प्रथम आजाद हिन्द फौज

फरवरी १९४२ से दिसम्बर १९४२ तक की आजाद हिन्द फौज को प्रथम आजाद हिन्द फौज (First Indian National Army (या the First INA)) कहते हैं। इसका संगठन सिंगापुर को जीतने के बाद जापान के समर्थन एवं आर्थिक सहयोग से किया गया था। ४० हजार भारतीय युद्धबन्दियों में से इसमें १२ हजार युद्धबन्दी शामिल थे जो मलाया अभियान में पकड़े गये थे या जिन्होने सिंगापुर में आत्मसमर्पण किया था। इस सेना का नेतृत्व मोहन सिंह के हाथ में था।[1][2]

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