कलिंग

दक्षिण एशिया तथाभारतीय उपमहाद्वीप का इतिहास
पाषाण युग (७०००–३००० ई.पू.)[दिखाएँ]
कांस्य युग (३०००–१३०० ई.पू.)[दिखाएँ]
लौह युग (१२००–२६ ई.पू.)[दिखाएँ]
मध्य साम्राज्य (२३० ई.पू.–१२०६ ईसवी)[दिखाएँ]
देर मध्ययुगीन युग (१२०६–१५९६ ईसवी)[दिखाएँ]
प्रारंभिक आधुनिक काल (१५२६–१८५८ ईसवी)[दिखाएँ]
औपनिवेशिक काल (१५०५–१९६१ ईसवी)[दिखाएँ]
श्रीलंका के राज्य[दिखाएँ]
राष्ट्र इतिहास[दिखाएँ]
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विशेष इतिहास[दिखाएँ]
देवासं

कलिंग का प्रभाव क्षेत्र

कलिंग पूर्व भारत में गंगा से गोदावरी तक विस्तृत एक शक्तिशाली साम्राज्य था। वर्तमान के ओडिशा, आन्ध्रकलिंग, छत्तीशगढ़, झारखण्ड और बंगाल और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में यह व्याप्त था।

ग्रीक् के लेखक इस के लोगों को ओरेट्स(Oretes) कहते थे, क्यों कि ये प्रतिकुल प्राकृतिक परिस्थितियों में भी ओरू (Ora>ओड>चावल) अर्थात् चावल बहु मात्रा में ऊगापाते थे।

कलिंग राज्य की राजधानी तोशाली थी।

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