phy ques

NCERT पाठ्यक्रम प्रश्नों का हल

प्रश्न संख्या: 1. अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।

उत्तर: मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश की किरणें अवतल दर्पण से परावर्तन के बाद जिस बिन्दु पर अभिसरित होती है, उसे अवतल दर्पण का मुख्य फोकस कहते हैं।मुख्य फोकस को अंगरेजी के अक्षर FF से निरूपित किया जाता है, तथा इसका दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।

प्रश्न संख्या: 2. एक गोलीय दर्पण के वक्रता त्रिज्या 20 cm20 cm है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी?

उत्तर: हम जानते हैं कि फोकस दूरी, वक्रता त्रिज्या की दूरी की आधी होती है।

अत: फोकस दूरी = वक्रता त्रिज्या / 2

=20 cm2=10 cm=20 cm2=10 cm

अत: फोकस दूरी =10 cm=10 cm

प्रश्न संख्या: 3. उस दर्पण का नाम बताइए जो बिम्ब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सके।

उत्तर: अवतल दर्पण।

ब्याख्या: जब बिम्ब (वस्तु) को अवतल दर्पण के मुख्य फोकस तथा ध्रुव के बीच रखा जाता है, तो दर्पण द्वारा दर्पण के पीछे एक आवर्धित तथा सीधा प्रतिबिम्ब बनाया जाता है।

उत्तल दर्पण द्वारा हमेशा बिम्ब से छोटा प्रतिबिम्ब बनाया जाता है।

प्रश्न संख्या: 4. हम वाहनों मे उत्तल दर्पण को पश्च दृष्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं?

उत्तर: उत्तल दर्पण के बाहर की ओर वक्रित होने के कारण इसका दृष्टि क्षेत्र बड़ा होता है तथा ये सीधा तथा सापेक्ष रूप से छोटा प्रतिबिम्ब बनाते हैं, जिसके कारण वाहन चालक उनके पीछे दूर तक आते वाहनों को आसानी से देख पाते हैं, जिससे वे वाहन सुरक्षित रूप से चला पाते हैं।

अत: हम वाहनों मे उत्तल दर्पण को पश्च दृष्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों हैं।

प्रश्न संख्या: 5. उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात किजिए जिसकी वक्रता त्रिज्या 32 cm32 cm है।

उत्तर: हम जानते हैं कि फोकस दूरी = वक्रता त्रिज्या / 2

अत: फोकस दूरी =32 cm2=16 cm=32 cm2=16 cm उत्तर

प्रश्न संख्या: 6. कोई अवतल दर्पण अपने सामने 10 cm10 cm दूरी पर रखे किसी बिम्ब का तीन गुणा आवर्धित (बड़ा) वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है। प्रतिबिम्ब दर्पण से कितनी दूरी पर है।

उत्तर: दिया गया है, बिम्ब की दूरी, u=−10 cmu=-10 cm

आवर्धन (m)=−3(m)=-3

अत: प्रतिबिम्ब की दूरी, v=?v=?

हम जानते हैं कि m=−vum=-vu

⇒−3=−v−10cm⇒-3=-v-10cm

⇒v=−30 cm⇒v=-30 cm

अत: प्रतिबिम्ब की दूरी (v)=−30 cm(v)=-30 cm

यहाँ प्रतिबिम्ब की दूरी का ऋणात्मक मान बतलाता है, कि प्रतिबिम्ब दर्पण से बाईं तरफ बनेगा।

अत: प्रतिबिम्ब दर्पण की बाईं तरफ 30 cm की दूरी पर बनेगा। उत्तर

प्रश्न संख्या: 7. वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलम्ब की ओर झुकेगी अथवा अभिलम्ब से दूर हटेगी? बताइए क्यों?

उत्तर: प्रकाश की किरण अभिलम्ब की ओर झुकेगी।

क्योंकि, जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में तिरछी प्रवेश करती है, तो वह अभिलम्ब की ओर झुक जाती या मुड़ जाती है तथा जब सधन माध्यम से विरल माध्यम में तिरछी प्रवेश करती है, तो अभिलम्ब से दूर हट जाती है।

चूँकि यहाँ दिये गये माध्यम युग्म में वायु विरल तथा जल सधन माध्यम है, अत: प्रकाश की किरण जल में तिरछी प्रवेश करने पर अभिलम्ब की ओर झुकेगी।

प्रश्न संख्या: 8. प्रकाश वायु से 1.501.50 अपवर्तनांक की काँच की प्लेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है? निर्वात में प्रकाश की चाल 3×108m/s3×108m/s है।

उत्तर: दिया गया है:

निर्वात में प्रकाश की चाल =3×108m/s=3×108m/s

हम जानते हैं कि वायु में प्रकाश की चाल लगभग निर्वात में प्रकाश की चाल के बराबर है।

अत: प्रकाश में प्रकाश की चाल =3×108m/s=3×108m/s

ग्लास का अपवर्तनांक =1.50=1.50

अत: काँच में प्रकाश की चाल = ?

प्रश्न संख्या: 9. सारणी 10.310.3 से अधिकतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को ज्ञात कीजिए। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को भी ज्ञात कीजिए।

उत्तर: पाठ्यक्रम में दिये गये सारणी 10.310.3 के अनुसार

हवा का अपवर्तनांक =1.0003=1.0003 (सारणी के अनुसार न्यूनतम)

हीरा का अपवर्तनांक =2.42=2.42 (सारणी के अनुसार अधिकतम)

हम जानते हैं कि अधिक अपवर्तनांक वाला माध्यम ज्यादा प्रकाशिक सघन है तथा कम अपवर्तनांक वाला माध्यम प्रकाशिक रूप से कम सघन है।

अत: सारणी में दिये गये मानों के अनुसार हीरा का प्रकाशिक घनत्व अधिकतम तथा हवा का प्रकाशिक घनत्व न्यूनतम है।

प्रश्न संख्या: 10. आपको किरोसिन, तारपीन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है? सारणी 10.310.3 में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए।

उत्तर: सारणी 10.310.3 के अनुसार

किरोसिन का अपवर्तनांक =1.44=1.44

तारपीन के तेल का अपवर्तनांक =1.47=1.47

तथा जल का अपवर्तनांक =1.33=1.33

हम जानते हैं कि किसी पदार्थ का अपवर्तनांक हवा में प्रकाश की गति तथा संबंधित पदार्थ में प्रकाश की गति के अनुपात को बतलाता है।

अत: जिस माध्यम का अपवर्तनांक सबसे कम होगा प्रकाश की गति उस माध्यम में अधिकतम होगी।

यहाँ दिये गये पदार्थों में जल का अपवर्तनांक न्यूनतम है, अत: प्रकाश की गति जल में किरोसीन तथा तारपीन के तेल की तुलना में अधिकतम होगी।

प्रश्न संख्या: 11. हीरे का अपवर्तनांक 2.422.42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: हम जानते हैं कि हवा का अपवर्तनांक 1.0003 है तथा अपवर्तनांक बढ़ने के साथ माध्यम प्रकाशिक रूप से सघन होता जाता है। अत: हीरे का अपवर्तनांक 2.422.42 का अर्थ है कि हीरा प्रकाशिक रूप से हवा की अपेक्षा काफी सघन है।

प्रश्न संख्या: 12. किसी लेंस की 1 डाइऑप्टर क्षमता को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: यदि फोकस दूरी (f) को मीटर में (m) लिया जाता है, तो लेंस की क्षमता डायोप्टर DD (dipoter) में व्यक्त की जाती है।

1 डाइऑप्टर (dipoter) उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर (meter) हो।

अर्थात, 1D=1m−1D=1m-

प्रश्न संख्या: 13. कोई उत्तल लेंस किसी सुई का वस्तविक तथा उलटा प्रतिबिम्ब उस लेंस से 50 cm50 cm दूर बनाता है। यह सूई, उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखी है, यदि इसका प्रतिबिम्ब उसी साइज का बन रहा है जिस साइज का बिम्ब है। लेंस की क्षमता भी ज्ञात कीजिए।

उत्तर: हम जानते हैं कि जब बिम्ब को उत्तल लेंस के वक्रता केन्द्र (C1or2F1)(C1or2F1) पर रखा जाता है, तो लेंस के दूसरी ओर वक्रता केन्द्र (C2or2F2)(C2or2F2) पर ही एक समान आकार का वास्तविक तथा उलटा प्रतिबिम्ब बनता है।

अत: सूई वक्रता केन्द्र (C1or2F1)(C1or2F1) पर रखा गया है।

यहाँ दिया गया है, प्रतिबिम्ब की दूरी (v)=50 cm(v)=50 cm

अत: बिम्ब की दूरी (u)=−50 cm(u)=-50 cm

हम जानते हैं कि फोकस दूरी, f=2F12f=2F12

अत: f=502=25cm=0.25mf=502=25cm=0.25m

हम जानते हैं कि लेंस की क्षमता, P=1f(∈meter)P=1f(∈meter)

∴P=10.25m=+4D∴P=10.25m=+4D

अत: सूई की स्थिति वक्रता केन्द्र (C1or2F1)(C1or2F1) पर

तथा लेंस की क्षमता अर्थात पावर (P)=+4D(P)=+4D उत्तर

प्रश्न संख्या: 14. 2m2m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।

उत्तर: यहाँ दिया गया है f=−2mf=-2m (ऋणात्मक चिन्ह अवतल लेंस को दिखाता है)

हम जानते हैं कि लेंस की क्षमता, P=1f(∈meter)P=1f(∈meter)

∴P=12m=−0.5D∴P=12m=-0.5D

अत: लेंस की क्षमता (P)=−0.5D(P)=-0.5D उत्तर

NCERT अभ्यास प्रश्नों के उत्तर

https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&slotname=5325519162&adk=676405611&adf=1307212148&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602408787&rafmt=1&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-6.html&flash=0&fwr=0&fwrattr=true&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602408787496&bpp=10&bdt=157&idt=88&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0&nras=1&correlator=8651069356302&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602408788&ga_hid=667309865&ga_fc=0&iag=0&icsg=35659946&dssz=18&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=32&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=563&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&oid=3&pvsid=3034502575043508&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-5.html&rx=0&eae=0&fc=1920&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7CeE%7C&abl=CS&pfx=0&fu=8320&bc=23&ifi=1&uci=a!1&fsb=1&xpc=CFM8Qjj3Vr&p=http%3A//10upon10.com&dtd=101

प्रश्न संख्या: 1. निम्न में से कौन सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता?

(a) जल

(b) काँच

(c) प्लास्टिक

(d) मिट्टी

उत्तर: मिट्टी

ब्याख्या: लेंस बनाने के लिये पदार्थ का पारदर्शी होना आवश्यक है, अर्थात किसी भी पारदर्शी पदार्थों से लेंस बनाया जा सकता है।

यहाँ, जल, काँच तथा प्लास्टिक, पारदर्शी पदार्थ हैं जिनसे लेंस बनाया जा सकता है, जबकि मिट्टी पारदर्शी पदार्थ नहीं है, जिससे लेंस नहीं बनाया जा सकता है।

अत: विकल्प (d) मिट्टी सही उत्तर है।

प्रश्न संख्या: 2. किसी बिम्ब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा बिम्ब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?

(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच

(b) वक्रता केन्द्र पर

(c) वक्रता केन्द्र से परे

(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच

ब्याख्या: जब बिम्ब को अवतल दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच रखा जाता है, तो दर्पण के पीछे एक आभासी, सीधा तथा विवर्धित प्रतिबिम्ब बनता है, जबकि अन्य स्थितियों में दर्पण के

अवतल दर्पण के आगे एक उलटा तथा वास्तविक प्रतिबिम्ब बनता है।https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&adk=2924948555&adf=3281476681&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602408788&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=7674610969&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-6.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=1067&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChAI8NqK_AUQtYO47MCXrbF1EkwApbimrF-DgejTr4WDbo1Qqx6zXG82jNu6ZAfiOe4rz0WlsiqB7vODfnAgYvr82blksmT-gN9qKzB39PnZ9I3DUAJ8V9CWuF0Dp69U&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602408788220&bpp=3&bdt=880&idt=-M&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0%2C1067x280&nras=2&correlator=8651069356302&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602408788&ga_hid=667309865&ga_fc=0&iag=0&icsg=142641674&dssz=134&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=32&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=1701&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&oid=3&pvsid=3034502575043508&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-5.html&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=8320&bc=23&jar=2020-10-11-09&ifi=3&uci=a!3&btvi=1&fsb=1&xpc=VUQIkPehFr&p=http%3A//10upon10.com&dtd=16

अत: विकल्प (d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच सही उत्तर है।https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&adk=2924948555&adf=1913675134&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602408788&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=7674610969&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-6.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=1067&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChAI8NqK_AUQtYO47MCXrbF1EkwApbimrF-DgejTr4WDbo1Qqx6zXG82jNu6ZAfiOe4rz0WlsiqB7vODfnAgYvr82blksmT-gN9qKzB39PnZ9I3DUAJ8V9CWuF0Dp69U&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602408788220&bpp=2&bdt=881&idt=-M&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0%2C1067x280%2C1067x280&nras=3&correlator=8651069356302&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602408788&ga_hid=667309865&ga_fc=0&iag=0&icsg=2290125322&dssz=135&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=32&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=2037&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&oid=3&pvsid=3034502575043508&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-5.html&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=8320&bc=23&jar=2020-10-11-09&ifi=4&uci=a!4&btvi=2&fsb=1&xpc=y9ZLRILZlB&p=http%3A//10upon10.com&dtd=25

प्रश्न संख्या: 3. किसी बिम्ब का वस्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए बिम्ब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें?

(a) लेंस के मुख्य फोकस पर

(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर

(c) अनंत पर

(d) लेंस के प्रकाशिक केन्द्र तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर

ब्याख्या: जब बिम्ब को उत्तल लेंस के फोकस दूरी की दोगुनी दूरी अर्थात वक्रता केन्द्र पर रखा जाता है, तो एक बिम्ब के ही समान आकार का, उलटा तथा वास्तविक प्रतिबिम्ब वक्रता केन्द्र पर ही बनता है। जबकि अन्य स्थितियों में उत्तल दर्पण द्वारा या तो बिम्ब से बड़ा या बिम्ब से छोटा प्रतिबिम्ब बनता है।

अत: विकल्प ‘ (b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर’ सही उत्तर है।

प्रश्न संख्या: 4. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस की फोकस दूरियाँ −15 cm-15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवत: हैं –

(a) दोनों अवतल

(b) दोनों उत्तल

(c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल

(d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल

उत्तर: (c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल

ब्याख्या: दर्पण तथा लेंस के बायीं ओर फोकस दूरी का मान ऋणात्मक होता है। अवतल दर्पण की एक ही फोकस दूरी होती है, जो केवल दर्पण के बायीं ओर ही होता है, जबकि लेंस की स्थिति में दो फोकस दूरी होती है, एक लेंस के बायीं ओर तथा दूसरी दायीं ओर। कार्तीय चिन्ह परिपाटी के अनुसार फोकस को लेंस के बायीं ओर ही माना जाता है, तथा लेंस या दर्पण के बायीं ओर ली जाने वाली दूरियों का मान हमेशा ऋणात्मक माना जाता है।

अत: ‘ (c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल’ सही उत्तर है।

प्रश्न संख्या: 5. किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिम्ब सदैव सीधा प्रतीत होता है। संभवत: दर्पण है ?

(a) केवल समतल

(b) केवल अवतल

(c) केवल उत्तल

(d) या तो समतल अथवा उत्तल

उत्तर: (d) या तो समतल अथवा उत्तल

ब्याख्या: समतल दर्पण तथा उत्त्ल दर्पण द्वारा हमेशा प्रतिबिम्ब सीधा बनाया जाता है चाहे बिम्ब किसी भी जगह पर रखी गई हो। जबकि अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब सीधा तथा उलटा दोनों प्रकार का बनता है, जो कि दर्पण से बिम्ब की दूरी पर निर्मर करता है।अत: विकल्प ‘ (d) या तो समतल अथवा उत्तल’ सही उत्तर है।https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&adk=2924948555&adf=3761697335&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602408788&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=7674610969&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-6.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=1067&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChAI8NqK_AUQtYO47MCXrbF1EkwApbimrF-DgejTr4WDbo1Qqx6zXG82jNu6ZAfiOe4rz0WlsiqB7vODfnAgYvr82blksmT-gN9qKzB39PnZ9I3DUAJ8V9CWuF0Dp69U&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602408788220&bpp=2&bdt=881&idt=-M&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280&nras=4&correlator=8651069356302&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602408788&ga_hid=667309865&ga_fc=0&iag=0&icsg=2290125322&dssz=135&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=32&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=3535&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&oid=3&pvsid=3034502575043508&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-5.html&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=8320&bc=23&jar=2020-10-11-09&ifi=5&uci=a!5&btvi=3&fsb=1&xpc=wgxEPblQku&p=http%3A//10upon10.com&dtd=30

प्रश्न संख्या: 6. किसी शब्दकोष (dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन सा लेंस पसंद करेंगे?

(a) 50 cm50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस

(b) 50 cm50 cm फोकस दूरी पर एक अवतल लेंस

(c) 5 cm5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस

(d) 5 cm5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस

उत्तर: (c) 5 cm5 cm फोकस दूरी क एक उत्तल लेंस

ब्याख्या: जब बिम्ब को उत्तल लेंस के प्रकाशिक केन्द्र तथा फोकस के बीच रखा जाता है, तो लेंस के दूसरी ओर वक्रता केन्द्र से परे एक विवर्धित तथा सीधा प्रतिबिम्ब बनता है, जबकि अवतल लेंस द्वारा हमेशा बिम्ब से छोट प्रतिबिम्ब बनता है।

अत: 5 cm5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस क उपयोग करके छोटे अक्षरों को आसानी से पढ़ा जा सकता है, क्योंकि इस स्थिति में प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर एक विवर्धित तथा सीधा प्रतिबिम्ब लगभग 1111 से 1515 या 20 cm20 cm के अंदर बनेगा, जिससे छोटे अक्षरों को पढ़ने में सुविधा होगी, जबकि 50 cm50 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस का उपयोग करने पर प्रतिबिम्ब 1 m1 m से ज्यादा दूरी पर बनेगी जो कि काफी असुविधाजनक होगी।

अत: विकल्प (c) 5 cm5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस सही उत्तर है।

प्रश्न संख्या: 7. 15 cm15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिम्ब का सीधा प्रतिबिम्ब बनाना चाहते हैं। बिम्ब का दर्पण से दूरी का परिसर (range) क्या होना चाहिए? प्रतिबिम्ब की प्रकृति कैसी है? प्रतिबिम्ब बिम्ब से बड़ा है अथवा छोटा? इस स्थिति में प्रतिबिम्ब बनने का एक किरण आरेख बनाइए।https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&adk=2924948555&adf=3276162259&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602408788&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=7674610969&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-6.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=1067&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChAI8NqK_AUQtYO47MCXrbF1EkwApbimrF-DgejTr4WDbo1Qqx6zXG82jNu6ZAfiOe4rz0WlsiqB7vODfnAgYvr82blksmT-gN9qKzB39PnZ9I3DUAJ8V9CWuF0Dp69U&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602408788220&bpp=3&bdt=880&idt=-M&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280&nras=5&correlator=8651069356302&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602408788&ga_hid=667309865&ga_fc=0&iag=0&icsg=2290125322&dssz=135&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=32&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=4431&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&oid=3&pvsid=3034502575043508&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-5.html&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=8320&bc=23&jar=2020-10-11-09&ifi=6&uci=a!6&btvi=4&fsb=1&xpc=JxXUdKVuj4&p=http%3A//10upon10.com&dtd=36

उत्तर: जब बिम्ब को अवतल दर्पण के फोकस तथा पोल के बीच में रखा जाता है, तो दर्पण के पीछे एक सीधा तथा विवर्धित प्रतिबिम्ब बनता है।https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&adk=2924948555&adf=1707977485&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602408788&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=7674610969&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-6.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=1067&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChAI8NqK_AUQtYO47MCXrbF1EkwApbimrF-DgejTr4WDbo1Qqx6zXG82jNu6ZAfiOe4rz0WlsiqB7vODfnAgYvr82blksmT-gN9qKzB39PnZ9I3DUAJ8V9CWuF0Dp69U&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602408788220&bpp=1&bdt=880&idt=-M&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280&nras=6&correlator=8651069356302&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602408788&ga_hid=667309865&ga_fc=0&iag=0&icsg=2290125322&dssz=135&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=32&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=4767&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&oid=3&pvsid=3034502575043508&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-5.html&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=8320&bc=23&jar=2020-10-11-09&ifi=7&uci=a!7&btvi=5&fsb=1&xpc=4Uncl6IbRT&p=http%3A//10upon10.com&dtd=43

अत: 15 cm15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिम्ब का सीधा प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिये, बिम्ब को दर्पण से 15 cm15 cm से कम दूरी पर रखना होगा।

इस तरह से बना हुआ प्रतिबिम्ब आभासी तथा बिम्ब से बड़ा, अर्थात विवर्धित होगा।

Image formation by a concave mirror ncert solution of question7

प्रश्न संख्या: 8. निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए ?

(a) किसी कार अग्र दीप (हेड लाइट)

(b) किसी वाहन का पार्श्व / पश्च दृश्य दर्पण

(c) सौर भट्ठी

अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

उत्तर(a) किसी कार अग्र दीप (हेड लाइट) के लिये एक अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है।

क्योंकि जब बिम्ब को अवलत दर्पण के फोकस पर रखा जाता है, तो बिम्ब से आने वाली किरणें दर्पण से परावर्तन के पश्चात मुख्य अक्ष के समानांतर जाती है, तथा अनंत पर प्रतिबिम्ब का निर्माण करता है।

जब बल्ब को अवतल दर्पण के फोकस पर रखा जाता है, तो प्रकाश की किरणों का एक समानांतर बीम प्राप्त होता है, जिससे दूर तक देखा जा सकता है।

(b) किसी वाहन का पार्श्व / पश्च दृश्य दर्पण के लिये एक उत्तल दर्पण का उपयोग होता है। क्योंकि, उत्तल दर्पण के बाहर की ओर वक्रित होने के कारण इसका दृष्टि क्षेत्र बड़ा होता है तथा ये सीधा तथा सापेक्ष रूप से छोटा प्रतिबिम्ब बनाते हैं, जिसके कारण वाहन चालक उनके पीछे दूर तक आते वाहनों को आसानी से देख पाते हैं, तथा वाहन सुरक्षित रूप से चला पाते हैं।

(c) सौर भट्ठी के लिये काफी बड़े अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है।

क्योंकि, अनंत से आने वाली प्रकाश की किरणें अवतल दर्पण से परावर्तन के पश्चात दर्पण के फोकस पर अभिसरित अर्थात केन्दित होती है, प्रकास की किरणों का एक जगह केन्द्रित होने से उसकी उष्मा भी एक जगह केन्द्रित होकर काफी उष्मा देती है। बड़े अवतल दर्पण का द्वारक भी बड़ा होता है, जिसके कारण सूर्य के प्रकाश की किरणों की काफी मात्रा एक जगह क्रेन्दित कर काफी उष्मा उत्पन्न किया जा सकता है।https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&adk=2924948555&adf=3679280035&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602408788&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=7674610969&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-6.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=1067&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChAI8NqK_AUQtYO47MCXrbF1EkwApbimrF-DgejTr4WDbo1Qqx6zXG82jNu6ZAfiOe4rz0WlsiqB7vODfnAgYvr82blksmT-gN9qKzB39PnZ9I3DUAJ8V9CWuF0Dp69U&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602408788220&bpp=2&bdt=881&idt=2&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280&nras=7&correlator=8651069356302&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602408788&ga_hid=667309865&ga_fc=0&iag=0&icsg=2290125322&dssz=135&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=32&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=5979&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&oid=3&pvsid=3034502575043508&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-light-relection-and-refraction-5.html&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=8320&bc=23&jar=2020-10-11-09&ifi=8&uci=a!8&btvi=6&fsb=1&xpc=RbXY1Ivi7f&p=http%3A//10upon10.com&dtd=50

अत: सौर भट्ठी के लिये काफे बड़े अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न संख्या: 9. किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज से ढ़क दिया गया है। क्या यह लेंस किसी बिम्ब का पूरा प्रतिबिम्ब बना पाएगा? अपने उत्तर् की प्रयोग द्वारा जाँच कीजिए। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: हाँ। किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज से ढ़क देने के बाबजूद भी यह बिम्ब का पूरा प्रतिबिम्ब बना पायेगा।

प्रयोग:

एक उत्तल लेंस के आधे भाग को काले कागज से ढ़ककर बिम्ब को बिभिन्न स्थितियों में रखकर अवलोकन किया गया।

सभी स्थितियों में प्रतिबिम्ब बना।

Image formation by a convex lens when half of portion is covered with a black paper ncert solution of question9

चूकि बिम्ब से आने वाली किरणें लेंस के आधे भाग से ही परावर्तित होती है। अत: लेंस के आधे भाग को ढ़क देने के बाबजूद भी बिम्ब का प्रतिबिम्ब प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न संख्या: 10. 5 cm5 cm लंबा कोई बिम्ब 10 cm10 cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेंस से 25 cm25 cm दूरी पर रखा जाता है। प्रकाश किरण आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिम्ब की स्थिति, साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।

उत्तर:दिया गया है,

बिम्ब का आकार (h)=5 cm(h)=5 cm

बिम्ब की दूरी (u)=−25 cm(u)=-25 cm

फोकस दूरी (f)=10 cm(f)=10 cm

प्रतिबिम्ब की दूरी (v)=?(v)=?

हम जानते हैं कि 1v− 1u=1f1v- 1u=1f

ncert solution of question10

हम जानते हैं कि आवर्धन, m=vu=h’hm=vu=h′h

जहाँ, vv = प्रतिबिम्ब की दूरी

u=u= बिम्ब की दूरी

h’=h′= प्रतिबिम्ब की उँचाई तथा

h=h= बिम्ब की उँचाई

अत:

m=16.66cm−25 cm=h’5 cmm=16.66cm-25 cm=h′5 cm

⇒−0.66=h’5 cm⇒-0.66=h′5 cm

⇒h’=−0.66×5 cm⇒h′=-0.66×5 cm

⇒h’=−3.3 cm⇒h′=-3.3 cm

ncert solution_c of question10

अत: प्रतिबिम्ब की स्थिति : दर्पण के दूसरी तरफ, F2F2 तथा 2F22F2 के बीच

Position of image: Between F2 and 2F2, i.e. at the other side of lens.

प्रतिबिम्ब का आकार: −3.3 cm-3.3 cm अर्थात बिम्ब से छोटा

प्रतिबिम्ब की प्रकृति: वास्तविक तथा उलटा

प्रश्न संख्या: 11. 15 cm15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस किसी बिम्ब का प्रतिबिम्ब लेंस से 10 cm10 cm दूरी पर बनाता है। बिम्ब लेंस से कितनी दूरी पर स्थित है? किरण आरेख खींचिए।

उत्तर: दिया गया है,

अवतल दर्पण का फोकस दूरी =−15 cm=-15 cm

प्रतिबिम्ब की दूरी (v)=−10 cm(v)=-10 cm

बिम्ब की दूरी (u)=?(u)=?

हम जानते हैं कि, 1v−1u=1f1v-1u=1f

∴1−10 cm− 1u=1−15 cm∴1-10 cm- 1u=1-15 cm

⇒1u=−110 cm+115 cm⇒1u=-110 cm+115 cm

⇒1u=−3+230cm⇒1u=-3+230cm

⇒1u=−130cm⇒1u=-130cm

∴u=−30 cm∴u=-30 cm

ncert solution-A of question11

अत: बिम्ब लेंस से 30 cm30 cm की दूरी पर रखा गया है। उत्तर

प्रश्न संख्या: 12. 15 cm15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से कोई बिम्ब 10 cm10 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिम्ब के स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दिया गया है फोकस दूरी =15 cm=15 cm

बिम्ब की दूरी =−10 cm=-10 cm

प्रतिबिम्ब की दूरी =?=?

हम जानते हैं कि, 1v+1u=1f1v+1u=1f

ncert solution of question12

अब आवर्धन,

ncert solution_A of question12

चूँकि प्रतिबिम्ब की दूरी धनात्मक है, अत: प्रतिबिम्ब दूसरी के दूसरी तरफ अर्थात दायीं ओर बन रहा है। साथ ही आवर्धन भी धनात्मक है, यह यह बतलाता है कि प्रतिबिम्ब सीधा बना है।

अत: प्रतिबिम्ब की दूरी =6cm=6cm (दर्पण के दूसरी तरफ)

प्रतिबिम्ब की प्रकृति = आभासी तथा सीधा

प्रश्न संख्या: 13. एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1+1 है। क्या अर्थ है?

उत्तर: यहाँ आवर्धन +1+1 का अर्थ है

(a) प्रतिबिम्ब का आकार बिम्ब के आकार के बराबर है।

(b) आवर्धन का धनात्मक मान बतलाता है कि प्रतिबिम्ब सीधा है।

ब्याख्या: समतल दर्पण में हमेशा बिम्ब के समान आकार का सीधा तथा आभासी प्रतिबिम्ब बनता है। समतल दर्पण वह दर्पण है, जिसे लोग घर में तैयार आदि होने के लिये उपयोग में लाते हैं।

प्रश्न संख्या: 14. 5.0 cm5.0 cm लंबाई का कोई बिम्ब 30 cm30 cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20 cm20 cm दूरी पर रखा गया है। प्रतिबिम्ब के स्थिति, प्रकृति तथा साइज ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दिया गया है,

बिम्ब की लंबाई, h=5.0 cmh=5.0 cm

बिम्ब की दूरी, u=−20 cmu=-20 cm

उत्तल दर्पण का वक्रता केन्द्र R=30 cmR=30 cm

चूँकि फोकस दूरी, ff = वक्रता केन्द्र RR / 2

∴f=302=15 cm∴f=302=15 cm

हम जानते हैं कि, 1v+1u=1f1v+1u=1f

ncert solution of question14

अब, आवर्धन, m=−vum=-vu

⇒m=−8.57 cm−20 cm=8.5720⇒m=-8.57 cm-20 cm=8.5720

⇒m=0.43⇒m=0.43

अब चूँकि m=h’hm=h′h

जहाँ, h’h′ = प्रतिबिम्ब की उँचाई

तथा hh = बिम्ब की उँचाई

∴m=h’5.0 cm∴m=h′5.0 cm

⇒h’=0.43×5.0 cm⇒h′=0.43×5.0 cm

⇒h’=2.15 cm⇒h′=2.15 cm

अत:

प्रतिबिम्ब की स्थिति =8.57 cm=8.57 cm दर्पण के पीछे

प्रतिबिम्ब का आकार =2.15 cm=2.15 cm, जो कि बिम्ब से छोटा है

प्रतिबिम्ब की प्रकृति = सीधा तथा आभासी (चूँकि आवर्धन तथा प्रतिबिम्ब की उँचाई, दोनों का मान धनात्मक है).

प्रश्न संख्या: 15. 7.0 cm7.0 cm साइज का कोई बिम्ब 18 cm18 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27 cm27 cm दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी परदे को रखा जाय ताकि उस पर वस्तु का स्प्ष्ट फोकसित प्रतिबिम्ब प्राप्त किया जा सके। प्रतिबिम्ब का साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

बिम्ब की उँचाई =7.0 cm=7.0 cm

बिम्ब की दूरी, u=−27 cmu=-27 cm

फोकस दूरी, f==−18 cmf==-18 cm

प्रतिबिम्ब की दूरी, v=?v=?

प्रतिबिम्ब की उँचाई, h’=?h′=?

हम जानते हैं कि, 1v+1u=1f1v+1u=1f

ncert solution of question15

अब, आवर्धन, m=−vum=-vu

⇒m=−−54 cm−27 cm=−5427⇒m=–54 cm-27 cm=-5427

⇒m=−2⇒m=-2

हम जानते हैं कि m=h’hm=h′h

जहाँ h’=h′= प्रतिबिम्ब की उँचाई तथा

h=h= बिम्ब की उँचाई

अत:, −2=h’7 cm-2=h′7 cm

⇒h’=−14 cm⇒h′=-14 cm

अत: एक स्पष्ट फोकसित प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए, पर्दे को दर्पण से 54 cm54 cm की दूरी पर रखना होगा।

प्रतिबिम्ब की स्थिति =54 cm=54 cm दर्पण के सामने

प्रतिबिम्ब का आकार =14 cm=14 cm जो कि बिम्ब के दोगुणा है, अर्थात विवर्धित

प्रतिबिम्ब की प्रकृति = वास्तविक तथा उलटा (चूँकि आवर्धन तथा प्रतिबिम्ब की दूरी का मान ऋणात्मक है।)

प्रश्न संख्या: 16. उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता −2.0 D-2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस है?

उत्तर:

दिया गया है,

लेंस की क्षमता P=−2.0 DP=-2.0 D

अत: लेंस की फोकस दूरी, f=?f=?

हम जानते हैं कि, लेंस की क्षमता P=1f(meter)P=1f(meter)

⇒−2.0 D=1f⇒-2.0 D=1f

⇒f=1−2.0 D⇒f=1-2.0 D

⇒f=−0.5 m⇒f=-0.5 m

अत: लेंस की फोकल दूरी f=−0.5 mf=-0.5 m

चूँकि लेंस की फोकल दूरी का मान ऋणात्मक है, अत: लेंस अवतल (अपसारी) (Concave) है।

वैकल्पिक विधि:

हम जानते हैं कि अभिसारी लेंस (उत्तल लेंस) की क्षमता का मान धनात्मक तथा अपसारी लेंस (अवतल लेंस या ताल) की क्षमता का मान ऋणात्मक होता है।

चूँकि लेंस की क्षमता का मान ऋणात्मक है, अत: लेंस अपसारी है।

तथा लेंस की फोकल दूरी उपरोक्त विधि से निकाला जा सकता है।

प्रश्न संख्या: 17. कोई डॉक्टर +1.5 D+1.5 D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी?

उत्तर:

दिया गया है,

लेंस की क्षमता, P=+1.5 DP=+1.5 D

फोकल दूरी, f=?f=?

तथा लेंस की प्रकृति = ?

हम जानते हैं कि, लेंस की क्षमता P=1f(meter)P=1f(meter)

⇒1.5 D=1f⇒1.5 D=1f

⇒f=11.5 D⇒f=11.5 D

⇒f=0.66 m⇒f=0.66 m

अत: लेंस की फोकल दूरी f=0.66 mf=0.66 m

चूँकि, लेंस की फोकल दूरी धनात्मक है, अत: लेंस अभिसारी है

प्रश्न संख्या (1) नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:

नेत्र दूर तथा निकट की वस्तुओं को सुस्पष्ट देखने के लिये अभिनेत्र लेंस को आवश्यकतानुसार पक्ष्माभी पेशियों की मदद से सामंजित करती है। दूर देखने के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल होकर अभिनेत्र लेंस को पतला बना देती है, जिससे लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है, तथा आँख दूर की वस्तुओं को आसानी से सुस्पष्ट देख पाती है। उसी तरह नजदीक देखने के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं जिससे लेंस मोटा हो जाता है, तथा उसकी फोकस दूरी घट जाती है, और आँख नजदीक की वस्तुओं को सुस्पष्ट देख पाता है।

अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है, नेत्र की समंजन क्षमता कहलाती है।

प्रश्न संख्या (2) निकट दृष्टिदोष का कोई व्यक्ति 1.2m1.2m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त संशोधक लेंस किस प्रकार का होना चाहिए?https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&adk=2924948555&adf=3281476681&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602409091&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=7674610969&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-the-human-eye-hindi-3.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=1067&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChAI8NqK_AUQtYO47MCXrbF1EkwApbimrAX6tLa4sGAn-y4-bvqf_yT1FIQyDVtqnBA-0ThQeRb8iueJMAeic5n2-IWs_OFNQf25vM0TST_n9A3GhhL7xez-Qk3qDb9Y&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602409091275&bpp=1&bdt=658&idt=-M&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0%2C1067x280&nras=2&correlator=3136586841780&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602409091&ga_hid=1367663111&ga_fc=0&iag=0&icsg=142641674&dssz=84&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=37&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=1189&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&eid=21066467%2C21067945&oid=3&pvsid=2421485624349307&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-the-human-eye-hindi-2.html&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=8320&bc=23&jar=2020-10-11-09&ifi=3&uci=a!3&btvi=1&fsb=1&xpc=n0vsKKZpK5&p=http%3A//10upon10.com&dtd=21

उत्तर: जब किसी व्यक्ति के नेत्र गोलक की लम्बाई घट जाती है, या नेत्र का दूर बिन्दु कम हो जाता है, तो उसे निकट दृष्टि दोष हो जाता है, तथा वह दूर रखे वस्तु को सुस्पष्ट नहीं देख पाता है। प्रश्नगत व्यक्ति को चूँकि निकट दृष्टि दोष है, अत: उसका दृष्टि दोष का उपयुक्त क्षमता का अपसारी लेंस [अवलत लेंस (Diverging lens)] लगाकर संशोधन किया जा सकता है जिससे दूर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब दृष्टिपटल पर सही स्थान पर बन सके।

प्रश्न संख्या (3) मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिन्दु तथा निकट बिन्दु नेत्र से कितनी दूर पर होते हैं?

उत्तर: मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिन्दु 25 cm25 cm से अनंत तक तथा निकट बिन्दु 25 cm25 cm होता है।

प्रश्न संख्या (4) अंतिम पंक्ति में बैठे किसी विद्यार्थी को श्यामपट्ट पढ़ने में कठिनाई होती है। यह विद्यार्थी किस दृष्टि दोष से पीड़ित है? इसे किस प्रकाश संशोधित किया जा सकता है?

उत्तर: अंतिम पंक्ति में बैठा विद्यार्थी को चूँकि श्यामपट्ट पढ़ने में कठिनाई होती है, अर्थात वह निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है।https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&adk=2924948555&adf=1913675134&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602409091&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=7674610969&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-the-human-eye-hindi-3.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=1067&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChAI8NqK_AUQtYO47MCXrbF1EkwApbimrAX6tLa4sGAn-y4-bvqf_yT1FIQyDVtqnBA-0ThQeRb8iueJMAeic5n2-IWs_OFNQf25vM0TST_n9A3GhhL7xez-Qk3qDb9Y&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602409091275&bpp=2&bdt=658&idt=-M&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0%2C1067x280%2C1067x280&nras=3&correlator=3136586841780&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602409091&ga_hid=1367663111&ga_fc=0&iag=0&icsg=2290125322&dssz=85&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=37&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=1791&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&eid=21066467%2C21067945&oid=3&pvsid=2421485624349307&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-the-human-eye-hindi-2.html&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=8320&bc=23&jar=2020-10-11-09&ifi=4&uci=a!4&btvi=2&fsb=1&xpc=ufJOho2aVH&p=http%3A//10upon10.com&dtd=28

अत: उक्त विद्यार्थी के दृष्टि दोष का संशोधन उपयुक्त क्षमता का अपसारी लेंस [अवलत लेंस (Diverging lens)] लगाकर संशोधन किया जा सकता है।

NCERT अभ्यास प्रश्नों का हल

प्रश्न संख्या (1) मानव नेत्र अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को फोकसित कर सकता है। ऐसा हो पाने का कारण है ?

(a) जरा दूरदृष्टिता

(b) समंजन

(c) निकट दृष्टि

(d) दीर्घ दृष्टि

उत्तर: (b) समंजन

ब्याख्या:

नेत्र दूर तथा निकट की वस्तुओं को सुस्पष्ट देखने के लिये अभिनेत्र लेंस को आवश्यकतानुसार पक्ष्माभी पेशियों की मदद से सामंजित करती है। दूर देखने के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल होकर अभिनेत्र लेंस को पतला बना देती है, जिससे लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है, तथा आँख दूर की वस्तुओं को आसानी से सुस्पष्ट देख पाती है। उसी तरह नजदीक देखने के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं जिससे लेंस मोटा हो जाता है, तथा उसकी फोकस दूरी घट जाती है, और आँख नजदीक की वस्तुओं को सुस्पष्ट देख पाता है।

अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है, नेत्र की समंजन क्षमता कहलाती है।https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&adk=2924948555&adf=3761697335&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602409091&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=7674610969&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-the-human-eye-hindi-3.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=1067&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChAI8NqK_AUQtYO47MCXrbF1EkwApbimrAX6tLa4sGAn-y4-bvqf_yT1FIQyDVtqnBA-0ThQeRb8iueJMAeic5n2-IWs_OFNQf25vM0TST_n9A3GhhL7xez-Qk3qDb9Y&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602409091275&bpp=3&bdt=658&idt=-M&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280&nras=4&correlator=3136586841780&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602409091&ga_hid=1367663111&ga_fc=0&iag=0&icsg=2290125322&dssz=85&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=37&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=2695&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&eid=21066467%2C21067945&oid=3&pvsid=2421485624349307&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-the-human-eye-hindi-2.html&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=8320&bc=23&jar=2020-10-11-09&ifi=5&uci=a!5&btvi=3&fsb=1&xpc=xPBQCIEYjs&p=http%3A//10upon10.com&dtd=33

प्रश्न संख्या (2) मानव नेत्र जिस भाग पर किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाते हैं वह है ?

(a) कॉर्निया

(b) परितारिका

(c) पुतली

(d) दृष्टिपटल

उत्तर: (d) दृष्टिपटल

ब्याख्या: दृष्टिपटल (Retina) आँखों के पिछ्ले भाग में होता है। दृष्टिपटल (Retina) एक सूक्ष्म झिल्ली होती है, जिसमें बृहत संख्यां में प्रकाश सुग्राही कोशिकाएँ (Light sensitive cells) होती हैं। ये प्रकाश सुग्राही कोशिकाएँ (Light sensitive cells) बिद्युत सिग्नल उत्पन्न करती हैं। किसी वस्तु से आती हुई प्रकाश की किरणें अभिनेत्र लेंस द्वारा अपवर्तन के पश्चात रेटिना पर प्रतिबिम्ब बनाता है। दृष्टिपटल (Retina) पर प्रतिबिम्ब बनते ही उसमें वर्तमान प्रकाश सुग्राही कोशिकाएँ (Light sensitive cells) प्रदीप्त होकर सक्रिय हो जाती हैं तथा विद्युत संकेतों को उत्पन्न करती हैं। ये विद्युत संकेत दृक तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचा दिये जाते हैं। मस्तिष्क इन संकेतों की व्याख्या करता है तथा अंतत: इस सूचना को संसाधित करता है जिससे कि हम किसी वस्तु को जैसा है, वैसा ही देख पाते हैं।

प्रश्न संख्या (3) सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी होती है, लगभग ?

(a) 25m25m

(b) 2.5 cm2.5 cm

(c) 25 cm25 cm

(d) 2.5 m2.5 m

उत्तर: (c) 25 cm25 cm

ब्याख्या: वह न्यूनतम दूरी जिस पर रखी कोई वस्तु बिना तनाव के अत्यधिक स्पष्ट देखी जा सकती है, उसे सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी या नेत्र का निकट बिन्दु कहते हैं। किसी समान्य दृष्टि के तरूण वयस्क के लिये निकट बिन्दु की आँख से दूरी लगभग 25 cm25 cm होती है।

प्रश्न संख्या (4) अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी में परिवर्तन किया जाता है ?

(a) पुतली द्वारा

(b) दृष्टिपटल द्वारा

(c) पक्ष्माभी द्वारा

(d) परितारिका द्वारा

उत्तर: (c) पक्ष्माभी द्वारा

ब्याख्या: नेत्र दूर तथा निकट की वस्तुओं को सुस्पष्ट देखने के लिये अभिनेत्र लेंस को आवश्यकतानुसार पक्ष्माभी पेशियों की मदद से सामंजित करती है। दूर देखने के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल होकर अभिनेत्र लेंस को पतला बना देती है, जिससे लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है, तथा आँख दूर की वस्तुओं को आसानी से सुस्पष्ट देख पाती है। उसी तरह नजदीक देखने के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं जिससे लेंस मोटा हो जाता है, तथा उसकी फोकस दूरी घट जाती है, और आँख नजदीक की वस्तुओं को सुस्पष्ट देख पाता है।

प्रश्न संख्या (5) किसी व्यक्ति को अपनी दूर की दृष्टि को संशोधित करने के लिए −5.5-5.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। अपनी निकट की दृष्टि को संशोधित करने के लिए उसे +1.5+1.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की फोकस दूरी क्या होगी ?

(i) दूर की दृष्टि के लिए

(ii) निकट की दृष्टि के लिए

उत्तर: दिया गया है,

दूर दृष्टि को संशोधित करने के लिये लेंस की क्षमता, P=?5.5P=?5.5 डाइऑप्टर

निकट दृष्टि को संशोधित करने के लिये लेंस की क्षमता, P=+1.5P=+1.5 डाइऑप्टरhttps://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&adk=2924948555&adf=3276162259&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602409091&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=7674610969&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-the-human-eye-hindi-3.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=1067&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChAI8NqK_AUQtYO47MCXrbF1EkwApbimrAX6tLa4sGAn-y4-bvqf_yT1FIQyDVtqnBA-0ThQeRb8iueJMAeic5n2-IWs_OFNQf25vM0TST_n9A3GhhL7xez-Qk3qDb9Y&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602409091275&bpp=2&bdt=658&idt=-M&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280&nras=5&correlator=3136586841780&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602409091&ga_hid=1367663111&ga_fc=0&iag=0&icsg=2290125322&dssz=85&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=37&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=4519&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&eid=21066467%2C21067945&oid=3&pvsid=2421485624349307&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-the-human-eye-hindi-2.html&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=8320&bc=23&jar=2020-10-11-09&ifi=6&uci=a!6&btvi=4&fsb=1&xpc=JVTgDKSiBU&p=http%3A//10upon10.com&dtd=38

(i) दूर दृष्टि के लिये दिये गये क्षमता के लेंस की फोकस दूरी:

हम जानते हैं कि लेंस की क्षमता P=1f(meter)P=1f(meter)

जहाँ PP लेंस की क्षमता तथा ff फोकस दूरी है।

∴ −5.5=1f-5.5=1f

⇒f=1−5.5=−0.18⇒f=1-5.5=-0.18 m

अत: दूर दृष्टि दोष के लिये दिये गये क्षमता के संशोधन लेंस की फोकस दूरी f=− 0.18 m or − 18 cmf=- 0.18 m or – 18 cm उत्तर

(ii)निकट दृष्टि दोष को संशोधित करने के लिये दिये गये क्षमता के लेंस की फोकस दूरी:

हम जानते हैं कि लेंस की क्षमता P=1f(meter)P=1f(meter)

जहाँ PP लेंस की क्षमता तथा ff फोकस दूरी है।

∴ 1.5=1f1.5=1f

⇒f=11.5=0.66⇒f=11.5=0.66 m = 66 cm

अत: दूर दृष्टि दोष के लिये दिये गये क्षमता के संशोधन लेंस की फोकस दूरी f=0.66 m or66 cmf=0.66 m or66 cm उत्तर

प्रश्न संख्या (6) किसी निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिन्दु नेत्र के सामने 80 cm80 cm दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की प्रकृति तथा क्षमता क्या होगी?

उत्तर : हम जानते हैं कि सामान्य नेत्र के लिये दूर बिन्दु 25 cm25 cm से अनंत तक होती है।

यहाँ दिया गया है, निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिन्दु =80 cm=80 cm

अर्थात प्रश्नगत व्यक्ति उसी वस्तु को सुस्पष्ट देख पाता है जिसका प्रतिबिम्ब 80 cm80 cm की दूरी पर बनता है।

अर्थात, v=−80v=-80 cm =−0.8=-0.8 m

तथा u=∞u=∞

हम जानते हैं कि 1v−1u=1f1v-1u=1f

∴1−0.8−1∞=1f∴1-0.8-1∞=1f

⇒1f=1−0.8−0⇒1f=1-0.8-0

[∵ 1∞=01∞=0]

⇒1f=1−0.8⇒1f=1-0.8

⇒f=−0.8⇒f=-0.8 m

चूँकि, P=1fP=1f

जहाँ, P=P= लेंस की क्षमता तथा f=f= फोकस दूरी

∴P=1−0.8∴P=1-0.8

⇒P=−1.25⇒P=-1.25 डाइऑप्टर

चूँकि यहाँ फोकस दूरी का मान ऋणात्मक है, अत: लेंस की प्रकृति अवतल है।

तथा लेंस की क्षमता =− 1.25=- 1.25 डाइऑप्टर

प्रश्न संख्या (7) चित्र बनाकर दर्शाइए कि दीर्घ दृष्टि दोष कैसे संशोधित किया जाता है। एक दीर्घ दृष्टि दोषयुक्त नेत्र का निकट बिन्दु 1 m1 m है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता क्या होगी? यह मान लिजिए कि सामान्य नेत्र का निकट बिन्दु 25 cm25 cm है।

उत्तर :

दिया गया है, प्रतिबिम्ब की दूरी, v=− 1v=- 1 m

बिम्ब (Object) की दूरी, u=− 25 cm =− 0.25 mu=- 25 cm =- 0.25 m

[∵ सामान्य नेत्र का निकट बिन्दु =25 cm=25 cm]

हम जानते हैं कि 1v−1u=1f1v-1u=1f

∴1−1−1−0.25=1f∴1-1-1-0.25=1f

⇒−1+4=1f⇒-1+4=1f

⇒1f=3⇒1f=3 m

⇒f=13⇒f=13 m

चूँकि यहाँ फोकस दूरी का मान धनात्मक है, अत: लेंस उत्तल (Convex) प्रकृति का है।

अब चूँकि लेंस की क्षमता, P=1fP=1f

जहाँ, P=P= लेंस की क्षमता तथा f=f= फोकस दूरी (मीटर में)

∴P=11/3∴P=11/3

⇒P=+3⇒P=+3 डाइऑप्टर

अत: प्रश्नगत नेत्र दोष के संशोधन के लिये एक +3+3 डाइऑप्टर की क्षमता के उत्तल लेंस की आवश्यकता होगी।

 hypermetropia and correction
निकट दृष्टिदोष तथा उसका संशोधन 4

प्रश्न संख्या (8) सामान्य नेत्र 25 cm25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते?

उत्तर:

किसी समान्य दृष्टि के तरूण वयस्क के लिये निकट बिन्दु की आँख से दूरी लगभग 25 cm25 cm होती है। तथा अभिनेत्र लेंस की समंजन क्षमता सीमित होती है, जो कि न्यूनतम 25 cm25 cm तक है। अत: 25 cm25 cm से कम दूरी पर रखी गई वस्तुओं को सामान्य नेत्र सुस्पष्ट नहीं देख पाता बल्कि धुँधला देखता है।

प्रश्न संख्या (9) जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं तो नेत्र में प्रतिबिम्ब दूरी का क्या होता है?https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-2248428667831891&output=html&h=280&adk=2924948555&adf=1707977485&w=1067&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1602409091&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=7674610969&psa=1&guci=2.2.0.0.2.2.0.0&ad_type=text_image&format=1067×280&url=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-the-human-eye-hindi-3.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=1067&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChAI8NqK_AUQtYO47MCXrbF1EkwApbimrAX6tLa4sGAn-y4-bvqf_yT1FIQyDVtqnBA-0ThQeRb8iueJMAeic5n2-IWs_OFNQf25vM0TST_n9A3GhhL7xez-Qk3qDb9Y&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjowfV0.&dt=1602409091275&bpp=1&bdt=658&idt=1&shv=r20201007&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D59f49660268f3c18%3AT%3D1602401839%3AS%3DALNI_MZTtDZdMcVbtZEqvDQTe9PspYQbHQ&prev_fmts=0x0%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280%2C1067x280&nras=6&correlator=3136586841780&frm=20&pv=1&ga_vid=385357140.1602401836&ga_sid=1602409091&ga_hid=1367663111&ga_fc=0&iag=0&icsg=2290125322&dssz=85&mdo=0&mso=0&u_tz=330&u_his=37&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=266&ady=7791&biw=1349&bih=657&scr_x=0&scr_y=0&eid=21066467%2C21067945&oid=3&pvsid=2421485624349307&pem=810&ref=http%3A%2F%2F10upon10.com%2F10-science-hindi-the-human-eye-hindi-2.html&rx=0&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C657&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=8320&bc=23&jar=2020-10-11-09&ifi=7&uci=a!7&btvi=5&fsb=1&xpc=qE0ngDle0u&p=http%3A//10upon10.com&dtd=43

उत्तर: नेत्र में प्रतिबिम्ब हमेशा दृष्टिपटल पर ही बनता है, जिसकी दूरी निश्चित होती है। अत: किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देने से प्रतिबिम्ब की दूरी में कोई अंतर नहीं होता बल्कि सामान्य नेत्र के लिए प्रत्येक दूरी पर रखे वस्तुओं के लिये प्रतिबिम्ब की दूरी समान रहती है।

प्रश्न संख्या (10) तारे क्यों टिमटिमाते हैं?

उत्तर:

तारे वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण टिमटिमाते हुए प्रतीत होते हैं। तारों का पृथ्वी से बहुत दूरी पर अवस्थित होने के कारण वे प्रकाश के बिन्दु स्त्रोत के समान प्रतीत होते हैं। तारों से आने वाली प्रकाश की किरणें का पृथ्वी पर पहुँचने के क्रम में वायुमंडल में कई बार असमान तरीके से अपवर्तन होता है जिसके कारण तारों से आने वाली प्रकाश की किरणों का पथ लगातार बदलता रहता है, जिससे तारे की आभासी स्थिति भी बदलती रहती है। चूँकि तारे की आभासी स्थिति विचलित होती रहती है तथा आँखों मे प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा झिलमिलाती रहती है, जिसके कारण कोई तारा कभी चमकीला तो कभी धुँधला प्रतीत होता है, और तारे हमें टिमटिमाते हुए प्रतीत होते हैं।

प्रश्न संख्या (11) ब्याख्या कीजिए के ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते।

उत्तर:

ग्रह तारों की अपेक्षा पृथ्वी के बहुत पास है, जिसके कारण उन्हें प्रकाश के विस्तृत स्त्रोत की भाँति माना जा सकता है। यदि हम ग्रह को बिन्दु साईज के अनेक प्रकाश स्त्रोतों का संग्रह मान लें तो सभी बिन्दु साइज के प्रकाश स्त्रोतों से हमारे नेत्रों में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा में कुल परिवर्तन का औसत मान शून्य हो जायेगा। चूँकि ग्रहों से आने वाली प्रकाश की मात्रा में कुल परिवर्तन का औसता का मान शून्य हो जाता है, जिससे टिमटिमाने का प्रभाव निष्प्रभावित हो जाता है, और ग्रह टिमटिमाते हुए नहीं प्रतीत होते है।

प्रश्न संख्या (12) सूर्योदय के समय सूर्ये रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है?

उत्तर:

सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य क्षितिज पर रहता है। क्षितिज पर स्थित सूर्य सर के उपर स्थित सूर्य से ज्यादा दूरी पर रहता है। क्षितिज से आती हुई सूर्य की किरणों को ज्यादा सघन वायुमंडल से गुजरते हुए ज्यादा दूरी तय करना होता है। क्षितिज के समीप नीले तथा कम तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश का अधिकांश भाग वायुमंडल में निलंबित कणों द्वार प्रकीर्ण हो जाता है। इसलिये हमारे नेत्रों तक पहुँचने वाला प्रकाश अधिक तरंगदैर्ध्य वाला अर्थात नारंगी तथा लाल रंग का होता है।

यही कारण है कि सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य का रंग नारंगी–लाल (रक्ताभ) प्रतीत होता है।

प्रश्न संख्या (13) किसी अंतरिक्षयात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है?

उत्तर:

जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल से गुजरता है, तो वायु के सूक्ष्म कण अन्य रंगों की अपेक्षा नीले रंग को अधिक प्रबलता से प्रकीर्ण करते हैं, जिसके कारण प्रकीर्णित नीला प्रकाश हमारी आँखों में पहुँचता है, और हमें स्वच्छ आकाश नीले वर्ण का दिखता है।

अंतरिक्ष में वायुमंडल नहीं होता है। वायुमंडल नहीं होने के कारण अंतरिक्ष में प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं होता है। इस कारण से किसी अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला प्रतीत होता है।

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *