ज़मीनी पुल

ज़मीनी पुल (अंग्रेज़ी: land bridge, लैंड ब्रिज) ऐसे भूडमरू (इस्थमस) या उस से चौड़े धरती के अंश को कहते हैं जिसके ज़रिये समुद्र द्वारा अलग किये हुए धरती के दो बड़े क्षेत्रों के बीच में जानवर आ-जा सकें और वृक्ष-पौधे फैल सकें। हिमयुगों (आइस एज) के दौरान ऐसे ज़मीनी पुल अक्सर उभर आते हैं क्योंकि तब समुद्र के पानी का कुछ अंश बर्फ़ में जमा हुआ होने से समुद्र-तल थोड़ा नीचे होता है। इसका एक बड़ा उदाहरण भारत को श्रीलंका से जोड़ने वाला रामसेतु है। यह हिमयुगों में पूरी तरह समुद्र-तल के ऊपर उभरी हुई ज़मीन की एक पट्टी होती थी जिसपर इतिहास में जानवर चलकर भारत से श्रीलंका पहुँचे थे और भारत से बहुत से पेड़-पौधे भी श्रीलंका में विस्तृत हुए थे। माना जाता है कि आज से लगभग २०,००० साल पहले श्रीलंका के वैदा आदिवासियों के पूर्वज भी इसी ज़मीनी पुल पर चलकर भारत से श्रीलंका पैदल पहुँचे। आधुनिक युग में भारत और श्रीलंका के बीच ४० मील का खुला समुद्र है[1][2][3]

हिमयुगों के अलावा ज़मीनी पुल बनाने के और भी कारण हो सकते हैं। कभी-कभी प्लेट विवर्तनिकी (टेकटॉनिक्स​) में भौगोलिक तख़्तों के हिलने से समुद्र के नीचे का फर्श ऊपर उठकर सतह से ऊपर आ जाता है और दो क्षेत्रों को एक पुल बनाकर जोड़ देता है। कुछ इलाक़ों में हिमयुगों के दौरान चलने वाली हिमानियाँ इतनी भारी होती हैं कि उनके नीचे की ज़मीन दब जाती है और हिमयुग की समाप्ति पर बर्फ़ पिघलने के बाद वापस उठ जाती है। कभी-कभी यही हिमयुग-उपरान्त उठी हुई धरती दो क्षेत्रों में पुल बना देती है।

कुछ प्रसिद्ध ज़मीनी पुल

इन्हें भी देखें

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