रबड़

Rubber

रबड़ वर्तमान युग का एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण पदार्थ है, जिसका उपयोग हमारे दैनिक जीवन की विभिन्न क्रियाकलापों में होता है। रबड़ भूमध्यरेखीय सदाबहार वनों में पाये जाने वाले एक प्रकार के वृक्ष के दूध से प्राप्त होता है। इस दूध को लेटेक्स (Latex) कहा जाता है। सबसे पहले इसका प्रयोग पेन्सिल के निशान मिटाने के लिये किया गया। इस कारण इसका नाम रबड़ पड़ा। शीघ्र ही यह अपनी प्रत्यास्थता (Elasticity), जलरोधी (Resistance to water) तथा विद्युत् कुचालकता के कारण अनेक उद्योगों में काम आने लगा। मेजन नदी की द्रोणी रबड़ के वृक्षों का मूल स्थान है। शुरू-शुरू में यह जायरे और आमेजन के वनों से जंगली उत्पाद के रूप प्राप्त किया जाता था जिस कारण इसे wild Rubber कहा जाता था । 20वीं सदी के आरंभ में मलाया तथा दक्षिणी पूर्वी एशिया के अन्य देशों के बागानों में इसकी कृषि प्रारंभ की गई जो बागानी रबड़ (Plantaton Rubber) के नाम जाना जाने लगा। द्वितीय विश्व युद्ध के समय जब यूरोप और उ० अमेरिका को दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों से रबड़ मिलना बंद हो गया तो इन देशों ने कृत्रिम रबड़ (synthetic Rubber) का विकास किया।

इस प्रकार रबड़ दो प्रकार के होते हैं-

  1. प्राकृतिक रबड़ (Natural Rubber): प्राकृतिक रबड़ कुछ विशिष्ट जाति के पेड़ों से निकले वनस्पति दूध (Latex) से प्राप्त किया जाता है। दूसरे शब्दों में प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त रबड़ को प्राकृतिक रबड़ कहा जाता है। यह आइसोप्रीन (Isoprene) का बहुलक है। इसका आण्विक सूत्र C5H8 और अणुभार 68 होता है।
  2. संश्लिष्ट रबड़ (synthetic Rubber): कृत्रिम स्रोतों से प्राप्त रबड़ को संश्लिष्ट रबड़ कहा जाता है । कृत्रिम रबड़ के विकास का श्रेय मैथ्यूस एवं हैरिस (Mathews and Hariss) को जाता है। उन्होंने आइसोप्रीन को सोडियम के साथ 60°C तापक्रम पर प्रतिक्रिया कराकर प्राकृतिक रबड़ के सदृश बहुलक (Polymer) प्राप्त किया जो, संश्लिष्ट रबड़ कहलाता है। उदाहरण- बुना-N-रबड़, बुना-S-रबड़, पॉलिस्टाइरीन (Polystyrene) ड्यूप्रीन रबर (Duprene Rubber), नियोप्रीन रबर (Neoprene Rubber), थायोकॉल रबर (Thiokol Rubber), पॉली विनाइल क्लोराइड (Poly Vinyl Chloride) आदिI
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