शेरशाह

शेरशाह:1540-1545 ई. पानीपत एवं घाघरा में बाबर की विजयों के परिणामस्वरूप अफगान नायकों का पूर्ण उन्मूलन नहीं हुआ। नव-स्थापित विदेशी शासन के विरुद्ध वे असन्तोष से खौल रहे थे। उन्हें केवल एक पराक्रमी व्यक्ति के पथप्रदर्शन की आवश्यकता थी, जो उनके छिटपुट प्रयत्नों को इस शासन के विरुद्ध एक संगठित राष्ट्रीय प्रतिरोध के रूप में […]

औरंगजेब

औरंगजेब: 1658-1707 ई. शाहजहाँ के चार पुत्र थे। चारों उस समय बालिग थे। दारा शुकोह की आयु तेंतालीस वर्ष की थी, शुजा की इक्तालीस, औरंगजेब की उनतालिस तथा मुराद की तेंतीस वर्ष की आयु थी। सभी भाइयों को उस समय तक प्रांतों के शासकों तथा सेनाओं के सेनापतियों के रूप में गैर-सैनिक एंव सैनिक को […]

शाहजहां

शाहजहां: 1627-1658 ई. जहाँगीर की मृत्यु के बाद, कुछ समय तक राजसिंहासन पर उत्तराधिकार के लिए संघर्ष चलता रहा। शाहजहाँ दक्कन में ही था जब उसके पिता की मृत्यु अक्टूबर 1627 ई. में हो गयी। उसके दो भाई खुसरो तथा परवेजू पहले ही मर चुके थे। किंतु एक भाई शाहजादा शहयार अभी जीवित था, जिसकी […]

जहाँगीर

जहाँगीर: 1605-1627 ई. 1605 अकबर की मृत्यु के एक सप्ताह के पश्चात् छत्तीस वर्ष की आयु में सलीम आगरे में राजसिंहासन पर बैठा तथा नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर बादशाह गाजी की उपाधि धारण की। विषय-सुख में आसक्त होने पर भी उसमें सैनिक महत्त्वाकांक्षा का एकदम अभाव नहीं था तथा वह प्रारम्भिक तैमूरियों की राजधानी ट्रांस-औक्सियाना जीतने का स्वप्न […]

सम्राट अकबर

अकबर: 1556-1605 ई. अकबर को, जो उस समय अपने अभिभावक एवं अपने पिता के पुराने साथी बैरम खाँ के साथ पंजाब में था, तेरह वर्ष की आयु में 14 फरवरी, 1556 ई. को विधिवत् हुमायूँ का उत्तराधिकारी घोषित किया गया। परन्तु अभी भी हिन्दुस्तान पर मुगलों की प्रभुता अनिश्चित थी। शेरशाह के उत्तराधिकारियों के मूर्खतापूर्ण […]

हुमायूं

हुमायूं: 1530-1540 ई. एवं 1555-1556 ई. बाबर की मृत्यु के तीन दिनों के पश्चात् हुमायूँ तेईस वर्षों की आयु में हिन्दुस्तान के राजसिंहासन पर बैठा। उसके सिंहासन पर बैठने के समय परिस्थिति वास्तव में बहुत आसान नहीं थी। उसे सब ओर से अनेक विरोधी शक्तियाँ घेरे हुए थीं, जो छिपे रूप में थीं, अत: अधिक […]

बाबर

बाबर: 1526-1530 ई. Babur: 1526-1530 AD. 1526 ई. से लेकर 1556 ई. तक का भारत का इतिहास मुख्यतः इस भूमि पर प्रभुता स्थापित करने के लिए मुग़ल अफगान-संघर्ष की कहानी है। भारत पर जो पहले मुग़ल (मंगोल) आक्रमण हुए थे, उनका दो बातों को छोड़ और कोई स्पष्ट फल नहीं निकला। इन आक्रमणों से नये मुसलमानों के […]

मुग़ल साम्राज्य

मुग़ल साम्राज्य भारतीय इतिहास में मुग़ल साम्राज्य एक युग के समान है। सल्तनतकाल की समाप्ति के साथ भारतीय इतिहास में इस नए युग का प्रारम्भ होता है। भारतीय इतिहास का यह नव युग मुग़लकाल के नाम से प्रसिद्ध है। इस राजवंश का संस्थापक बाबर था जो चगताई तुर्क था। बाबर अपने पिता की ओर से तैमूर का […]

मुगलकाल

मुगलकाल में तकनीकी विकास तकनीकी विकास भारत में तुकों के साथ ही तकली का आगमन हुआ। वस्तुतः 17वीं शताब्दी के दौरान कोई आमूल परितर्वन या विकास नहीं हुआ। फिर भी इस काल तक दो महत्वपूर्ण तकनीकी विकास हुए। (1) लाहौर, आगरा और फतेहपुर सीकरी में अकबर के संरक्षण में कालीनों की बुनाई और (2) बड़े […]

गुप्तोत्तर काल: वर्धन राजवंश

गुप्तोत्तर काल इतिहास के अपना एक चक्र पूरा कर वहीँ आ गया जहाँ मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद की स्थिति थी। गुप्तों के साम्राज्य के धराशायी हो जाने के बाद भारतवर्ष में पुन: विघटन ओर विकेन्द्रीकरण की प्रवृत्तियाँ बलवती हो गई। स्कन्द गुप्त के निधन के उपरान्त शीघ्र ही प्रान्तीय राज्य अपनी स्वतंत्रता जयघोष […]

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