भागीरथी नदी

भागीरथी नदी
Bhagirathi River
गंगोत्री में भागीरथी पर बने स्नान घाट
देश भारत
राज्यउत्तराखण्ड
क्षेत्रगढ़वाल
जिलाउत्तरकाशीटिहरी गढ़वाल
उपनदियाँ
 – बाएँकेदारगंगा, भिलंगना, अलकनंदा
 – दाएँजाडगंगा/जहाँव्ही, सियागंगा
स्रोत30.925449°N 79.081480°Eनिर्देशांक30.925449°N 79.081480°E
 – स्थानगौमुखगंगोत्री शहर से लगभग 18 किमी दूर
 – ऊँचाई3,892 मी. (12,769 फीट)
मुहाना30.146315°N 78.598251°E
 – स्थानगंगा नदीदेवप्रयाग में
 – ऊँचाई475 मी. (1,558 फीट)
लंबाई205 कि॰मी॰ (127 मील) कि.मी. (एक्स्प्रेशन त्रुटि: अनपेक्षित उद्गार चिन्ह “&”। मील)
जलसम्भर6,921 कि॰मी2 (7.450×1010 वर्ग फुट) कि.मी.² (एक्स्प्रेशन त्रुटि: अनपेक्षित उद्गार चिन्ह “,”। वर्ग मील)
हिमालय में भागीरथी के जलशीर्ष का मानचित्र, आंकड़े मीटर में ऊँचाई दर्शाते हैं।

भागीरथी भारत के उत्तराखण्ड राज्य में बहने वाली एक नदी है। इस नदी को किरात नदी के नाम से भी जाना जाता है [1] । यह देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है। भागीरथी का उद्गम स्थल उत्तरकाशी ज़िले में गौमुख (गंगोत्री ग्लेशियर) है। भागीरथी यहाँ २५ कि॰मी॰ लम्बे गंगोत्री हिमनद से निकलती है। २०५ किमी बहने के बाद, भागीरथी व अलकनंदा का देवप्रयाग में संगम होता है, जिसके पश्चात वह गंगा के रूप में पहचानी जाती है।

अवस्थिति

भागीरथी गोमुख स्थान से 25 कि॰मी॰ लम्बे गंगोत्री हिमनद से निकलती है। यह स्थान उत्तराखण्ड राज्य में उत्तरकाशी जिले में है। यह समुद्रतल से 618 मीटर की ऊँचाई पर, ऋषिकेश से 70 किमी दूरी पर स्थित है।

टिहरी बाँध

भारत में टिहरी बाँध, टेहरी विकास परियोजना का एक प्राथमिक बाँध है, जो उत्तराखण्ड राज्य के टिहरी में स्थित है। यह बाँध भागीरथी नदी पर बनाया गया है। टिहरी बाँध की ऊँचाई 260 मीटर है, जो इसे विश्व का पाँचवा सबसे ऊँचा बाँध बनाती है। इस बाँध से 2400 मेगा वाट विद्युत उत्पादन, 270,000 हेक्टर क्षेत्र की सिंचाई और प्रतिदिन 102.20 करोड़ लीटर पेयजल दिल्ली, उत्तर प्रदेश एवँ उत्तराखण्ड को उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित किया गया है।

सहायक नदियाँ

  • रुद्रागंगा- गंगोत्री ग्लेशियर के पास रुद्रागेरा ग्लेशियर से निकलती है।
  • केदारगंगा- केदारताल से निकलकर गंगोत्री में भागीरथी से मिलती है।
  • जाडगंगा / जाह्नवी – भैरोघाटी नामक स्थान पर भागीरथी नदी से मिलती है।
  • सियागंगा- झाला नामक स्थान पर गंगा नदी से मिलती है।
  • असीगंगा- गंगोरी में भागीरथी से मिलती है ।
  • भिलंगना- खतलिंग ग्लेशियर टेहरी से निकलकर गणेशप्रयाग में भागीरथी से मिलती है । अब यह संगम टेहरी डैम में डूब चुका है।
  • भिलंगना की सहायक नदियां – मेडगंगा, दूधगंगा,बालगंगा।
  • अलकनंदा- यह देवप्रयाग में भााागिरथी से मिलती है।जो मिलकर गंगा नदी बनाती है।

इतिहास

शताब्दी तक भागीरथी में गंगा का मूल हके बाद नबद्वीप में जलांगी से मिलकर हुगली नदी बनाती है। 16वीं शताब्दी तक भागीरथी में गंगा का मूल प्रवाह था, लेकिन इसके बाद गंगा का मुख्य बहाव पूर्व की ओर पद्मा में स्थानांतरित हो गया। इसके तट पर कभी बंगाल की राजधानी रहे मुर्शिदाबाद सहित बंगाल के कई महत्त्वपूर्ण मध्यकालीन नगर बसे। भारत में गंगा पर फ़रक्का बांध बनाया गया, ताकि गंगा-पद्मा नदी का कुछ पानी अपक्षय होती भागीरथी-हुगली नदी की ओर मोड़ा जा सके, जिस पर कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) पोर्ट कमिश्नर के कलकत्ता और हल्दिया बंदरगाह स्थित हैं। भागीरथी पर बहरामपुर में एक पुल बना है।

कथा

भागीरथी नदी के सम्बन्ध में एक कथा विश्वविख्यात है। भागीरथ की तपस्या के फलस्वरूप गंगा के अवतरण की कथा [1] है। कथा के अंत में गंगा के भागीरथी नाम का उल्लेख है-

गंगा त्रिपथगा नाम दिव्या भागीरथीति च त्रीन्पथो भावयन्तीति तस्मान् त्रिपथगा स्मृता रोहित के कुल में बाहुक का जन्म हुआ। शत्रुओं ने उसका राज्य छीन लिया। वह अपनी पत्नी सहित वन चला गया। वन में बुढ़ापे के कारण उसकी मृत्यु हो गयी। उसके गुरु ओर्व ने उसकी पत्नी को सती नहीं होने दिया क्योंकि वह जानता था कि वह गर्भवती है। उसकी सौतों को ज्ञात हुआ तो उन्होंने उसे विष दे दिया। विष का गर्भ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। बालक विष (गर) के साथ ही उत्पन्न हुआ, इसलिए ‘स+गर= सगर कहलाया। बड़ा होने पर उसका विवाह दो रानियों से हुआ-

सुमति- सुमति के गर्भ से एक तूंबा निकला जिसके फटने पर साठ हज़ार पुत्रों का जन्म हुआ। केशिनी- जिसके असमंजस नामक पुत्र हुआ। सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया। इन्द्र ने उसके यज्ञ का घोड़ा चुरा लिया तथा तपस्वी कपिल के पास ले जाकर खड़ा किया। उधर सगर ने सुमति के पुत्रों को घोड़ा ढूंढ़ने के लिए भेजा। साठ हज़ार राजकुमारों को कहीं घोड़ा नहीं मिला तो उन्होंने सब ओर से पृथ्वी खोद डाली। पूर्व-उत्तर दिशा में कपिल मुनि के पास घोड़ा देखकर उन्होंने शस्त्र उठाये और मुनि को बुरा-भला कहते हुए उधर बढ़े। फलस्वरूप उनके अपने ही शरीरों से आग निकली जिसने उन्हें भस्म कर दिया। केशिनी के पुत्र का नाम असमंजस तथा असमंजस के पुत्र का नाम अंशुमान था। असमंजस पूर्वजन्म में योगभ्रष्ट हो गया था, उसकी स्मृति खोयी नहीं थी, अत: वह सबसे विरक्त रह विचित्र कार्य करता रहा था। एक बार उसने बच्चों को सरयू में डाल दिया। पिता ने रुष्ट होकर उसे त्याग दिया। उसने अपने योगबल से बच्चों को जीवित कर दिया तथा स्वयं वन चला गया। यह देखकर सबको बहुत पश्चात्ताप हुआ। राजा सगर ने अपने पौत्र अंशुमान को घोड़ा खोजने भेजा। वह ढूंढ़ता-ढूंढ़ता कपिल मुनि के पास पहुंचा। उनके चरणों में प्रणाम कर उसने विनयपूर्वक स्तुति की। कपिल से प्रसन्न होकर उसे घोड़ा दे दिया तथा कहा कि भस्म हुए चाचाओं का उद्धार गंगाजल से होगा। अंशुमान ने जीवनपर्यंत तपस्या की किंतु वह गंगा को पृथ्वी पर नहीं ला पाया। तदनंतर उसके पुत्र दिलीप ने भी असफल तपस्या की। दिलीप के पुत्र भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर गंगा ने पृथ्वी पर आना स्वीकार किया। गंगा के वेग को शिव ने अपनी जटाओं में संभाला। भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर गंगा समुद्र तक पहुंची। भागीरथ के द्वारा गंगा को पृथ्वी पर लाने के कारण यह भागीरथी कहलाई। समुद्र-संगम पर पहुंचकर उसने सगर के पुत्रों का उद्धार किया।

इन्हें भी देखें

[छुपाएँ]देवासंगंगा नदी
सहायक नदियाँअलकनंदा  • कोसी  • गंडक  • मन्दाकिनी  • नंदाकिनी  • भागीरथी  • विष्णु गंगा  • धौलीगंगा  • यमुना • रामगंगा  • घाघरा  • सोन  • ब्रह्मपुत्र  • हुगली  • पद्मा  • मेघना  • सरस्वती नदी
आरंभिक पड़ावगोमुख  • गंगोत्री  • विष्णु प्रयाग  • कर्णप्रयाग  • देवप्रयाग  • रुद्रप्रयाग  • नंदप्रयाग • ऋषिकेश  • हरिद्वार
मैदानी क्षेत्रगंगा के मैदान  • गढ़मुक्तेश्वर  • फैजाबाद  • बिठूर  • कन्नौज  • फ़र्रूख़ाबाद  • कानपुर  • इलाहाबाद  •  • राजेसुल्तानपुर वाराणसी  • मीरजापुर  • पटना  • भागलपुर  • पाकुर
अंत्य क्षेत्रफरक्का बैराज  • पाकुर  • कोलकाता  • हावड़ा  • सुन्दरवन  • गंगा-सागर-संगम  • बांग्लादेश  • बंगाल की खाड़ी
धार्मिक महत्वपौराणिक प्रसंग  • गंगा दशहरा  • कुम्भ मेला  • मकर संक्रांति  • गंगा स्नान  • सगर  • भगीरथ
पंच प्रयागविष्णु प्रयाग  • कर्णप्रयाग  • देवप्रयाग  • रुद्रप्रयाग  • नंदप्रयाग
यह भी देखेंनंदा देवी  • कामत पर्वत  • त्रिशूल पर्वत  • जीव-जन्तु और वनस्पति • आर्थिक महत्त्व  • फरक्का बांध • टिहरी बाँध • बैक्टीरियोफेज
[छुपाएँ]देवासंभारत की नदियाँ
अलकनन्दा नदी  • इंद्रावती नदी  • कालिंदी नदी  • काली नदी  • कावेरी नदी  • कृष्णा नदी  • केन नदी  • कोशी नदी  • क्षिप्रा नदी  • खड़कई नदी  • गंगा नदी  • गंडक नदी  • गोदावरी नदी  • गोमती नदी  • घाघरा नदी  • चम्बल नदी  • झेलम नदी  • टोंस नदी  • तवा नदी  • चनाब नदी  • ताप्ती नदी  • ताम्रपर्णी नदी  • तुंगभद्रा नदी  • दामोदर नदी  • नर्मदा नदी  • पार्वती नदी  • पुनपुन नदी  • पेन्नार नदी  • फल्गू नदी  • बनास नदी  • बराकर नदी  • बागमती  • बाणगंगा नदी  • बेतवा नदी  • बैगाई नदी  • बैगुल नदी  • ब्यास नदी  • ब्रह्मपुत्र नदी  • बकुलाही नदी  • भागीरथी नदी  • भीमा नदी  • महानंदा नदी  • महानदी  • माही नदी  • मूठा नदी  • मुला नदी  • मूसी नदी  • यमुना नदी  • रामगंगा नदी  • रावी नदी  • लखनदेई नदी  • लाछुंग नदी  • लूनी नदी  • शारदा नदी  • शिप्रा नदी  • सतलुज नदी  • सरस्वती नदी  • साबरमती नदी  • सिन्धु नदी  • सुवर्णरेखा नदी  • सोन नदी  • हुगली नदी  • टिस्टा नदी  • सई नदी

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