भारत में जनजातियों की प्रमुख समस्याएं

समस्याएं सामान्य रूप में जनजातियों की समस्याओं को निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत विवेचित किया जा सकता है- प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण की समाप्ति: ब्रिटिश शासन के आगमन से पूर्व जनजातियां प्राकृतिक संसाधनों (भूमि, जंगल, वन्य जीवन, जल, मिट्टी, मत्स्य इत्यादि) के ऊपर स्वामित्व एवं प्रबंधन के निर्वाघ अधिकारों का उपभोग करती थीं। औपनिवेशिक शासन के अधीन […]

जाति

उत्पति की रूपरेखा जाति एक वंशगत, अंतर्विवाही और सामान्यतः स्थानीय समूह है। जातियों में परस्पर पारंपरिक संबंध होते हैं और स्थानीय अधिक्रम में इनका एक विशिष्ट स्थान होता है। जातियों के बीच के संबंध अपवित्रता तथा शुचिता की संरचना द्वारा नियंत्रित होते हैं। जाति व्यवस्था धार्मिक आधार पर अंतर्निहित होती है। इसे वंशानुक्रम, अंतर्जातीय और […]

भाषा,धर्म एवं संस्कृति

किसी समाज, देश अथवा राष्ट्र में निवास करने वाले मानव समुदाय के धर्म, दर्शन, ज्ञान-विज्ञान से संबंधित क्रियाकलाप, रीति-रिवाज, खाने-पीने के तरीके, आदर्श संस्कार आदि के सामंजस्य को ही संस्कृति का नाम दिया जा सकता है या दूसरे शब्दों में मनुष्य अपनी बुद्धि एवं विवेक का प्रयोग कर विचार और कर्म के क्षेत्र में जो […]

संवृद्धि दर और जनांकिकीय संक्रमण

संवृद्धि दर दो समय बिन्दुओं के बीच विशुद्ध परिवर्तन है जिसे सामान्यतः प्रतिशत के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है। हाल के दशकों में जनसंख्या की वृद्धि दर में गिरावट आई है। 2001-2011 में, जनसंख्या की वृद्धि दर में अहम गिरावट थी। भारत की दशकीय संवृद्धि दर, 1991 तक, हमेशा 24 प्रतिशत के आस-पास-अस्थिर स्तर […]

जनसंख्या घनत्व

जनसंख्या घनत्व को प्रतिवर्ग किमी. क्षेत्र में व्यक्तियों की संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है। यह एक अशोधित मापन है जिसे अंकगणितीय घनत्व के तौर पर संदर्भित किया जाता है। यह अशोधित इसलिए है क्योंकि जनसंख्या घनत्व की गणना करने में देश के पूरे क्षेत्र को शामिल किया जाता है। हालांकि, वह जनसंख्या जो कुछ […]

बाल जनसंख्या

0-6 वर्ष आयु वर्ग की जनसंख्या आंकड़ों का प्राथमिक तौर पर अर्थ साक्षरता दरों की गणना करने के लिए होता है जो 7 साल से ऊपर की जनसंख्या के लिए किया जाता है। हालांकि, ये आंकड़े हमें व्यापक रूप से जनसंख्या संवृद्धि के साथ संभावित संबंधों के विश्लेषण करने में सक्षम बनाता है। सुरक्षात्मक रूप […]

लिंग संरचना

प्रत्येक 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या के रूप में लिंगानुपात को परिभाषित किया जाता है। लिंगानुपात, एक समय विशेष पर पुरुषों एवं महिलाओं के बीच सहभागिता का एक महत्वपूर्ण सामाजिक संकेतक है। लिंगानुपात को प्रभावित करने वाले कारकों में, मुख्य रूप से मृत्यु-दर में विभेद, लिंग चयन प्रवास, जन्म पर लिंगानुपात और, जनसंख्या परिगणना […]

भारत में साक्षरता

साक्षरता और शिक्षा को सामान्यतः सामाजिक विकास के संकेतकों के तौर पर देखा जाता है। साक्षरता का विस्तार औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, बेहतर संचार, वाणिज्य विस्तार और आधुनिकीकरण के साथ भी सम्बद्ध किया जाता है। संशोधित साक्षरता स्तर जागरूकता और सामाजिक कौशल बढ़ाने तथा आर्थिक दशा सुधारने में सहायक होता है। साक्षरता जीवन की गुणवत्ता-आयु प्रत्याशा, बच्चों […]

आयु संरचना

आयु सरंचना विभिन्न आयु वर्गों द्वारा एक राष्ट्र के संघटन से संबंधित है। आयु संरचना (Age Composition) आयु संरचना जनसंख्या की एक आधारभूत विशेषता है। आयु संरचना किसी जनसंख्या में आयु या आयु वर्गों के अनुसार जनसंख्या के वितरण को प्रदर्शित करती है। इसे आयु संघटन (Age Structure) भी कहते हैं। यहां तीन प्रकार की आयु […]

जनसंख्या वृद्धि, समस्याएं एवं नीतियां

जैसाकि संसाधन सीमित होते हैं, जनसंख्या में तीव्र वृद्धि भारत के लिए एक बड़ी समस्या है। इन सीमित संसाधनों पर जनसंख्या के बढ़ते दबाव ने भारी पर्यावरणीय प्रभाव को बढ़ाने के अतिरिक्त, कई सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं को उत्पन्न किया है। हाल के वर्षों में, जनसंख्या वृद्धि और जनसंख्या का व्यावसायिक वितरण, शहरीकरण की भात्रा […]