अहमदाबाद मिल हड़ताल, 1918

सन १९१८ में अहमदाबाद की एक सूती कपड़ा मिल के मजदूरों ने २१ दिन की हड़तल की थी। यही अहमदाबाद मिल हड़ताल के नाम से प्रसिद्ध है। १९१७ में चम्पारण सत्याग्रह की सफलता के बाद गांधीजी का दूसरा सफल सत्याग्रह, 1918 अहमदाबाद मिल मजदूरो की हड़ताल का नेतृत्व था।

सन् 1917 में अहमदाबाद में प्लेग की बीमारी फैलने के कारण मिल कर्मचारियों को प्लेग बोनस दिया जाता था। सन् 1918 में मिल मालिकों ने बोनस समाप्त करने की घोषणा कर दी, जिसका मिल मजदूरों ने विरोध किया। गांधी जी ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए मिल मजदूरों को शांतिपूर्वक, अहिंसात्मक हड़ताल पर चले जाने एवं 35% बोनस की मांग करने को कहा परन्तु मजदूर 50% भत्ते की मांग कर रहे थे। गांधी जी ने मजदूरों के समर्थन में भूख हड़ताल(अनशन ) करने का फैसला किया। हड़ताल को देखते हुए मिल मालिक 20% भत्ता देने को राजी हो गए। गांधी जी के समर्थन से मजदूरों में उत्साह बढ गया और आंदोलन अधिक सक्रिय हो गया।

इस आन्दोलन में अंबालाल साराभाई की बहन अनुसूइया बेन ने गांधी जी का साथ दिया और एक दैनिक समाचार पत्र का प्रकाशन भी किया। मजबूर होकर मिल मालिक मजदूरों से समझौता करने के लिए तैयार हो गए। सारा मामला एक ट्रिब्यूनल को सौंप दिया गया । ट्रिब्यूनल ने सारे मामले को देखते हुए हुए मजदूरों को 35% भत्ता देने की घोषणा कर दी जिससे हड़ताल समाप्त हो गई।

यह गांधी जी का भारत में दूसरा सफल आंदोलन था। इस आंदोलन में गांधी जी ने पहली बार भूख हड़ताल (अनशन ) की थी।

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