बीजपत्र

बीजपत्र (cotyledon, अर्थ: बीज-पत्ता) बहुत से पौधों के बीज का एक महत्वपूर्ण भाग होता है। बीज के अंकुरण होने पर यही बीजपत्र विकसित होकर पौधे के पहले पत्तों का रूप धारण कर सकते हैं। वनस्पति शास्त्र में फूलदार (सपुष्पक या आवृतबीजी) पौधों का वर्गीकरण बीज में मौजूद बीजपत्रों की संख्या के आधार पर ही किया जाता है। एक बीजपत्र वाली जातियों को ‘मोनोकॉट​’ (monocot या monocotylenonous, एकबीजपत्री) और दो बीजपत्र वाली जातियों को ‘डायकॉट’ (dicot या dicotylenonous, द्विबीजपत्री) कहा जाता है। इनके अलवा बिना फूल वाले ‘अनावृतबीजी‘ (gymnosperm, अर्थ: नग्न बीज) कहलाए जाने वाले पौधों के बीजों में (जिनमें चीड़ जैसे कोणधारी शामिल हैं) २ से लेकर २४ बीजपत्र हो सकते हैं।

आवृतबीजी वृक्षों व पौधों में मोनोकॉट​ और डायकॉट का अंतर उन पौधों के रूप में बहुत दिखाई देता है:[1]

लक्षणमोनोकॉट​डायकॉट
पत्तों की नसेंसमानांतर चलती नसेंजाला बनती नसें
जड़ेंरेशेदार जड़ेंमोटी केन्द्रीय जड़
तनामुलायम तनासख्त तना
बीजपत्रों की संख्या
फूलों की पंखुड़ियों की संख्या३ का गुणज४ या ५ का गुणज

इन्हें भी देखें

.श्रेणियाँ

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