उत्तर वैदिक काल

सभ्यता के काल का विभाजन अत्यन्त कठिन है। ऋग्वैदिक काल की सभ्यता, आर्यों के भारत प्रवेश से लेकर ऋग्वेद की रचना और उसके बहुत पश्चात् तक की सभ्यता है। ऋग्वेद के बाद जब कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण धार्मिक ग्रन्थों की रचना हो जाती है, तब इस काल की सभ्यता को ऋग्वैदिक काल की सभ्यता से पृथक […]

ऋग्वैदिक काल

सिन्धु सभ्यता के पतन के बाद आर्य सभ्यता का उदय हुआ। आर्यों की सभ्यता वैदिक सभ्यता भी कहलाती है। वैदिक सभ्यता दो काल-खण्डों में विभक्त है- ऋग्वैदिक सभ्यता और उत्तर वैदिक सभ्यता। ऋग्वैदिक सभ्यता के ज्ञान का मूल स्रोत ऋग्वेद है, अतएव यह सभ्यता उसी के नाम से अभिहित है। ऋग्वेद चारों वेदों में सर्वाधिक […]

वैदिक साहित्य

वैदिक साहित्य आर्यों के सम्बन्ध में समस्त ज्ञान वेदों से प्राप्त होता है। वैदिक साहित्य से तात्पर्य उस विपुल साहित्य से है जिसमें वेद, ब्राह्मण, अरण्यक एवं उपनिषद् शामिल हैं। वेद शब्द विद् धातु से बना है जिसका अर्थ होता है जानना अर्थात् ज्ञान। वेद ऐसा साहित्यिक भंडार है जो अनेक शताब्दियों के बीच विकसित […]

बौद्धकालीन भारत

भारतीय इतिहास में बुद्ध का आगमन एक क्रान्तिकारी घटना है। उनका जन्म छठी शताब्दी ई.पू. में हुआ था। भारतीय इतिहास में यह काल बुद्ध युग के नाम से विख्यात है। 600 ई.पू. से लेकर 400 ई.पू. तक का काल-खण्ड भारतीय इतिहास का महत्त्वपूर्ण काल-खण्ड है। इस काल-खण्ड में भारत के इतिहास-गगन पर युग प्रवर्त्तनकारी घटनाएँ घटित हुई। […]

प्राचीन भारत में धार्मिक आन्दोलन

प्राचीन भारत में धार्मिक आन्दोलन लगभग 600 ई.पू. भारत में एक धार्मिक आन्दोलन उठ खड़ा हुआ जिसने भारतीय जनमानस को बौद्धिक रूप से आन्दोलित कर दिया। ईसा पूर्व छठी सदी का काल बौद्धिक चिंतन का युग माना जाता है। इस काल में यूनान में पाइथागोरस, ईरान में जरथ्रुष्ट, चीन में कन्फूसियस और लाआोत्से और भारत में बुद्ध और महावीर जैसे चिंतक हुए। इस काल में […]

जैन धर्म

जैन धर्म की मान्यता के अनुसार यह काफी पुराना और शाश्वत धर्म है। यह अनादि काल से प्रारंभ हुआ है। जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकरों की मान्यता है। ऋग्वेद में ऋषभ और अरिष्टनेमी – दो तीर्थंकरों की चर्चा हुई है। वायु पुराण एंव भागवत पुराण ने ऋषभदेव को नारायण का अवतार घोषित किया। प्रथम तीर्थकर ऋषभ का प्रतीक सांड है। […]

बौद्ध धर्म

मज्झिम निकाय तथा निदान कथा से महात्मा बुद्ध के जन्म की कथा का बोध होता है। गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई.पू. में कपिलवस्तु की लुबिनी नामक वाटिका में हुआ था। उनके पिता का नाम शुद्धोदन और माता का नाम महामाया था। शुद्धोदन कपिलवस्तु के शाक्य गण के प्रधान थे। गौतम बुद्ध के बचपन का […]

मौर्य युग का पतन

अशोक के उत्तराधिकारी अशोक की मृत्यु के उपरांत मौर्य साम्राज्य का इतिहास अत्यंत तिमिरावृत्त हो जाता है। उसके उत्तराधिकारियों का जो विवरण बौद्द्द, जैन, ब्राहमण ग्रंथों में में मिलता है, वह इतना अस्पष्ट और परस्पर-विरोधी हैं कि उसके आधार पर मौर्य साम्राज्य के परिवर्ती इतिहास का निर्माण करना अतीव दुष्कर कार्य प्रतीत होता है। इतना […]

मौर्यकालीन शिक्षा, भाषा, साहित्य एवं कला

मौर्यकालीन शिक्षा, भाषा, साहित्य एवं कला शिक्षा, भाषा और साहित्य मौर्य काल में शिक्षा, भाषा और साहित्य के क्षेत्र में अच्छी उन्नति हुई। मौर्य कालीन शासकों के संरक्षण में शिक्षा की उन्नति को अनुकूल अवसर मिला। तक्षशिला उच्च शिक्षा का सुविख्यात केन्द्र था। यहाँ दूर-दूर के देशों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते थे। […]

मौर्यकालीन व्यवस्था

मौर्यकालीन सामाजिक व्यवस्था वस्तुत: बुद्ध युग में पशुचारण अर्थव्यवस्था एक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ढल चुकी थी। इस काल में वाणिज्य और व्यापार का भी विकास हुआ था। परिणामस्वरूप एक व्यापारी वर्ग का उदय हुआ। बौद्ध साहित्य में चतुर्वर्ग में व्यवस्था को इस तरह प्रस्तुत किया गया है- खतिय (क्षत्रिय), बाम्हन (ब्राह्मण), वेस्सा (वैश्य), सूदा (शूद्र)। […]

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