भारतीय संसदीय ग्रुप

उदभव भारतीय संसदीय ग्रुप एक स्वायत्त निकाय है जिसका गठन 16 अगस्त, 1948 को संविधान सभा (विधायी) द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसरण में वर्ष 1949 में किया गया था। सदस्यता सभी संसद सदस्य और पूर्व संसद सदस्य भारतीय संसदीय ग्रुप की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं । कोई संसद सदस्य 500/- रुपए का आजीवन सदस्यता […]

संसद सदस्‍यों हेतु सुविधाएं

संसद के लिए निर्वाचित होने के पश्चात् संसद सदस्य कतिपय सुख-सुविधाओं के हकदार हो जाते हैं। ये सुख सुविधाएं संसद सदस्यों को इस दृष्टि से प्रदान की जाती हैं कि वे संसद सदस्य के रूप में अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से निपटा सकें। मोटे तौर पर संसद सदस्यों को प्रदान की गई सुख-सुविधाएं वेतन […]

लोक सभा में प्रश्‍न काल

सामान्यतया, लोकसभा की बैठक का पहला घंटा प्रश्‍नों के लिए होता है और उसे प्रश्‍नकाल कहा जाता है। इसका संसद की कार्यवाही में विशेष महत्व है। प्रश्‍न पूछना सदस्यों का जन्मजात और उन्मुक्त संसदीय अधिकार है। प्रश्‍नकाल के दौरान सदस्य प्रशासन और सरकार के कार्यकलापों के प्रत्येक पहलू पर प्रश्‍न पूछ सकते हैं। चूंकि सदस्य […]

संसद में विधेयक का अधिनियम बनना

विधेयक किसी विधायी प्रस्ताव का प्रारूप होता है। अधिनियम बनने से पूर्व विधेयक को कई प्रक्रमों से गुजरना पड़ता है। प्रथम वाचन विधान संबंधी प्रक्रिया विधेयक के संसद की किसी भी सभा – लोक सभा अथवा राज्य सभा में पुरःस्थापित किये जाने से आरम्भ होती हैं। विधेयक किसी मंत्री या किसी गैर-सरकारी सदस्य द्वारा पुरःस्थापित […]

राष्ट्रपति द्वारा संसद का आरंभ

संविधान का अनुच्छेद 87(1) उपबंध करता है- ” राष्ट्रपति लोक सभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात प्रथम सत्र के आरंभ में एक साथ समवेत संसद के दोनों सदनों में अभिभाषण करेगा और संसद को उसके आह्वान के कारण बताएगा।” लोक सभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन होने के पश्चात प्रथम सत्र की दशा […]

संसद

संसद देश का सर्वोच्च विधायी निकाय है। हमारी संसद राष्ट्रपति और दो सदनों-लोक सभा (हाउस आफ द पीपुल) और राज्य सभा (काँसिल ऑफ स्टेट्स) से मिला कर बनती है। राष्ट्रपति के पास संसद के किसी भी सदन की बैठक बुलाने और सत्रावसान करने अथवा लोक सभा को भंग करने का अधिकार है। 26 जनवरी, 1950 […]

मराठा साम्राज्य: शिवाजी

Maratha Empire: Shivaji मराठा साम्राज्य मराठा राज्य का निर्माण एक क्रान्तिकारी घटना है। विजयनगर के उत्थान से भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण तत्व आया था, वैसे ही सत्रहवीं सदी के उत्तराद्ध में मराठा शक्ति के उत्थान से हुआ। भारतीय इतिहास के पूर्व मध्य काल में मराठों की राजनैतिक एवं सांस्कृतिक कार्यों में उज्जवल परम्पराएँ थीं। […]

मराठा प्रशासन: शिवाजी

शासन-स्वरूप शिवाजी का प्रशासन मूलत: दक्षिणी व्यवस्था पर आधारित था परन्तु इसमें कुछ मुगल तत्त्व भी शामिल थे। मराठा राज्य के अंतर्गत दो प्रकार के क्षेत्र होते थे- स्वराज- जो क्षेत्र प्रत्यक्षतः मराठों के नियंत्रण में थे, उन्हें स्वराज क्षेत्र कहा जाता था। मुघतई- (मुल्क-ए-कदीम) यह वह क्षेत्र था जिसमें वे चौथ एवं सरदेशमुखी वसूल करते थे। […]

शिवाजी के उत्तराधिकारी

Shivaji’s Successor शिवाजी के उत्तराधिकारी शिवाजी के बाद उसका ज्येष्ठ पुत्र शम्भूजी आया। विषय-सुख का प्रेमी होने पर भी वह वीर था। उसका प्रमुख परामर्शदाता उत्तर भारत का एक ब्राह्मण था, जिसका नाम कवि कलश था। कवि कलश का आचरण निन्दा से परे नहीं था। नये राजा (शम्भूजी) के अधीन मराठा शक्ति दुर्बल हो गयी, […]

यूरोपियों का आगमन

यूरोपियों का आगमन प्राचीन काल से ही भारत सोने की चिड़िया कहलाता था। इस कारण विदेशी हमेशा इस देश के प्रति आकृष्ट होते रहे थे चाहे वे व्यापारी हों, आक्रमणकारी हों या फिर जिज्ञासु पर्यटक। अति प्राचीन काल से भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक सम्बन्ध चले आ रहे थे। यूरोप से व्यापार के कई […]