नगालैंड के स्थानीय नागरिकों का रजिस्टर (RIIN)

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चर्चा में क्यों?

हाल ही में नगा जनजातियों के एक शीर्ष निकाय, नगा होहो (Naga Hoho) द्वारा  नगालैंड के स्थानीय नागरिकों का रजिस्टर (Register of Indigenous Inhabitants of Nagaland-  RIIN) तैयार करने के संबंध नगालैंड राज्य सरकार को आगाह किया गया है। RIIN को असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens) का ही एक रूप माना जा रहा है।

पृष्ठभूमि:

  • राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2019 में RIIN के  अध्ययन, परीक्षण और कार्यान्वयन के संदर्भ में सिफारिश करने हेतु तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।
  • RIIN हेतु गठित समिति द्वारा निम्नलिखित कार्यों का निर्धारण किया जाना था:
    • स्थानीय निवासी होने के लिये पात्रता मानदंड।
    • स्थानीय होने के दावों को प्रमाणित करने के लिये प्राधिकरण।
    • स्थानीय निवासी के रूप में पंजीकरण का स्थान।
    • स्थानीय निवासी होने के दावों का आधार।
    • दस्तावेजों की प्रकृति जो स्थानीय होने के प्रमाण के रूप में स्वीकार्य होंगे।
  • हालांँकि, समुदाय आधारित और चरमपंथी संगठनों के विरोध के बाद इस कार्य को निलंबित कर दिया गया था।
  • तब से नगालैंड सरकार जुलाई 2019 में शुरू की गई RIIN प्रक्रिया, जिसका उद्देश्य बाह्य लोगों द्वारा राज्य में नौकरी और सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने हेतु नकली स्वदेशी प्रमाण पत्रों प्रस्तुत किये जाने पर अंकुश लगाना था, को पुन: शुरू करने का प्रयास कर रही है।

नगालैंड के स्थानीय नागरिकों का रजिस्टर (RIIN):

  • RIIN को आधिकारिक अभिलेखों/रिकार्ड्स के आधार पर स्थानीय निवासियों की ग्राम-वार और वार्ड-वार सूची की मदद से एक विस्तृत सर्वेक्षण के बाद तैयार किया जाएगा। साथ ही, इसे प्रत्येक ज़िला प्रशासन की निगरानी में तैयार किया जाएगा।
  • एक बार RIIN का कार्य पूर्ण होने के बाद, राज्य के स्थानीय निवासियों बच्चों के जन्म के अलावा किसी को भी नया स्वदेशी निवासी प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया जाएगा। स्थानीय निवासियों के बच्चों के जन्म प्रमाण के साथ ही उन्हें स्थानीय निवासी का प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। तदनुसार RIIN डेटाबेस को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा।
  • RIIN को इनर-लाइन परमिट (Inner-Line Permit) प्राप्त करने के हेतु ऑनलाइन प्रणाली के साथ भी एकीकृत किया जाएगा। इनर-लाइन परमिट एक अस्थायी दस्तावेज़ है जो नगालैंड में प्रवेश और यात्रा करने वाले गैर-निवासियों को जारी किया जाता  है।
  • इस समग्र प्रणाली या प्रक्रिया की निगरानी नगालैंड के आयुक्त द्वारा की जाएगी। इसके अलावा, राज्य सरकार सचिव रैंक के अधिकारियों को नोडल अधिकारी के रूप में नामित करेगी।

नगाओं की चिंता: 

  • यदि RIIN के लिये पहचान प्रक्रिया के तहत 1 दिसंबर, 1963 (नगालैंड को राज्य का दर्जा मिलने की तिथि) को स्थानीय निवासियों के निर्धारण हेतु अंतिम तिथि के रूप में लागू किया जाता है तो इस तिथि के बाद नगालैंड में प्रवेश करने वाले नगा RIIN की सूची से बाहर हो जाएंगे। इसके चलते भयावह परिणाम सामने आ सकते हैं।
  • संपत्ति का नुकसान:
    • भारत के असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और म्याँमार में रहने वाली नगा जनजातियाँ अपने पूर्वजों की पैतृक भूमि पर अपने दावे को वैध ठहराती रही हैं।
    • हज़ारों नगा ऐसे हैं जिन्होंने नगालैंड में ज़मीनें खरीदी, अपने घर बनाए और दशकों से यहाँ रहे हैं।
    • 1 दिसंबर, 1963 से पहले के अभिलेखों  जैसे- भूमि का पट्टाकरण, भूमि कर तथा हाउस टैक्स का भुगतान या मतदाता सूची में नामांकन आदि का अभाव के रूप कई प्रक्रियात्मक विसंगतियां उन नगा परिवारों में भी देखने को मिल सकती हैं जिन्हें तथाकथित रूप से नगालैंड का विशुद्ध नगा समुदाय माना जाता है।
  • अवैध प्रवासी: 
    • गैर-स्थानिक नगाओं (Non-Indigenous Nagas) में इस बात की आशंका बनी हुई है कि उन्हें राज्य में “अवैध आप्रवासी” (Illegal Immigrants) घोषित किया जा सकता है तथा उनकी भूमि ज़ब्त हो सकती  है। इससे एक साथ, एकजुट और स्वतंत्र रूप से रहने के नगा लोगों की धारणा/विचार पर नकरात्मक प्रभाव पड़ेगा।

नगा: 

  • नगा, मुख्य तौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग होते हैं जिनकी आबादी लगभग 2. 5 मिलियन (नगालैंड में 1.8 मिलियन, मणिपुर में 0.6 मिलियन और अरुणाचल प्रदेश में 0.1 मिलियन) है। ये भारतीय राज्य- असम और बर्मा (म्याँमार) के मध्य सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में रहते हैं।
  • नगा, केवल एक जनजाति नहीं है, बल्कि एक जातीय समुदाय है, जिसमें नगालैंड और उसके आसपास के क्षेत्रों की कई जनजातियाँ शामिल हैं।
  • नगा समुदाय,  इंडो-मंगोलॉयड समूह से संबंधित है।
  • कुछ  प्रमुख नगा जनजातियों में  एओस (Aos), अंगामिस (Angamis), चांग्स (Changs), चकेसांग (Chakesang) , काबूस (Kabuis), कचरिस (Kacharis),  कोन्याक (Konyaks), कूकी (Kuki) लोथस (Lothas), माओ (Maos) , मिकीर्स (Mikirs), रेंगमास (Rengmas), टैंकहुल्स (Tankhuls), और ज़ीलियांग (Zeeliang) आदि शामिल हैं।

आगे की राह: 

  • नागालैंड पहले से ही अस्थिर क्षेत्र है जहांँ सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम 1958 (Armed Forces Special Powers Act-AFSPA) लागू है, अत: ऐसी स्थिति में राज्य सरकार के लिये RIIN को त‍ैयार करने में खासा सावधानी बरतने काफी आवश्यक है। साथ ही RIIN को एक ऐसे साधन के रूप में प्रयोग करने से बचा जाना चाहिये, जिससे राज्य के मूल निवासियों की पहचान पर कोई भी संकट उत्पन्न हो।
  • ज्ञात हो कि असम में NRC के प्रयोग के अत्यंत विभाजनकारी परिणाम सामने आए थे। असम और नगालैंड राज्यों में जो कुछ भी घटित होता  है उसका अन्य पूर्वोत्तर राज्यों पर भी प्रभाव पड़ता है। अत: ऐसी स्थिति में RIIN को त‍ैयार करने में भावनात्मक राजनीतिक मुद्दों को एक आधार बनाने से बचा जाना चाहिये।
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