भारतीय स्पाइसेस बोर्ड

Spices Board of India

स्पाइसेस बोर्ड (वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय) भारतीय मसालों के विकास और विश्वव्यापी संवर्द्धन का एक शीर्षस्थ संगठन है। बोर्ड भारतीय निर्यातकों एवं विदेशी आयातकों के बीच की अंतरराष्ट्रीय कड़ी है।

बोर्ड का मुख्यालय कोचीन में स्थित है। बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय, आंचलिक कार्यालय एवं क्षेत्र कार्यालय हैं। मुख्यालय में एक केंद्रीय गुणवत्ता मूल्यांकन प्रयोगशाला स्थापित है। मुख्यालय में एक जैव-प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला भी प्रवृत्त है। स्पाइसेस बोर्ड के अनुसंधान स्कंध भारतीय इलायची संस्थान का तडियनकुडिशु (तमिलनाडु) सकलेशपुर (कर्नाटक) एवं गान्तोक (सिक्किम) स्थित क्षेत्रीय स्टेशनों सहित मुख्य स्टेशन मैलाडुपारा (केरल) में है।

बोर्ड का संघठन और प्रकार्य

संसद द्वारा अधिनियमित स्पाइसेस बोर्ड अधिनियम, 1986 (1986 का सं. 10) में इलायची की खेती एवं उससे जुड़े मामलों के नियंत्रण सहित मसालों के निर्यात के विकास तथा इलायची उद्योग के नियंत्रणार्थ बोर्ड के गठन का प्रावधान है। इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा केंद्रीय सरकार ने स्पाइसेस बोर्ड का गठन किया जो 26 फरवरी, 1987 से अस्तित्व में आ गया।

स्पाइसेस बोर्ड की सदस्यता

  • एक अध्यक्ष
  • संसद के तीन सदस्य, जिनमें से दो लोकसभा से और एक राज्यसभा से चुने हुए।
  • केंद्र सरकार के निम्नलिखित मंत्रालयों के प्रतिनिधि तीन सदस्य:
  1. वाणिज्य
  2. कृषि, एवं
  3. वित्त
  • मसाले कृषकों के प्रतिनिधि सात सदस्य
  • मसाले निर्यातकों के प्रतिनिधि दस सदस्य
  • प्रमुख मसाले उत्पादक राज्यों के प्रतिनिधि तीन सदस्य
  • निम्नलिखित प्रत्येक का प्रतिनिधित्व करने वाले चार सदस्य
  1. योजना आयोग
  2. भारतीय पैकेजिंग संस्थान, मुम्बई
  3. केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान, मैसूर
  4. भारतीय मसाले फसल अनुसंधान संस्थान, कालिकट;
  • मसाले श्रमिकों के हितों का प्रतिनिधि एक सदस्य।

बोर्ड की संविधिक समितियां

  • कार्यकारी समिति
  • इलायची के लिए अनुसंधान एवं विकास समिति
  • मसालों के लिए विपणन विकास समिति

बोर्ड के कर्तव्य एवं दायित्व

स्पाइसेस बोर्ड अधिनियम 1986 के मुताबिक स्पाइसेस बोर्ड को निम्नलिखित काम सौंप दिए गए हैं-

  • मसालों का विकास, सुधार एवं निर्यात-नियमन करें,
  • मसालों के निर्यात के लिए प्रमाणपत्र प्रदान करें
  • मसालों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम व परियोजना चलाए
  • मसालों की ग्रेडिंग व पैकेजिंग की गुणवत्ता तकनीक तथा संसाधन संवर्धन संबंधी अनुसंधान व अध्ययन कार्य को सहायता एवं प्रोत्साहन प्रदान करें
  • नियतिार्थ मसालों के मूल्य को स्थाई रखने का प्रयास करें
  • उपयुक्त गुणवत्ता प्रतिमानों का विकास तथा निर्यात योग्य मसालों का गुणवत्ता चिन्हांकन द्वारा गुणवत्ता-प्रमाणीकरण करें
  • निर्यातार्थ मसालों की गुणवत्ता का नियंत्रण करें,
  • नियतिार्थ मसालों के विनिर्माताओं को निर्धारित शर्त व निबन्धनों के आधार पर लाइसेंस प्रदान करें;
  • निर्यात बढ़ाने के लिए आवश्यकता महसूस होने पर किसी भी मसाले का विपणन करें;
  • मसालों के लिए विदेशों में भण्डागार सुविधाएं प्रदान करें,
  • संकलन एवं प्रकाशनार्थ मसाले विपयक सांख्यिकी इकठ्ठा करें;
  • केंद्र सरकार के पूर्वानुमोदन से बिक्री के लिए किसी भी मसाले का आयात करें; तथा
  • मसालों के आयात-निर्यात संबंधी बातों पर केंद्र सरकार को सलाह दे दें।
  • इलायची कृषकों के बीच सहकारी प्रयासों को बढ़ावा दें;
  • इलायची कृषकों को लाभकारी पारिश्रमिक सुनिश्चित करें;
  • इलायची खेती इलाको के विस्तारण, इलायची पुनरोपण तथा इलायची खेती और प्रसंकरण के सुधरे तरीकों के लिए वित्तीय एवं अन्य सहायता प्रदान करें;
  • इलायची की बिक्री को नियमित तथा उसके मूल्य को स्थिर रखें;
  • इलायची की जांच तथा उसके ग्रेड प्रतिमानों को स्थिर करने का प्रशिक्षण प्रदान करें;
  • इलायची के उपभोग को बढ़ावा दें तथा उसके प्रचार-प्रसार को जारी रखें;
  • इलायची के (नीलामकर्ताओं सहित) दलालों एवं इलायची का धंधा करने वाले लोगों का पंजीयन और अनुज्ञप्ति दें;
  • इलायची विपणन का सुधार करें;
  • इलायची उद्योग से जुड़े किसी भी विषय पर कृषकों, व्यापारियों या ऐसे अन्य विनिर्दिष्ट लोगों से आंकड़ा इकठ्ठा करें और उनकी या उनके अंश को या उनके सारांश को प्रकाशित करें;
  • श्रमिकों को काम करने का अच्छा माहौल, उनके लिए सुविधाओं में सुधार तथा प्रोत्साहन का उपबंध बनाए; और
  • वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीय तथा आर्थिक अनुसंधान कार्य चलाएं: उनके लिए प्रोत्साहन या सहायता प्रदान करें।
Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *