संघ शासित प्रदेशों का प्रशासन

The Administration of Union Territories भारतीय संविधान के भाग 8 में अनुच्छेद 239 से 241 संघ शासित प्रदेशों के प्रशासन से संबंधित प्रावधानों की व्याख्या करते हैं। इन प्रदेशों के प्रशासन को सुचारू ढंग से चलाने का दायित्व राष्ट्रपति को सौंपा गया है। इन प्रदेशों की संख्या सात है- दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, […]

भारत में स्थानीय स्वशासन: पंचायती राज

Local Self-Government In India: Panchayati Raj Institutions – PRIs भारत की 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या गांवों में रहती है। इसलिए ग्रामीण स्तर पर स्वशासन का विशेष महत्व है। लोकतंत्र की वास्तविक सफलता तब है जब शासन के सभी स्तरों पर जनता की भागीदारी सुनिश्चित हो। भारत में अंग्रेजी उपनिवेशवाद के समय से ही स्थानीय […]

भारत में स्थानीय स्वशासन: नगर प्रशासन

Local Self-Government In India: Municipal Administration प्राचीन भारत में नगरीय प्रशासन के विद्यमान होने का भी उल्लेख मिलता है। मैगस्थनीज ने ईस्वी पूर्व तीसरी शताब्दी के भारत में एक नगर के शासन का अपने विवरण में उल्लेख किया है। उस विवरण से पता चलता है कि प्राचीन काल के नगरीय शासन की 5-5 सदस्यों की […]

सहकारी समितियां

Co-Operative Societies भारत में सहकारी आंदोलन को आंरभ हुये नौ दशक हो चुके हैं। इन वर्षों में यह आंदोलन विश्व का सबसे बड़ा सहकारी आंदोलन बन गया है। भारत में इसका आरंभ 1904 में फेड्रिक निकल्सन द्वारा सहकारी ऋण समिति की स्थापना किये जाने के साथ हुआ था। ऋण क्षेत्र से आरंभ हुआ यह आंदोलन आवास, उपभोक्ता […]

अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन

Administration in Scheduled and Tribal Areas अनुसूचित क्षेत्र संविधान के अनुच्छेद 244(1) के अंतर्गत असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिजोरम से भिन्न राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों कहे जाने वाले कुछ क्षेत्र (फिर चाहे ये क्षेत्र किसी राज्य में हों अथवा संघ शासित क्षेत्र में) के प्रशासन हेतु कुछ विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऐसा इन क्षेत्रों में निवास […]

संघ की न्यायपालिका: उच्चतम न्यायालय

The Union Judiciary: Supreme Court न्यायपालिका सरकार का महत्वपूर्ण अंग है। सरकार का स्वरूप चाहे कोई भी हो, न्यायपालिका की व्यवस्था किसी-न-किसी रूप में अवश्य की जाती है। संघीय शासन प्रणाली में स्वतंत्र तथा निष्पक्ष न्यायपालिका का होना अनिवार्य है क्योंकि शक्तियों के विभाजन के कारण संघ तथा राज्यों में प्रायः विवाद उत्पन्न होते रहते […]

राज्यों के उच्च न्यायालय

The High Courts In The States भारतीय संविधान के अनुसार, उच्च न्यायालय राज्य न्यायपालिका का सर्वोच्च न्यायालय है। संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था की गई है। यह आवश्यक नहीं कि प्रत्येक राज्य के लिए एक पृथक् उच्च न्यायालय हो। संविधान के अनुच्छेद 231 के अनुसार, […]

अधीनस्थ न्यायालय

उच्च न्यायालयों के अधीन कई श्रेणी के न्यायालय होते हैं इन्हें संविधान में अधीनस्थ न्यायालय कहा गया है। इनका गठन राज्य अधिनियम कानून के आधार पर किया गया है। विभिन्न राज्यों में इनके अलग-अलग नाम और अलग-अलग दर्जे हैं लेकिन व्यापक परिप्रेक्ष्य में इनके संगठनात्मक ढांचे में समानता है। प्रत्येक राज्य जिलों में बंटा हुआ […]

जनहित याचिका

Public Interest Litigation – PIL जनहित याचिका का अभिप्राय यह है कि पीड़ित व्यक्तियों के बदले अन्य व्यक्ति और संगठन न्याय की मांग कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में, यदि कोई व्यक्ति पीड़ित है परंतु उसमें न्यायालय में न्याय के लिए जाने की क्षमता नहीं है वैसी स्थिति में अन्य व्यक्तियों तथा स्वैच्छिक संगठनों की […]

भारतीय संघवाद: मुद्दे एवं चुनौतियां

Indian Federalism: Issues and Challenges सरकार राज्य का महत्वपूर्ण अंग है परंतु सभी राज्यों की सरकारों का स्वरूप एक समान नहीं होता है। सरकार के स्वरूप का चयन देश की विशेष परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। यही कारण है कि किसी देश की सरकार एकात्मक और किसी की संघात्मक […]