भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज

भीखाजी कामा श्रीमती भीखाजी जी रूस्तम कामा (मैडम कामा) ने जर्मनी के स्टटगार्ट नगर में 22 अगस्त 1907 में हुई सातवीं अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस में भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज फहराया था। यह प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज मेडम कामाजी और महान क्रन्तिकारी सरदारसिंह राणा दोनों ने मिलके बनाया था।


भीखाजी ने वर्ष 1907 में अपने सहयोगी महान क्रन्तिकारी सरदारसिंह राणा की मदद से भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज का डिजाइन तैयार किया था। उन्होंने एक ही रात में हाथो द्वारा सिलाई करके यह प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज का निर्माण किया था।

कामा ने 22 अगस्त 1907 को जर्मनी में हुई इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांफ्रेंस में भारतीय स्वतंत्रता के ध्वज भारत के प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज को बुलंद किया था।

भीकाजी द्वारा लहराए गए झंडे में देश के विभिन्न धर्मों की भावनाओं और संस्कृति को समेटने की कोशिश की गई थी। उसमें इस्लाम, हिंदुत्व और बौद्ध मत को प्रदर्शित करने के लिए हरा, पीला और लाल रंग इस्तेमाल किया गया था। साथ ही उसमें बीच में देवनागरी लिपि में वंदे मातरम लिखा हुआ था।

मैडम कमा और महान क्रन्तिकारी सरदारसिंह राणा द्वारा निर्मित यह भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज आज भी गुजरात के भावनगर स्थित सरदारसिंह राणा के पौत्र और भाजपा नेता राजुभाई राणा ( राजेन्द्रसिंह राणा ) के घर सुरक्षित रखा गया है |

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