रणजीत सीताराम पण्डित

रणजीत सीताराम पण्डित (1893 – 14 जनवरी 1944) भारत के राजकोट से भारतीय बैरिस्टर, कांग्रेसी, भाषाविद और विद्वान थे। उन्हें भारतीय असहयोग आंदोलन में अपनी भूमिका और संस्कृत ग्रंथों मुद्राराक्षसऋतुसंहार और कल्हण की राजतरंगिणी का अंग्रेजी में अनुवाद करने के लिए के लिए जाना जाता है।

वह विजय लक्ष्मी पण्डित के पति, मोतीलाल नेहरू के दामाद, जवाहरलाल नेहरू के बहनोई और नयनतारा सहगल के पिता थे।

जीवनी

रणजीत का जन्म 1893 में राजकोट में समृद्ध ब्राह्मण परिवार में हुआ था।[1] 1926 तक वह कलकत्ता में एक बैरिस्टर थे। 10 मई 1921 को उन्होंने विजय लक्ष्मी पण्डित से 1857 के विद्रोह की सालगिरह पर शादी की। उनकी पहली बेटी वत्सला का नौ महीने की उम्र में निधन हो गया। इसके बाद उनकी तीन बेटियाँ हुई; चंद्रलेखा मेहता, नयनतारा सहगल और रीता डार, जिनका जन्म क्रमशः 1924, 1927 और 1929 में हुआ।[2]

राजकोट में अपने परिवार की इच्छाओं के खिलाफ, वह सत्याग्रही बन गए और महात्मा गांधी और मोतीलाल नेहरू के साथ असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। बाद में, उन्हें आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत के विधान सभा का सदस्य (एमएलए) नियुक्त किया गया। उन्हें कई बार जेल की सजा दी गई, जिनमें जवाहरलाल नेहरू के साथ दो जेल की सजाएँ, 1931 में नैनी सेंट्रल जेल और एक अन्य देहरादून में शामिल थी।

जेल में रहते हुए, रणजीत ने कल्हण की राजतरंगिणी का अंग्रेजी में अनुवाद किया, जो कश्मीर के राजाओं का 12 वीं शताब्दी का संस्कृत में लिखा गया इतिहास है।[3] उन्होंने संस्कृत से अंग्रेजी में, मुद्राराक्षस और ऋतुसंहार का अनुवाद पूरा किया। 1944 में अंग्रेजों द्वारा उनके चौथे कारावास से रिहा होने के तुरंत बाद उनकी मृत्यु हो गई।

सन्दर्भ

  1.  “Love Story: विजयलक्ष्मी को इस युवक से था प्यार, नेहरू परिवार ने बीच में पैदा की दीवार”न्यूज़ 18. 1 जनवरी 1970. मूल से 18 अप्रैल 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 फरवरी 2020.
  2.  “नयनतारा सहगल का मराठी साहित्य सम्मेलन का कार्यक्रम रद्द किया गया”बीबीसी हिन्दी. 7 जनवरी 2019. मूल से 3 फ़रवरी 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 फरवरी 2020.
  3.  “जेल में हुआ विचार रच दी ऐतिहासिक पुस्तक”नई दुनिया. 3 मार्च 2017.
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