चम्बल नदी

चम्बल नदी

धौलपुर, राजस्थान के पास चंबल नदी

भारत में नदियों और झीलों का नक्शा
चम्बल नदी
स्थान
देशभारत
राज्यमध्य प्रदेशराजस्थानउत्तर प्रदेश
भौतिक लक्षण
नदीशीर्षजनपव पहाड़ी
 • स्थानविंध्याचल पर्वतमाला, महूमध्य प्रदेशभारत
 • निर्देशांक22°27′N 75°31′E
 • ऊँचाई843 मी॰ (2,766 फीट)
नदीमुखयमुना नदी
 • स्थानसाहोन, भिंड (म.प्र) और जालौन इटावा (उ.प्र), मध्य प्रदेशभारत
 • निर्देशांक26°29′20″N 79°15′10″Eनिर्देशांक26°29′20″N 79°15′10″E
 • ऊँचाई122 मी॰ (400 फीट)
लम्बाई1,024 कि॰मी॰ (636 मील)
जलसम्भर आकार143,219 कि॰मी2 (1.54160×1012 वर्ग फुट)
प्रवाह 
 • औसत456 m3/s (16,100 घन फुट/सेकंड)[1]
 • न्यूनतम58.53 m3/s (2,067 घन फुट/सेकंड)
 • अधिकतम2,074.68 m3/s (73,267 घन फुट/सेकंड)
जलसम्भर लक्षण
उपनदियाँ 
 • बाएँबनासमेज
 • दाएँपारबतीकाली सिंधशिप्रा

चम्बल (चंबल) नदी मध्य भारत में यमुना नदी की सहायक नदी है। यह नदी “जानापाव पर्वत ” बाचू पाईट महू से निकलती है। इसका प्राचीन नाम “चरमवाती ” है। इसकी सहायक नदियाँ शिप्रा, सिन्ध (सिंध), काली सिन्ध, ओर कुनू नदी है। यह नदी भारत में उत्तर तथा उत्तर-मध्य भाग में राजस्थान के कोटा तथा धौलपुरमध्य प्रदेश के धारउज्जैनरतलाममन्दसौरभिंडमुरैना आदि जिलों से होकर बहती है।[2] यह नदी दक्षिण की ओर मुड़ कर उत्तर प्रदेश राज्य में यमुना में शामिल होने के पहले राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच सीमा बनाती है। इस नदी पर चार जल विधुत परियोजना -गांधी सागर, राणा सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज (कोटा)- चल रही है।[3] प्रसिद्ध चूलीय जल प्रपातचम्बल (चंबल) नदी (कोटा) मे है। कुल लम्बाई 135। राजस्थान की औधोगिक नगरी कोटा इस नदी के किनारे स्थित है।

यह एक बारहमासी नदी है। इसका उद्गम स्थल जानापाव की पहाड़ी (मध्य प्रदेश) है।[4] यह दक्षिण में महू शहर के, इन्दौर (इंदौर) के पास, विन्ध्य (विंध्य) रेंज में मध्य प्रदेश में दक्षिण ढलान से होकर गुजरती है। चम्बल और उसकी सहायक नदियाँ उत्तर पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र के नाले, जबकि इसकी सहायक नदी, बनास, जो अरावली पर्वतों से शुरू होती है इसमें मिल जाती है। चम्बल, कावेरी, यमुना, सिन्धु, पहुज भरेह के पास पचनदा में, उत्तर प्रदेश राज्य में भिण्ड (भिंड) और इटावा जिले की सीमा पर शामिल पाँच नदियों के सङ्गम (संगम) समाप्त होता है।

अपवाह क्षेत्र

चम्बल के अपवाह क्षेत्र में चित्तौड़, कोटा, बूँदी, सवाई माधौपुर, करौली, धौलपुर इत्यादि इलाके शामिल हैं। तथा सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर से गुजरती हुई राजस्थान व मध्यप्रदेश की सीमा बनाते हुए चलती है जो कि 252 किलोमीटर की है।[5] [6]

सहायक नदियाँ

बनास नदीक्षिप्रा नदी,मेज , बामनी, सीप काली सिंधपार्वती, छोटी कालीसिंध, कुनो, ब्राह्मणी, परवन नदी इत्यादि चम्बल की सहायक नदियाँ हैं।

मुहाना

उत्तर प्रदेश में बहते हुए 965 किलोमीटर की दूरी तय करके यमुना नदी में मिल जाती है। चम्बल नदी का कुल अपवाह क्षेत्र 19,500 वर्ग किलोमीटर हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें] चम्बल यमुना नदी की मुख्य सहायक नदियों में से एक है। उतरप्रदेश के इटावा जिले के मुरादगंज के पास यमुना में मिल जाती है।

ग्रन्थों के अनुसार

महाभारत के अनुसार राजा रंतिदेव के यज्ञों में जो आर्द्र चर्म राशि इकट्ठा हो गई थी उसी से यह नदी उदभुत हुई थी-

महानदी चर्मराशेरूत्क्लेदात् ससृजेयतःततश्चर्मण्वतीत्येवं विख्याता स महानदी

कालिदास ने भी मेघदूत-पूर्वमेघ 47 में चर्मण्वती नदी को रंतिदेव की कीर्ति का मूर्त स्वरूप कहा गया है-

आराध्यैनं शदवनभवं देवमुल्लघिताध्वा,
सिद्धद्वन्द्वैर्जलकण भयाद्वीणिभिदैत्त मार्गः।
व्यालम्बेथास्सुरभितनयालंभजां मानयिष्यन्,
स्रोतो मूत्यभुवि परिणतां रंतिदेवस्य कीर्तिः।

इन उल्लेखों से यह जान पड़ता है कि रंतिदेव ने चर्मवती के तट पर अनेक यज्ञ किए थे। महाभारत में भी चर्मवती का उल्लेख है –

ततश्चर्मणवती कूले जंभकस्यात्मजं नृपं ददर्श वासुदेवेन शेषितं पूर्ववैरिणा
अर्थात इसके पश्चात सहदेव ने (दक्षिण दिशा की विजय यात्रा के प्रसंग में) चर्मण्वती के तट पर जंभक के पुत्र को देखा जिसे उसके पूर्व शत्रु वासुदेव ने जीवित छोड़ दिया था। सहदेव इसे युद्ध में हराकर दक्षिण की ओर अग्रसर हुए थे।

चर्मण्वती नदी को वन पर्व के तीर्थ यात्रा अनु पर्व में पुण्य नदी माना गया है –
चर्मण्वती समासाद्य नियतों नियताशनः रंतिदेवाभ्यनुज्ञातमग्निष्टोमफलं लभेत्

श्रीमदभागवत में चर्मवती का नर्मदा के साथ उल्लेख है-
सुरसानर्मदा चर्मण्वती सिंधुरंधः

इस नदी का उदगम जनपव की पहाड़ियों से हुआ है। यहीं से गम्भीरा (गंभीरा) नदी भी निकलती है। यह यमुना की सहायक नदी है। महाभारत में अश्वनदी का चर्मण्वती में, चर्मण्वती का यमुना में और यमुना का गङ्गा (गंगा) नदी में मिलने का उल्लेख है –

मंजूषात्वश्वनद्याः सा ययौ चर्मण्वती नदीम्,
चर्मण्वत्याश्व यमुना ततो गङ्गा जगामह।
गङ्गायाः सूतविषये चंपामनुययौपुरीम्।

[छुपाएँ]देवासंभारत की नदियाँ
अलकनन्दा नदी  • इंद्रावती नदी  • कालिंदी नदी  • काली नदी  • कावेरी नदी  • कृष्णा नदी  • केन नदी  • कोशी नदी  • क्षिप्रा नदी  • खड़कई नदी  • गंगा नदी  • गंडक नदी  • गोदावरी नदी  • गोमती नदी  • घाघरा नदी  • चम्बल नदी  • झेलम नदी  • टोंस नदी  • तवा नदी  • चनाब नदी  • ताप्ती नदी  • ताम्रपर्णी नदी  • तुंगभद्रा नदी  • दामोदर नदी  • नर्मदा नदी  • पार्वती नदी  • पुनपुन नदी  • पेन्नार नदी  • फल्गू नदी  • बनास नदी  • बराकर नदी  • बागमती  • बाणगंगा नदी  • बेतवा नदी  • बैगाई नदी  • बैगुल नदी  • ब्यास नदी  • ब्रह्मपुत्र नदी  • बकुलाही नदी  • भागीरथी नदी  • भीमा नदी  • महानंदा नदी  • महानदी  • माही नदी  • मूठा नदी  • मुला नदी  • मूसी नदी  • यमुना नदी  • रामगंगा नदी  • रावी नदी  • लखनदेई नदी  • लाछुंग नदी  • लूनी नदी  • शारदा नदी  • शिप्रा नदी  • सतलुज नदी  • सरस्वती नदी  • साबरमती नदी  • सिन्धु नदी  • सुवर्णरेखा नदी  • सोन नदी  • हुगली नदी  • टिस्टा नदी  • सई नदी

श्रेणियाँ

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *