कुनलुन पर्वत

कुनलुन पर्वत शृंखला (चीनी: 昆仑山, कुनलुन शान; मंगोलियाई: Хөндлөн Уулс, ख़ोन्दलोन ऊल्स) मध्य एशिया में स्थित एक पर्वत शृंखला है। ३,००० किलोमीटर से अधिक चलने वाली यह शृंखला एशिया की सब से लम्बी पर्वतमालाओं में से एक गिनी जाती है। कुनलुन पर्वत तिब्बत के पठार के उत्तर में स्थित हैं और उसके और तारिम द्रोणी के बीच एक दीवार बनकर खड़े हैं। पूर्व में यह उत्तर चीन के मैदानों में वेई नदी के दक्षिण-पूर्व में जाकर ख़त्म हो जाते हैं। कुनलुन पर्वत भारत के अक्साई चिन इलाक़े को भी तारिम द्रोणी से अलग करते हैं, हालांकि वर्तमान में अक्साई चिन क्षेत्र चीन के क़ब्ज़े में है। इस पर्वतमाला में कुछ ज्वालामुखी भी स्थित हैं।[1]

भूगोल

कुनलुन पर्वत ताजिकिस्तान की पामीर पर्वतमाला से शुरू होकर पूर्व को चलते हैं, जहाँ यह चीन द्वारा नियंत्रित तिब्बत और शिञियांग के क्षेत्रों की सीमा के साथ-साथ चलकर पूर्व में चिंग हई प्रांत में अंत होते हैं। यह तारिम द्रोणी, टकलामकान रेगिस्तान और गोबी रेगिस्तान की दक्षिणी सीमा भी बनाते हैं। कुनलुन पहाड़ों से कुछ महत्वपूर्ण नदियाँ शुरू होती हैं, जैसे कि काराकाश नदी और युरुंगकाश नदी, जो ख़ोतान के मरुद्यान (ओएसिस) से होकर टकलामकान रेगिस्तान की रेतों में ग़ायब हो जाती हैं।

कुनलुन शृंखला की सब से ऊँची छोटी ७,१६७ मीटर ऊँचा कुनलुन देवी (Kunlun Goddess, कुनलुन गॉडॅस) पर्वत है। पश्चिम की ओर दो इस से भी ऊँचे पहाड़ हैं – कोन्गुर ताग़ (७,६४९ मीटर) और मुज़ताग़ अता (७,५४६ मीटर) – हालांकि बहुत से भूवैज्ञानिक इन्हें कुनलुन की बजाए पामीर पर्वतों का हिस्सा मानते हैं।

कुनलुन पर्वतों से बहुत ही कम सड़कें निकलती हैं – एक तो राजमार्ग २१९ है जो शिञियांग के येचेंग शहर से तिब्बत के ल्हात्से शहर तक जाता है। उस से पूर्व में राजमार्ग १०९ है जो तिब्बत की राजधानी ल्हासा से चिंग हई प्रांत के गोलमुद शहर तक जाता है।

इन्हें भी देखें

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