओं पर आधारित है?
उत्तर:
मानव विकास का विचार समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता और सशक्तीकरण की संकल्पनाओं पर आश्रित है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मानव विकास क्यों आवश्यक है, व्याख्या कीजिए। उत्तर-निम्नलिखित कारणों से मानव विकास आवश्यक है

  1. विकास का उद्देश्य मानवीय दशाओं को सुधारना तथा लोगों के लिए विकल्पों को बढ़ाना है।
  2. मानव विकास उच्चतर उत्पादकता का साधन है। सुपुष्ट, स्वस्थ, शिक्षित, कुशल और सतर्क श्रमिक अधिक उत्पादन करने में समर्थ होते हैं। अत: उत्पादकता के आधार पर मानव विकास में विनिवेश न्यायसंगत है।

प्रश्न 2.
मानव विकास की संकल्पना की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास में दीर्घ और स्वस्थ जीवन, शिक्षा और उच्च जीवन स्तर मानव विकास के मुख्य तत्त्व हैं। मानव विकास के अन्य विकल्प हैं, राजनीतिक स्वतंत्रता, मानव अधिकारों की गारंटी, आत्म निर्भरता तथा स्वाभिमान के विविध घटक। लोगों के विकल्पों के परिवर्धन की प्रक्रिया और जनकल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना ही मानव विकास है। मानव विकास की संकल्पना केवल अर्थव्यवस्था के विकास से संबंधित न होकर, मानव के संपूर्ण विकास से संबंधित है। आर्थिक कारकों के समान राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कारकों को भी उतना ही महत्त्व दिया जाता है। इसके अलावा विकास के लक्ष्य और साधनों, दोनों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। मानव विकल्पों के विस्तार के तो विकास का लक्ष्य माना जाता है लेकिन आय के विस्तार को इसका आवश्यक साधन माना जाता है।

प्रश्न 3.
आर्थिक विकास और मानव विकास की संकल्पनाओं में क्या अंतर है?
उत्तर:
आर्थिक विकास और मानव विकास दोनों में आधारभूत अंतर है। आर्थिक विकास में केवल आय बढ़ाने पर बल दिया जाता है जबकि मानव विकास का अर्थ मानवीय विकल्पों के परिवर्धन पर बल देना है। आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास मानव विकास के मुख्य विकल्प हैं। इन सबके विकास के लिए आर्थिक विकास अनिवार्य है। आर्थिक विकास का मूल सिद्धांत विकास कार्यों में आय का सदुपयोग है न कि आय। इसी से मानवीय विकल्पों में वृद्धि होती है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक सम्पदा उसके लोग हैं। अत: मानव विकास होना चाहिए।

प्रश्न 4.
अंतर स्पष्ट कीजिए:
(क) मानव विकास और मानव संसाधन विकास
(ख) आर्थिक विकास और मानव विकास
उत्तर:
(क) मानव विकास और मानव संसाधन विकास –

मानव विकास:
लोगों के विकल्पों के परिवर्धन की प्रक्रिया और जनकल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना ही मानव विकास है। दीर्घ और स्वस्थ जीवन, शिक्षा और उच्च जीवन स्तर मानव विकास के प्रमुख तत्त्व हैं। मानव संसाधन विकास-मानव विकास के लिए आवश्यक संसाधनों को मानव संसाधन विकास कहते हैं। राजनीतिक स्वतंत्रता, मानव अधिकारों की गारंटी, आत्मनिर्भरता तथा स्वाभिमान, मानव विकास के अनिवार्य विकल्प हैं। विकास लोगों के लिए हो न कि लोग विकास के लिए। विकास सहभागीय होना चाहिए। लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशिक्षण की क्षमताओं को सुधारने के लिए विनिवेश के अवसर मिलने चाहिए। लोगों को अपनी क्षमताओं का पूरा-पूरा उपयोग करने के अवसर मिलने चाहिए।

(ख) आर्थिक विकास और मानव विकास

आर्थिक विकास:
आर्थिक विकास में मानव की आय बढ़ज्ञने पर ही मुख्य रूप से बल दिया जाता है। आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास के लिए आर्थिक विकास अनिवार्य है। आर्थिक विकास में आय का सही उपयोग है न कि आय।

मानव विकास:
लोगों के विकल्पों के परिवर्धन की प्रक्रिया और जनकल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना ही मानव विकास है। दीर्घ और स्वस्थ जीवन, शिक्षा और उच्च जीवन स्तर मानव के विकास के प्रमुख तत्त्व हैं।

प्रश्न 5.
पर्यावरण की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं?
उत्तर:
पर्यावरण की गुणवता तीन कारकों पर निर्भर करती है –

  1. उपयोग किए गए संसाधनों की मात्रा तथा उत्पादन की प्रति इकाई के अनुसार प्रदूषण की उत्पत्ति।
  2. प्रति व्यक्ति उत्पादन और उपभोग।
  3. जनसंख्या का आकार। इन तत्त्वों के पर्यावरण पर प्रभाव के विश्लेषण के लिए एक सूत्र बनाया गया है।

I = PAT
I = पर्यावरणीय प्रभाव
P = जनसंख्या (घनत्व और वृद्धि)
A= प्रचुरता
T = उत्पादन में प्रयुक्त हानिकारक प्रौद्योगिकी।

प्रश्न 6.
स्वास्थ्य संकेतक के प्रतिरूप का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्वास्थ्य संकेतक का मापन जन्म दर, मृत्यु-दर, पोषण और जन्म के समय जीवन प्रत्याशा के रूप में किया जाता है। मृत्यु दर भारत में तेजी से घटी है। 1951 में मृत्यु दर 25.1 थी लेकिन वह घटकर 1999 में 8.7 रह गई है। लेकिन जन्म दर में कोई कमी नहीं आई। 1999 में शिशु मृत्यु दर सन् 1951 की तुलना में आधी रह गई है। चार वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर काफी घट गई है। 1971 में यह 51.9 प्रति हजार थी जो 1999 से 22.5 रह गई। अतः मृत्यु का खतरा जीवन की प्रत्येक अवस्था में घट गया। प्रजनन दर भी धीमी गति से घटी है। 1951 में यह 40.8 प्रति हजार थी जो 1999 में घटकर 26.1 रह गई। 1951 से 1999 तक जनांकिकीय संकेतकों का विवरण नीचे तालिका में दिया गया है।

तालिका: भारत-मानव विकास के चुने हुए स्वास्थ्य संकेतक संकेतक

  1. 1998 वर्ष के आँकड़े।
  2. 1961-71 के वर्षों के आँकड़े
  3. 1991-96 के वर्षों के आँकडे

प्रश्न 7.
मानव विकास प्रक्रिया में शिक्षा का क्या स्थान है? व्याख्या करो।
उत्तर:
शिक्षा सामाजिक संकेतक का अंग है। शिक्षा को सर्वत्र मानव संसाधन का प्रमुख घटक माना गया है। लोगों के लिए साक्षरता का न्यूनतम निश्चित स्तर अनिवार्य है। यह लोगों के गरीबी के दुश्चक्र के बाहर निकालती है। इसलिए मानव विकास का मूल्यांकन साक्षरता संबंधित संकेतकों के संदर्भ में किया जाता है। शिक्षा मानव के जीवन स्तर को ऊँचा उठाकर विकास में योगदान देती है। शिक्षा और उच्च मानव जीवन स्तर मानव विकास के प्रमुख तत्त्व हैं।

प्रश्न 8.
भारत में आर्थिक की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विकास का अंतिम लक्ष्य प्रगति है। आर्थिक विकास का अर्थ है आय बढ़ाना। आर्थिक उत्पादकता मानव विकास का अनिवार्य अंग है। आर्थिक विकास मानव प्रगति का एक साधन है। अर्थव्यवस्था और उत्पादकता में विकास का मूल्यांकन सकल राष्ट्रीय उत्पाद तथा प्रति व्यक्ति आय के द्वारा किया जा सकता है। 1950-1951 में सकल घरेलू उत्पाद स्थिर कीमत (1993-94) पर 1404.66 अरब रुपये था जो बढ़कर 1999-2000 में 11485.00 अरब रुपये हो गया था। इसी के अनुसार प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद स्थिर कीमत पर 1950-51 में 3687 रुपये था, जो बढ़कर 1999-2000 में 10,067 रुपये हो गया था। गरीबी उन्मूलन भारत के आर्थिक विकास की कार्यनीति का अनिवार्य अंग रहा है नवीनतम आँकड़ों के अनुसार निर्धनता का अनुपात गाँवों में 27.9 प्रतिशत, नगरों में 23.62 प्रतिशत तथा संपूर्ण भारत में 26.10 प्रतिशत है। 1999-2000 के अनुसार 26 प्रतिशत लोग गरीबी रखा क नीचे हैं।

प्रश्न 9.
भारत में साक्षरता का वितरण मानचित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:

चित्र: राज्यानुसार साक्षरता का वितरण, 2001

प्रश्न 10.
मानव विकास की संकल्पना की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास में दीर्घ और स्वस्थ जीवन, शिक्षा और उच्च जीवन स्तर मानव विकास के मुख्य तत्त्व हैं। मानव विकास के अन्य विकल्प हैं, राजनीतिक स्वतंत्रता, मानव अधिकारों की गारंटी, आत्म निर्भरता तथा स्वाभिमान के विविध घटक। लोगों के विकल्पों के परिवर्धन की प्रक्रिया और जनकल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना ही मानव विकास है। मानव विकास की संकल्पना केवल अर्थव्यवस्था के विकास से संबंधित न होकर, मानव के संपूर्ण विकास से संबंधित है। आर्थिक कारकों के समान राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कारकों को भी उतना ही महत्त्व दिया जाता है। इसके अलावा विकास के लक्ष्य और साधनों, दोनों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। मानव विकल्पों के विस्तार के तो विकास का लक्ष्य माना जाता है। लेकिन आय के विस्तार को इसका आवश्यक साधन माना जाता है।

प्रश्न 11.
‘विकास और पर्यावरण ह्रास, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यह उक्ति कहाँ तक सही है।
उत्तर:
धीरे-धीरे मानव ने प्राकृतिक बाधाओं को दूर करने की तकनीक खोज ली। जलवायु की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए कपड़ों और आवास का उपभोग प्रारंभ कर दिया तथा जीव जन्तुओं का पालन तथा पेड़-पौधों को उगाना आरंभ कर दिया। सामाजिक और आर्थिक संगठनों की प्रगति और प्रौद्योगिकी के विकास से प्राकृतिक संसाधनों के दोहन द्वारा वस्तुओं के उत्पादन तथा सेवाओं के विकास की क्षमता में बहुत उन्नति हुई।

परिवहन के साधनों के विकास ने संसाधनों के दोहन की प्रक्रिया को तेज कर दिया। औद्योगिक क्रांति के साथ मानव ने अत्यधिक ज्ञान, कार्य कुशलता, शक्ति और प्रौद्योगिकी विकसित कर ली। इसके द्वारा अब उसने प्रकृति पर नियंत्रण शुरू कर दिया तथा पदार्थों और ऊर्जा के साधनों का बड़े पैमाने पर दोहन प्रारंभ कर दिया। इसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक संसाधनों की समाप्ति, अभाव, अधिक शोषण और पर्यावरण ह्रास होने लगा। इस प्रकार मानव प्रकृति का विनाशक बन गया। पर्यावरण पर मानव का प्रभाव, प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग द्वारा पड़ता है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि मानव विकास और पर्यावरण ह्रास एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

प्रश्न 12.
भारत में प्राथमिक स्तर पर नामांकन का प्रतिरूप बनाएँ।
उत्तर:
प्राथमिक स्तर (I-V) पर कुल नामांकन में भी 5.91 गुनी वृद्धि हुई है। 1950-51 में नामांकन 1.92 करोड़ था, जो बढ़कर 1999-2000 में 11.361 करोड़ हो गया है इसमें बालिकाओं के नामांकन में वृद्धि हुई है। 1950-51 में यह 28.1 प्रतिशत था जो बढ़कर 1999 2000 में 43.6 प्रतिशत हो गया है। उच्च प्राथमिक स्तरों (VI-VIII) पर कुल नामांकन बढ़ा है, जो इसी अवधि में 31 लाख से बढ़कर 4.206 करोड़ हो गया। नामांकन में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में बहुत असमानता है।

प्रश्न 13.
देश में मानव विकास के आर्थिक संकेतकों की प्रगति की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास के आर्थिक संकेतक वेतन, आय और रोजगार से संबंधित है। प्रति व्यक्ति घरेलू उत्पाद, गरीबी का विस्तार तथा रोजगार के अवसर इस समूह के वांछित संकेतक हैं। मानव विकास के समग्र चित्रण के लिए इन्हें मिश्र सूचकांक में परिवर्तित कर लिया गया है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में बहुत मानव विकास किया है। मानव विकास सूचकांक में भारत का 162 देशों में 115 वाँ स्थान है। मानव विकास की दृष्टि से न केवल विकसित देश भारत से आगे हैं, अपितु श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे विकासशील देश भी भारत से बहुत आगे हैं। आर्थिक विकास में मानव की आय बढ़ाने पर बल दिया जाता है। आय के विस्तार को इसका आवश्यक साधन माना जाता है।

प्रश्न 14.
भूटान विश्व में अकेला देश है जिसने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (GNH) को देश की प्रगति का आधिकारिक माप घोषित किया है। इस पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
भूटानियों ने अपने पर्यावरण अथवा सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जीवन के अन्य पहलुओं को भौतिक प्रगति और प्रौद्योगिकी विकास से होने वाली संभावित नुकसान को सतर्कतापूर्वक अथवा ध्यान में रखकर अपनाया है। इसका साधारण सा अर्थ है कि प्रसन्नता की कीमत पर भौतिक प्रगति नहीं की जा सकती। सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता हमें विकास के आध्यात्मिक, भौतिकता और गुणात्मक पक्षों को सोचने के लिए प्रोत्साहित करती है।

प्रश्न 15.
मानव विकास और मानव संसाधन विकास में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास-लोगों के विकल्पों के परिवर्धन की प्रक्रिया और जनकल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना ही मानव विकास है। दीर्घ और स्वस्थ जीवन, शिक्षा और उच्च जीवन स्तर मानव के विकास के प्रमुख तत्त्व हैं।

मानव संसाधन विकास:
मानव विकास के लिए आवश्यक संसाधनों को मानव संसाधन विकास कहते हैं। राजनीतिक स्वतंत्रता, मानव अधिकारों की गारंटी, आत्मनिर्भरता तथा स्वाभिमान, मानव विकास के अनिवार्य विकल्प हैं। विकास लोगों के लिए हो न कि लोग विकास के लिए। विकास सहभागीय होना चाहिए। लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशिक्षण की क्षमाताओं को सुधारने के लिए विनिवेश के अवसर मिलने चाहिए। लोगों को अपनी क्षमताओं का पूरा-पूरा उपयोग करने के अवसर मिलने चाहिए।

प्रश्न 16.
मानव विकास का कल्याण उपागम क्या है?
उत्तर:
यह उपागम मानव को लाभार्थी अथवा सभी विकासात्मक गतिविधियों के लक्ष्य के रूप में देखता है। यह उपागम शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सुख-साधनों पर उच्चतर सरकारी व्यय का तर्क देता है। लोग विकास में प्रतिभागी नहीं हैं लेकिन वे केवल निष्क्रिय प्राप्त कर्ता हैं। सरकार कल्याण पर अधिकतम व्यय करके मानव विकास के स्तरों में वृद्धि करने के लिए जिम्मेदार है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
पर्यावरण पर मानव के प्रभाव को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या, पर्यावरण और विकास में संबंध है। पर्यावरण पर मानव का प्रभाव प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग द्वारा पड़ता है। यही नहीं, वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन और उपभोग की प्रक्रिया से उत्पन्न प्रदूषकों के पर्यावरण में उत्सर्जन से भी वह प्रदूषित होता है। जनसंख्या के आकार और उसमें निरंतर वृद्धि से भी पर्यावरण दूषित होता है। पर्यावरण की गुणवत्ता निम्नलिखित तीन कारकों पर निर्भर करती है –

  1. उपभोग किए गए संसाधनों की मात्रा तथा उत्पादन की प्रति इकाई के अनुसार प्रदूषण की उत्पत्ति।
  2. प्रति व्यक्ति उत्पादन और उपभोग।
  3. जनसंख्या का आकार। इन तत्त्वों के पर्यावरण पर प्रभाव के लिए एक सूत्र बनाया गया है।

I = PAT
I = पर्यावरणीय प्रभाव
P = जनसंख्या (घनत्व और वृद्धि)
A = प्रचुरता
T = उत्पादन में प्रयुक्त हानिकारक प्रौद्योगिकी

जनसंख्या का घनत्व और वृद्धि प्रमुख कारक हैं। इससे संसाधनों पर दबाव पड़ता है जिससे वे समाप्त हो जाते हैं या उनका अभाव या अति शोषण हो जाता है। इससे पर्यावरण का ह्रास होता है। प्रौद्योगिकी तीसरा कारक है जो पर्यावरण को अत्यधिक प्रभाव करती है। प्रति व्यक्ति उत्पादन और कच्चे माल का बड़े पैमाने पर उपयोग तथा इसी अनुपात में ईंधन और ऊर्जा के उपभोग से संबंधित है। इससे भारी यात्रा में अपशिष्ट और कूड़ा कचरा पैदा होता है। इन दो कारकों का सबसे अधिक प्रभाव विकसित देशों में है।

प्रश्न 2.
आर्थिक विकास और मानव विकास किस प्रकार एक दूसरे से संबंधित हैं। मानव विकास की आवश्यकता क्यों हुई?
उत्तर:
(क) आर्थिक विकास और मानव विकास-मानव विकास के आर्थिक संकेतक वेतन, आय और रोजगार से संबंधित हैं। प्रति व्यक्ति घरेलू उत्पाद, गरीबी का विस्तार तथा रोजगार के अवसर इस समूह के वांछित संकेतक हैं। मानव विकास के समग्र चित्रण के लिए इन्हें मिश्र सूचकांक में परिवर्तित कर लिया गया है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने बहुत मानव विकास किया है। मानव विकास सूचकांक में भारत का 162 देशों में 115वाँ स्थान है। मानव विकास की दृष्टि से न केवल विकसित देश भारत से आगे हैं अपितु श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे विकासशील देश भी भारत से बहुत आगे हैं, आर्थिक विकास में मानव की आय बढ़ाने पर बल दिया जाता है। आय के विस्तार को इसका आवश्यक साधन माना जाता है।

(ख) मानव विकास की आवश्यकता-निम्नलिखित कारणों से मानव विकास आवश्यक है –

  • विकास का उद्देश्य मानवीय दशाओं को सुधारना तथा लोगों के लिए विकल्पों को बढ़ाना है।
  • मानव विकास उच्चतर उत्पादकता का साधन है। सुपुष्ट, स्वस्थ, शिक्षित, कुशल और सतर्क श्रमिक अधिक उत्पादन करने में समर्थ होते हैं। अतः उत्पादकता के आधार पर मानव विकास में विनिवेश न्यायसंगत है।
  • मानवीय प्रजनन की गति धीमी करके यह परिवार के आकार को छोटा करने में मदद करता है।
  • मानव विकास भौतिक पर्यावरण हितैषी भी है। गरीबी घटने से निर्वनीकरण, मरुस्थलीकरण और मृदा अपरदन भी कम हो जाता है।
  • सुधरी मानवीय दशाएँ समाज के कल्याण में योगदान करती हैं।
  • मानव विकास सामाजिक अशांति को कम करता है तथा राजनीतिक स्थिरता को बढ़ाने में सहायक होता है।

प्रश्न 3.
आर्थिक विकास प्राकृतिक पर्यावरण क्रिया पर प्रौद्योगिकी एवं संस्थाओं के मध्य अनुरूपी अन्तः क्रिया पर निर्भर करता है, व्याख्या करो।
उत्तर:
(क) विकास-लोगों के विकल्पों के परिवर्धन की प्रक्रिया और जनकल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना ही मानव विकास है। प्रादेशिक विकास के संदर्भ में विकास की धारणा है कि लोगों का रहन-सहन ऊँचा हो तथा मानव कल्याण की सामान्य दशाओं में वृद्धि हो। प्रति व्यक्ति आय विकास की महत्त्वपूर्ण सूचक है। इसलिए लोगों की प्रति व्यक्ति आय बढ़े। आर्थिक उत्पाद तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि हो। इस प्रकार देश के सभी भागों में तथा समाज में सभी वर्गों में समान रूप से उन्नति हो।

(ख) विकास के प्रांचल-किसी भी देश के विकास के तीन आधारभूत प्रांचल हैं –

  1. प्राकृतिक पर्यावरण
  2. प्रौद्योगिकी
  3. संस्थाएँ प्रांचलों का प्रभाव

1. प्राकृतिक पर्यावरण:
यह आर्थिक विकास की दिशा निर्धारित करता है। उदाहरण के लिए वनाच्छादित प्रदेशों में लकड़ी काटना व शिकार करना, तटीय भागों में मत्स्यन, नदी घाटियों में कृषि करना लोगों के मुख्य व्यवसाय हैं।

2. प्रौद्योगिकी:
किसी भी देश में उत्पादन का स्तर वहाँ के लोगों को उपलब्ध प्रौद्योगिकी पर निर्भर होता है। प्रौद्योगिकी वह अस्त्र है जिसके माध्यम से मनुष्य अपने प्राकृतिक वातावरण का उपयोग करता है भारतवर्ष प्राकृतिक संसाधनों में निर्धन नहीं है, बल्कि प्रौद्योगिकी में निर्धन है।

3. संस्थाएँ:
आर्थिक विकास को प्रोत्साहित कराने के लिए संस्थाएँ बनाई जाती हैं। ये संस्थाएँ समाज को सुचारू रूप से संचालित करती हैं। कई बार इन संस्थाओं की आलोचना के कारण आर्थिक विकास रुक जाता है।

प्रश्न 4.
(क) आप अपने मोहल्ले के 7-10 वर्ष की आयु के बच्चों का इन सूचनाओं के अनुसार लड़के/लड़कियों किस कक्षा में पढ़ रहे/रही है और किस विद्यालय में नहीं पढ़ रहे हैं-सर्वेक्षण कीजिए।
(ख) इस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी तैयार कीजिए। उत्तर-सारणी: भारत साक्षरता तथा प्राथमिक विद्यालयों में नामांकन अनुपात साक्षरता अनुपात नामांकन अनुपात

टिप्पणी:
प्राथमिक स्तर (I-V) पर कुल नामांकन में भी 5.91 गुनी वृद्धि हुई है। 1950-. 51 में नामांकन 1.92 करोड़ था, जो बढ़कर 1999-2000 में 11.361 करोड़ हो गया है। इसमें लड़कियों के सापेक्षिक भाग में वृद्धि हुई है। 1950-51 में यह 28.1 प्रतिशत था जो बढ़कर 1999-2000 में 43.6 प्रतिशत हो गया। नामांकन के संदर्भ में राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में बहुत असमानता है। कुल नामांकन 100 प्रतिशत से अधिक इसलिए है कि प्राथमिक विद्यालय स्तर की आयु सीमा (7-10 वर्ष) है। चंडीगढ़ में लड़कों का नामांकन अनुपात (50.18) सबसे नीचा रहा। उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों में नामांकित बच्चों का अनुपात (64.97 प्रतिशत) सबसे कम है तथा सिक्किम में (138.91 प्रतिशत) सबसे अधिक है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
लोगों की परिवर्धन की प्रक्रिया और जनकल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना क्या कहलाता है?
(A) मानव विकास
(B) राजनीतिक विकास
(C) सांस्कृतिक विकास
(D) आर्थिक विकास
उत्तर:
(A) मानव विकास

प्रश्न 2.
मानव विकास का मापन किस प्रकार किया जाता है?
(A) गणना द्वारा
(B) मानव सूचकांक द्वारा
(C) जनसंख्या की गणना
(D) शिक्षा स्तर द्वारा
उत्तर:
(B) मानव सूचकांक द्वारा

प्रश्न 3.
विश्व में भारत का मानव विकास सूचकांक कितना है?
(A) 127
(B) 120
(C) 125
(D) 124
उत्तर:
(A) 127

प्रश्न 4.
केरल में साक्षरता दर कितने प्रतिशत है?
(A)92.4 प्रतिशत
(B) 90.92 प्रतिशत
(C) 47.53 प्रतिशत
(D) 54.16 प्रतिशत
उत्तर:
(B) 90.92 प्रतिशत

प्रश्न 5.
2001 में स्त्री साक्षरता दर कितनी थी?
(A) 54.16 प्रतिशत
(B) 54.00 प्रतिशत
(C) 50.16 प्रतिशत
(D) 56.00 प्रतिशत
उत्तर:
(A) 54.16 प्रतिशत

प्रश्न 6.
केरल का मानव सूचकांक कितना है?
(A)0.532
(B) 0.533
(C) 0.638
(D) 0.523
उत्तर:
(C) 0.638

प्रश्न 7.
प्राथमिक विद्यालय स्तर की आयु सीमा क्या है?
(A) 7-10 वर्ष
(B) 6-11 वर्ष
(C) 5-10 वर्ष
(D) 5-11 वर्ष
उत्तर:
(B) 6-11 वर्ष

प्रश्न 8.
1999-2000 में कितने लोग गरीबी रेखा से नीचे थे?
(A) 26 प्रतिशत
(B) 36 प्रतिशत
(C) 16 प्रतिशत
(D) 46 प्रतिशत
उत्तर:
(A) 26 प्रतिशत

प्रश्न 9.
उच्च मानव विकास स्तर रखने वाले देशों की संख्या लगभग कितनी है?
(A) 88
(B) 57
(C) 32
(D) 42
उत्तर:
(B) 57

प्रश्न 10.
निम्न मानव विकास स्तर रखने वाले देशों की संख्या लगभग कितनी है?
(A) 62
(B) 32
(C) 52
(D) 22
उत्तर:
(B) 32

प्रश्न 11.
मध्यम विकास स्तर रखने वाले देशों की संख्या लगभग कितनी है?
(A) 88
(B) 98
(C) 68
(D) 78
उत्तर:
(A) 88

प्रश्न 12.
विश्व में अकेला ऐसा कौन-सा देश है। जिसने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (GNH) को देश की प्रगति का आधिकारिक माप घोषित किया है।
(A) नेपाल
(B) पाकिस्तान
(C) भूटान
(D) श्रीलंका
उत्तर:
(C) भूटान

प्रश्न 13.
मानव विकास के उपागम कौन से हैं?
(A) आय उपागम
(B) कल्याण उपागम
(C) न्यूनतम आवश्यकता उपागम
(D) सभी
उत्तर:
(D) सभी

प्रश्न 14.
मानव विकास का स्तंभ कौन-सा है?
(A) समता
(B) सतत पोषणीयता
(C) उत्पादकता
(D) सभी
उत्तर:
(D) सभी

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