अजीवात् जीवोत्पत्ति

यह लेख अजीवात् जीवोत्पत्ति के वैज्ञानिक सिद्धांत के बारे में है। जीवन की उत्पत्ति के गैर वैज्ञानिक विचारों के लिए, सृजन मिथक देखें।अमरीका के ग्लेशियर नेशनल पार्क की सियह फार्मेशन (अंग्रेज़ी: Siyeh Formation) में कैंब्रियनपूर्वी स्ट्रॉमैटोलाइट (अंग्रेज़ीPrecambrianstromatolites)। वर्ष २००२ में वैज्ञानिक पत्रिका नेचर में प्रकाशित एक शोधपत्र ने सुझाव दिया कि ३.५ अरब वर्ष पुराने इस भूविज्ञानी फार्मेशन में सूक्ष्मजीव साइनोबैक्टीरिया (अंग्रेज़ीCyanobacteria) के जीवाश्म हैं। इसके अनुसार ये पृथ्वी पर जीवन के सबसे प्राचीन सुराग हैं।

पृथ्वी जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई, यह एक वैज्ञानिक समस्या है जिसके लिए अभी तक सर्वमान्य सिद्धान्त नहीं मिले हैं। वैसे तो इसके बारे में बहुत से सिद्धान्त दिए गए हैं, किन्तु स्पष्ट तथ्यों से मण्डित सिद्धान्त बहुत कम हैं।[1]

हाँ, अधिकांश विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि वर्तमान में धरती पर जितना भी जीवन है, वह सब किसी एक आदि जीव से उत्पन्न हुआ है।[2] किन्तु यह पता नहीं है कि यह आदि जीव-रूप कैसे बना या उत्पन्न हुआ। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किसी प्राकृतिक प्रक्रिया के द्वारा हुआ (अप्राकृतिक या दैवी प्रक्रिया से नहीं) जो आज से लगभग ३९० करोड़ वर्ष पहले घटित हुई।

अजीवात् जीवोत्पत्ति (=निर्जीव से जीवन की उत्पत्ति ; अंग्रेज़ीAbiogenesis) सरल कार्बनिक यौगिक जैसे निर्जीव पदार्थों से जीवन की उत्पत्ति की प्राकृतिक प्रक्रिया को कहते हैं।[3][4][5][6] जीवोत्पत्ति पृथ्वी पर अनुमानित ३.८ से ४ अरब वर्ष पूर्व हुई थी।[7] इसका अध्ययन प्रयोगशाला में किए गए कुछ प्रयोगों के द्वारा, और आज के जीवों के जेनेटिक पदार्थों से जीवन पूर्व पृथ्वी पर हुए उन रासायनिक अभिक्रियाओं का अनुमान लगा कर किया गया है जिनसे संभवतः जीवन की उत्पत्ति हुई है।[8]

जीवोत्पत्ति के अध्ययन के लिए मुख्यतः तीन तरह की परिस्थितियों का ध्यान रखना पड़ता है: भूभौतिकीरासायनिक और जीवविज्ञानी[9] बहुत अध्ययन यह अनुसंधान करते हैं कि अपनी प्रतिलिपि बनाने वाले अणु कैसे उत्पन्न हुए। यह स्वीकृत है कि आज के सभी जीव आर एन ए अणुओं के वंशज हैं[10] (हालांकि यह जरुरी नहीं है कि आर एन ए आधारित जीवन अस्तित्व में आने वाला पहला जीवन था)।[11][12] मिलर-उरे प्रयोग (अंग्रेज़ीMiller–Urey experiment) और अन्य ऐसे प्रयोगों ने साबित किया है कि अधिकांश अमीनो अम्लों (जो कि जीवन के बुनियादी रसायन हैं) का संश्लेषण प्राचीन पृथ्वी जैसी परिस्थितियों में अजैविक यौगिकों से हो सकता है। कार्बनिक यौगिक के संश्लेषण की कई क्रियाविधियों का अध्ययन किया गया है, इनमें तड़ित और विकिरण शामिल हैं। अन्य अध्ययन, जैसे कि “मेटाबोलिज्म फर्स्ट हाइपोथिसिस”, यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रतिलिपि बनाने वाले अणुओं की उत्पत्ति के लिए जरुरी रसायनों को बनाने के लिए क्या प्राचीन पृथ्वी पर उत्प्रेरक पदार्थों ने कोई भूमिका निभाई होगी।[13] जटिल कार्बनिक यौगिक सौर मण्डल और तारों के बीच के अंतरिक्ष में भी मिलें हैं। यह संभव है कि इन कार्बनिक यौगिकों ने पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत के लिए सामग्री प्रदान की हो।[14][15][16][17]

पैनस्पेर्मिया हाइपोथिसिस (अंग्रेज़ीPanspermia Hypothesisis) यह सुझाव देती है कि सूक्ष्मजीवी जीवन उल्काओंक्षुद्रग्रहों और सौर मण्डल की अन्य छोटी वस्तुऔं द्वारा वितरित किया गया था, और जीवन ब्रह्माण्ड में हर जगह मौजूद हो सकता है।[18] यह सुझाया गया है कि जीवन बिग बैंग के कुछ समय बाद (जब ब्रह्माण्ड १ से १.७ करोड़ वर्ष पुराना था) उत्पन्न हुआ हो सकता है।[19][20] पैनस्पेर्मिया हाइपोथिसिस केवल यह बताती है कि जीवन कहाँ से आया, यह नहीं बताती की जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई।

पृथ्वी की उम्र लगभग ४.५४ अरब वर्ष है।[21][22][23] जीवन का सबसे पुराना निर्विवादित सबूत ३.५ अरब वर्ष पुराना है।[24][25][26] पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में ३.४८ अरब वर्ष पुराने बलुआ पत्थर में माइक्रोबियल चटाई के जीवाश्म मिलें हैं।[27][28][29] जीवन के इस से पुराने सबूत यह हैं १) ग्रीनलैंड में मिला ग्रेफाइट, जो की एक बायोजेनिक पदार्थ है[30] और २) २०१५ में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में ४.१ अरब वर्ष पुराने पत्थरों में मिले “बायोटिक जीवन के अवशेष”।[31][32] एक शोधकर्ता के अनुसार “अगर जीवन पृथ्वी पर बहुत जल्दी उत्पन्न हो गया था, तो यह ब्रह्माण्ड में सामान्य हो सकता है”।[31]

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