संघ सीलेन्ट्रेटा या निडेरिया

Phylum Coelenterata or Cnidaria

सीलेन्ट्रेटा शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्द Koilos = Hollow ; Enteron = Intestine से मिलकर बना है। इसका नया नाम निडेरिया (Cnidaria) जो ग्रीक भाषा के शब्द Knide = Nettle or Stinging cell bearing अर्थात् दंशकोशिका धारक से बना है। सीलेन्ट्रेटा शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम लूकर्ट (Leuckart) ने 1847 ई. में किया। इस संघ में लगभग 9500 जातियाँ (species) हैं। ये बहुकोशिकीय प्राणियों में निम्न स्तर के जन्तु हैं। इनमें अधिकांश समुद्र में पाये जाते हैं। इस संघ के जन्तुओं के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं-

  • ये जलीय अधिकांश समुद्री, एकाकी (solitary) या संघचारी (Colonial) जन्तु हैं।
  • ये द्विस्तरीय (Diploblastic) प्राणी होते हैं। शरीर का बाहय स्तर एक्टोडर्म (Ectoderm) तथा भीतरी स्तर एण्डोडर्म (Endoderm) या गैस्ट्रोडर्मिस (Gastrodermis) होता है। दोनों स्तरों के बीच में अकोशिकीय मेसोग्लीया (Mesoglea) होता है। शरीर की कोशिकाएँ ऊतक स्तर पर व्यवस्थित होती हैं।
  • ये जन्तु बहुकोशिकीय (Multicellular) होते हैं जिनके अंदर सिर्फ एक ही गुहा (Cavity) पायी जाती है जिसे अंतरगुहा (Coelenteron) कहते हैं।
  • इसका सर अरीय सममित (Radial symmetry) होता है।
  • इनमें सिर नहीं होता है।
  • इनमें गुदा नहीं होती है।
  • इनमें पाचन गुहा (Digestive cavity) थैली जैसी होती है।
  • इनमें मुख के चारों ओर लम्बे-लम्बे संस्पर्शक (Tentacles) पाये जाते हैं।
  • इनके संस्पर्शक तथा शरीर के अन्य भागों में दंश कोशिकाएँ (Nematoeyst) पाये जाते हैं। टीनोपीरा (Tenophora) में दंश कोशिकाएं अनुपस्थित होती हैं।
  • इनमें श्वसन तंत्र, उत्सर्जन तंत्र एवं परिसंचरण तंत्र नहीं पाया जाता है।
  • इनमें तंत्रिका कोशिकाओं (Nerve cells) की शाखाएँ आपस में मिलकर तंत्रिकाओं का जाल बनाती हैं।
  • इनमें नेत्र बिन्दु या स्टेटोसिस्ट (statocyst) पाये जा सकते हैं।
  • पॉलिपॉएड (Polypoid) चूनेदार अस्थि का निर्माण करते हैं जिसे कोरल (Coral) कहते हैं।
  • इनके जीवन चक्र में पीढ़ी एकान्तरण (Alteration of generation) या मेटाजेनेसिस (Metagenesis) पाया जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं- पॉलिपॉएड (Polypoid) और मेड्यूसॉएड (Medusoid)।
  • इनमें अलैंगिक प्रजनन (Asexual reproduction) मुकुलन (Budding) द्वारा लिंगी प्रजनन (Sexual reproduction) युग्मकों द्वारा होता है।
  • इनके लार्वा को मुख्यतः प्लेनुला (Planula) कहते हैं।
  • इनकी कोशिकाओं में स्थायी श्रम विभाजन (Division of labour) पाया जाता है। अर्थात् अलग-अलग कार्यों के सम्पादन के लिए भिन्न-भिन्न कोशिकाएँ होती हैं।
  • श्वसन एवं उत्सर्जन की क्रिया शरीर की सतह से होती है।
  • इनमें मस्तिष्क का अभाव होता है।

उदाहरण: हाइड्रा (Hydra), फाइसेलिया (Physalia), ओबीलिया (Obelia), ऑरलिया (Aurelia), सी-एनिमोन (sea anemone), फंजिया (Fungia) मीण्ड्रा (Meandra), पेनाटुला (Pennatula), गोर्गोनिया (Gorgonia) आदि।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • हाइड्रा में अमरत्व (Immortality) का गुण पाया जाता है।
  • ऑरेलिया (Aurelia) को साधारणतः जेलीफिश (Jelly fish) कहा जाता है। मेसोग्लिया के अधिक विकसित होने के कारण ऑरेलिया का शरीर काफी मोटा जेली जैसा लगता है।
  • मेट्रोडियम (Metridium) को सी-एनीमोन (Sea-anemone) के नाम से जाना जाता है।
  • गोर्गोनिया (Gorgonia) को समुद्री पंखा (Sea-fan) तथा पेनाटुला (Pennatula) को समुद्री कलम (Sea pen) कहा जाता है।
  • फाइसेलिया (Physalia) को साधारणतया पुर्तगाली युद्धपोत (Portugauese man of war) कहा जाता है, क्योंकि इसे देखने पर यह एक उल्टा जंगी जहाज जैसा लगता है।
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