कोचरब आश्रम

कोचरब आश्रम, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नेता मोहनदास गांधी द्वारा स्थापित भारत में पहला आश्रम था, जोकि उनके दोस्त बैरिस्टर जीवनलाल देसाई ने उन्हें उपहार में दिया था।[1] 25 मई 1915 को स्थापित, गांधी का कोचरब आश्रम गुजरात राज्य के अहमदाबाद शहर के पास स्थित था।

यह आश्रम गांधीवादी विचारों के छात्रों के लिए सत्याग्रह, आत्मनिर्भरता, स्वदेशी, गरीबों, महिलाओं और अछूतों के उत्थान के लिए काम करने और बेहतर सार्वजनिक शिक्षा और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख केंद्र था। आश्रम का संचालन मानवीय समानता, स्व-सहायता और सादगी के आधार पर किया जाता था। हालाँकि, दो साल बाद आश्रम प्लेग के चपेट में आ गया, और गांधी को अपने आश्रम को इस बार साबरमती नदी के किनारे स्थानांतरित करना पड़ा। इसी समय के दौरान साबरमती आश्रम गांधी की प्रतिष्ठा जनता की आवाज के रूप में और राष्ट्र के नेता के रूप में और बढ़ी।

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