बाबा गुरमुख सिंह


बाबा गुरमुख सिंह (1888 – 13 मार्च, 1977) एक ग़दर क्रांतिकारी और एक सिख नेता थे.[1]

जीवनी

बाबा गुरमुख सिंह लुधियाना जिले के ललतों खुर्द में पैदा हुए थे। उन्होंने लुधियाना के एक चर्च मिशन स्कूल में मैट्रिक तक पढ़ाई की और कर्तार सिंह सराभा के एक स्कूल के साथी थे। उन्होंने सेना में शामिल होने का प्रयास किया, लेकिन मेडिकल कारणों के कारण उन्हें शामिल नहीं किया जा सका।  [2]

कोमागाटा मारू

1914 में वह कनाडा जाने के लिए एक जापानी फर्म से किराए पर लिया गए जहाज कोमागाटा मारू पर चढ़े। हांगकांग में, उसे कनाडाई सरकार द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों के बारे में पता चला। कनाडा पहुंचने पर, यात्रियों को उतरने की अनुमति नहीं थी, और उन्हें भारत लौटना पड़ा। कोलकात्ता के बजबज घाट पर जहाज,से उतरने के बाद यात्रियों और स्थानीय पुलिस के बीच एक संघर्ष हुआ। गुरमुख सिंह बच गए किन्तु उन्हें तीन दिन बाद गिरफ्तार कर लिया गया और अलीपुर जेल में कैद किया गया। तीन महीने बाद, उन्हें पंजाब लाया गया।

Posted in Aik
Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *