सोंढुर नदी

सोंढुर का वासतविक नाम मुचकुंदपुर था,वह कालंतर में वरत़़मान नाम मेचका है, और यह़ नाम राजा मुचकुंद के नाम पर पडा़,राजा मुचकुंद ने देवासुर संगराम मे देवताऔं की तरप से भाग लिया यह लडाई बहुत दिनों तक चलि और देंवताओं की जीत हुई ,बरमहा आदि देंवताऔं ने राजा मुचकुंद काे वरदान मांगने कहा राजन ने लडाई से थककर गाढी निदरा का वर लिया और जो भी इस नींद से जगाने वाले को आंख खुलते ही भसम हो जाने क वर लिया,कालंतर दवापर में भगवान किसन ने कालयवन असुर को यहिं पर मरवाया था।

सोंढुर नाले पर डैम बनने के कारण सोंढुर नाम परचलन मे आया है, सोंढूँर नदी राजिम में महानदी से मिलती है जहाँ पैरी, महानदी और सोंढूर नदियों का त्रिवेणी संगम-स्थल है।

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