जनसँख्या की समस्याएं एवं उनका निराकरण

विश्व में विकासशील एवं निर्धन देशों में तेजी से जनसंख्या वृद्धि (2 से 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष) ही जनसंख्या समस्या का मूल है। इस बारे में निम्नलिखित तथ्य उल्लेखनीय हैं- अल्पविकसित, निर्धन व विकासशील देशों में निरन्तर जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के कारण कुछ प्रदेशों में भूमि पर मानव का भार अधिक बढ़ गया है। जहाँ […]

विश्व की मानव प्रजातियाँ

प्रजाति की परिभाषा मानवशास्त्रियों ने रंग, रूप, आकार तथा अन्य शारीरिक लक्षणों के आधार पर मानव समूह को वर्गीकृत करने के प्रयास किए हैं। वैज्ञानिकों और मानवशास्त्रियों के अनुसार प्रजाति एक जैविकीय या प्राणिशास्त्रीय अवधारणा है। इनके अनुसार शारीरिक लक्षणों के आधार पर एक विशिष्ट मानव समूह को प्रजाति माना गया है। ये शारीरिक लक्षण […]

भारत की प्रमुख जनजातियाँ

नगा Nagas नगा जनजाति का मुख्य निवास नगा पहाड़ियों (Naga Hills) का प्रदेश नगालैण्ड है। नगालैण्ड के बाहर पटकोई पहाड़ियों, मणिपुर, मिजोरम, असम और अरुणाचल प्रदेश में भी नगा जाति के लोग रहते हैं। टोलेमी के अनुसार नगा का अर्थ नंगे (Naked) रहने वाले व्यक्तियों से। डॉ. वेरियर इल्विन का विचार है कि नगा शब्द की उत्पत्ति नॉक […]

ग्रामीण अधिवास

अधिवास मानव निवास के मूल आधार हैं। मानव समूह जहाँ स्थायी वा अस्थायी रूप से घर बनाकर रहते हैं उन समूहों को मानव अधिवास कहते हैं। ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं- स्थायी अधिवास अस्थायी अधिवास स्थायी अधिवास Permanent settlements उन क्षेत्रों में मिलते हैं जहाँ भूमि समतल होने के साथ-साथ उपजाऊ हो, […]

ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रारंभिक विद्रोह

1757 के पश्चात् सौ वर्षों में विदेशी राज्य तथा उससे संलग्न कठिनाइयों के विरुद्ध अनेक आंदोलन, विद्रोह तथा सैनिक विप्लव हुए। अपनी स्वतंत्रता के खो जाने पर स्वशासन में विदेशी हस्तक्षेप प्रशासनिक परिवर्तनों का आना, अत्यधिक करों की मांग, अर्थव्यवस्था का भंग होना, इन सबसे भारत के भिन्न-भिन्न भागों में भिन्न-भिन्न समय पर प्रतिक्रिया हुई […]

1857 का विद्रोह

आधुनिक भारत के इतिह्रास में 1857 ई. अपना विशिष्ट महत्त्व रखता है, क्योंकि इसी वर्ष से भारतीय स्वाधीनता संग्राम की शुरूआत मानी जाती है। तात्कालिक कारण 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण सैनिक थे। कम्पनी ने भारतीयों के प्रति जो भेदभाव की नीति रखी थी, उसका सर्वाधिक स्पष्ट रूप सेना में था। कारण, उसी में […]

धार्मिक एवं सामाजिक सुधार आंदोलन

चेतना की उत्पति व प्रसार 18वीं शताब्दी में यूरोप में एक नवीन बौद्धिक लहर चली, जिसके फलस्वरूप जागृति के एक नये युग का सूत्रपात हुआ। तर्कवाद तथा अन्वेषणा की भावना ने यूरोपीय समाज को प्रगति प्रदान की। भारत का एक नवीन पाश्चात्य शिक्षित वर्ग भी तर्कवाद, विज्ञानवाद तथा मानववाद से प्रभावित हुये बिना नहीं रह […]

स्वतंत्रता संघर्ष की शुरुआत

उदारवादी चरण और प्रारंभिक कांग्रेस 1858-1905 ई. सामान्यतः भारत में राष्ट्रवाद का उदय और विकास उन कारकों का परिणाम माना जाता है, जो भारत में उपनिवेशी शासन के कारण उत्पन्न हुए जैसे- नयी-नयी संस्थाओं की स्थापना, रोजगार के नये अवसरों का पृजन, संसाधनों का अधिकाधिक दोहन इत्यादि। दूसरे शब्दों में भारत में राष्ट्रवाद का उदय कुछ उपनिवेशी […]

कांग्रेस के गठन से पूर्व की राजनीतिक संस्थायें

19वीं शताब्दी के पूर्वाध में भारत में जिन राजनीतिक संस्थाओं की स्थापना हुयी उनका नेतृत्व मुख्यतः समृद्ध एवं प्रभावशाली वर्ग द्वारा किया गया। इन संस्थाओं का स्वरूप स्थानीय या क्षेत्रीय था। इन्होंने विभिन्न याचिकाओं एवं प्रार्थना-पत्रों के माध्यम से ब्रिटिश संसद के समक्ष निम्न मांगें रखीं- प्रशासनिक सुधार प्रशासन में भारतीयों की भागीदारी को बढ़ावा […]

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

कांग्रेस के गठन से पूर्व देश में एक अखिल भारतीय संस्था के गठन की भूमिका तैयार हो चुकी थी। 19वीं शताब्दी के छठे दशक से ही राष्ट्रवादी राजनीतिक कार्यकर्ता एक अखिल भारतीय संगठन के निर्माण में प्रयासरत थे। किंतु इस विचार की मूर्त एवं व्यावहारिक रूप देने का श्रेय एक सेवानिवृत्त अंग्रेज अधिकारी ए.ओ. ह्यूम […]