राजपूत काल

राजपूत काल The Rajput Age हर्षवर्धन की मृत्यु के पश्चात् भारतीय इतिहास के रंगमंच पर कई छोटे-छोटे राज्यों का उदय हुआ। यां प्राचीन भारतीय इतिहास के गौरव के अवसान का युग था। भारतीय इतिहास के प्राचीन युग के अवसान और पूर्व मध्ययुग के आगमन का सन्धि काल राजपूत युग के नाम से प्रसिद्ध है। राजपूत उन राजकुलों, […]

कन्नौज के गुर्जर-प्रतिहार

हर्षोत्तर-कालीन भारत की राजनैतिक शक्तियों में गुर्जर-प्रतिहारों का राज्य प्रमुख था। गुर्जर-राजकुल राजपूत जाति का था। गुर्जर-राजकुल प्रतिहार शाखा का था, अतएव इतिहास में यह गुर्जर-प्रतिहार के नाम से विख्यात है। सन् 836 ई. के लगभग प्रतिहार राजवंश ने कन्नौज के नगर में अपनी सत्ता जमा ली। नवीं शताब्दी के अन्त के पूर्व ही इस […]

नेपाल का राज्य

भारत के साथ नेपाल के सम्बन्ध का सबसे पहला ऐतिहासिक उल्लेख हमें अशोक के काल में मिलता है। ऐसी अनुश्रुति है कि अशोक अपनी पुत्री चारुमती और दामाद देवपाल के साथ नेपाल गया था जहाँ उसने अनेक स्तूपों और बिहारों का निर्माण कराया था। अशोक को ही ललितपाटन नामक नगर के निर्माण का श्रेय भी दिया जाता है। इन […]

कामरूप का राज्य

प्राचीन भारत का कामरूप राज्य वर्तमान असम-राज्य से बडा था। यह राज्य आधुनिक काल में भारत की पूर्वी सीमा का निर्माण करता था। प्राग्ज्योतिष प्राचीन कामरूप की राजधानी थी। यह राज्य करतोया नदी तक फैला हुआ था। और इसमें कूचबिहार तथा रंगपुर के जिले सम्मिलित थे। महाभारत में कामरूप राज्य और उसके नरेश का उल्लेख […]

कश्मीर का राज्य

कश्मीर का प्राचीन भारत में शेष भारत के साथ बहुत गहरा और अविच्छिन्न राजनैतिक सम्बन्ध नहीं था, परन्तु सांस्कृतिक दृष्टि से कश्मीर कभी भारत से पृथक नहीं था। कुछ समय तक तो कश्मीर संस्कृत विद्या के प्रमुख केन्द्र के रूप में रहा। अशोक का कश्मीर पर अधिकार था। यहां पर उसने अनेक स्तूप बनवाये। नेपाल […]

शाकम्भरी और अजमेर के चौहान

चाहमान वंश के अनेक राजपूत सरदार आठवीं शताब्दी के प्रारम्भ से ही अजमेर के उत्तर में सांभर झील के निकट सांभर (शाकम्भरी) नामक स्थान पर राज करने लगे थे। इस वंश की अन्य शाखाओं का राज्य आगरा और ग्वालियर के मध्य में धौलपुर नामक स्थान में, रणथम्भौर में और आबू पर्वत के उत्तर में नद्दूल […]

बुन्देलखण्ड के चन्देल

प्रतिहार साम्राज्य के ध्वंसावशेष पर खड़े हुए राज्यों में जैजाकभुक्ति (बुन्देलखण्ड) के चन्देलों का राज्य सबसे अधिक शक्तिशाली था। विन्सेन्ट स्मिथ का मत है कि चन्देलों का उद्भव गोंड और भरों के कबीलों से हुआ था और उनका मूल छतरपुर राज्य में केन नदी के तट पर मनियागढ़ था। परन्तु चन्देल लोग अपने को ऋषि […]

मालवा के परमार

परमार वंश की उत्पत्ति भी गुर्जर प्रतिहारों की भांति अग्निकुण्ड से बताई जाती है। किन्तु अपेक्षाकृत अधिक प्राचीन अन्य लेखों से सिद्ध होता है कि परमार शासकों का उद्भव राष्ट्रकूटों के कुल में हुआ था। इनकी कई शाखाएं थीं। परमार वंश की स्थापना उपेन्द्र अथवा कृष्णराज ने दसवीं शताब्दी के के प्रारंभ में की थी। […]

अन्हिलवाड के सोलंकी

गुजरात में अन्हिलवाड (पाटन) नामक स्थान पर पहले प्रतिहार साम्राज्य का अधिकार था, परन्तु राजनैतिक प्रभुता के लिए राष्ट्रकूटों और प्रतिहारों में जो पारस्परिक संघर्ष हुआ उससे लाभ उठाकर मूलराज-प्रथम ने दसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में (942 ई.) अपना एक स्वतन्त्र राज्य स्थापित कर लिया और अन्हिलवाड को अपने राज्य की राजधानी बनाया। मूलराज सोलंकी- मूलराज […]

त्रिपुरी के कलचुरी

जैजाकभुक्ति के चन्देलों के राज्य के दक्षिण में आ जबलपुर के निकट कलचुरि राजपूतों का राज्य था। अपने को कलचुरि लीग हैह्य वंश का क्षत्रिय बतलाते हैं। गुर्जर प्रतिहारों और बदामी के चालुक्यों के उत्ता ने के पूर्व बुन्देल्क्हंस से लेकर गुजराज और नासिक, तर्क, विशेषकर नर्मदा की उपरली घाटी में, कलचुरी लोग सबसे अधिक […]

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