अजंता और एलोरा की गुफाएँ

  • सामान्य अध्ययन-I
  • भारतीय वास्तुकला

प्रीलिम्स के लिये

अजंता और एलोरा की गुफाएँ, सह्याद्रि पर्वतमाला

मेन्स के लिये

भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल की वास्तुकला के मुख्य पहलू

चर्चा में क्यों?

महाराष्ट्र सरकार ने अजंता और एलोरा की गुफाओं में स्थापित दो पर्यटक आगंतुक केंद्रों को बिजली और पानी के बिल (5 करोड़ रुपए) न जमा करने के कारण बंद कर दिया है।

Ajanta caves

अजंता की गुफाएँ:

  • अवस्थिति: ये गुफाएँ महाराष्ट्र में औरंगाबाद के पास वाघोरा नदी के पास सह्याद्रि पर्वतमाला (पश्चिमी घाट) में रॉक-कट गुफाओं की एक श्रृंखला के रूप में स्थित हैं।
  • गुफाओं की संख्या: इसमें कुल 29 गुफाएँ (सभी बौद्ध) हैं, जिनमें से 25 को विहार या आवासीय गुफाओं के रूप में जबकि 4 को चैत्य या प्रार्थना हॉल के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
  • गुफाओं का विकास
    • गुफाओं का विकास 200 ई.पू. से 650 ईस्वी के मध्य हुआ था।
    • वाकाटक राजाओं जिनमें हरिसेना एक प्रमुख था, के संरक्षण में अजंता की गुफाएँ बौद्ध भिक्षुओं द्वारा उत्कीर्ण की गई थीं।
    • अजंता की गुफाओं की जानकारी चीनी बौद्ध यात्रियों फ़ाहियान (चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान 380- 415 ईस्वी) और ह्वेन त्सांग (सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान 606 – 647 ईस्वी) के यात्रा वृतांतों में पाई जाती है।
  • अजंता की गुफाओं में चित्रकारी:
    • इन गुफाओं में आकृतियों को फ्रेस्को पेंटिंग का उपयोग करके दर्शाया गया था।
    • इन गुफाओं के चित्रों में लाल रंग की प्रचुरता है किंतु नीले रंग की अनुपस्थिति है।
    • इन चित्रों में सामान्यतः बुद्ध और जातक कहानियों को प्रदर्शित किया गया है।
  • यूनेस्को स्थल: इन गुफाओं को वर्ष 1983 में यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल घोषित किया था।

एलोरा की गुफाएँ:

  • अवस्थिति: ये गुफाएँ महाराष्ट्र की सह्याद्रि पर्वतमाला में अजंता की गुफाओं से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित हैं।
  • गुफाओं की संख्या: यहाँ 34 गुफाओं का एक समूह है, जिनमें 17 ब्राह्मण, 12 बौद्ध और 5 जैन धर्म से संबंधित हैं।

गुफाओं का विकास:

  • इन गुफाओं के समूह को 5वीं से 11वीं शताब्दी के मध्य विदर्भ, कर्नाटक और तमिलनाडु के विभिन्न शिल्पी संघों द्वारा विकसित किया गया था।
  • इनकी शुरुआत राष्ट्रकूट वंश के शासकों द्वारा की गई थी।
  • ये गुफाएँ विषय और स्थापत्य शैली के रूप में प्राकृतिक विविधता को दर्शाती हैं।

यूनेस्को स्थल: इन गुफाओं को वर्ष 1983 में यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल घोषित किया था।

  • एलोरा की गुफाओं के मंदिरों में सबसे उल्लेखनीय कैलासा (कैलासनाथ; गुफा संख्या 16) है, जिसका नाम हिमालय के कैलास पर्वत (हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का निवास स्थान) के नाम पर रखा गया है।
  • एलोरा की बौद्ध, ब्राह्मण और जैन गुफाएँ मध्य भारत में पैठण (Paithan) से उज्जैन (Ujjain) जाने वाले व्यापारिक मार्ग पर बनाई गई थीं।

सह्याद्रि पर्वतमाला

  • पश्चिमी घाट को स्थानीय रूप से महाराष्ट्र में सह्याद्री, कर्नाटक और तमिलनाडु में नीलगिरि पहाड़ियों और केरल में अन्नामलाई पहाड़ियों या इलायची पहाड़ियों के नाम से जाना जाता है।
  • पश्चिमी घाट, पहाड़ियों की उत्तर-दक्षिण श्रृंखला है जो दक्कन के पठारी क्षेत्र के पश्चिमी सिरे को चिह्नित करते हैं।
  • पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट की तुलना में ऊँचाई में अधिक तथा निरंतरता को बनाए हुए है। उत्तर से दक्षिण तक इसकी औसत ऊँचाई लगभग 1,500 मीटर है।
  • अनाइमुदी (2,695 मीटर), प्रायद्वीपीय पठार की सबसे ऊँची चोटी पश्चिमी घाट की अन्नामलाई पहाड़ियों पर स्थित है, इसके बाद नीलगिरि पहाड़ियों पर डोडाबेट्टा (2,637 मीटर) स्थित है।
  • अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ जैसे कृष्णा, कावेरी का उद्गम पश्चिमी घाट से हुआ है।
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