कोसी परियोजना

कोसी परियोजना भारत की एक प्रमुख नदी घाटी परियोजना है।

पृष्ठभूमि

जब सप्तकोशी नदी की बाढ बिहार राज्य मेँ तवाही मचाना शुरू किया तब से अंग्रेज शासकों ने ही कोसी तटबन्ध निर्माण कर बाढ नियन्त्रण की अध्ययन शुरू किया था। “१७७९ आसपास मेजर जे. रेनल ने, सन् १८६३ मा जेम्स फरगुसन और उसकी बाद एफए सिलिङफिल्ड ने कोसी बाढकी अध्ययन की। जब १८६९-७० की बाढ बिहारकी पूर्णियामे ताण्डव रचा तब अंग्रेज कोसी तटबन्ध बनाकर बाढी नियन्त्रण की निष्कर्षमे पहुँचे थे।”[1]

बृटिसने नेपालकी उदयपुर जिलाकी बराह क्षेत्रमें बाँध निर्माण की प्रस्ताव लाया। नेपालकी राणा प्रधानमन्त्री बीरसम्शेर बराहक्षेत्रसे ५-६ किलोमीटर निचे चतरामें बाँध निर्माणके लिए राजी हुए। [2] बृटिस राज खतम होनेके बाद में स्वतन्त्र भारत सरकार इस प्रस्तावको और घनीभूत रूपमें उठाया। विभिन्न चरणकी छलफल और अध्ययन हो के बीपी कोइराला प्रधानमन्त्री होते वक्त कोशी और गण्डक नदीमें बाँध निर्माणकी सम्झौते हुए। नेपाल भारत सीमावर्ती हनुमाननगरमें सन् १९६५ को कोशी बाँध निर्माण सम्पन्न हुवा।

परियोजना का प्रारम्भ

६ अप्रैल १९४७ को निर्मलि मे बाढ़ पीड़ितों का सम्मेलन हुआ था। जिसमे लगभग ६० हजार लोग सम्मिलित हुए थे। इस सम्मेलन मे राजेन्द्र प्रसाद, श्रीकृष्ण सिंह, गुलज़ारीलाल नन्दाललित नरायण, हरिलाल आदि देश के बड़े नेता शामिल हुए थे। योजना मन्त्री सी एच भाभा ने कोसी पर बराह मे बाँध के निर्माण की घोषणा की। इससे १२ लाख हेक्टर सिचाई होगी त्तथा ३३०० मेगावाट बिजली बनेगा। १९५४ मे औपचारिक रूप से कोसी परियोजना का निर्माण का काम शुरु कर दिया। उस समय माना गया था कि १५ वर्ष में बाढ़ की समस्या पर काबू पा लिया जायेगा।

नदी

कोसी परियोजना कोसी नदी पर है।

स्थान

यह परियोजना बिहार और नेपाल की है।

उद्देश्य

= लाभान्वित होने वाले राज्य

=

बाहरी कड़ियाँ

संदर्भ सूची

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *