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अध्ययन सामग्री: भारत का भूगोल “ऊर्जा के संसाधन”


अध्ययन सामग्री: भारत का भूगोल


ऊर्जा के संसाधन

ऊर्जा संबंधी परिदृश्य –

ऊर्जा का आर्थिक विकास से सीधा संबंध है । भारत जैसे विकासशील देशों में ऊर्जा के उत्पादन में तीव्र वृद्धि के बावजूद ऊर्जा की भारी कमी बनी हुई है । भारत में ऊर्जा का उपभोग कई प्रकार से होता है । ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी, जानवरों के गोबर तथा कृषि के अवशिष्ट पदार्थों से ऊर्जा प्राप्त की जाती है । इन गैर-व्यवसायिक ईंधनों का स्थानान्तरण धीरे-धीरे कोयला, पेट्रोलियम, गैस तथा बिजली जैसे व्यवसायिक ईंधन द्वारा हो रहा है । देश की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति का 60: भाग व्यवसायिक ईंधनों से हो रहा है ।

ऊर्जा नीति –

भारत सरकार ने ऊर्जा के संसाधनों के अनुचित दुरुपयोग को रोककर और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सस्ते मूल्य पर ऊर्जा की पर्याप्त आपूर्ति करने तथा ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से एक ऊर्जा-नीति बनाई है । इस ऊर्जा-नीति के मुख्य तत्त्व हैं:-

(i)  तेल, कोयला, जल तथा नाभिकीय ऊर्जा जैसे परंपरागत ऊर्जा स्रोतों का अधिकाधिक उपयोग करना
(ii)  प्राकृतिक तेल और गैस के नये-नये भंडारों की खोज कर उनका इस्तेमाल करना
(iii) तेल तथा ऊर्जा के अन्य स्रोतों की मांगों का प्रबंधन करना
(iv) ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा की मांग की पूर्ति के लिए नवीनीकरण योग्य ऊर्जा के संसाधनों का विकास करना
(v)  देश में मौजूद संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना तथा ;(vi)  ऊर्जा-क्षेत्र में लगे कर्मचारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करना ।

कोयला –

भारत में कोयला ऊर्जा का प्रमुख संसाधन है । देश की कुल व्यवसायिक ऊर्जा का 67: उत्पादन कोयले से होता है । कोयला भारत के गोंडवाना और तृतीय महाकल्प चरण वाले चट्टानों से मिलता है । लगभग 75: कोयले का भंडार दामोदर नदी-घाटी में है । प. बंगाल में रानीगंज और बिहार में झरिया, गिरिडीह, बोकारो और कनकपुरा से कोयला मिलता है । मध्यप्रदेश की सतपुड़ा श्रेणी तथा छत्तीसगढ़ के मैदानों से भी कोयला मिलता है ।

अधिकतर कोयले के भंडार भारत के पूर्वी और मध्य भागों में केन्द्रित हैं, जबकि ताप-विद्युत संयंत्र सर्वत्र बिखरे हुए हैं । इसके कारण कोयले की लंबी-लंबी दूरी तक ढुलाई की आवश्यकता पड़ती है ।

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