पम्बा-अचनकोविल-वैपर नदी जोड़ो परियोजना

  • सामान्य अध्ययन-I
  • महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों का वितरण
  • सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप

प्रीलिम्स के लिये:

भारत में नदी जोड़ों परियोजनाएँ

मेन्स के लिये:

परियोजना के लाभ और हानियाँ

चर्चा में क्यों?

केरल सरकार प्रस्तावित पम्बा-अचनकोविल-वैपर (Pamba-Achankovil-Vaippar) नदी परियोजना के कार्यान्वयन का विरोध कर रही है क्योंकि इस परियोजना से केरल-तमिलनाडु के मध्य जल का डायवर्ज़न बढ़ जाएगा। केरल के अनुसार राज्य की नदियों में अतिरिक्त जल नहीं है।

परियोजना के बारे में:

  • इस परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1995 में केरल के लिये 500 मेगावाट बिजली का उत्पादन तथा तमिलनाडु में भूमि सिंचाई हेतु की गई थी।
  • राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण (National Water Development Agency-NWDA) की परियोजनाओं में सूचीबद्ध इस परियोजना के तहत केरल में पम्बा और अचनकोविल नदियों से तमिलनाडु के वैपर बेसिन के लिये 634 क्यूबिक मिलीमीटर पानी के डायवर्जन की परिकल्पना की गई है।
    • हालाँकि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना को इसमें शामिल राज्यों की मंज़ूरी के बाद ही क्रियान्वित किया जाएगा।
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नदी जोड़ो परियोजनाओं के लाभ:

  • ये परियोजनाएँ देश की जल और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ सूखे की समस्या से निपटने के लिये आवश्यक हैं।
  • परियोजना द्वारा जल का संग्रहण करना या जल अधिशेष क्षेत्र से कम उपलब्धता वाले क्षेत्र में जल स्थानांतरित करना, मानसून की विफलता के कारण होने वाली समस्या का एक व्यावहारिक समाधान है।
  • चूँकि ग्रामीण भारत का मुख्य व्यवसाय कृषि है और यदि किसी वर्ष मानसून  विफल हो जाता है, तो कृषि गतिविधियों में ठहराव आ जाता है जो ग्रामीण गरीबी बढ़ने का एक कारक है।
  • इसके अलावा ये परियोजनाएँ, आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिये एक नया व्यवसाय सृजित करती हैं जैसे- मछली पालन

इनसे संबंधित मुद्दे:

  • इस परियोजना का विरोध करने वालों ने जल-जमाव, लवणता और मरुस्थलीकरण जैसे सामाजिक-पारिस्थितिकीय प्रभावों के समग्र मूल्यांकन के अभाव का हवाला देते हुए इसकी उपादेयता पर प्रश्न उठाए हैं।
  • नहरों और जलाशयों के निर्माण के लिये बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की जाती है इससे वर्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

पम्बा नदी

  • इस नदी का उद्भव केरल के इडुक्की ज़िले में स्थित पीरमेड पठार (Peermade Platue) से होता है और यह अंत में अरब की खाड़ी में गिरती है।
  • पम्बा नदी का पूरा जलग्रहण क्षेत्र केरल राज्य में है।
  • पम्बा बेसिन पूर्व में पश्चिमी घाट से और पश्चिम में अरब सागर से घिरा हुआ है।

अचनकोविल नदी

  • इस नदी का उद्भव पश्चिमी घाट में केरल के पठानमथिट्टा ( Pathanamthitta) ज़िले से होता है।
  • यह वीयपुरम (Veeyapuram) में पम्बा नदी से मिलती है।
  • यह नदी पूरी तरह से केरल राज्य में विस्तारित है।

वैपर नदी

  • इस नदी का उद्भव तमिलनाडु में पश्चिमी घाट के वरुशनाड पहाड़ी शृंखला ( Varushanad hill) रेंज के पूर्वी ढलानों से होता है।

राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण (National Water Development Agency-NWDA):

  • NWDA की स्थापना जुलाई 1982 में सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत स्वायत्त सोसाइटी के रूप में की गई थी।
  • इसके कार्य इस प्रकार हैं-
    • राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में परियोजना के प्रायद्वीपीय नदी विकास घटक को ठोस आकार देना।
    • जल संसाधनों के ईष्टतम उपयोग के लिये वैज्ञानिक और यथार्थवादी आधार पर जल संतुलन तथा अन्य अध्ययन करने एवं संभाव्यता रिपोर्टें तैयार करना।
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