मानवशास्त्र

मानवशास्त्र
विषय
पुरातत्वशास्त्रीय  • जैविक  • सांस्कृतिक  • भाषाई  • सामाजिक
सामाजिक और सांस्कृतिक उपक्षेत्र
अनुप्रयुक्त  • कला  • संज्ञानात्मक  • सायबॉर्ग  • विकास  • अंकीय  • पारिस्थितिकीय  • पर्यावरणी  • आर्थिक  • राजकीय अर्थशास्त्र  • ऐतिहासिक  • नारी अधिकारवादी  • नातेदारी  • विधि  • मीडिया  • चिकित्सा  • संगीतशास्त्र  • पोषणज  • राजनीतिक  • मनोवैज्ञानिक  • लोक  • धार्मिक  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी  • Transpersonal  • नगरीय  • दृष्‍टि
भाषाई उपक्षेत्र
वर्णनात्मक  • Ethno-  • ऐतिहासिक  • लाक्षणिक  • समाजभाषाविज्ञान  • Ethnopoetics
पुरातात्त्विक और
जैविक उपक्षेत्र
Anthrozoological  • जैव-सांस्कृतिक  • विकासवादी  • नारी अधिकारवादी  • न्यायिक विज्ञान  • अनुसमुद्री  • पुरामानवशास्त्र
शोध framework
नृवंशविज्ञान  • मानव जाति विज्ञान  • Cross-cultural comparison  • सहभागी प्रेक्षण  • ऑनलाइन नृवंशविज्ञान  • पूर्णतावाद  • स्वतुल्यता  • स्थूल वर्णन  • सांस्कृतिक सापेक्षवाद  • Ethnocentrism  • व्यवहारपरक  • मानवशास्त्र का इतिहास
प्रमुख सिद्धांत
Actor-network और गठजोड़ सिद्धांत  • Cross-cultural studies  • सांस्कृतिक भौतिकवाद  • सांस्कृतिक सिद्धांत  • नारी अधिकारवादी  • प्रकार्यवाद  • व्याख्यात्मक  • निष्पादन अध्ययन  • राजकीय अर्थशास्त्र  • अभ्यास सिद्धांत  • संरचनावाद  • Post-संरचनावाद  • तंत्र सिद्धांत
मुख्य अवधारणा
क्रम-विकास  • समाज  • संस्कृति  • प्रागितिहास  • सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास  • रिश्तेदारी और वंश  • लिंग  • प्रजाति  • संजातीयता  • विकास  • उपनिवेशवाद  • उत्तर निवहता  • मूल्य
सूची
रूपरेखा  • ग्रंथसूची  • जरनल  • वर्ष  • संगठन  • राष्ट्रीयता द्वारा मानवविज्ञानी
 मानवशास्त्र प्रवेशद्वार
देवासं

चित्र:The Forensic Science Mu.jpgबैंकाक के फोरेंसिक विज्ञान संग्रहालय में मानवशास्त्रीय वस्तुएँ

मानवशास्त्र या नृविज्ञान (en:Anthropologyमानव, उसके जेनेटिक्ससंस्कृति और समाज की वैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से अध्ययन है। इसके अंतर्गत मनुष्य के समाज के अतीत और वर्तमान के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाता है। सामाजिक नृविज्ञान और सांस्कृतिक नृविज्ञान के तहत मानदंडों और समाज के मूल्यों का अध्ययन किया जाता है। भाषाई नृविज्ञान में पढ़ा जाता है कि कैसे भाषा, सामाजिक जीवन को प्रभावित करती है। जैविक या शारीरिक नृविज्ञान में मनुष्य के जैविक विकास का अध्ययन किया जाता है।

नृविज्ञान एक वैश्विक अनुशासन है, जिसमे मानविकी, सामाजिक और प्राकृतिक विज्ञान को एक दूसरे का सामना करने के लिए मजबूर किया जाता है। मानव विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान के समेत मनुष्य उत्पत्ति, मानव शारीरिक लक्षण, मानव शरीर में बदलाव, मनुष्य प्रजातियों में आये बदलावों इत्यादि से ज्ञान की रचना करता है।

सामाजिक-सांस्कृतिक नृविज्ञान, संरचनात्मक और उत्तर आधुनिक सिद्धांतों से बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।

शाखाएँ

एंथ्रोपोलाजी यानी नृतत्व विज्ञान की कई शाखाएं हैं। इनमें से कुछ हैं:

  • सामाजिक सांस्कृतिक नृतत्व विज्ञान,
  • प्रागैतिहासिक नृतत्व विज्ञान या आर्कियोलाजी,
  • भौतिक और जैव नृतत्व विज्ञान,
  • भाषिक नृतत्तव विज्ञान और
  • अनुप्रयुक्त नृतत्व विज्ञान

सामाजिक-सांस्कृतिक नृतत्व विज्ञान

इसका संबंध सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवहार के विभिन्न पहलुओं, जैसे समूह और समुदायों के गठन और संस्कृतियों के विकास से है। इसमें सामाजिक-आर्थिक बदलावों, जैसे विभिन्न समुदायों और के बीच सांस्कृतिक भिन्नताओं और इस तरह की भिन्नताओं के कारणों; विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद; भाषाओं के विकास, टेक्नोलाजी के विकास और विभिन्न संस्कृतियों क बीच परिवर्तन की प्रवृत्तियों का अध्ययन किया जाता है।

प्रागैतिहासिक नृतत्व विज्ञान या पुरातत्व विज्ञान

इसमें प्रतिमाओं, हड्डियों, सिक्कों और अन्य ऐतिहासिक पुरावशेषों के आधार पर इतिहास का पुनर्निर्धारण किया जाता है। इस तरह के अवशेषों की खोज से प्राचीन काल के लोगों के इतिहास का लेखन किया जाता है और सामाजिक रीति रिवाजों तथा परम्पराओं का पता लगाया जाता है। पुरातत्व वैज्ञानिक इस तरह की खोजों से उस काल की सामाजिक गतिविधियों का भी विश्लेषण करते हैं। वे अपनी खोज के मिलान समसामयिक अभिलेखों या ऐतिहासिक दस्तावेजों से करके प्राचीन मानव इतिहास का पुनर्निर्माण करते हैं।

भौतिक या जैव नृतत्व विज्ञान

मुख्य लेख: जैविक नृविज्ञान

इस शाखा का संबंध आदि मानवों और मानव के पूर्वजों की भौतिक या जैव विशेषताओं तथा मानव जैसे अन्य जीवों, जैसे चिमपैन्जी, गोरिल्ला और बंदरों से समानताओं से है। यह शाखा विकास श्रृंखला के जरिए सामाजिक रीति रिवाजों को समझने का प्रयास करती है। यह जातियों के बीच भौतिक अंतरों की पहचान करती है और इस बात का भी पता लगाती है कि विभिन्न प्रजातियों ने किस तरह अपने आप को शारीरिक रूप से परिवेश के अनुरूप ढाला. इसमें यह भी अध्ययन किया जाता है कि विभिन्न परिवेशों का उनपर क्या असर पड़ा. जैव या भौतिक नृतत्व विज्ञान की अन्य उप शाखाएं और विभाग भी हैं जिनमें और भी अधिक विशेषज्ञता हासिल की जा सकती है। इनमें आदि मानव जीव विज्ञान, ओस्टियोलाजी (हड्डियों और कंकाल का अध्ययन), पैलीओएंथ्रोपोलाजी यानी पुरा नृतत्व विज्ञान और फोरेंसिक एंथ्रोपोलाजी.

अनुप्रयुक्त नृतत्व विज्ञान

इसमें नृतत्व विज्ञान की अन्य शाखाओं से प्राप्त सूचनाओं का उपयोग किया जाता है और इन सूचनाओं के आधार पर संतति निरोध, स्वास्थ्य चिकित्सा, कुपोषण की रोकथाम, बाल अपराधों की रोकथाम, श्रम समस्या के समाधान, कारखानों में मजदूरों की समस्याओं के समाधान, खेती के तौर तरीकों में सुधार, जनजातीय कल्याण और उनके जबरन विस्थापन भूमि अधिग्रहण की स्थिति में जनजातीय लोगों के पुनर्वास के काम में सहायता ली जाती है।

भाषिक नृतत्व विज्ञान

इसमें मौखिक और लिखित भाषा की उत्पत्ति और विकास का अध्ययन किया जाता है। इसमें भाषाओं और बोलियों के तुलनात्मक अध्ययन की भी गुंजाइश है। इसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि किस तरह सांस्कृतिक आदान प्रदान से विभिन्न संस्कृतियों भाषाओं पर असर पड़ा है और किस तरह भाषा विभिन्न सांस्कृतिक रीति रिवाजों और प्रथाओं की सूचक है। भाषायी नृतत्व विज्ञान सांस्कृतिक नृतत्व विज्ञान से घनिष्ठ रूप से संबद्ध है।

इन्हें भी देखें

बाहरी कड़ियाँ

  • मानवशास्त्र (गूगल पुस्तक ; लेखक – रामनाथ शर्मा, राजेंद्र कुमार शर्मा)
[छुपाएँ]देवासंजीवविज्ञान के मुख्य उप-क्षेत्र
शरीर संरचना विज्ञान · अंतरिक्षजैविकी · जैवरासायनिकी · जैवसूचना विज्ञान · जैवसांख्यिकी · पादप विज्ञान · कोशिका विज्ञान · क्रोनोबायोलॉजी · विकासशील जीव विज्ञान · पारिस्थितिकी · महामारी विज्ञान · जैवविकास विज्ञान · अनुवांशिकी · जीनोमिक्स · मानव विज्ञान · इम्म्युनोलॉजी · सागरीय विज्ञान · सूक्ष्मजैविकी · आण्विक जैविकी · न्यूरोसाइंस · पोषण विज्ञान · जीवन का उद्गम · जीवाश्मविज्ञान · परजीवविज्ञान · विकृति विज्ञान · शरीर क्रिया विज्ञान · सिस्टम्स बायोलॉजी · टैक्सोनॉमी · प्राणी विज्ञान · जैवप्रौद्योगिकी

श्रेणियाँ

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *