भारतीय आम चुनाव, 2014

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लोक सभा की सभी ५४३ सीटें
बहुमत के लिए चाहिए २७२
जनमत सर्वेक्षण
मतदान %६६.३८ %
 नेतानरेन्द्र मोदीराहुल गांधीपार्टीभाजपाकांग्रेसगठबंधनराजगसंप्रगनेता बने१० जून २०१३१९ जनवरी २०१३नेता की सीटवडोदरावाराणसीअमेठीपिछला चुनाव१५९ सीटें, २४.६३%२६२ सीट, ३७.२२%सीटें जीतीं३३६५९सीटों में बदलावIncrease२०४▼२०३लोकप्रिय मत१७१,४५९,२८६१०६,७६०,००१प्रतिशत३१.१%१९.४ %उतार-चढ़ावIncrease६.४७%Decrease १७.८२ %
भारतीय आम चुनाव के परिणाम का मानचित्र
प्रधानमंत्री चुनाव से पहले
मनमोहन सिंह
कांग्रेसनिर्वाचित प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी
भाजपा

भारत में सोलहवीं लोक सभा के लिए आम चुनाव ७ अप्रैल से १२ मई २०१४ तक ९ चरणों में हुए। मतगणना १६ मई को हुई।[1] इसके लिए भारत की सभी संसदीय क्षेत्रों में वोट डाले गये। वर्तमान में पंद्रहवी लोक सभा का कार्यकाल ३१ मई २०१४ को ख़त्म हो रहा है।[2] ये चुनाव अब तक के इतिहास में सबसे लंबा कार्यक्रम वाला चुनाव था। यह पहली बार होगा, जब देश में ९ चरणों में लोकसभा चुनाव हुए। निर्वाचन आयोग के अनुसार ८१.४५ करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।[3][4]

सभी नौ चरणों में औसत मतदान ६६.३८% के आसपास रहा जो भारतीय आम चुनाव के इतिहास में सबसे उच्चतम है।[5] चुनाव के परिणाम १६ मई को घोषित किये गये। ३३६ सीटों के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सबसे बड़ा दल और २८२ सीटों के साथ भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने ५९ सीटों पर और कांग्रेस ने ४४ सीटों पर जीत हासिल की।[6]

बीजेपी ने केवल 31.0% वोट जीते, जो आजादी के बाद से भारत में बहुमत वाली सरकार बनाने के लिए पार्टी का सबसे कम हिस्सा है,[7] जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का संयुक्त वोट हिस्सा 38.5% था। 1984 के आम चुनाव के बाद बीजेपी और उसके सहयोगियों ने सबसे बड़ी बहुमत वाली सरकार बनाने का अधिकार जीता, और यह चुनाव पहली बार हुआ जब पार्टी ने अन्य पार्टियों के समर्थन के बिना शासन करने के लिए पर्याप्त सीटें जीती हैं। आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी की सबसे खराब हार थी। भारत में आधिकारिक विपक्षी दल बनने के लिए, एक पार्टी को लोकसभा में 10% सीटें (54 सीटें) हासिल करनी होंगी; हालांकि, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस नंबर को हासिल करने में असमर्थ थी। इस तथ्य के कारण, भारत एक आधिकारिक विपक्षी पार्टी के बिना बना हुआ है।

पृष्ठभूमि

संवैधानिक आवश्यकता से, लोक सभा के चुनाव हर पांच साल की अवधि पर आयोजित किये जाने चाहिए। १५ वीं लोकसभा के गठन के लिए पिछला चुनाव अप्रैल से मई २००९ में आयोजित किया गया था। १५ वीं लोकसभा की अवधि ३१ मई २०१४ को स्वाभाविक रूप से समाप्त हो गयी। चुनाव का आयोजन भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाता है। बड़े चुनावी आधार और सुरक्षा कारणों को संभालने के लिए चुनाव कई चरणों में आयोजित किये जाते हैं।

२००९ में पिछले आम चुनाव के बाद से, अन्ना हजारेअरविन्द केजरीवाल और बाबा रामदेव द्वारा भारतीय भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने गति और राजनीतिक हित प्राप्त किये हैं। भाजपा भी विभिन विधान सभा चुनावों में बहुमत जीतकर आम चुनाव के लिए आशान्वित है। गोवा चुनाव में भाजपा को बहुमत प्राप्त हुआ और पंजाब में सत्ता विरोधी लहर की एक परंपरा के बावजूद जीत हासिल की। हालांकि, भाजपा उत्तराखंडहिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के दक्षिणी गढ़ में सत्ता खो दी।

दिसंबर २०१३ में आयोजित हुए चारों विधान सभा चुनावों में भाजपा ने जीत प्रापत की। भाजपा ने दिल्ली में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। कांग्रेस को चुनावों हरा कर भाजपा ने राजस्थान में दो-तिहाई से ज्यादा सीट प्राप्त की। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा ने तीसरी बार सरकार बनाई।

आयोजन

चुनाव खर्च की सीमा में वृद्धि

प्रति उम्मीदवार चुनाव खर्च की सीमा को बढ़ने के प्रस्ताव को भारतीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। बड़े राज्यों में यह सीमा ₹40 लाख से बढ़ाकर ₹70 लाख और छोटे राज्यों और दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र प्रशसित क्षेत्रों में सीमा बढ़ाकर ₹54 लाख कर दी गयी।[8]

चुनाव कार्यक्रम

भारतीय आम चुनाव, 2014 के लिए निर्वाचन तिथियाँ

5 मार्च २०१४ को मुख्य निर्वाचन आयुक्त वी एस संपथ ने चुनाव कार्यक्रम की तारीखों और तैयारियों का ऐलान किया। कुल 9 चरणों में मत डाले जाएँगे। 7 अप्रैल को पहले, 9 अप्रैल को दूसरे, 10 अप्रैल को तीसरे, 12 अप्रैल को चौथे, 17 अप्रैल को पाँचवें, 24 अप्रैल को छठे, 30 अप्रैल को सातवें, 7 मई को आठवें, 12 मई को नौवें चरण का मतदान होगा।[9]

[दिखाएँ]क्षेत्रकुल संसदीय क्षेत्रमतदान तिथि और संसदीय क्षेत्रों की संख्या[10]

* − छात्र संगठनों के बंद के कारण मिजोरम में 11 अप्रैल को मतदान हुआ।[11]

दल तथा गठबंधन

पार्टीसीटें लड़ीं
भारतीय जनता पार्टी427
तेलुगु देशम पार्टी30
शिवसेना20
देशीया मुरपोक्कु द्रविड़ कलगम14
शिरोमणि अकाली दल10
पट्टाली मक्कल कच्ची8
मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कझगम7
लोक जनशक्ति पार्टी7
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी3
अपना दल2
हरियाणा जनहित कांग्रेस2
स्वाभिमानी पक्ष2
इंधिया जननयागा काची1
कोनगुनाडु मक्कल देसिया काची1
ऑल इंडिया एन॰आर॰ कांग्रेस 1
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (अठवले)1
राष्ट्रीय समाज पक्ष1
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (बोल्शेविक)1
केरल कांग्रेस (राष्ट्रवादी)1
नेशनल पीपुल्स पार्टी1
नागा पीपुल्स फ्रंट1
मिजो नेशनल फ्रंट1
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन542

१३ सितम्बर २०१३ को भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए अपने उम्मीदवार के लिए नामजद किया।[12] कांग्रेस पार्टी ने १७ जनवरी २०१४ एलान किया की राहुल गांधीसोनिया गांधी के बेटे, कांग्रेस के चुनाव अभियान के नेता होंगे. हालांकि, उन्हें स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार नामित नहीं किया गया।[13]

भाजपा के मुख्य सहयोगी महाराष्ट्र में शिवसेना, पंजाब में शिरोमणि अकाली दल, तीन तमिल पार्टियों देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके), मक्कल काची पात्तली (पीएमके) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम मरुमलार्ची (एमडीएमके) ने तमिलनाडु में और आंध्र प्रदेश में तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) हैं। शिवसेना, शिवसेना, एक चरम हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी है और शिरोमणि अकाली दल, जो परंपरागत सिख पार्टी है, पंजाब में कांग्रेस पार्टी की विरोधी है और भाजपा के स्वाभाविक सहयोगी हैं। अन्य दलों में यह मामला नहीं है। तेलुगू देशम २००९ के पिछले चुनाव में वामपंथी तीसरे मोर्चे के हिस्से के रूप में उतरी और २०१४ में रागज में शामिल हो कर आंध्र प्रदेश में संयुक्त उम्मीदवारों पर सहमत हो गयी। भाजपा के साथ एक समझौते के अंतरगत वर्तमान चुनाव की शुरुआत से पहले ही यह सहमति बनी। भाजपा आंध्र प्रदेश के ४२ निर्वाचन क्षेत्रों में से १२ पर उम्मीदवार उतारेगी जिसमे तेलंगाना से आठ उम्मीदवार होंगे। तमिलनाडु में भाजपा पांच तमिल पार्टियों के सहित एक गठबंधन में शामिल हुई। डीएमडीके १४ निर्वाचन क्षेत्रों पर, भाजपा और पीएमके आठ पर और सात पर एमडीएमके उम्मीदवार उतारेगी।[14][15][16][17]

मुद्दे

भ्रष्टाचार

भारत में ‘भ्रष्टाचार‘ बड़े पैमाने पर है। भारत ट्रान्सपैरेंसी इंटरनेशनल के भ्रष्टाचार धारणाएं सूचकांक में 179 देशों में से 95 वें स्थान पर है। लेकिन भारत के स्कोर में लगातार सुधार हुआ है जो 2002 में 2.7 से 2011 में 3.1 हो गया।[18] ऐतिहासिक रूप से, भ्रष्टाचार, भारतीय राजनीति और नौकरशाही का एक व्यापक पहलू की भूमिका में है।[19]

भारत में भ्रष्टाचार घूसकर अपवंचन और गबन, आदि के रूप में उपस्थित है। २००९ में पिछले भारतीय आम चुनाव के बाद से 2011 भारतीय भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और अन्ना हजारे और बाबा रामदेव द्वारा अन्य इसी तरह के आंदोलनों के द्वारा भ्रष्टाचार रोकने के प्रयास हुए हैं।[20] भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के कार्यकर्ता अन्ना हजारे द्वारा जंतर मंतर,नई दिल्ली में शुरू की गयी भूख हड़ताल में भ्रष्टाचार को कम करने के लिए विधायी उद्देश्य के साथ अगस्त 2011 में भारत सरकार के माध्यम से जन लोकपाल विधेयक को पारित करने की शुरुआत की गयी। रामदेव के नेतृत्व में एक अन्य उद्देश्य से स्विस और अन्य विदेशी बैंकों से काला धन के प्रत्यावर्तन के लिए आंदोलन किये गए।

सर्वेक्षण

चुनाव पूर्व सर्वेक्षण

मुख्य लेख: भारतीय आम चुनाव, 2014 के लिए चुनाव पूर्व सर्वेक्षण

महीनासन्दर्भसर्वेक्षण संस्थानमूने का आकार
संप्रगराजगतीमोअन्य
जनवरी-मार्च 2013[21]टाइम्स नाऊ -सीवोटरनमूने का आकार नहीं दिया128184
अप्रैल-मई 2013[22]हेडलाइन टुडे -सीवोटर120,000132 (मोदी के बिना)
155 (मोदी के साथ)
179(मोदी के बिना)
220 (मोदी के साथ)
मई 2013[23]एबीपी न्यूज़ -नीलसन33,408136206
जुलाई 2013[24]द वीक – हंसा रिसर्चनमूने का आकार नहीं दिया184197162
जुलाई 2013[25]सीएनएन-आईबीएन और द हिन्दू सीएसडीएस के साथ19,062[26]149-157172-180208-224
जुलाई 2013[27]टाइम्स नाऊ –इंडिया टुडे -सीवोटर36,914134 (कांग्रेस 119)156 (भाजपा 131)
अगस्त-अक्टूबर 2013[28]टाइम्स नाऊ –इंडिया टीवी -सीवोटर24,284117 (कांग्रेस 102)186 (भाजपा 162)240
दिसम्बर 2013–जनवरी २०१४[29]इंडिया टुडे- सीवोटर21,792103 (कांग्रेस 91)212 (भाजपा 188)228
दिसम्बर 2013–जनवरी २०१४[30]एबीपी न्यूज़ -नीलसन64,006[31]101 (कांग्रेस 81)226 (भाजपा 210)216
जनवरी २०१४[32]सीएनएन-आईबीएन -लोकनीति -सीएसडीएस18,591[33]107 – 127
(कांग्रेस 92 – 108)
211 – 231
(भाजपा 192 – 210)
205
जनवरी-फरवरी २०१४[34]टाइम्स नाऊ –इंडिया टुडे -सीवोटर14,000[35]101 (कांग्रेस 89)227 (भाजपा 202)215
फरवरी २०१४[31]एबीपी न्यूज़ -नीलसन29,0009223629186
फरवरी २०१४[36]सीएनएन-आईबीएन -लोकनीति -सीएसडीएस29,000119 – 139
(कांग्रेस 94 – 110)
212 – 232
(भाजपा 193 – 213)
105 – 193
मार्च २०१४[37]एनडीटीवी – हंसा रिसर्च46,57112923255130
मार्च २०१४[37]एनडीटीवी – हंसा रिसर्च46,571123259171
मार्च २०१४[38]सीएनएन-आईबीएन -लोकनीति -सीएसडीएस20,957111-123234-246170-180

चुनाव बाद सर्वेक्षण

प्रकाशन तिथिसन्दर्भसर्वेक्षण संस्था
राजगसंप्रगअन्य
12 मई 2014[39]सीएनएन-आईबीएन – लोकनीति – सीएसडीएस276 (±6)97 (±5)148 (±23)
[39][40]इंडिया टुडे – सिस्रो272 (±11)115 (±5)156 (±6)
[39][41]न्यूज़ 24 – टुडेज़ चाणक्या340 (±14)70 (±9)133 (±11)
[39]टाइम्स नाऊ – ओआरजी249148146
[39][42]एबीपी न्यूज़ – नीलसन27497165
[39]इंडिया टीवी – सीवोटर289101148
14 मई 2014[43][44]एनडीटीवी – हंसा रिसर्च279103161

मतदान

चरण १ – ७ अप्रैल

पहले चरण के मतदान असम की पांच और त्रिपुरा की एक सीट पर हुए। मतदान प्रतिशत क्रमश: ७२.५ और ८४ फीसदी रहा।[45]चरण २ – ९ और ११ अप्रैल

नागालैंड में ८२.५%, अरुणाचल प्रदेश में ७१%, मेघालय में ६६% तथा मणिपुर में ७०% लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।[46][47] छात्र संगठनों के बंद के कारण मिजोरम में चुनाव ११ अप्रैल तक टल गया।[11] यहाँ पर ६०% लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।[48]चरण ३ – १० अप्रैल

तीसरे चरण का मतदान १० अप्रैल को ९१ सीटों पर हुआ। केरल में ७६%, दिल्ली में ६४%, मध्य प्रदेश में ५५.९८%, महाराष्ट्र में ५४.१३%, उत्तर प्रदेश में ६५%, हरियाणा में ७३%, झारखंड में ५८% तथा जम्मू में ६६.२९% मतदान हुआ।[49]चरण ४ – १२ अप्रैल

चौथे चरण में गोवा में ७५%, असम में ७५%, त्रिपुरा में ८१.८% तथा सिक्किम में ७६% मतदान हुआ।[50]चरण ५ – १७ अप्रैल

इस चरण में १२१ सीटों पर मतदान हुआ। उत्तर प्रदेश में ६२%, पश्चिम बंगाल में ८०%, ओडिशा में ७०% से ज्यादा, जम्मू और कश्मीर में ६९%, मध्य प्रदेश में ५४% और झारखंड में ६२% मतदान हुआ। महाराष्ट्र में ६१.७%, मणिपुर में ७४%, कर्नाटक में ६५%, राजस्थान में ६३.२५%, छत्तीसगढ़ में ६३.४४% और बिहार में ५६% मतदान हुआ।[51]चरण ६ – २४ अप्रैल

इस चरण में ११७ सीटों पर मतदान हुआ। उत्तर प्रदेश की १२ सीटों में ५८.५८%, राजस्थान की ५ सीटों में ५९.२%, जम्मू और कश्मीर की १ सीट में २८%, तमिलनाडु की सभी ३९ सीटों में ७२.८%, बिहार की ७ सीटों में ६०%, महाराष्ट्र की १९ सीटों में ५५.३३%, पश्चिम बंगाल की ६ सीटों में ८२%, असम की ६ सीटों में ७७.०५%, मध्य प्रदेश की १० सीटों में ६४.४%, झारखंड की ४ सीटों में ६३.४% पुदुच्चेरी की एकमात्र सीट में ८२.१३% और छत्तीसगढ़ की ७ सीटों में ६३.४४% मतदान हुआ।। छठवें चरण के साथ ही मप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड की सभी सीटों के लिए मतदान पूरा हो चुका है। इसके साथ ही ३४९ सीटों पर मतदान हो चुका है।[52]चरण ७ – ३० अप्रैल

इस चरण में ८९ सीटों पर मतदान हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार गुजरात की सभी २६ सीटों के लिए हुए मतदान में कुल ६२ प्रतिशत वोट पड़े। नव गठित राज्य तेलंगाना की सभी १७ सीटों के लिए कुल ७० प्रतिशत वोट पड़े हैं। पंजाब की १३ सीटों के लिए कुल ७३ प्रतिशत मतदान हुआ है। उत्तर प्रदेश की १४ सीटों के लिए हुए मतदान में ५७.१ प्रतिशत मत पड़े। बिहार की सात सीटों के लिए ५७.७४ प्रतिशत मतदान हुआ है। पश्चिम बंगाल की नौ सीटों पर कुल ८१.३५ प्रतिशत मतदान हुआ है। जम्मू और कश्मीर की श्रीनगर सीट पर २५.६२ प्रतिशत, दादरा और नगर हवेली सीट पर ८५ प्रतिशत और दमन और दीव सीट पर ७६ प्रतिशत मतदान हुआ है।[53]]चरण ८ – ७ मई

इस चरण में कुल ६४ सीटों पर मतदान हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में ८०.५१% मतदान दर्ज किया गया। आंध्र प्रदेश के सीमांन्ध्र क्षेत्र की २५ सीटों पर ७६%, उत्तर प्रदेश की १५ सीटों पर ५५.५२%, बिहार की सात सीटों पर ५८%, जम्मू और कश्मीर की दो सीटों पर ५०% मतदान हुआ। उत्तराखंड की सभी पांच सीटों पर ६२% और हिमाचल प्रदेश की सभी चार सीटों पर ६५% मतदान हुआ। आठवें चरण के साथ ही १६वीं लोकसभा की ५४३ में से ५०२ सीटों के लिए यानी ९२ फ़ीसदी मतदान संपन्न हो गया है।[54]चरण ९ – १२ मई

इस चरण में कुल ४१ सीटों पर मतदान हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश की १८ सीटों पर औसतन ५४.२१ फीसद मतदान हुआ। पश्चिम बंगाल की १७ सीटों पर ७९.९६ फीसदी मतदान हुआ। बिहार में लोकसभा चुनाव के छठे और अंतिम चरण के तहत छह संसदीय सीटों के लिए आज संपन्न मतदान के दौरान ५६.६७ फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया, जो २००९ के लोकसभा चुनाव की तुलना में करीब १२ प्रतिशत अधिक रहा। इसके साथ ही मतदान के सभी चरण समाप्त हो गये। इस बार चुनाव के सभी नौ चरणों में कुल मिलाकर ६६.३८ फीसदी मतदान हुआ, जो लोकसभा चुनावों में अब तक का सर्वाधिक मतदान है। पिछला सर्वाधिक मतदान १९८४ में दर्ज किया गया था जब ६४.०१ प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। २००९ के आम चुनाव में ५८.१९ फीसदी वोट पड़े थे।[55]

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन

भारत के चुनाव आयोग के मुताबिक, 2009 में पिछली आम चुनाव के बाद से 81.45 करोड़ लोग मतदान के लिए पात्र थे, जिससे यह दुनिया में सबसे बड़ा चुनाव बना।[56] कुल योग्य मतदाताओं में से लगभग 23.1 मिलियन या 2.7% आयु 18-19 वर्ष की आयु के थे।

कुल मिलाकर 930,000 मतदान केंद्रों में 1.4 मिलियन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन थीं। वोटर वेरीफ़ाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) प्रणाली जो ईवीएम स्लिप के निर्माण से प्रत्येक वोट डालने के लिए सक्षम बनाता है, को लखनऊ, गांधीनगर, बैंगलोर दक्षिण, चेन्नई सेंट्रल, जादवपुर, रायपुर, पटना साहिब और मिजोरम के 8 निर्वाचन क्षेत्रों में पेश किया गया था। एक पायलट प्रोजेक्ट। इसके अलावा, मतदान केंद्रों पर अंधा के लिए ब्रेल मतपत्र की व्यवस्था की गई। चुनाव के पैमाने के लिए 11 लाख सिविल सेवकों और 5.5 मिलियन नागरिक कर्मचारियों को चुनाव संभालते हैं। यह पहला चुनाव था जिसमें “ऊपर से कोई भी” विकल्प नहीं था और अनिवासी भारतीयों को वोट देने की अनुमति थी; हालांकि केवल भारत में ही। चुनाव के दौरान सुरक्षा बढ़ा दी गई, खासकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) (सीपीआई (माओवादी)) ने चुनाव के बहिष्कार के लिए बुलाया। 12 अप्रैल को, भले ही इस दिन कोई वोट नहीं था, छत्तीसगढ़ में एक वाहन ने सीपीआई (माओवादी) लैंडमिन को मारा जिससे दो बस ड्राइवरों और पांच चुनाव अधिकारियों की मौत हो गई, जिसके परिणामस्वरूप कुट्रू से बीजापुर तक की तैयारी के दौरान चार और घायल हो गए। मतदान के पांचवें चरण के लिए उसी दिन, एक घंटे के भीतर, उन्होंने एक वाहन पर हमला किया जिसके परिणामस्वरूप दरभा वन में पांच अर्धसैनिक सैनिकों की मौत हो गई। भारत के चुनाव आयोग के अनुमान के मुताबिक देश के इतिहास में चुनाव का सबसे लंबा और सबसे महंगी आम चुनाव था, जिसके अनुसार चुनाव में खजाने पर 3500 करोड़ रुपये (यूएस $ 577 मिलियन) का खर्च हुआ, जिसमें सुरक्षा के लिए खर्च किए गए खर्च और व्यक्तिगत राजनीतिक दलों। सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के मुताबिक, दलों को चुनाव में 30,500 करोड़ रुपये (यूएस 5 अरब डॉलर) खर्च करने की उम्मीद थी। यह 2009 की पिछली चुनाव में खर्च की गई तीन गुनी राशि थी, और तब वह 2012 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में 7 अरब अमेरिकी डालर के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा था।

परिणाम

16 मई 2014 को हुई मतगणना के अनुसार भाजपा 282 सीटें प्राप्त कीं। यह संख्या 545 सदस्यीय लोकसभा में आधी संख्या यानी 272 से अधिक है। लोकसभा के 543 सदस्यों का निर्वाचन होता है, जबकि दो सदस्यों को नामित किया जाता है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में राजग 336 सीटों पर जीत हासिल की। भाजपा ने पिछले 30 वर्षों के दौरान लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत हासिल करने वाली पहली पार्टी बन कर उभरी है।[57]

33614760
राजगअन्य दलसंप्रग

चुनाव पूर्व गठबंधन अनुसार चुनाव परिणाम का मानचित्र

पार्टीभाजपाकांग्रेसएडीएमकेतृणमूल कांग्रेसबसपासपा
नेतानरेंद्र मोदीराहुल गांधीजयललिताममता बनर्जीमायावतीमुलायम सिंह यादव
वोट प्रतिशत31.0%,17163768419.3%,1069353113.3%,181158253.8%,212596814.1%,229448413.8%,21259681
सीटें282 (51.9%)44 (8.1%)37 (6.8%)34 (6.2%)0 (0.0%)5 (0.9%)
282 / 54344 / 54337 / 54334 / 5430 / 5435 / 543

विभिन्न दलों का मत प्रतिशत██ भाजपा (31.0%)██ कांग्रेस (19.3%)██ बसपा (4.1%)██ तृकां (3.8%)██ सपा (3.4%)██ अन्नाद्रमुक (3.3%)██ माकपा (3.3%)██ अन्य (31.8%)

पार्टीसीटें जीतीं[6]बदलावमत प्रतिशतबदलाव
भारतीय जनता पार्टी282Increase16631.0%Increase12.2%
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस44Decrease16219.3%Decrease9.3%
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम37Increase283.3%Increase1.6%
सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस34Increase153.8%Increase0.6%
बीजू जनता दल20Increase61.7%Increase0.1%
शिवसेना18Increase71.9%Increase0.3%
तेलुगू देशम पार्टी16Increase102.5%
तेलंगाना राष्ट्र समिति11Increase91.2%Increase0.6%
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)9Decrease73.2%Decrease2.1%
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी9नई पार्टी2.5%नई पार्टी
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी6Decrease31.6%Decrease0.4%
लोक जनशक्ति पार्टी6Increase60.4%Decrease0.1%
समाजवादी पार्टी5Decrease183.4%
आम आदमी पार्टी4नई पार्टी2.0%नई पार्टी
राष्ट्रीय जनता दल41.3%
शिरोमणि अकाली दल40.7%Decrease0.3%
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट3Increase20.4%Decrease0.1%
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी3नई पार्टी0.2%नई पार्टी
जम्मू और कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी3Increase3N/AN/A
जनता दल (यूनाइटेड)2Decrease181.1%Decrease0.4%
जनता दल (सेकुलर)2Decrease10.7%Decrease0.1%
इंडियन नेशनल लोकदल2Increase20.5%Increase0.2%
झारखंड मुक्ति मोर्चा20.3%Decrease0.1%
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग2Increase20.2%Increase0.2%
अपना दल2Increase20.2%
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी1Decrease30.8%Decrease0.6%
पट्टाली मक्कल कच्ची1Increase10.3%Decrease0.2%
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी1Decrease10.3%Decrease0.1%
स्वाभिमानी पक्ष10.2%Increase0.1%
नागा पीपुल्स फ्रंट10.2%
निर्दलीय3Decrease63.0%Decrease2.2%
अन्य दल5
कुल543

२०१४ के लोकसभा चुनाव की विशिष्टताएँ

  • सर्वाधिक मतदान (६६.४%)
  • सबसे अधिक ख़र्चीला
  • अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव की तर्ज पर लड़ा गया। भाजपा ने नरेन्द्र मोदी को प्रधान मंत्री का प्रत्याशी घोषित किया था।
  • सर्वाधिक महिलाएँ विजयी (६१)
  • उत्तर भारत के क्षेत्रीय दलों (सपा, बसपा, जदयू, आरजेडी आदि) की अभूतपूर्व पराजय। बसपा को एक भी सीट नहीं।
  • १९५२ को छोडकर सबसे कम मुसलमान सांसद (२२)। उत्तर प्रदेश सहित 27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार लोकसभा नहीं पहुंच सका। 1962 के बाद से हुए आम चुनावों के बाद से यह संख्या सबसे कम है हालांकि 1952 के पहले आम चुनाव में केवल 11 मुसलमान ही जीते थे।
  • भाजपा को अब तक की सर्वाधिक सीटें (२८२), अपने दम पर साधारण बहुमत प्राप्त किया।
  • कांग्रेस को अब तक का सबसे कम सीटें (४४)

इन्हें भी देखें

[छुपाएँ]देवासं भारतीय चुनाव
आम चुनाव1951 · 1957 · 1962 · 1967 · 1971 · 1977 · 1980 · 1984 · 1985 · 1989 · 1991 · 1992 · 1996 · 1998 · 1999 · 2004 · 2009 · 2014
राज्य चुनाव1952 · 1998 · 2003 · 2004 · 2005 · 2006 · 2007 · 2008  · 2009  · 2010 · 2011 · 2012 · 2013  · 2014 · 2015 · 2016 · 2017

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